PrepShorts · पढ़ाई की शीट · Class 9 Mathematics · Chapter 7, The Mathematics of Maybe: Introduction to Probability
Chapter 7 · The Mathematics of Maybe: Introduction to Probability
प्रायोगिक प्रायिकता: बहुत सारे परीक्षणों पर सापेक्ष बारंबारता
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किसी बात का मौका number में बताने के 2 ईमानदार तरीके हैं। पहला रिकॉर्ड पढ़ता है: चीज को बार-बार चलाइए और जो हुआ उसे लिख लीजिए। दूसरा कुछ चलाता ही नहीं; वह मानता है कि सारे जवाब बराबर संभव हैं और उन्हें गिन लेता है। बहुत से students सोचते हैं कि पहला तरीका तब चुना जाता है जब गिनने का मन न हो। यह गलत है, और इस video के आखिर में एक ऐसी चीज आती है जिसके लिए गिनने वाला तरीका है ही नहीं।
मुख्य idea
प्रायोगिक प्रायिकता एक ऐसी माप है जो अपने साथ एक त्रुटि बाँधकर आती है, और उसे प्रायिकता कहलाने का हक़ सिर्फ़ एक चीज़ देती है — बृहत् संख्याओं का नियम: पचास चालों को सही जवाब देने के लिए कोई बाध्य नहीं करता, और दस लाख चालों को भी नहीं — दस लाख चालें जो करती हैं वह यह है कि किसी भी बड़ी चूक को बेतरह असंभावित बना देती हैं। गारंटी बस इतनी ही है, और इतनी काफ़ी है। (इससे ज़्यादा हो भी नहीं सकती: दस लाख छह का गुणज नहीं है, इसलिए दस लाख चालें ठीक 1/6 पर उतर ही नहीं सकतीं — यह इसी brief की मोटे-औज़ार वाली बात है, छोटी संख्या की जगह बड़ी संख्या पर लगाई हुई।) इस तरह पढ़ने पर chapter का अपना Example 2 इस तरीक़े के पक्ष में दलील देता है, ख़िलाफ़ नहीं — पचास चालों में आठ चौके 0.16 देते हैं, जहाँ न्यायसंगत पासे का मान 1/6 ≈ 0.167 है, और आठ दरअसल चौकों की वह निकटतम पूर्ण संख्या है जो पचास चालों का कोई दौर दे सकता था। और काग़ज़ का कप वह वजह है जिसके कारण इस तरीक़े का होना ज़रूरी है। कप में तर्क करने लायक़ कोई सममिति है ही नहीं, इसलिए बाँटने के लिए समसंभाव्य फलकों की कोई गिनती नहीं है; कप के लिए परीक्षण किसी सिद्धांत का सस्ता विकल्प नहीं हैं, वे उस संख्या तक पहुँचने का इकलौता रास्ता हैं।
आपको क्या आना चाहिए
- वे दो वस्तुपरक रास्ते बताइए जो §7.2 देता है, और कहिए कि हर एक किस प्रमाण पर चलता है
- outcome और sample space को वैसे परिभाषित कीजिए जैसे §7.2.1 उन्हें लाता है, और सिक्के तथा पासे का sample space लिखिए
- प्रायोगिक प्रायिकता का सूत्र बताइए और पहचानिए कि उसका हर हिस्सा क्या गिनता है
- परीक्षणों और सफलताओं की दी हुई संख्या से प्रायोगिक प्रायिकता को भिन्न, दशमलव और प्रतिशत, तीनों में निकालिए
- समझाइए कि सापेक्ष बारंबारता और प्रायोगिक प्रायिकता एक ही संख्या के दो नाम हैं
- समझाइए कि कोई प्रायोगिक मान सैद्धांतिक मान से मेल क्यों नहीं खाता, और परीक्षणों की संख्या बढ़ने पर क्या बदलता है
- बृहत् संख्याओं का नियम बताइए, यह अलग करते हुए कि वह अनुपातों के बारे में क्या वादा करता है और गिनतियों के बारे में क्या वादा नहीं करता
- समझाइए कि काग़ज़ के कप जैसी बिना सममिति वाली चीज़ के लिए प्रयोग ही इकलौता उपलब्ध रास्ता क्यों है
- सिक्के का 20 परीक्षणों वाला प्रयोग कीजिए, नतीजे दर्ज कीजिए, और अपने ही रिकॉर्ड से प्रायोगिक प्रायिकता निकालिए
- किसी सर्वेक्षण की table में बारंबारता और सापेक्ष बारंबारता में फ़र्क़ कीजिए
जानने लायक़ शब्द
| शब्द | एक पंक्ति में अर्थ | हिंदी / क्षेत्रीय समकक्ष | पहली बार कहाँ |
|---|---|---|---|
| experimental probability | कोई घटना असल में कितनी बार हुई, कितने परीक्षण चलाए गए उनके ऊपर | प्रायोगिक प्रायिकता | §7.2 के पहले रास्ते के सिरे पर (p. 159) bold में छपा है, और इसका सूत्र §7.2.1 (p. 160) में है |
| relative frequency | वही भागफल, उस नाम से जो कोई सांख्यिकीविद् देता है | सापेक्ष बारंबारता | §7.2.1 (p. 160) में bold में छपा है; §7.2 यह वाक्यांश p. 159 पर ही बरत लेता है |
| frequency | कोई चीज़ कितनी बार हुई, इसकी सीधी गिनती | बारंबारता | End-of-Chapter Q2 (p. 170) में छपा है, सापेक्ष बारंबारता के सामने रखकर |
| trial | प्रयोग का एक बार चलाया जाना | परीक्षण | §7.1.1 (p. 156) में छपा है; §7.2.1 (p. 160) के सूत्र का हर यही है |
| outcome | प्रयोग का एक नतीजा | परिणाम | §7.2.1 (p. 160) में अपनी परिभाषा के साथ bold में छपा है |
| sample space | हर मुमकिन outcome का संग्रह | प्रतिदर्श समष्टि | §7.2.1 (p. 160) में अपनी परिभाषा के साथ bold में छपा है; §7.3.1 (p. 166) में आगे बढ़ाया गया है |
| Law of Large Numbers | यह तथ्य कि परीक्षण जमा होते जाने पर प्रायोगिक मान सैद्धांतिक मान की ओर बैठ जाता है | बृहत् संख्याओं का नियम | §7.2.3 के सिरे पर (p. 163) bold में छपा है |
| long run | बहुत परीक्षणों वाली वह स्थिति जिसके बारे में नियम है | दीर्घ अवधि | p. 163 के Think and Reflect में छपा है |
| evidence from experience | आँकड़े जुटाने वाले रास्ते को §7.2 जो नाम देता है | अनुभव से प्राप्त प्रमाण | §7.2 (p. 159) में दोनों रास्तों में से पहले की तरह bold में छपा है |
| Snakes and Ladders | पासों वाला वह खेल जिसे chapter का इतिहास-box किसी पुराने भारतीय मूल तक ले जाता है | साँप-सीढ़ी | Did you know? box (p. 161) में छपा है |
| sampling error | किसी परिमित दौर से मिले मान और जिस मान का वह अनुमान है, उन दोनों के बीच की दूरी | प्रतिचयन त्रुटि | यहाँ जोड़ा गया शब्द; chapter §7.2.3 (p. 163) में इस दूरी का वर्णन करता है और उसे नाम नहीं देता |
| best attainable count | सफलताओं की वह पूर्ण संख्या जो परीक्षणों से मिलने वाले मान के सबसे नज़दीक हो | निकटतम संभव गणना | यहाँ जोड़ा गया वाक्यांश, सिर्फ़ section 5 में बरता गया |
हिंदी column में standard हिंदी गणितीय शब्दावली दी गई है। Ganita Manjari का हिंदी संस्करण यहाँ नहीं देखा गया।
लोग कहाँ चूकते हैं
- "प्रयोग आपको सच्ची प्रायिकता दे देता है।" वह एक अनुमान देता है। chapter का अपना Example 2 1/6 का अनुमान 0.16 लगाता है।
- "अगर 1/6 नहीं निकला तो पासा ज़रूर भारी होगा।" न्यायसंगत पासे की पचास चालें आम तौर पर ठीक 1/6 नहीं देंगी — दे ही नहीं सकतीं, क्योंकि 1/6 का 50 कोई पूर्ण संख्या नहीं है। औज़ार मोटा है, पासा टेढ़ा नहीं।
- "ज़्यादा परीक्षण हर अकेले परीक्षण को ज़्यादा पूर्वानुमेय बना देते हैं।" वे अनुपात को ज़्यादा स्थिर बनाते हैं। अगली चाल ठीक उतनी ही अप्रत्याशित है जितनी पहली थी।
- "बृहत् संख्याओं का नियम कहता है कि गिनतियाँ बराबर हो जाती हैं।" वह कहता है कि अनुपात बैठ जाता है। चित और पट के बीच का निरपेक्ष अंतर बढ़ता रह सकता है और आम तौर पर बढ़ता ही है। पूरे chapter में यही सबसे भारी नतीजों वाली ग़लत पढ़त है, और Fair, unbiased, and memoryless: the gambler's fallacy इसी के बारे में है।
- "सापेक्ष बारंबारता प्रायोगिक प्रायिकता से अलग कोई चीज़ है।" वे एक ही भागफल हैं; chapter यह Example 2 के साथ ही एक साँस में कह देता है।
- "प्रयोग वह है जो आप तब करते हैं जब सिद्धांत निकालने में आलस आ जाए।" काग़ज़ के कप के लिए निकालने को कोई सिद्धांत है ही नहीं।
- "15 सापेक्ष बारंबारता है।" 15 एक गिनती है। सापेक्ष बारंबारता 15 में से 50 है। End-of-Chapter Q2 ठीक इसी अदला-बदली को पकड़ने के लिए है।
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Worked answers to this chapter’s exercises · this video explains Exercise Set 7.2 Q4, Exercise Set 7.2 Q6, End-of-Chapter Exercises Q2
पूरा transcript1,951 शब्द
किसी बात का मौका number में बताने के 2 ईमानदार तरीके हैं। बोर्ड पर दोनों साथ लिखे देखिए, क्योंकि आगे की पूरी बात इन्हीं के बीच का फर्क है। पहला तरीका रिकॉर्ड पढ़ता है — आप चीज को बार-बार चलाते हैं और जो हुआ उसे लिख लेते हैं। दूसरा तरीका कुछ चलाता ही नहीं; वह मानता है कि सारे जवाब बराबर संभव हैं और उन्हें गिन लेता है। बहुत से students यह सोचते हैं कि प्रयोग वाला तरीका तब चुना जाता है जब गिनने का मन न हो।
यह गलत है, और इस video के आखिर में एक चीज ऐसी आएगी जिसके लिए गिनने वाला तरीका है ही नहीं। पहले तरीके को 2 शब्द चाहिए। एक बार चलाने पर जो निकलता है वह एक जवाब है, और सारे मुमकिन जवाबों की पूरी list को sample space कहते हैं। नीचे देखिए — coin की list में 2 चीजें हैं, heads और tails। die की list में 6 हैं, 1 से 6 तक।
हर जवाब list में ठीक 1 बार आता है, 2 बार नहीं। ध्यान दीजिए कि ये दोनों list पहले से लिखी जा सकती हैं, चीज को एक बार भी चलाए बिना। यही वह हिस्सा है जो प्रयोग से नहीं आता। अब formula। ऊपर वाला हिस्सा गिनता है कि वह बात कितनी बार हुई, और नीचे वाला गिनता है कि आपने कुल कितनी बार चलाया। बोर्ड पर दोनों तीर देखिए — दोनों गिनतियाँ आपके अपने रिकॉर्ड से आती हैं, चीज के बारे में कुछ माने बिना।
तो एक सवाल: इनमें से किस रिकॉर्ड को formula को मना कर देना चाहिए — जिसमें एक भी trial न हो, जिसमें सफलताएँ trials से ज्यादा हों, या जिसमें गिनती घटाकर लिखी हो? तीनों को ही मना किया जाता है, और ऊपर तीनों पर cross लगे देखिए। और साथ में एक आम रिकॉर्ड रखा है जिसे मना नहीं किया जाता — उसके बिना ये तीनों मना करना कुछ साबित न करते।
अब एक असली रिकॉर्ड। एक die को 50 बार फेंका गया और उसमें 4 ठीक 8 बार आया। बोर्ड पर 50 निशान बन रहे हैं और जो 4 हैं वे जल रहे हैं। तो प्रयोग से निकला मौका है 8 बटा 50। इसे छोटा करने पर 4 बटा 25 मिलता है, दशमलव में 0 दशमलव 1 6, और 100 में से 16। तीनों एक ही number हैं। एक सही die का गिनती वाला मौका 1 बटा 6 है।
नीचे दोनों निशान साथ देखिए — प्रयोग वाला number नीचे बैठा है, और फर्क है 1 बटा 150। 50 बार में सही जवाब नहीं आया, और पहली नजर में यह रिकॉर्ड बदकिस्मत लगता है। तो एक सवाल: क्या वह सचमुच बदकिस्मत था, या उतना ही सही था जितना 50 बार होने दे सकता है? इसे गिनकर देखिए — 50 बार फेंकने पर जवाब सिर्फ़ 51 तरह के हो सकते हैं, क्योंकि 4 कितनी बार आया यह 0 से 50 तक ही जा सकता है।
ऊपर देखिए — 1 बटा 6 उन 51 में है ही नहीं, वह 2 पायदानों के बीच गिरता है। इसलिए सबसे पास कौन बैठ सकता है, यह पूछिए। 8 बार से फर्क 1 बटा 150 है और 9 बार से 1 बटा 75, यानी ठीक 2 गुना ज्यादा। और सिर्फ़ इन 2 को मत देखिए, सारे 51 देखिए। इनमें 8 से बेहतर बैठने वाले 0 हैं, और इसके बराबर बैठने वाले सिर्फ़ 1 — यानी खुद 8।
तो यह रिकॉर्ड बदकिस्मत नहीं था, वह उतना ही सही था जितना 50 बार होने दे सकता है। औजार मोटा है, die टेढ़ी नहीं। यहाँ एक शब्द और मिलता है। जिस number को अभी निकाला, उसे सापेक्ष बारंबारता भी कहते हैं। बोर्ड पर दोनों नाम एक ही number के ऊपर लिखे देखिए। कई students इसे दूसरा number समझ लेते हैं और दोबारा कुछ निकालने लगते हैं। वही रिकॉर्ड, उसी तरह भाग दिया गया, वही जवाब — सिर्फ़ नाम अलग है।
अब दूसरा रिकॉर्ड। एक die 12 बार फेंकी गई और 3 का face 3 बार आया। नीचे 12 निशान देखिए। तो प्रयोग से निकला मौका है 3 बटा 12। इसे छोटा करने पर 1 बटा 4 मिलता है, और दशमलव में 0 दशमलव 2 5। पिछला रिकॉर्ड नीचे पढ़ रहा था; यह ऊपर पढ़ रहा है। फर्क है 1 बटा 12। तो एक सवाल: क्या 12 बार फेंकने पर ठीक 1 बटा 6 आ सकता था?
हाँ, आ सकता था। 12 बार में 3 का face अगर 2 बार आता तो जवाब ठीक 1 बटा 6 होता। तो यह रिकॉर्ड पूरे 1 बार से ज्यादा चला गया, इससे ज्यादा नहीं। अब 4 अलग लंबाई देखिए — 12, 60, 600 और 6000 बार। एक face की उम्मीद वाली गिनती हर बार पूरी निकलती है: 2, 10, 100 और 1000। बोर्ड पर चारों नीचे लिखी हैं। इनमें से हर लंबाई ठीक 1 बटा 6 बता सकती है, चारों की चारों।
जो बदलता है वह बारीकी है — 12 बार का सबसे छोटा कदम 1 बटा 12 है, और 6000 बार का उससे 500 गुना बारीक। और यह बात बड़े number पर भी वैसी ही है। 10 लाख बार फेंकिए, तब भी ठीक 1 बटा 6 नहीं आ सकता, क्योंकि वह 6 का गुणक नहीं है। उसका सबसे पास वाला जवाब 166667 बार पर बैठता है, और वह भी थोड़ा चूकता है।
अब असली सवाल। अगर कोई लंबाई ठीक जवाब देने को मजबूर नहीं है, तो प्रयोग वाले तरीके पर भरोसा क्यों? 50 बार को कुछ मजबूर नहीं करता, और 10 लाख बार को भी नहीं। जो मिलता है वह यह है कि बड़ी चूक बहुत असंभव हो जाती है, और यह गिनकर दिखाया जा सकता है। एक coin को 10 बार उछालिए: आधे से 1 बटा 10 या ज्यादा दूर पढ़ने का मौका आधे से भी ज्यादा है।
50 बार पर वही मौका करीब 5 में 1 रह जाता है, और 100 बार पर करीब 18 में 1। ऊपर आगे देखिए — 500 बार पर यह 1 लाख में 1 से भी कम है, और 1000 बार पर 1 अरब में 1 से भी कम। और पूरी जाँच में एक भी जगह यह मौका बढ़ा नहीं: बढ़ने वाली जगहें 0 हैं। यही पूरी गारंटी है, और यही काफी है।
कोई यह नहीं कहता कि 1000 बार में चूक हो ही नहीं सकती — हो सकती है, उसका मौका 0 नहीं है। बस वह इतना छोटा है कि उस पर काम चलाया जा सकता है। यहाँ सबसे भारी गलतफहमी आती है। बहुत से students इसे ऐसे पढ़ते हैं कि लंबे चलने पर heads और tails की गिनतियाँ बराबर हो जाती हैं। बोर्ड पर देखिए — जो टिकता है वह अनुपात है, गिनतियाँ नहीं।
उम्मीद वाली बढ़त गिनकर देखिए। 16 बार उछालने पर heads और tails के बीच की बढ़त करीब 1 दशमलव 6 रहती है, और 4096 बार पर वह 25 से ऊपर चली जाती है। नीचे की पट्टियाँ हर बार ऊँची हो रही हैं। और इसमें एक साफ नियम है: tosses 4 गुना कीजिए तो उम्मीद वाली बढ़त 2 गुना हो जाती है, चारों बार। उसी दूरी में अनुपात की बारीकी 256 गुना बढ़ जाती है।
एक चीज गिर रही है और दूसरी चढ़ रही है। अब यह दोनों बातें एक ही run में देखिए। एक coin 1 लाख बार उछाला गया और उसे 4 जगह पढ़ा गया। बोर्ड पर अनुपात वाली line आधे की तरफ लगातार सिमट रही है। अब उसी run की बढ़त देखिए। 100 बार पर 55 heads थे, यानी अनुपात 0 दशमलव 5 5 और बढ़त 5। 1000 बार पर बढ़त 15 है, 10000 बार पर 50, और 1 लाख बार पर 158।
तो एक ही run में बढ़त 30 गुना बढ़ी और अनुपात आधे से 1 बटा 600 के अंदर आ गया। टिकना और बराबर हो जाना 2 अलग बातें हैं, और यह run दोनों एक साथ करके दिखा देता है। मान लीजिए एक die पर लगातार 3 बार 4 आ चुका है। तो एक सवाल: अगली बार 4 आने का मौका अब कम हो गया या नहीं? इसे गिनकर देखिए। एक die को 4 बार फेंकने पर 1296 अलग-अलग कतारें बन सकती हैं, और उन्हें पूरा लिखा जा सकता है।
ऊपर देखिए — इनमें से 3 बार 4 से शुरू होने वाली सिर्फ़ 6 हैं, और उन 6 में से 4 पर खत्म होने वाली ठीक 1। यानी 1 बटा 6, वही जो पहली बार था। और सिर्फ़ इसी शुरुआत को मत देखिए। 3 बार फेंकने की 216 मुमकिन शुरुआतें हैं, और इनमें से हर एक के बाद अगली बार 4 आने का मौका 1 बटा 6 ही रहता है — पूरी 216 में से 216।
अब एक ऐसी चीज जिस पर यह पूरी बात टिकी है — एक paper cup, जिसे ऊपर उछाला जाता है। वह 3 तरह से गिर सकता है: अपने base पर खड़ा, उल्टा अपने rim पर, या पहलू के बल। बोर्ड पर तीनों हालतें देखिए। गिनती वाला तरीका die पर चल जाता है, क्योंकि वहाँ 6 बराबर face गिने जा सकते हैं। cup पर वह चलता ही नहीं — 3 हालतें हैं, पर उनके बराबर होने की कोई वजह नहीं, तो बाँटने के लिए कुछ है ही नहीं।
ऊपर देखिए, वह तरीका यहाँ मना कर देता है। इसीलिए cup के लिए प्रयोग कोई छोटा रास्ता नहीं है। वहाँ उस number तक पहुँचने का और कोई रास्ता है ही नहीं। उसी paper cup को 100 बार उछालकर रिकॉर्ड रखिए। एक run में base पर 32 बार, rim पर 45 और पहलू पर 23 आया। तीनों के मौके निकलते हैं 8 बटा 25, 9 बटा 20 और 23 बटा 100 — नीचे तीनों लिखे देखिए, और तीनों अलग हैं।
पर यह सिर्फ़ इसी run की बात नहीं है। 100 बार 3 हिस्सों में 5151 तरह से बँट सकते हैं, और इनमें से 1 भी ऐसा नहीं जहाँ तीनों मौके मिलकर 1 न बनें — न बनने वाले 0 हैं। और इसकी वजह कोई इत्तिफाक नहीं है। तीनों गिनतियाँ मिलकर 100 बनती हैं, और तीनों को उसी 100 से बाँटा गया है, तो जोड़ 1 आना ही था। 50 students से पूछा गया और उनमें से 15 ने football कहा।
बोर्ड पर दोनों खाने देखिए — 15 एक गिनती है, यानी बारंबारता। और दूसरे खाने में 15 बटा 50 आता है, यानी 3 बटा 10 — यही सापेक्ष बारंबारता है। कई students यहाँ 15 को ही दूसरे खाने में लिख देते हैं। वह गलत है, और यही गलती पकड़ने के लिए वह सवाल बना है। 3 बटा 10 को दशमलव में लिखिए तो 0 दशमलव 3, और 100 में से 30।
और ध्यान दीजिए, 15 उस number का ठीक 50 गुना है — एक गिनती 1 से बड़ी हो सकती है, सापेक्ष बारंबारता कभी नहीं। आखिर में उसी 0 दशमलव 1 6 पर लौटिए। तो एक सवाल: क्या यह number 1 बटा 6 को छोटा करके लिखा गया है? नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। ऊपर देखिए — 1 बटा 6 को 2 जगह तक लिखने पर 0 दशमलव 1 7 मिलता है, और 3 जगह तक लिखने पर 0 दशमलव 1 6 7।
दोनों में से कोई 0 दशमलव 1 6 नहीं है। तो 0 दशमलव 1 6 उस 50 बार वाले रिकॉर्ड की नाप है, 1 बटा 6 की नकल नहीं। दोनों अलग number हैं और अलग जगह से आए हैं। तो प्रयोग से निकला number क्या है। वह एक नाप है, और हर नाप की तरह उसके साथ एक चूक जुड़ी रहती है। बोर्ड पर दोनों खाने देखिए — बाईं तरफ वह जो मिलता है, दाईं तरफ वह जो नहीं मिलता।
उसे मौका कहने का हक उस नियम से मिलता है जो कहता है कि लंबे चलने पर बड़ी चूक बहुत असंभव हो जाती है। इसके बिना यह सिर्फ़ एक गिनती होती। और जो सवाल खड़ा है वह यह है कि दूसरा तरीका — जो कुछ चलाता ही नहीं — अपने बारे में क्या कहता है, और वह बराबर संभव होने की शर्त कहाँ से लाता है।
यह कहाँ बैठता है
यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.
किस पर टिका है
- What we mean by randomकक्षा 9 · Ch 7, The Mathematics of Maybe: Introduction to Probability
- The 0-to-1 scale, and what the endpoints meanकक्षा 9 · Ch 7, The Mathematics of Maybe: Introduction to Probability
- Why long division must either stop or loopकक्षा 9 · Ch 3, The World of Numbers
आगे फिर कहाँ आता है
- Theoretical probability: counting favourable outcomes when all are equally likelyकक्षा 9 · Ch 7, The Mathematics of Maybe: Introduction to Probability
- Estimating from statistical data, and scaling the estimate upकक्षा 9 · Ch 7, The Mathematics of Maybe: Introduction to Probability
- Fair, unbiased, and memoryless: the gambler's fallacyकक्षा 9 · Ch 7, The Mathematics of Maybe: Introduction to Probability
- Listing every outcome: the sample spaceकक्षा 9 · Ch 7, The Mathematics of Maybe: Introduction to Probability