PrepShorts · पढ़ाई की शीट · Class 7 Mathematics · Chapter 1, Large Numbers Around Us
Chapter 1 · Large Numbers Around Us
"क्या यह कभी समा सकता है?" का जवाब, चरणों में आकलन करके
यह video load नहीं हो सकी. फिर से कोशिश करने के लिए page reload करें.
Sign in with Google11 min.
इस chapter में अपनी जगह बनाए रखिए — sign in करें, यह free है.Sign in करें
कक्षा 7 की सभी Hindi videos · सभी Hindi videos
क्या 1 करोड़ 24 लाख लोगों का एक शहर 1 लाख buses में समा सकता है? हर bus में 50 लोग मानें, तो buses में बस 50 लाख आते हैं, लगभग 74 लाख कम। पर हर bus में 125 लोग मानें, तो वही buses 1 करोड़ 25 लाख ले जाती हैं, और जवाब हाँ हो जाता है।
मुख्य idea
जो सवाल हल न हो सकने वाला लगता है, वह उसी पल हल होने लायक़ बन जाता है जब तुम उसे दो संख्याओं में बदल देते हो, हर एक को कुछ आसान चरणों में बनाते हो, और दोनों की तुलना करते हो। यह तरीक़ा असल में यह दिखाता है कि जो मान्यता तुम इसमें डालते हो, उस पर कितना कुछ टिका है: एक bus में पचास लोग हों तो Mumbai एक लाख buses में नहीं समाता, एक सौ पच्चीस हों तो समा जाता है। इसलिए मान्यता जवाब का हिस्सा है और उसे ज़ोर से कहना ज़रूरी है — और अंतर भी, क्योंकि chapter का एक सवाल लगभग ढाई गुने के फ़र्क़ से नाकाम होता है और दूसरा आधे प्रतिशत से भी कम के फ़र्क़ से तय होता है।
आपको क्या आना चाहिए
- "क्या यह कभी समा सकता है" वाले सवाल को ऐसी दो मात्राओं में बदलना जिनकी तुलना की जा सके
- संभाव्यता वाला आकलन जिस मान्यता पर टिका है, उसे हिसाब करने से पहले बताना
- किसी बड़े गुणनफल या भागफल को एक क़दम में नहीं, चरणों में निकालना, और बताना कि हर चरण का क्या मतलब है
- दोनों मात्राओं की तुलना करना और अंतर के साथ फ़ैसला देना
- परखना कि मान्यता बदलने पर फ़ैसला कहाँ तक टिका रहता है, और वह मान्यता ढूँढ़ना जिस पर फ़ैसला पलट जाता है
- जो मात्राएँ नहीं दी गईं — सीटें, घंटे, दिन — उनके लिए समझदारी भरी values चुनना और उस चुनाव का बचाव करना
- पहचानना कि कब अंतर इतना छोटा है कि फ़ैसले पर भरोसा करने से पहले मान्यताओं को और सटीक करना होगा
जानने लायक़ शब्द
| शब्द | एक पंक्ति में अर्थ | हिंदी / क्षेत्रीय समकक्ष | पहली बार कहाँ आया |
|---|---|---|---|
| assumption | ऐसी value जो तुम ख़ुद देते हो ताकि हिसाब आगे बढ़ सके | कल्पना / मान्यता | इस chapter में छपा (Part I, §1.6, p.19) |
| estimate | ऐसी value जो पूछे गए सवाल को तय करने के लिए जवाब के काफ़ी पास हो | आकलन | इस chapter में छपा (Part I, §1.4, p.11) |
| approximate | बराबर नहीं, बल्कि पास | लगभग | इस chapter में छपा (Part I, §1.1, p.3) |
| thought experiment | काग़ज़ पर हल किया गया ऐसा सवाल जिसे सच में आज़माया नहीं जा सकता | विचार-प्रयोग | इस chapter में छपा (Part I, SUMMARY, p.22) |
| in stages | एक बड़े हिसाब को कई छोटे हिसाबों में तोड़ना | चरणों में | इस chapter में छपा (Part I, §1.6, p.19) |
| feasibility check | यह पता करना कि कोई चीज़ असल में हो भी सकती है या नहीं, यह नहीं कि कितनी | संभाव्यता जाँच | व्याख्या का अपना शब्द, इस chapter में नहीं छपा |
| margin | तुलना की गई दोनों मात्राएँ आपस में कितनी दूर निकलती हैं | अंतर-सीमा | व्याख्या का अपना शब्द, इस chapter में नहीं छपा |
| break-even value | मान्यता की वह value जिस पर फ़ैसला पलट जाता है | संतुलन मान | व्याख्या का अपना जोड़ा हुआ शब्द, इस chapter में नहीं छपा |
Hindi column में standard Hindi गणितीय शब्दावली है। मैंने Ganita Prakash कक्षा 7 का Hindi संस्करण नहीं देखा, इसलिए इसे उस संस्करण के शब्दों के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
लोग कहाँ चूकते हैं
- "एक लाख buses एक शहर के लिए ज़ाहिर तौर पर काफ़ी हैं।" नहीं हैं, एक bus में पचास हों तो। करोड़ के आकार वाली मात्राओं के बारे में अंतर्ज्ञान ही वह चीज़ है जिस पर यह section भरोसा नहीं करता।
- "जवाब सवाल का अपना गुण है।" वह सवाल और मान्यता दोनों का गुण है। एक bus में पचास से जवाब नहीं आता; एक सौ पच्चीस से हाँ। जो व्याख्या मान्यता बताए बिना फ़ैसला बताती है, उसने chapter की बात ग़लत बताई है।
- "क्योंकि buses नाकाम हुईं, इसलिए जहाज़ भी नाकाम होंगे।" वे कामयाब होते हैं, 57,627 लोगों से। हर एक में 2,500 वाले पाँच हज़ार जहाज़ों में उसका ढाई गुना आता है जितना पचास-पचास वाली एक लाख buses में।
- "पूरा हिसाब एक ही गुणा में करना चाहिए।" चरणों में करना chapter की अपनी सलाह है, और इसी से student आधे रास्ते पर अपना काम जाँच पाता है। इससे इकाइयाँ भी दिखती रहती हैं: किलोमीटर प्रति दिन, फिर प्रति साल, फिर प्रति दस साल।
- "रोज़ 100 km से दस साल में चाँद के आसपास भी नहीं पहुँचते।" यह पाँच प्रतिशत के भीतर है। जो students इसे आँख से अंदाज़ते हैं, वे दोनों दिशाओं में बुरी तरह ग़लत होते हैं, और हिसाब करने की वजह यही है।
- "मोटे जवाब के लिए million और लाख काफ़ी पास हैं।" उनमें दस गुने का फ़र्क़ है, और एक दिन में बच्चों वाला सवाल ठीक उसी गुने से तय होता है।
- "समझदारी भरी मान्यताओं का मतलब है वे संख्याएँ जिनसे बात बन जाए।" बचाव लायक़ मान्यता वह है जिसे तुम ज़ोर से कह सको और कोई सहपाठी मान ले — एक bus में पचास सीटें, एक दिन में 86,400 seconds.
Ask your teacher a person
Your teacher reads this and writes back, usually within a day. For an instant answer, use Ask the video in the sidebar.
Your class sees the question and the answer. Only your teacher sees that it was you.
No questions on this topic yet.
Worked answers to this chapter’s exercises · this video explains Figure it Out · 1.6 Q11, Figure it Out · 1.6 Q12, Figure it Out · 1.6 Q13, Figure it Out · 1.6 Q14
पूरा transcript1,790 शब्द
एक सवाल सुनो, जो सुनने में ऐसा लगता है कि इसका कोई जवाब हो ही नहीं सकता। एक बड़े शहर में 1 करोड़ 24 लाख 42 thousand 373 लोग रहते हैं। क्या यह पूरा शहर 1 लाख buses में समा सकता है? सोचो, 1 लाख यानी 100 thousand buses, एक के पीछे एक, कितनी लंबी line बनेगी। पहली बार सुन कर लगता है कि यह असली सवाल ही नहीं है, पर यह पूरी तरह असली सवाल है।
जैसे ही हम इसे 2 numbers में बदल कर उनकी तुलना करते हैं, यह एक आम सवाल बन जाता है। पर एक चीज़ किसी ने बताई ही नहीं, कि एक bus में कितने लोग आते हैं। यह number हमें ख़ुद चुनना पड़ेगा, और ऐसे ख़ुद चुने हुए number को assumption कहते हैं। यह शब्द याद रखना, क्योंकि आगे चल कर यह किसी भी हिसाब से ज़्यादा अहम निकलेगा। तो चलो एक assumption चुनते हैं, और उसे ज़ोर से बोलते हैं: हर bus में 50 लोग।
अब पहला number आसान कदमों में बनाते हैं, एक बार में नहीं। एक bus में 50 लोग, 10 buses में 500, और 100 buses में 5 thousand। फिर 1000 buses में 50 thousand, और 1 लाख buses में 50 लाख लोग। यानी line की सारी buses मिल कर 50 लाख लोगों को ले जा सकती हैं। दूसरा number है शहर की आबादी, यानी 1 करोड़ 24 लाख 42 thousand 373।
अब सवाल बस इतना है, क्या 50 लाख, 1 करोड़ 24 लाख जितना बड़ा है? बिल्कुल नहीं, 50 लाख तो 1 करोड़ 24 लाख के आस पास भी नहीं पहुँचता। buses में 74 लाख 42 thousand 373 लोग कम पड़ते हैं, यानी लगभग 74 लाख। दोनों bars को साथ रखो, तो buses शहर का लगभग 5 में से 2 हिस्सा ही ले जा पाती हैं। तो इस assumption पर जवाब है नहीं, शहर इन buses में नहीं समाता।
पर ध्यान दो, हमने सिर्फ़ नहीं नहीं कहा, यह भी बताया कि कितना कम पड़ा। इस दूसरे हिस्से को margin कहते हैं। बहुत बड़े फ़ासले से चूकना, और बाल भर से चूकना, ये बिल्कुल अलग तरह की हार हैं। पहली हार तब भी टिकी रहती है जब हमारे numbers थोड़े गलत हों, पर दूसरी नहीं टिकती। तो ईमानदार जवाब है: नहीं, हर bus में 50 लोगों के हिसाब से। वह आख़िरी हिस्सा, कि हर bus में 50 लोग, असल में पूरा बोझ उठा रहा है।
अब बस वही number बदलते हैं जो हमने ख़ुद चुना था, और बाकी सब वैसा ही रखते हैं। अगर एक bus में 125 लोग आ जाएँ, तो क्या होगा? तब 1 लाख buses में 1 करोड़ 25 लाख लोग आते हैं, जो शहर की आबादी से ज़्यादा है। वही शहर और वही 1 लाख buses हैं, पर अब जवाब हाँ हो गया। तो जवाब कभी सिर्फ़ शहर के बारे में था ही नहीं, वह शहर और हमारी assumption, दोनों के बारे में था।
पर हर bus में 124 लोग हों, तो buses में 1 करोड़ 24 लाख लोग आते हैं, यानी अब भी 42 thousand 373 कम। यानी फ़ैसला ठीक 124 और 125 के बीच पलटता है, और 125 वह पहली पूरी seat है जिस पर शहर समा जाता है। अब यही तरीका किसी बड़ी चीज़ पर आज़माते हैं। एक बड़ा passenger ship लगभग 2 thousand 500 लोगों को ले जाता है। क्या वही शहर 5 thousand ऐसे ships में समा सकता है?
कुल जगह हुई 5 thousand गुणा 2 thousand 500, यानी 1 करोड़ 25 लाख। यह शहर की आबादी से ज़्यादा है, तो हाँ, शहर इन ships में समा जाता है। पर इस बार बची हुई जगह सिर्फ़ 57 thousand 627 लोगों की है। करोड़ से ऊपर के शहर के सामने यह हर 100 लोगों पर आधे से भी कम है, क्योंकि 57 thousand 627 का 200 गुना भी 1 करोड़ 15 लाख 25 thousand 400 ही बनता है।
यानी ये ships, 50 वाली buses से ढाई गुना लोग ले जाते हैं। अब buses और ships, दोनों के नतीजे साथ रख कर देखो। buses लगभग 74 लाख से चूक गईं, और ships सिर्फ़ 57 thousand 627 से पार हुए। कोई सोच सकता है कि buses फ़ेल हुईं तो ships भी फ़ेल होंगे, पर ऐसा नहीं हुआ। पर अगर शहर में हर 100 लोगों पर बस 1 इंसान और हो, तो क्या होगा?
तब आबादी 1 करोड़ 25 लाख 66 thousand 796 से भी ऊपर चली जाती है, और ships कम पड़ जाते हैं। आबादी का कोई भी गिना हुआ number इतना पक्का नहीं होता, तो ships वाला हाँ सच तो है, पर इतना करीब है कि उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। पहला फ़ैसला सुरक्षित है, दूसरा सिर्फ़ तब सही है जब हमारा हर number लगभग बिल्कुल ठीक हो। अब एक अलग तरह का सवाल सोचते हैं, जिसमें लोग नहीं, दूरी है।
अगर तुम हर दिन 100 kilometre चलो, पूरे 10 साल तक, तो क्या चाँद तक पहुँच जाओगे? चाँद हमसे लगभग 3 लाख 84 thousand 400 kilometre दूर है। इसे कदमों में करते हैं, और पहले सिर्फ़ एक साल देखते हैं। एक दिन में 100 kilometre, तो 365 दिनों में 36 thousand 500 kilometre। अब ऐसे 10 साल, यानी 3 लाख 65 thousand kilometre। तो तुम 19 thousand 400 kilometre पीछे रह जाते हो, जो पूरी दूरी का लगभग बीसवाँ हिस्सा है।
ज़्यादातर लोग अंदाज़े से या तो बहुत कम बताते हैं या बहुत ज़्यादा, और इसीलिए हिसाब करना ज़रूरी है। और leap days जोड़ें तो भी, 10 साल में ज़्यादा से ज़्यादा 3 leap days होते हैं, यानी बस 300 kilometre और, जबकि कमी 19 thousand 400 की है। चाँद तक पहुँचने में असल में 10 साल और आधे साल से थोड़ा ज़्यादा लगेगा। ध्यान दो कि यह कैसे किया गया, कहीं भी कोई एक बहुत बड़ा गुणा नहीं था।
बस छोटे छोटे कदम थे, और हर कदम का अपना मतलब था: एक दिन के kilometre, एक साल के kilometre, और 10 साल के kilometre। सब कुछ एक ही लंबे गुणा में करो, तो हाथ में बस एक number आता है, जिसे जाँचने के लिए कुछ नहीं होता। कदमों में करो, तो बीच का हर number अपने आप में एक सच होता है, जिसे अलग से जाँचा जा सकता है।
साल भर में 36 thousand 500 kilometre, यह जानना अपने आप में काम का है, चाहे पूरा सवाल हल हो या न हो। गलती भी यहीं पकड़ में आती है, क्योंकि अगर कोई कदम अजीब लगे, तो गलती बस उसी कदम में होगी। buses भी ऐसे ही बनी थीं: 500, फिर 5 thousand, फिर 50 thousand, फिर 50 लाख। कदमों में करना धीमा तरीका नहीं है, यह वह तरीका है जिसे जाँचा जा सकता है।
वही तरीका अब सूरज पर लगाते हैं, और इस बार जवाब और भी हैरान करता है। सूरज की दूरी लगभग 2100 गुणा 70 thousand kilometre है। गुणा करो तो यह बनता है 14 करोड़ 70 लाख kilometre। इस बार पहले से 10 गुना तेज़ चलो, यानी हर दिन 1000 kilometre। ऐसे एक साल में 3 लाख 65 thousand kilometre होते हैं। पूरी दूरी को एक साल के सफ़र से भाग करने पर पता चलता है कि लगभग 403 साल लगेंगे।
अगर एक उम्र 80 साल मानें, तो यह लगभग 5 उम्रें हैं, एक भी नहीं। चाँद और सूरज के बीच तरीका बिल्कुल नहीं बदला, सिर्फ़ numbers बदले, और यही इस तरीके की ताकत है। अब 3 जल्दी वाले सवाल, यह देखने के लिए कि यह तरीका कितनी जल्दी चलता है। क्या तुम 1 लाख काग़ज़ के पन्ने उठा सकते हो, अगर हर पन्ना 5 gram का हो? यह हुआ 5 लाख gram, यानी 500 kilogram, तो नहीं, बिल्कुल नहीं उठा सकते।
क्या एक ही दिन में 10 लाख, यानी एक million, बच्चे पैदा हो सकते हैं, अगर हर minute 250 बच्चे पैदा हों? एक घंटे में 250 गुणा 60, यानी 15 thousand, और एक दिन में उसका 24 गुना, यानी 3 लाख 60 thousand, तो नहीं। पर इस वाले को ध्यान से देखो, क्योंकि 3 लाख 60 thousand एक million से कम है, पर 1 लाख से काफ़ी ज़्यादा। million और लाख में 10 गुना का फ़र्क है, तो सवाल में बस वह शब्द बदलो, और जवाब पलट जाता है।
और आख़िरी सवाल, हर सेकंड एक सिक्का गिनो, पूरा दिन, तो 86 thousand 400 सिक्के होते हैं, जो 1 लाख से कम है। यानी 3 सवाल और तीनों का जवाब नहीं, पर तीनों के margin बिल्कुल अलग हैं। इससे हम शुरू वाले शब्द पर लौटते हैं, यानी assumption। यह तरीका उतना ही अच्छा है, जितने अच्छे numbers हम इसमें डालते हैं। तो assumption का मतलब कोई भी ऐसा number नहीं, जिससे हिसाब अपनी मर्ज़ी का निकले।
अच्छी assumption वह है, जिसे तुम ज़ोर से बोलो और कोई दूसरा भी उसे मान ले। कुछ बातें assumption होती ही नहीं, जैसे एक दिन में 86 thousand 400 सेकंड होते हैं, यह तो सच है। हर bus में 50 लोग एक चुनाव है, पर ऐसा चुनाव जिसकी वजह बताई जा सकती है। इसे ऐसे पकड़ो: कौन सी चीज़, कौन सा number, क्यों, और क्या बदले तो तुम्हारा मन बदलेगा।
और कितना सावधान रहना है, यह margin तय करता है: बड़े फ़ासले से चूके तो मोटा अंदाज़ा चलेगा, पर हर 100 में आधे से भी कम से जीते, तो नहीं। अब इस तरीके को कुछ और सवालों पर खुला छोड़ते हैं। एक millimetre मोटे सिक्के, 180 metre ऊँची एक मूर्ति के ऊपर तक रखो, तो 180 metre यानी 1 लाख 80 thousand millimetre, यानी 1 लाख 80 thousand सिक्के। एक पक्षी 12 thousand kilometre उड़ता है, रोज़ 900 से 1000 kilometre, तो उसे 12 दिन से लेकर 13 दिन से थोड़ा ज़्यादा उड़ना पड़ता है।
एक और पक्षी लगभग 11 दिन में 13 thousand 560 kilometre उड़ता है, यानी रोज़ 1 thousand 200 से ज़्यादा, और घंटे में लगभग 51 kilometre। कुछ eagles 4 thousand 500 से 6 thousand metre की ऊँचाई पर देखे गए हैं, और 40 metre की इमारत से नापो, तो यह लगभग 113 से 150 इमारतें हैं। दुनिया का सबसे ऊँचा पहाड़, 8 thousand 850 metre, लगभग 221 इमारतों जितना है, और हवाई जहाज़ 250 से 320 इमारतों की ऊँचाई पर उड़ता है, यानी सच में पहाड़ के ऊपर से।
इनमें से किसी भी सवाल के लिए कुछ नया सीखना नहीं पड़ा। तो अब तुम्हारी बारी है, क्या तुम अपना कोई सवाल चुन कर, पहले assumption बोल कर, दोनों numbers कदमों में बना कर, जवाब उसके margin के साथ बता सकते हो? तो याद रखो, जो सवाल नामुमकिन लगता है, वह 2 numbers की तुलना बन जाता है। जवाब सिर्फ़ सवाल का नहीं, सवाल और assumption, दोनों का होता है: 50 पर नहीं, 125 पर हाँ।
बड़े हिसाब को कदमों में करो, ताकि हर कदम अलग से जाँचा जा सके। और फ़ैसले के साथ margin भी बताओ, क्योंकि लगभग 74 लाख से चूकना और 57 thousand 627 से जीतना, दोनों एक जैसे पक्के नहीं हैं।
यह कहाँ बैठता है
यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.
किस पर टिका है
- What it actually takes to make one lakhकक्षा 7 · Ch 1, Large Numbers Around Us
- Crores and millions: one number, two naming systemsकक्षा 7 · Ch 1, Large Numbers Around Us
- When an approximate answer is the better answerकक्षा 7 · Ch 1, Large Numbers Around Us
- Factorise and regroup instead of multiplying head-onकक्षा 7 · Ch 1, Large Numbers Around Us
आगे फिर कहाँ आता है
- Using row and column sums to prove a grid cannot be filledकक्षा 7 · Ch 6, Number Play
- A whole number times a fraction, read as repeated distanceकक्षा 7 · Ch 8, Working with Fractions
इसके ठीक पहले और ठीक बाद
- Predicting how many digits a product will have, before multiplyingकक्षा 7 · Ch 1, Large Numbers Around Us
- Writing a situation as an expression before computing itकक्षा 7 · Ch 2, Arithmetic Expressions