PrepShorts · पढ़ाई की शीट · Class 7 Mathematics · Chapter 6, Constructions and Tilings
Chapter 6 · Constructions and Tilings
लंब समद्विभाजक, और वह बराबर-दूरी वाला गुण जो इसे सही ठहराता है
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compass को 90 degree का पता नहीं - वह बस एक दूरी पकड़ती है। फिर भी उसी से segment ठीक आधा होता है, और उस पर 90 degree का angle खड़ा होता है।
मुख्य idea
compass को यह नहीं बताया जा सकता कि perpendicular का मतलब क्या है। वह बस एक दूरी को स्थिर रख सकता है — इसलिए वे चार arcs असल में सिर्फ़ ऐसे points बनाते हैं जो X से उतनी ही दूर हैं जितनी Y से। बाक़ी सब तर्क से निकलता है। congruent triangles ही "दोनों सिरों से बराबर दूर" को "XY को आधा काटती है" और "XY से ठीक सीधा मिलती है" में बदलते हैं, और एक बार यह तर्क समझ लिया तो construction नक़ल करने वाली रस्म नहीं रह जाता: तब दिखता है कि ऊपर वाली radius का नीचे वाली radius के बराबर होना क्यों ज़रूरी नहीं, हर तरफ़ एक crossing point क्यों काफ़ी है, और जिस काम के लिए marked scale बना हुआ लगता है, उसी काम में compass उससे बेहतर क्यों है।
आपको क्या आना चाहिए
- बताना कि bisection का मतलब क्या है और perpendicular शब्द उसमें क्या जोड़ता है
- समझाना कि construction के चार arcs ऐसे points क्यों बनाते हैं जो segment के दोनों सिरों से बराबर दूरी पर हैं
- दो क़दमों वाले congruence तर्क को फिर से खड़ा करना और बताना कि हर क़दम कौन-सी condition इस्तेमाल करता है
- समझाना कि मिलकर straight angle भरने वाले दो बराबर angles में से हर एक 90° का क्यों होना चाहिए
- converse को सही ठहराना: जो point दोनों endpoints से बराबर दूर है, उसे उनके perpendicular bisector पर ही बैठना होगा
- compass और unmarked ruler से construction करना
- कारण के साथ तय करना कि ऊपर और नीचे के arcs को एक ही radius चाहिए या नहीं
- बताना कि यह construction नापने के मुक़ाबले midpoint को ज़्यादा भरोसे से क्यों ढूँढ़ता है
जानने लायक़ शब्द
| शब्द | एक line में परिभाषा | हिंदी / क्षेत्रीय समकक्ष | पहली बार कहाँ आया |
|---|---|---|---|
| bisection | किसी चीज़ को दो एक जैसे हिस्सों में काटना | द्विभाजन | §6.1, Part II, p.137 में bold में छपा, और SUMMARY, p.163 में दोबारा कहा गया |
| perpendicular bisector | वह line जो segment को आधा काटती है और उससे right angle पर मिलती है | लंब समद्विभाजक | §6.1, Part II, p.137 में छपा, और पूरे pp.139–142 में |
| midpoint | वह point जो segment को दो बराबर आधों में बाँटता है | मध्य-बिंदु | §6.1, Part II, pp.137, 141, 142 में छपा |
| arc | किसी centre से तय radius पर बना circle का हिस्सा | चाप | §6.1, Part II, pp.136–137, 139–140 में छपा |
| radius / radii | compass का वह तय खुलाव जिससे arc बनाया जाता है | त्रिज्या | §6.1, Part II, pp.136–137, 139–140 में छपा |
| compass | वह औज़ार जो घूमते हुए एक दूरी को थामे रखता है | परकार | §6.1, Part II, pp.139–141 में छपा |
| unmarked ruler | सीधा किनारा जिस पर कोई scale नहीं | अंकनरहित रूलर | §6.1, Part II, pp.139–140 में छपा |
| congruent | ऐसी दो figures के लिए कहा जाता है जो हिस्से-हिस्से में मिलती हैं | सर्वांगसम | §6.1, Part II, pp.137–138 में छपा |
| SAS congruence condition | दो भुजाएँ और उनके बीच का angle, जो congruence को पक्का कर देते हैं | भुजा-कोण-भुजा (SAS) प्रतिबंध | §6.1, Part II, p.138 में छपा |
| straight angle | किसी point पर दो उलटी rays से बना 180° का angle | ऋजु कोण | §6.1, Part II, p.137 में छपा |
| supporting line | सिर्फ़ figure को जगह पर रखने के लिए खींची गई line, जो figure का हिस्सा नहीं | सहायक रेखा | §6.1, Part II, pp.136, 140 में छपा |
| line of symmetry | वह line जिस पर figure को मोड़ने से वह ख़ुद से मिल जाती है | सममिति रेखा | §6.1, Part II, p.136 में छपा |
| equidistant | दो दिए गए points से बराबर दूर | समदूरस्थ | इस पाठ का शब्द, इस chapter में नहीं छपा — chapter इसे हमेशा लंबे ढंग से ही कहता है (pp.136, 139, 140) |
हिंदी column में standard NCERT हिंदी गणितीय शब्दावली दी गई है। इस brief के लिए Ganita Prakash Part II का हिंदी संस्करण उपलब्ध नहीं था — Notes देखें।
लोग कहाँ चूकते हैं
- "ऊपर और नीचे के arcs एक ही radius से बनाने चाहिए।" chapter का अपना Figure it Out सबसे पहले इसी पर चोट करता है (p.140, question 1)। ज़रूरी नहीं। ऊपर का कोई भी point जो दोनों endpoints से बराबर दूर हो, चलेगा, और नीचे का भी वैसा ही; ऐसे दो points line को तय कर देते हैं।
- "चारों arcs चाहिए — उन्हीं से काम बनता है।" चार arcs दो points देते हैं, और line को दो points ही चाहिए। chapter यही बात p.141 पर सच में काम में लेता है, जहाँ दोनों में से एक point पहले से पता है और arcs की दूसरी जोड़ी छोड़ दी जाती है।
- "दोनों crossings XY की उलटी तरफ़ों पर ही होनी चाहिए।" Question 2, p.140 पर, ठीक यही पूछता है और नियम के बजाय construction करके देखने को कहता है। तर्क में कहीं भी तरफ़ों का ज़िक्र नहीं; उसमें सिर्फ़ दूरियों का ज़िक्र है।
- "यह perpendicular है क्योंकि perpendicular दिखता है।" पूरे pp.137–138 इसीलिए हैं कि देखना काफ़ी नहीं। right angle drawing से नापा नहीं जाता, बल्कि straight angle भरने वाले दो बराबर angles से निकाला जाता है।
- "bisect करना बस नापकर बीच ढूँढ़ना है।" chapter कहता है कि compass वाला तरीक़ा दोनों में ज़्यादा सटीक है (p.141)। नापने में पढ़ने की ग़लती दो बार आती है; compass कभी कुछ पढ़ता ही नहीं।
- "bisection सिर्फ़ line segments के साथ किया जाता है।" p.137 की परिभाषा उससे ज़्यादा चौड़ी है, और chapter दो पन्ने बाद angles पर उसका इस्तेमाल करता है। परिभाषा बताते समय उसे आम ही रखो।
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पूरा transcript1,663 शब्द
compass को नहीं पता कि 90 degree का angle क्या होता है, वह सिर्फ़ एक काम जानती है, एक दूरी को पकड़े रखना। नोक एक बिंदु पर टिकाओ और घुमाओ, तो जो arc बनता है उसका हर बिंदु उस नोक से ठीक उतनी ही दूर। फिर भी इसी compass से किसी segment को ठीक आधा किया जा सकता है, और उस पर 90 degree का angle भी बनता है, और हर कदम पर सवाल, यह सच क्यों है।
एक segment XY लो, 24 इकाई लंबा। उसका बीच O, दोनों सिरों से 12 इकाई दूर, पर अभी हमें O का पता नहीं, उसे ढूँढना है। आँख से अंदाज़ा नहीं, नापकर आधा भी नहीं, सिर्फ़ compass और बिना निशान वाली सीधी पट्टी से। compass को 15 इकाई खोलो, नोक X पर, और ऊपर नीचे arc खींचो। फैलाव वही रखो, अब नोक बिंदु Y पर, और फिर से ऊपर नीचे arc।
arc 2 जगह कटते हैं, ऊपर A पर और नीचे B पर, बस इतने ही। क्या कोई भी फैलाव चलेगा? नहीं, फैलाव segment के आधे, यानी 12, से ज़्यादा होना चाहिए, वरना arc मिलते ही नहीं। यहाँ 1 से 40 तक के फैलावों में से 28 चलते हैं, 13 से 40 तक, और ठीक 12 पर arc बस 1 बिंदु पर छूते हैं, कटते नहीं। वजह सीधी है, दोनों arc के केंद्र X और Y, आपस में 24 दूर।
हर arc की पहुँच अगर बस 12 हो, तो दोनों मिलकर ठीक 24 तक पहुँचते हैं, बस बीच में O पर छू पाते हैं। पहुँच ज़रा भी ज़्यादा हो, तो arc एक दूसरे के पार निकलते हैं, और ऊपर नीचे 2 जगह कटते हैं। अब सोचो compass ने असल में क्या बनाया, A, X वाले arc पर है, तो AX बराबर 15। और A, Y वाले arc पर भी, तो AY भी 15, यही बात B के लिए, BX और BY।
यानी AX, AY, BX, BY, ये सभी 4 लंबाइयाँ एक ही लंबाई, compass का फैलाव। हमारी जाली पर A, O से ठीक 9 ऊपर, क्यों? और 9 का वर्ग 81, 12 का वर्ग 144, जोड़ 225, और यही 15 का वर्ग। फैलाव 13 हो, तो ऊँचाई 5, क्योंकि 25 और 144 का जोड़ 169, यानी 13 का वर्ग। compass ने बस 2 बिंदु बनाए, और हर एक X से उतना ही दूर जितना Y से।
अब 90 degree का angle या आधे का अभी कहीं ज़िक्र नहीं, वह सब हमें तर्क से निकालना है। compass बस circle की परिभाषा निभा रही है, एक बिंदु से तय दूरी वाले सारे बिंदु। अब A और B को सीधी पट्टी से जोड़ो, यह line XY को एक बिंदु पर काटती है, उस बिंदु का नाम O। चित्र अब एक kite, XAYB, और उसके दोनों diagonal बने हुए। दावा यह है कि O, XY का ठीक बीच है, और A B, XY पर 90 degree पर खड़ी है, पर क्यों?
बराबर दूरियाँ अपने आप में न आधा कहती हैं, न 90 degree का angle, इन्हें जोड़ने के लिए 2 कदम चाहिए। पहला कदम A पर के angle को बराबर बाँटेगा, दूसरा उसी से O को बीच साबित करेगा। पहले triangle ABX और ABY देखो। A B दोनों में साझा, AX बराबर AY, और BX बराबर BY, तीनों sides मिलती हैं। तीनों sides बराबर, तो दोनों triangle congruent, और इससे हमें एक चीज़ चाहिए, A पर का angle ठीक 2 बराबर हिस्सों में बँटा है, A B के दोनों ओर।
अब छोटे triangle AOX और AOY। AX बराबर AY, A पर के दोनों angle बराबर, और AO साझा। ध्यान रहे, बराबर angle ठीक उन्हीं 2 sides के बीच का है, इसी से triangle पक्का बँध जाता है। तो दोनों congruent, और OX बराबर OY, दोनों 12, यानी O सच में XY का बीच। उन्हीं triangles से, बिंदु O पर के 2 angle भी बराबर। और X, O, Y एक सीधी line पर, O बीच में, तो ये 2 angle मिलकर पूरा straight angle बनाते हैं, यानी 180 degree।
देखो, 2 बराबर angle, जोड़ 180, तो हर एक कितना? यहाँ 180 को 2 से भाग, 90 degree, नापा नहीं, निकाला। एक और जाँच भी है, segment को वर्गों वाली जाली पर रखो, तो O पर हर corner ठीक 90 degree का angle निकलता है। पर असली बात तर्क है, 90 degree का angle इसलिए है क्योंकि 2 बराबर angle एक straight angle भरते हैं, इसलिए नहीं कि दिखता है।
उल्टी बात भी सच है, एक जाली लो जिसमें 14641 बिंदु, हर आधी इकाई पर एक। इनमें से ठीक 121 बिंदु X और Y से बराबर दूर, और सब के सब A B वाली बीच की line पर। और बीच की line के सभी 121 बिंदु बराबर दूर, तो दोनों बातें एक ही समूह चुनती हैं। वजह, किसी बिंदु की X से दूरी का वर्ग और Y से दूरी का वर्ग, इनका फ़र्क निकालो, तो ऊपर नीचे वाला हिस्सा कट जाता है।
बचता है बस 48 गुणा बीच से बगल की दूरी, जो सिर्फ़ बीच की line पर 0 होता है। तो बराबर दूर होना और बीच की line पर होना, एक ही बात के 2 नाम। तो XY की बीच वाली 90 degree की line ठीक उन सारे बिंदुओं का समूह है, जो X और Y से बराबर दूर हैं। इसे perpendicular bisector कहते हैं, perpendicular यानी 90 degree पर खड़ी, bisector यानी ठीक आधा करने वाली।
एक सवाल, ऊपर और नीचे के arc एक ही फैलाव से बनाना ज़रूरी है? ऊपर 13 के फैलाव से, कटान 5 की ऊँचाई पर, नीचे 15 के फैलाव से, कटान 9 नीचे। दोनों कटान बीच की line पर, तो उनसे बनी line अब भी XY को आधा करती है, 90 degree पर। पर उल्टा नहीं, अब XY, A B को आधा नहीं करती, ऊपर 5, नीचे 9। kite का एक diagonal दूसरे को आधा करता है, दोनों एक दूसरे को नहीं, जब तक फैलाव एक जैसे न हों।
जब ऊपर नीचे फैलाव एक जैसा, 15 और 15, तब कटान 9 ऊपर और 9 नीचे, तब दोनों diagonal एक दूसरे को आधा करते हैं। और क्या दोनों कटान XY के अलग अलग तरफ़ होने चाहिए? और 13 और 20 के फैलाव से, दोनों कटान ऊपर, 5 और 16 की ऊँचाई पर। दोनों बीच की line पर, तो वही line मिलती है, तर्क में कहीं भी तरफ़ का ज़िक्र है ही नहीं, सिर्फ़ दूरियों का।
अब 4 फैलाव, 13, 15, 20, 37, हर एक से ऊपर और नीचे कटान, कुल 8 अलग बिंदु। और सभी 8 एक ही सीधी line पर, सब X और Y से बराबर दूर। चित्र में यही दिखता है, ऊपर से नीचे कटान एक के ऊपर एक, सब एक ही खड़ी line में। तो 4 बार arc क्यों खींचे? क्योंकि उनसे 2 बिंदु मिलते हैं, और एक line के लिए ठीक 2 बिंदु काफ़ी।
तीसरा कटान कुछ नया नहीं जोड़ता, वह पहले से उसी line पर है। तो मायने कटानों की गिनती रखती है, arc की गिनती नहीं। और अगर बीच की line का एक बिंदु पहले से पता हो, तो? तो बस एक और कटान चाहिए, यानी 2 arc, और 2 बिंदुओं से line तय। यह चाल तब काम आती है, जब किसी दिए हुए बिंदु से line बनानी हो। तो बनाने का तरीका, कदम 1, आधे से ज़्यादा फैलाव लो, X और Y से arc, कटान A।
कदम 2, दूसरी जगह कटान B, ऊपर या नीचे, एक ही या अलग फैलाव से। कदम 3, A और B को जोड़ो, यही perpendicular bisector, और जहाँ यह XY को काटे, वहीं XY का बीच है। इस पूरे काम में बस 2 औज़ार, compass और बिना निशान वाली पट्टी, कोई नाप पढ़ना नहीं पड़ता। नाप वाला पैमाना तभी, जब किसी लंबाई को इकाइयों में बनाना हो। पैमाना पढ़ने से गलती आती है, इसलिए जहाँ तक हो सके, दूरी पढ़नी नहीं, बस उठाकर ले जानी है।
पर पैमाने से नापकर आधा करना आसान नहीं? पैमाने पर 2 बार पढ़ना पड़ता है, दोनों सिरे, और हर पढ़ाई निकटतम मिलीमीटर तक गोल होती है। फिर दोनों पढ़ी हुई संख्याओं का फ़र्क निकालो, उसे आधा करो, और उतना नापकर बिंदु लगाओ, हर कदम पर एक नई गलती का मौका। हर सिरा 0 दशमलव 0 5 सेंटीमीटर तक गलत हो सकता है। और आधा करने पर भी बीच का बिंदु 0 दशमलव 0 5 सेंटीमीटर तक खिसक सकता है, आधा मिलीमीटर।
देखो, 2 गलतियाँ एक दूसरे को काटती नहीं, औसत बन जाती हैं, 4 बुरे मामलों में से बस 2 में कटती हैं। मान लो असली सिरे 2 दशमलव 0 3 और 11 दशमलव 4 8 सेंटीमीटर पर, पैमाना पढ़ता है 2 दशमलव 0 और 11 दशमलव 5। असली बीच 6 दशमलव 7 5 5, पढ़ा हुआ बीच 6 दशमलव 7 5, फ़र्क 0 दशमलव 0 0 5 सेंटीमीटर। फ़र्क छोटा है, पर है, और compass वाले तरीके में ऐसी कोई गोलाई आती ही नहीं।
compass कोई संख्या नहीं पढ़ती, बस एक दूरी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती है। इसलिए बीच निकालने में वह पैमाने से ज़्यादा सटीक, पढ़ाई नहीं, तो पढ़ाई की गलती भी नहीं। तो बीच ढूँढना मतलब नापकर आधा करना नहीं, बराबर दूरी वाले बिंदु बनाना है। bisection का मतलब किसी चीज़ को 2 बिल्कुल एक जैसे हिस्सों में काटना, सिर्फ़ segment नहीं। angle भी, straight angle का आधा 90, और उसका भी आधा 45, यह भी compass से ही हो सकता है।
और हमारे segment का आधा, 24 में से 12। आख़िर में एक डिज़ाइन, 4 एक जैसी पत्तियाँ, एक बिंदु पर मिलती हुई, ऊपर, नीचे, बाएँ, दाएँ। हर पत्ती 2 arcs से बनी, इसे सिर्फ़ compass और पट्टी से बनाकर देखो, और सोचो कि हर arc की नोक कहाँ टिकी। डिज़ाइन सुंदर है, पर हर पत्ती के पीछे वही बात, बराबर दूरी वाले बिंदु। compass सिर्फ़ बराबर दूरी बनाती है, बाकी सब तर्क से आता है।
congruent triangle बराबर दूरी को बीच और 90 degree में बदलते हैं। यहाँ 90 degree का angle नापा नहीं जाता, 2 बराबर angle straight angle को भरते हैं। फैलाव अलग हो सकते हैं, कटान एक तरफ़ हो सकते हैं, बस 2 बिंदु चाहिए। पैमाना पढ़ता है और गलती जोड़ता है, compass पढ़ती ही नहीं।
यह कहाँ बैठता है
यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.
किस पर टिका है
- SAS, and why the angle has to be the included oneकक्षा 7 · Ch 1, Geometric Twins
- The four angles at a crossing: vertically opposite and linear pairsकक्षा 7 · Ch 5, Parallel and Intersecting Lines
आगे फिर कहाँ आता है
- Constructing a 90° angle at a chosen point on a lineकक्षा 7 · Ch 6, Constructions and Tilings
- A stretched rope as compass and straightedge: the Śulba-Sūtra constructionsकक्षा 7 · Ch 6, Constructions and Tilings
- Bisecting an angle, and halving 90° to get 45°कक्षा 7 · Ch 6, Constructions and Tilings
- Copying an angle, and why triangle congruence proves it worksकक्षा 7 · Ch 6, Constructions and Tilings
- Constructing 60° from an equilateral triangle, and the arches built on itकक्षा 7 · Ch 6, Constructions and Tilings
इसके ठीक पहले और ठीक बाद
- Why every answer from data raises the next questionकक्षा 7 · Ch 5, Connecting the Dots...