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Chapter 5 · Connecting the Dots...

data से मिला हर जवाब अगला सवाल क्यों खड़ा करता है

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"हर महीने प्याज़ की 35 बोरियाँ" - इस पर पूछने को कुछ नहीं। पर साल भर की 24 संख्याओं में 35 सिर्फ़ 2 बार सच है, और फैलाव 43 का।

मुख्य idea

एक अकेला number बातचीत ख़त्म कर देता है; numbers का फैलाव बातचीत शुरू कर देता है। यही chapter का असली आख़िरी दावा है, और यह अभ्यास करने वाली कोई तकनीक नहीं, बल्कि इस बारे में दावा है कि खोजबीन कैसे चलती है। देखिए कि हर बार कोई विश्लेषण पूरा होने पर किताब क्या करती है: निष्कर्ष के बजाय वह वे सवाल छापती है जो उस विश्लेषण ने जगाए — और वे सवाल हमेशा data के बाहर की दुनिया के बारे में होते हैं। ये दो कस्बे कहाँ हैं? एक school दूसरे से इतना लंबा क्यों है? किसी देश के इतिहास का उसके उन्नीस साल के लोगों से क्या लेना-देना? data analysis एक चक्र है, सीधी पाइप नहीं, और SUMMARY ठीक इसी बात पर ख़त्म होता है।

आपको क्या आना चाहिए

  • समझाना कि data में variation जिज्ञासा क्यों जगाता है और एक सपाट आँकड़ा क्यों नहीं
  • पूरे हो चुके विश्लेषण से आगे के सवाल बनाना, और उन्हें दो हिस्सों में छाँटना: जिनका फ़ैसला data कर सकता है और जिनका नहीं
  • एक ढीली-सी जिज्ञासा को statistical question में बदलना, यह बताते हुए कि क्या इकट्ठा किया जाएगा
  • chapter का अपना pattern पहचानना: पहचानो कि क्या दिया गया है, उससे निष्कर्ष निकालो, फिर पूछो कि आगे क्या देखना है
  • ऐसा graph पढ़ना जिसका विषय जान-बूझकर छिपाया गया हो, और बताना कि data का आकार उस विषय के बारे में क्या इशारा करता है
  • अपना छोटा data संग्रह योजना बनाकर करना: क्या दर्ज करना है, किस अवधि में, और उसे कैसे दिखाना है
  • बताना कि पूरा हुआ विश्लेषण नतीजा नहीं, बल्कि शुरुआत क्यों है

जानने लायक़ शब्द

शब्दएक पंक्ति में परिभाषाहिंदी / क्षेत्रीय समकक्षपहली बार कहाँ आया
curiosityजानने की वह चाह जो data का फैलाव जगाता है और एक अकेला आँकड़ा नहीं जगाताजिज्ञासा§5.2 में छपा, Part II, p.104
wonderविश्लेषण के बाद आने वाले सवालों के लिए chapter की अपनी क्रियासोचना-विचारना§5.2 में छपा, Part II, p.104 और §5.4 में, Part II, p.126
exploreपहला जवाब मिल जाने के बाद किसी सवाल के पीछे और आगे जानाअन्वेषण करना§5.3 में छपा, Part II, p.121
inferdata से ऐसा निष्कर्ष निकालना जिसका वह समर्थन करेनिष्कर्ष निकालना§5.3 में छपा, Part II, pp.117, 119
variationvalues के किसी set का फैलाव, और वह चीज़ जो अगला सवाल जगाती हैविचरण§5.2 में variations के रूप में छपा, Part II, p.104
statistical questionऐसा सवाल जिसका फ़ैसला सिर्फ़ data इकट्ठा करके हो सकता हैसांख्यिकीय प्रश्न§5.1 में छपा, Part II, p.98
projectकिसी student या समूह का किया हुआ लंबा data संग्रहपरियोजना§5.4 में छपा, Part II, pp.132–133
observationdata में देखी गई कोई बात जो ज़ोर से कहने लायक़ होप्रेक्षण§5.3 में छपा, Part II, pp.116, 119
analysisवह काम जो इकट्ठा किए गए data को ऐसी चीज़ में बदलता है जिसे आप कह सकेंविश्लेषण§5.4 में छपा, Part II, p.133, आख़िरी "Figure it Out" के item 13 में; §5.1, Part II, p.98 पर सिर्फ़ क्रिया है, analyse और analysing के रूप में
research questionवह सवाल जिसका जवाब देने के लिए कोई संग्रह, data जुटाने से पहले, बनाया जाता हैशोध प्रश्नइस पाठ का शब्द, इस chapter में नहीं छपा, जो statistical question कहता है
enquiry cycleसवाल से data, data से जवाब, और जवाब से अगले सवाल तक का चक्रजाँच-चक्रइस पाठ का शब्द, उस pattern के लिए जिसे chapter बार-बार दोहराता है पर कभी नाम नहीं देता

हिंदी column में standard NCERT हिंदी गणितीय शब्दावली दी गई है। Ganita Prakash Part II का हिंदी संस्करण उपलब्ध नहीं था — Notes देखें।

लोग कहाँ चूकते हैं

  • "विश्लेषण एक जवाब पर ख़त्म होता है।" इस chapter में वह हर एक बार एक सवाल पर ख़त्म होता है। चाहें तो गिन लीजिए — p.104, p.118, p.121, p.126, p.128 और SUMMARY का आख़िरी bullet, सब एक ही काम करते हैं।
  • "सोचना-विचारना वह है जो आप कोई भी गणित जानने से पहले करते हैं।" chapter अपना सबसे घना सोच-विचार विश्लेषण के बाद रखता है, पहले नहीं। आगे क्या पूछना है, यह जानने के लिए आपको graph चाहिए।
  • "आगे के हर सवाल का जवाब और data से दिया जा सकता है।" chapter के अपने कई सवालों का नहीं। यह पूछना कि क़ीमतों के उतार-चढ़ाव से किसे नुक़सान होता है, अर्थशास्त्र और नीति का सवाल है; data सिर्फ़ यह बताता है कि उतार-चढ़ाव हैं। सवालों को इस हिसाब से छाँटना कि किससे उनका फ़ैसला हो सकता है, इसी हुनर का हिस्सा है।
  • "अगर किताब जवाब नहीं देती, तो सवाल बस कहने भर का था।" इनमें से कुछ जान-बूझकर खुले हैं। सवाल को खुला छोड़ना एक जायज़ अंत है, और जो व्याख्या एक साफ़-सुथरा जवाब गढ़ लेती है, वह इस section का उल्टा सिखाती है।
  • "छिपे हुए data के बारे में अंदाज़े वाला खेल बस शुरुआती अभ्यास है।" City 1 / City 2 वाला अभ्यास असली काम कर रहा है: वह पढ़ने वाले को मजबूर करता है कि सहारे के लिए कोई label मिलने से पहले ही कच्चे numbers से आकार, सममिति और उलटी चाल पढ़े।
  • "projects बस अतिरिक्त, मर्ज़ी की चीज़ें हैं।" आख़िरी "Figure it Out" (Part II, §5.4, pp.129–134) के तेरह items में से पाँच ऐसे संग्रह हैं जिन्हें student ख़ुद चलाता है — items 6, 9, 11, 12 और 13; बाक़ी आठ अपना data छापते हैं। यहीं पर चक्र पढ़ी जाने वाली चीज़ नहीं रहता और की जाने वाली चीज़ बन जाता है।
पूरा transcript1,419 शब्द

बात छोटी सी है, एक अकेली संख्या बातचीत ख़त्म कर देती है, और संख्याओं का फैलाव नई बातचीत शुरू करता है। हर बार हिसाब पूरा होते ही एक नया सवाल खड़ा हो जाता है, और यह कोई कमी नहीं, यही असली काम है। मान लो कोई बस इतना कहे, इस शहर के बाज़ार में हर महीने प्याज़ की 35 बोरियाँ आती हैं। इस पर पूछने को क्या है? कुछ ख़ास नहीं, बात वहीं ख़त्म।

एक संख्या में न कोई बदलाव है, न कोई तुलना, तो जिज्ञासा को पकड़ने के लिए कुछ भी नहीं मिलता। अब असली तालिका, 2 शहर, 12 महीने, कुल 24 संख्याएँ। यहाँ 35 वाली बात इनमें से सिर्फ़ 2 खानों में सच, और दोनों बार महीना 6। बाकी 22 खानों में वह संख्या गलत, तो वह अकेली संख्या झूठ नहीं, बस बहुत कुछ छिपाती है। सबसे कम 17 बोरियाँ, सबसे ज़्यादा 60, यानी 43 का फैलाव।

यह फैलाव अकेली संख्या 35 से भी बड़ा, और सबसे ज़्यादा वाला महीना सबसे कम वाले के 3 गुने से भी ऊपर। और यहीं से सवाल उठने लगते हैं, ऐसा क्यों, कब, कहाँ। क्या मौसम आवक बदलते हैं? ये 2 शहर कहाँ हैं, कितनी दूर? एक ही मोहल्ले के अलग बाज़ारों में कितना फ़र्क? क्या दूसरी चीज़ें भी ऐसे ही चलती हैं? आवक तय कौन करता है? और इस उतार चढ़ाव से किसका नुकसान, किसका फ़ायदा?

कुल 6 सवाल, और हर एक इस तालिका को देखकर ही पैदा हुआ। अब इन्हें छाँटो, किसका जवाब और आँकड़े इकट्ठा करके मिल सकता है? और 4 सवाल आँकड़ों वाले, मौसम, दूरी, बाज़ारों का फ़र्क, दूसरी चीज़ें, और 2 ऐसे जिनके लिए दूसरी तरह की खोज चाहिए। आवक कौन तय करता है, नुकसान किसका, ये बुरे सवाल नहीं, बस इनका जवाब सिर्फ़ गिनती से नहीं मिलता, बाज़ार और लोगों को समझना पड़ता है।

जो सवाल आँकड़ों से सुलझ सकते हैं, उनके लिए कौन से आँकड़े? मौसम वाले सवाल के लिए कई सालों के वही महीने, ताकि देखें कि हर साल एक सा पैटर्न आता है या नहीं। शहर कहाँ हैं, इसके लिए नक्शा, और मोहल्ले के बाज़ारों के फ़र्क के लिए एक ही दिन कई बाज़ारों की गिनती। यानी हर अच्छा सवाल यह भी बताता है कि अगली बार क्या इकट्ठा करना है।

कुछ लोग सोचते हैं सवाल पूछना गणित से पहले का काम है। पर यहाँ सबसे अच्छे सवाल हिसाब के बाद आए, तालिका और ग्राफ़ के बिना पता ही नहीं होता कि क्या पूछना है। अब एक खेल, 2 पंक्तियाँ, हर एक में 12 संख्याएँ, पर ऊपर कोई नाम नहीं। पहली पंक्ति, 210, 257, 372, 441, 536, 564, 555, 465, 394, 310, 222, 186। दूसरी पंक्ति, 459, 384, 381, 327, 304, 276, 295, 318, 369, 409, 435, 468।

नाम देखे बिना, सिर्फ़ शक्ल से अंदाज़ा लगाओ, ये क्या नाप रही होंगी? पहली पंक्ति सबसे ऊपर महीना 6 में, सबसे नीचे महीना 12 में। दूसरी ठीक उल्टी, सबसे ऊपर महीना 12 में, सबसे नीचे महीना 6 में। यह पहला सुराग है, जो चीज़ साल के बीच में एक जगह सबसे ज़्यादा और दूसरी जगह सबसे कम, वह शायद मौसम से जुड़ी है। महीने से महीने तक 11 कदम, कोई भी कदम सपाट नहीं।

और सभी 11 कदमों में जब एक पंक्ति चढ़ती है, दूसरी उतरती है। सिर्फ़ सिरों पर नहीं, हर एक कदम पर उल्टी चाल, यह कोई इत्तफ़ाक वाला मेल नहीं लगता, कोई एक ही वजह दोनों को उल्टा चला रही है। पर जोड़ो तो 4512 और 4425, सिर्फ़ 87 का फ़र्क। यह पहली पंक्ति का बस लगभग 1 दशमलव 9 प्रतिशत, यानी आकार लगभग बराबर, और शक्ल बिल्कुल उल्टी। एक सुराग, सभी 24 संख्याएँ 24 से बड़ी, तो ये एक दिन के घंटे नहीं हो सकते।

अब नाम खोलते हैं, ये 2 शहरों में हर महीने कुल कितने घंटे दिन की रोशनी रही, उसके आँकड़े हैं। हर महीने को उसके दिनों से भाग करो, तो एक दिन की लंबाई मिलती है, और सभी 24 संख्याएँ 0 और 24 के बीच आ जाती हैं। उत्तरी शहर में महीना 6 में लगभग 18 दशमलव 8 घंटे का दिन, महीना 12 में 6 दशमलव 0। दक्षिणी शहर में महीना 12 में लगभग 15 दशमलव 1, महीना 6 में लगभग 9 दशमलव 2।

सबसे छोटा दिन, ठीक 24 घंटे का 1 बटा 4 हिस्सा। सबसे लंबा, 24 का 3 बटा 4 यानी 18, उससे भी 0 दशमलव 8 घंटे ज़्यादा। भाग करना ज़रूरी क्यों? दक्षिणी शहर में महीना 10 में 409 घंटे, महीना 2 में 384, यानी 25 ज़्यादा। पर दिन की लंबाई महीना 2 में लगभग 13 दशमलव 7 1, महीना 10 में लगभग 13 दशमलव 1 9, छोटे महीने के दिन लंबे निकले।

वजह, एक शहर पृथ्वी के उत्तरी आधे में, दूसरा दक्षिणी आधे में, दोनों बीच की गोलाई से दूर, तो एक की गर्मी दूसरे की सर्दी। उत्तरी शहर में दिन की लंबाई साल भर में 12 दशमलव 8 घंटे ऊपर नीचे होती है, दक्षिणी में लगभग 5 दशमलव 9, आधे से भी कम। देखो कितनी लंबी कड़ी बनी, बिना नाम की संख्याओं से, शक्ल से, भाग से, पृथ्वी के बारे में एक बात तक।

और जवाब मिलते ही नया सवाल, उत्तरी शहर का सबसे लंबा दिन भी पूरे 24 घंटे से 5 दशमलव 2 घंटे कम। तो क्या कोई ऐसी जगह है जहाँ गर्मियों में सूरज डूबता ही नहीं? इन 2 पंक्तियों में इसका जवाब नहीं, पर इन्हीं ने यह सवाल पैदा किया, यही चक्र है। आँकड़ों का काम एक सीधी पाइप नहीं, एक चक्र है, आँकड़े, हिसाब, नया सवाल, फिर नए आँकड़े। हिसाब का अंत जवाब पर नहीं, अगले सवाल पर होता है।

अब 2 स्कूल, कक्षा 6 से 8 तक लड़कों और लड़कियों की औसत लंबाई, कुल 12 औसत, 6 पंक्तियाँ। हर पंक्ति में स्कूल B आगे, 6 में से 6 बार। हिसाब पूरा हुआ, और सामने फिर सवालों की कतार। इसके बाद 4 सवाल, तुम्हारे अपने स्कूल के बच्चे कितने लंबे हैं? और कक्षा 6 के सारे बच्चों का औसत क्या है? और एक स्कूल हर कक्षा में लंबा क्यों है?

ये स्कूल कहाँ हैं? पहले 2 के लिए नए आँकड़े इकट्ठा किए जा सकते हैं, बाकी 2 का जवाब इन 12 औसतों में है ही नहीं। जिस सवाल का जवाब नहीं दिया गया, वह बेकार नहीं, कुछ सवाल जानबूझकर खुले छोड़े जाते हैं। खुला सवाल छोड़ना ईमानदार अंत है, बना बनाया जवाब गढ़ना उल्टी सीख देता है। उम्र के हिसाब से औसत लंबाई की बड़ी तालिका से भी यही होता है, क्या वज़न में भी ऐसे ही पैटर्न हैं?

दूसरे देशों में क्या दिखेगा? और बहुत पहले के ज़माने में लोग छोटे थे या नहीं? हर एक नया आँकड़ों वाला सवाल है, जो एक जवाब दिए गए सवाल से निकला। और यह चक्र तुम खुद भी चला सकते हो, अपनी क्लास के नामों की लंबाई, 2 किताबों के एक पन्ने के वाक्यों की लंबाई। एक महीने तक गिनो कि घर से कितनी बार निकले, परिवार की लंबाइयाँ, या एक मिनट का अंदाज़ा।

मान लो एक परिवार के 4 सदस्य, A, B, C, D, हर एक आँख बंद करके 3 बार अंदाज़ा लगाता है कि एक मिनट कब हुआ। A के अंदाज़े 52, 55, 58 सेकंड, B के 66, 62, 61 सेकंड। C के 48, 50, 52, D के 60, 59, 61, और हर एक का औसत 55, 63, 50, 60। सभी 12 अंदाज़े, कुल 684, माध्य 57 सेकंड। क्रम से लगाओ तो बीच वाले 2 अंदाज़े 58 और 59, बीच का मान 58 दशमलव 5।

अब 7 अंदाज़े 60 से कम, 1 ठीक 60, 4 ज़्यादा। हर सदस्य का फैलाव, 6, 5, 4, 2 सेकंड। सबसे स्थिर D, और उसी का औसत ठीक 60। यहाँ 2 अलग बातें हैं, औसत बताता है कोई कितना सही है, फैलाव बताता है वह कितना स्थिर है, और दोनों अलग सवालों के जवाब हैं। पहले अंदाज़े से तीसरे तक, 4 में से 3 सदस्य 60 के ज़्यादा पास आए।

सिर्फ़ D दूर गया, उसका पहला अंदाज़ा ठीक 60, तीसरा 61। पर 4 लोगों के 12 अंदाज़ों से यह नहीं कह सकते कि अभ्यास से हर किसी का अंदाज़ा सुधरता है, यह इन आँकड़ों के दायरे से बाहर है। और फिर नए सवाल, क्या अभ्यास से अंदाज़ा सुधरता है? ज़्यादातर लोग मिनट छोटा क्यों गिनते हैं? और 3 मिनट के अंदाज़े में, क्या चूक भी 3 गुना होगी? इसके लिए नए आँकड़े चाहिए, चक्र फिर घूमा।

अकेली संख्या बात ख़त्म करती है, फैलाव सवाल खोलता है। हर सवाल को छाँटो, किसका जवाब आँकड़ों से मिलेगा, किसके लिए दूसरी खोज चाहिए। बिना नाम की संख्याएँ भी अपनी शक्ल से बहुत कुछ बताती हैं। खुला सवाल छोड़ना ईमानदारी है, हार नहीं। आँकड़े, हिसाब, नया सवाल, नए आँकड़े, यह चक्र तुम खुद चला सकते हो।

यह कहाँ बैठता है

यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.

किस पर टिका है

इसके ठीक पहले और ठीक बाद

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