PrepShorts · पढ़ाई की शीट · Class 7 Mathematics · Chapter 6, Constructions and Tilings
Chapter 6 · Constructions and Tilings
equilateral triangle से 60° बनाना, और उस पर बनी मेहराबें
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arch का curve हाथ से 2 बार एक जैसा नहीं बनता - इसलिए पहले सीधी lines का ढाँचा, फिर curves।
मुख्य idea
यह chapter असल में जिन angles का construction करता है उन्हें गिनो, तो सिर्फ़ दो बीज मिलते हैं: 90°, जो perpendicular bisector से निकला, और 60°, जो equilateral triangle से निकलता है। उसकी पहुँच में बाक़ी सब — 45°, जो p.144 पर बना, 120°, जो 60° के बग़ल वाली line से पढ़ा गया, और 30° तथा 15°, जिन्हें एक सवाल के रूप में छोड़ दिया गया है जिसका जवाब यही दो चालें देती हैं — उन्हीं दोनों में से किसी का आधा या जोड़ है। और 60° की कोई क़ीमत ही नहीं लगती, क्योंकि एक ही खुलाव पर रखा compass, उसी खुलाव के दोनों सिरों से घुमाया जाए, तो उसके पास तीन बराबर भुजाएँ बनाने के अलावा कोई चारा नहीं रहता। मेहराबें इस बात का तर्क हैं कि यह सब मायने क्यों रखता है: त्रिदल या नुकीली मेहराब ऐसा curve है जिसे कोई हाथ दो बार एक जैसा नहीं बना सकता, और जिस पल उसकी सहायक lines बराबर लंबाइयों और बराबर angles से पक्की हो जाती हैं, वह ऐसी चीज़ बन जाती है जिसे राजमिस्त्री पत्थर में काट सके और student बिल्कुल वैसी ही दोबारा बना सके।
आपको क्या आना चाहिए
- समझाना कि मेहराब को बनाने से पहले उसे सहायक lines तक क्यों घटाना पड़ता है
- त्रिदल मेहराब के सहारों को जिन बराबरियों की ज़रूरत है उन्हें पहचानना, और उन्हें बनाना
- दो बराबर segments और उनके midpoints से नुकीली मेहराब के सहारे बनाना
- compass और unmarked ruler से 60° का angle बनाना
- समझाना कि उस construction के दोनों arcs equilateral triangle बनाने को मजबूर क्यों करते हैं
- bisection से 30° और 15° को 60° से निकालना
- बताना कि इस chapter में किन angles का construction होता है, और हर एक को 90° या 60° तक वापस ले जाना
- बताना कि मेहराब की drawing में सटीकता कहाँ ख़त्म होती है और design का चुनाव कहाँ शुरू होता है
जानने लायक़ शब्द
| शब्द | एक line में परिभाषा | हिंदी / क्षेत्रीय समकक्ष | पहली बार कहाँ आया |
|---|---|---|---|
| arch | किसी खुली जगह के ऊपर बना घुमावदार ढाँचा | मेहराब | §6.1, Part II, pp.149–151 में छपा |
| trefoil arch | ऐसी मेहराब जिसका ऊपरी हिस्सा तीन गोल हिस्सों से बना हो | त्रिदल मेहराब | §6.1, Part II, p.149 में छपा |
| pointed arch | ऐसी मेहराब जिसके दोनों curves ऊपर एक नोक पर मिलते हैं | नुकीली मेहराब | §6.1, Part II, pp.150–151 में छपा |
| support lines | पहले बनाया गया ढाँचा, जिसे पूरी figure छिपा लेती है | सहायक रेखाएँ | §6.1, Part II, pp.149, 151 में छपा; p.150 पर supporting lines भी लिखा है |
| equilateral triangle | तीन बराबर भुजाओं वाला triangle | समबाहु त्रिभुज | §6.1, Part II, pp.151–153 में छपा |
| radii | arc के वे कई खुलाव जिनसे मेहराब का design सँवारा जाता है | त्रिज्याएँ | §6.1, Part II, pp.137, 140, 149 में छपा (p.151 पर एकवचन radius है) |
| compass | वह औज़ार जो घूमते हुए एक खुलाव थामे रखता है | परकार | §6.1, Part II, pp.152–154 में छपा |
| symmetry | किसी figure के दोनों आधों का आपस में मिलना | सममिति | §6.1, Part II, pp.136, 149 में छपा |
| plane surface | वह सपाट काग़ज़ या पत्थर की सतह जिस पर design पहले बनाया जाता है | समतल सतह | §6.1, Part II, p.149 में छपा |
| inflexed arc | p.154 की design exercises में से पहली को दिया गया नाम | अंतर्नत चाप | §6.1, Part II, p.154 में छपा |
| Wavy Wave | कक्षा 6 का वह construction जिस पर नुकीली मेहराब बनती है | वेवी वेव | §6.1, Part II, p.150 में छपा |
| equilateral | जिसकी सभी भुजाएँ बराबर हों | समबाहु | §6.1, Part II, pp.151–153 में, और SUMMARY, p.163 में छपा |
हिंदी column में standard NCERT हिंदी गणितीय शब्दावली दी गई है। इस brief के लिए Ganita Prakash Part II का हिंदी संस्करण उपलब्ध नहीं था — Notes देखें।
लोग कहाँ चूकते हैं
- "मेहराब अर्धवृत्त होती है।" chapter की दोनों में से कोई भी मेहराब ऐसी नहीं है। त्रिदल तीन गोल हिस्सों वाली है और नुकीली मेहराब के ऊपर एक कोना है; दोनों ऐसे arcs से बनी हैं जिनके centres फैलाव का बीच नहीं हैं।
- "मेहराब के लिए एक ही सही radius होती है।" chapter साफ़ कहता है कि मेहराब को सुंदर दिखाने के लिए radii बदली जा सकती हैं। geometry सहारों को तय करती है; curves design का फ़ैसला हैं। दोनों को अलग रखो।
- "60° को protractor से नापना ही पड़ेगा।" यही वह angle है जो मुफ़्त में मिलता है: तीन बराबर भुजाएँ, इसलिए तीन बराबर angles, इसलिए 180 ÷ 3।
- **"60° वाले construction को किसी ख़ास radius की ज़रूरत है।"** कोई भी खुलाव चलेगा, बशर्ते A से और B से वही इस्तेमाल हो। यही दोबारा इस्तेमाल तीनों भुजाओं को बराबर बनाता है।
- "तो compass कोई भी angle बना सकता है।" नहीं बना सकता। यह chapter जो कुछ भी बनाता है वह 90° या 60° से आधा करके और जोड़कर आता है, और जो student इसके उलट मानता है वह ऐसे 65.5° construction को ढूँढ़ेगा जो है ही नहीं।
- "त्रिदल के दोनों आधार angles नापने पड़ते हैं।" उनकी copy बनाई जाती है — जो ठीक Copying an angle, and why triangle congruence proves it works वाला construction है, और यही कारण है कि वह topic पहले आता है।
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पूरा transcript1,542 शब्द
पुरानी इमारतों के arches देखो, कुछ के सिर पर 3 गोल उभार, कुछ ऊपर से नुकीले। कई लोग सोचते हैं कि arch मतलब आधा गोला, पर इन दोनों में से कोई भी वैसा नहीं। ऐसा curve हाथ से 2 बार एक जैसा नहीं बनता। पत्थर में काटने से पहले arch को काग़ज़ पर सपाट बनाना पड़ता है। और हर पत्थर एक जैसा कटे, इसके लिए चित्र सटीक चाहिए, अंदाज़े वाला नहीं।
तो पहले curves नहीं, उनके नीचे की सीधी सहायक lines, यानी ढाँचा। एक arch कई पत्थरों से बनता है, और हर पत्थर उसी एक चित्र से कटता है। अगर ढाँचे में ज़रा सी गड़बड़ हो, तो दोनों तरफ़ के पत्थर बीच में ठीक से नहीं मिलते। और arch एक तरफ़ झुका हुआ दिखता है, जिसे कोई भी आँख पकड़ लेती है। trefoil arch का ढाँचा, नीचे एक आधार, बाएँ सिरे पर A, दाएँ पर D।
आधार के दोनों सिरों से अंदर की ओर झुकी 2 arms, बाईं A से B तक, दाईं D से C तक। शर्तें 2, दोनों arms बराबर, और A पर का angle D पर के angle के बराबर। बनाने का क्रम भी तय है, पहले A और D पर बराबर angles। D पर का angle नापा नहीं जाता, A वाले की नकल उतारी जाती है, angle की नकल वाला तरीका। फिर दोनों arms पर बराबर लंबाई, और वहाँ B और C।
हमारे चित्र में आधार की लंबाई 78, और दोनों arms 25 की। तब B और C, आधार के बीच से उठी खड़ी line के आर पार, एक दूसरे की आईने वाली छवि हैं। दोनों एक ही ऊँचाई पर, और B से C की दूरी 48, बीच वाले उभार को इतना पाटना है। एक बात बिना माँगे मिलती है, A से C और D से B की दूरियाँ भी बराबर निकलती हैं।
और सिर पर 3 उभार, एक के बाद एक, A से B तक, फिर B से C तक, फिर C से D तक। बाहर वाले 2 उभारों का फ़ासला 25 और 25, बराबर, और बीच वाले का 48। क्या इनमें से एक शर्त काफ़ी है? angles बराबर पर arms 25 और 50, तो B और C अलग अलग ऊँचाई पर। arms बराबर पर angles अलग, तो फिर अलग ऊँचाई, और आईने वाली बात टूट जाती है।
तो दोनों शर्तें चाहिए, एक से काम नहीं चलता। arms की लंबाई बदलकर देखो, 10, 25, 40 और 55। सभी 4 में B और C बराबर ऊँचाई पर, एक दूसरे की आईने वाली छवि। बदलता है बस बीच का फ़ासला, 66, 48, 30 और 12। और arms की लंबाई 65 हो, तो B और C मिल ही जाते हैं, बीच में कुछ नहीं बचता। अब ऊपर के उभार, और यहाँ सटीकता ख़त्म, पसंद शुरू।
कुछ लोग मानते हैं कि arch का बस एक ही सही फैलाव होता है। पर B और C दोनों से होकर जाने वाले arcs बहुत से हैं, उनके केंद्र B C के बीच वाले बिंदु के ठीक नीचे। यहाँ 4 केंद्र, फैलाव 25, 26, 30 और 40। उभार के सबसे ऊपर वाले बिंदु की ऊँचाई, 38, 36, 32 और 28। यानी बड़ा फैलाव, चपटा उभार, ऊँचा नहीं। सबसे छोटा फैलाव जो दोनों पैरों तक पहुँचे, 24, B C पर बना आधा गोला।
फैलाव 20 या 23 हो, तो arcs किसी भी पैर तक नहीं पहुँचते। तो ढाँचा गणित तय करता है, उभार पसंद तय करती है, दोनों को अलग रखो। अब नुकीला arch, इसका ढाँचा 2 बराबर सीधे टुकड़े, जो ऊपर एक नोक पर मिलते हैं। हर टुकड़े पर उसका बीच वाला बिंदु निशान करो, arch के curves उन्हीं से सधते हैं। यहाँ भी पहले सीधी lines, फिर उन पर curves, वही trefoil वाली सीख।
एक आसान रूप देखो, पैर 60 दूर, और हर पैर से 60 का arc। दोनों arcs ऊपर मिलते हैं, और वह बिंदु दोनों पैरों से 60 दूर। यानी 3 लंबाइयाँ, सब एक, पैरों के बीच की और दोनों तरफ़ की। उन्हीं पैरों पर आधा गोला बस 30 की ऊँचाई तक जाता। पर नुकीले arch की नोक उससे ऊँची उठती है, और उसके दोनों curves के केंद्र ख़ुद पैर हैं, बीच वाला बिंदु नहीं।
और ऊपर की नोक पर जो angle है, वह उसी triangle के कोनों जैसा है जो पैरों और नोक से बनता है। और यहीं एक नया angle छुपा है, 60 degree। compass से सबसे आसानी से 90 बनता है, और उसके आधे। तो 60 आए कहाँ से? नुकीले arch की नोक पर, hexagon वाले designs में, हर जगह यही angle चाहिए। एक ray लो, उसका सिरा A। A से कोई भी फैलाव लेकर arc लगाओ, जो ray को B पर काटे।
अब वही फैलाव, इस बार B से, और यह arc पहले arc को C पर काटता है। A से C तक line, और A पर angle 60 degree। पर यह 60 ही क्यों? triangle A B C देखो, A से B एक फैलाव, A से C वही फैलाव, B से C भी वही। यहाँ तीनों sides बराबर, यह equilateral triangle है। compass का फैलाव एक ही रखा, तो बराबरी चुनी नहीं गई, मजबूरी में आई।
बराबर sides, तो बराबर angles, सभी 3। और triangle के angles मिलकर 180, उसे 3 बराबर हिस्सों में बाँटो, हर एक 60। सभी 3 कोने जाँचे गए, हर कोने पर वही angle। ये 2 arcs ray के नीचे भी एक बार और कटते हैं। वह बिंदु भी A और B दोनों से उसी फैलाव पर, यानी नीचे की ओर एक और equilateral triangle। तो 60 ऊपर भी मिलता है और नीचे भी, जिधर चाहिए, उधर वाला कटान लो।
कुछ लोग सोचते हैं कि इसके लिए कोई ख़ास फैलाव चाहिए। नहीं, 4 फैलाव लेकर देखो, 1, 25, 60 और 7 बटा 3, हर बार 3 बराबर sides। शर्त बस इतनी, A से और B से फैलाव वही। अगर B पर दूसरा फैलाव लिया, तो 60 हाथ से गया। पहला फैलाव 25 रखकर दूसरा 10, 25, 40, 50 या 60 लो, तो बस 25 पर 60 मिलता है। और 50 पर triangle चपटा होकर ray पर लेट जाता है, और 60 पर कोई triangle बनता ही नहीं।
इसीलिए 60 मुफ़्त है, एक फैलाव, 2 केंद्र, और 3 बराबर sides अपने आप। कुछ लोग मानते हैं कि 60 को protractor से नापना पड़ता है, पर यह तो ख़ुद बन जाता है। यह सबसे सस्ता angle है, न आधा करना, न नकल उतारना। और 60 बनाते ही, उसी line पर बगल में 120, वह भी मुफ़्त। क्योंकि सीधी line पर दोनों angles मिलकर 180। यह 120 hexagon जैसे designs की सीढ़ी है।
अब 30 और 15, 60 को आधा करो तो 30, फिर आधा तो 15। angle को आधा करने वाला तरीका यहाँ काम आता है। और 90 का आधा 45। अब 30 तक पहुँचने के 2 रास्ते, 60 का आधा, या 90 में से 60 घटाओ। देखो, 45 के भी 2, 90 का आधा, या 60 में से 15 घटाओ। यानी ये angles अलग अलग टापू नहीं, एक जाल हैं, एक से दूसरे तक कई रास्ते।
एक hexagon, यानी 6 sides वाली आकृति, हर कोने पर मुड़ती है 360 को 6 में बाँटकर, यानी 60। और 6 पंखुड़ियों वाला फूल भी वही 60, बार बार, पूरे 360 तक। इसीलिए 60 वाले designs इतने आम हैं, हर एक बस उसी एक फैलाव से। अब गिनो, इन सब में सचमुच शुरू से बनाए गए angles कितने हैं? जड़ में बस 2 angles, 90, जो perpendicular bisector से आया, और 60, जो equilateral triangle से।
बाकी सब इन्हीं के आधे, या इनके जोड़। यहाँ 7 नाम वाले angles, 45, 30, 15, 120, 75, 105 और 150, सब इन्हीं 2 से, बस आधा करके और जोड़कर। एक पेड़ की तरह, जड़ में 2 बीज, और हर डाल आधा करना या जोड़ना। इनमें से किसी के लिए protractor नहीं चाहिए, बस compass और सीधी पट्टी। कुछ लोग मान लेते हैं कि फिर तो compass से हर angle बन जाएगा।
इन 2 बीजों से, आधा करके, जोड़कर, घटाकर, 40, 50, 70 और 65 दशमलव 5, इनमें से एक भी नहीं आता। हर मिलने वाला angle, 15 को कुछ बार आधा करके जो टुकड़ा बने, उसी टुकड़े की पूरी गिनती है, और ये 4 उस साँचे में नहीं बैठते। और 40 के पास ज़रूर आ सकते हो, हर दौर में चूक आधी, 5 बटा 2, 5 बटा 4, 5 बटा 8, 5 बटा 16, 5 बटा 32।
पर 40 पर पहुँचते कभी नहीं। और यह बात बस इन तरीकों और इन 2 बीजों की है, किसी और तरीके के बारे में हम कुछ नहीं कह रहे। अब इन्हें बनाकर देखो, 6 पंखुड़ियों वाला फूल, जो बस compass से बन जाता है। circle के अंदर hexagon, एक घेरे में 6 बराबर circles, और छोटे triangles से भरा hexagon। सब 60 के परिवार के, हर एक में वही एक फैलाव बार बार।
और एक पहेली, 3 कटे हुए गोले, एक triangle के कोनों पर रखे, पर triangle खिंचा ही नहीं। फिर भी आँख को triangle दिखता है, ऐसा क्यों होता है, इस पर सोचकर देखो। सुराग, आँख ख़ाली जगहों को भी जोड़ लेती है, जैसे हम ढाँचे की lines मिटाने के बाद भी उन्हें देख लेते हैं। arch पहले ढाँचा है, बराबर arms, बराबर angles, फिर curves। ढाँचा सटीक, उभार का फैलाव पसंद का।
एक फैलाव, 2 केंद्र, 3 बराबर sides, और 60 मुफ़्त। अब 60 से 120, 30, 15, और 90 से 45। सब कुछ 2 बीजों से, पर हर angle नहीं।
यह कहाँ बैठता है
यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.
किस पर टिका है
- Copying an angle, and why triangle congruence proves it worksकक्षा 7 · Ch 6, Constructions and Tilings
- Bisecting an angle, and halving 90° to get 45°कक्षा 7 · Ch 6, Constructions and Tilings
- The perpendicular bisector, and the equidistance property that justifies itकक्षा 7 · Ch 6, Constructions and Tilings
आगे फिर कहाँ आता है
- Regular hexagons, and why the angles round a point must total 360°कक्षा 7 · Ch 6, Constructions and Tilings