PrepShorts · पढ़ाई की शीट · Class 8 Mathematics · Chapter 5, Number Play
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कोई भी 2 even संख्याएँ जोड़िए, तो क्या जवाब 4 का multiple होता है? 12 और 16 का जोड़ 28 है, जो है, पर 12 और 6 का जोड़ 18 है, जो नहीं है।
मुख्य idea
हमेशा, कभी-कभी और कभी नहीं — ये भरोसे के तीन स्तर नहीं हैं; ये दावे के तीन अलग आकार हैं, और हर एक सिर्फ़ अपनी तरह के सबूत से कमाया जा सकता है। "हमेशा" वाला दावा अनगिनत हालतों को ढकता है, इसलिए सफल उदाहरणों की कोई भी गिनती उसे साबित नहीं करती, और ठीक एक नाकामी उसे गिरा देती है। "कभी नहीं" वाला दावा भी उतना ही व्यापक है, और उसे इस बात की पक्की दलील चाहिए कि वह चीज़ हो ही नहीं सकती — यह बताना काफ़ी नहीं कि तुम्हें कोई उदाहरण नहीं मिला। "कभी-कभी" अकेला ऐसा फ़ैसला है जिसे संख्याओं की एक जोड़ी तय कर सकती है, और उसके लिए दो चाहिए: एक उदाहरण और एक प्रति-उदाहरण। इसलिए किसी कथन को कौन-सा फ़ैसला मिले, यह इस बात का सवाल है कि प्रमाण किसे माना जाएगा, और यह सवाल किसी भी हिसाब से पहले आता है।
आपको क्या आना चाहिए
- विभाज्यता के किसी कथन को हमेशा, कभी-कभी या कभी नहीं सच की श्रेणी में रखना, और बताना कि फ़ैसला किस सबूत पर टिका है
- किसी बताए गए सार्वत्रिक दावे को गिराने वाला एक प्रत्युदाहरण देना, और समझाना कि एक क्यों काफ़ी है
- "कभी-कभी सच" का फ़ैसला साबित करने के लिए एक उदाहरण और एक प्रति-उदाहरण देना
- "कभी सच नहीं" वाले फ़ैसले के लिए असंभवता की दलील खड़ी करना, सम-विषमता या विभाज्यता के टकराव से
- समझाना कि values रखकर किसी व्यापक दावे को ग़लत साबित किया जा सकता है पर पक्का नहीं किया जा सकता
- दो आपस में असंबंधित संख्याओं के बारे में दावा दो अलग अक्षरों से लिखना, और बताना कि एक अक्षर दावे को सीमित क्यों कर देता
- किसी दूसरे student के नाम से दिए गए अनुमान को जाँचना, उसका फ़ैसला करना, और औचित्य लिखना
जानने लायक़ शब्द
| शब्द | एक पंक्ति में अर्थ | हिंदी / क्षेत्रीय समकक्ष | पहली बार कहाँ आया |
|---|---|---|---|
| Always True | वह फ़ैसला कि कोई कथन उन सभी हालतों में सही है जिनके बारे में वह बोलता है | सदैव सत्य | इस chapter में छपा (Part I, §5.1, p.118) |
| Sometimes True | वह फ़ैसला कि कोई कथन कुछ हालतों में सही है और कुछ में ग़लत | कभी-कभी सत्य | इस chapter में छपा (Part I, §5.1, p.118) |
| Never True | वह फ़ैसला कि कोई कथन उन सभी हालतों में ग़लत है जिनके बारे में वह बोलता है | कभी सत्य नहीं | इस chapter में छपा (Part I, §5.1, p.118) |
| counterexample | एक अकेली हालत जिसमें दावा किया गया नियम टूट जाता है | प्रत्युदाहरण | इस chapter में, SUMMARY में छपा (Part I p.134) |
| non-example | ऐसी value जो रखने पर दावा किया गया गुण टूट जाए | प्रति-उदाहरण | इस chapter में छपा (Part I, §5.1, p.116) |
| conjecture | ऐसा दावा जो तय होने से पहले सामने रखा गया हो | अनुमान | इस chapter में छपा (Part I, §5.2, p.131) |
| justify | किसी फ़ैसले के पक्ष में तर्क देना | न्यायसंगत ठहराना | इस chapter में छपा (Part I, §5.1, p.122) |
| statement | फ़ैसले के लिए रखा गया दावा | कथन | इस chapter में छपा (Part I, §5.1, p.118) |
| reasoning | ऐसी दलील जो हर हालत जाँचे बिना सवाल तय कर दे | तर्क | इस chapter में छपा (Part I, §5.1, p.115) |
| universal claim | किसी तरह की हर संख्या के बारे में बोलने वाले कथन के लिए इस पाठ का नाम | सार्वत्रिक दावा | इस पाठ का शब्द; chapter इस विचार पर काम करता है और इसे नाम नहीं देता |
हिंदी column में standard हिंदी गणितीय शब्दावली दी गई है। Ganita Prakash कक्षा 8 का हिंदी संस्करण नहीं देखा गया, इसलिए इसे standard चलन मानें, उस संस्करण के ठीक-ठीक शब्द नहीं।
लोग कहाँ चूकते हैं
- "कभी-कभी सच का मतलब है मुझे पक्का नहीं पता।" यह एक पक्का फ़ैसला है जिसके साथ प्रमाण की पक्की ज़िम्मेदारी है: एक हालत दिखाओ जिसमें बात चलती है और एक जिसमें नहीं चलती। students अक्सर इसे बचाव की तरह इस्तेमाल करते हैं, और chapter के दोनों हल किए "कभी-कभी" वाले कथन ठीक ऐसी ही जोड़ी के साथ आते हैं।
- "मैंने बीस संख्याएँ आज़माईं और हर बार चला, तो यह हमेशा सच है।" बीस, हर संख्या नहीं है। chapter Part I p.115 पर साफ़ कहता है कि हालतों की कोई सीमा नहीं। ऐसा दावा दिखाओ जो बहुत-सी छोटी संख्याओं पर टिका रहे और एक बड़ी संख्या पर गिर जाए।
- "प्रत्युदाहरण सिर्फ़ यह दिखाता है कि नियम आम तौर पर चलता है।" वह दिखाता है कि जैसा कहा गया है, वैसा नियम ग़लत है। जो बच सकता है वह एक सुधारा हुआ नियम है जिसमें एक शर्त जोड़ी गई हो — और यही काम का जवाब है, जिसे statement 7 पर करके दिखाना ठीक है।
- "कभी सच नहीं का मतलब बस इतना है कि किसी को उदाहरण नहीं मिला।" न खोजना कोई दलील नहीं है। "कभी नहीं" वाले फ़ैसले को एक टकराव चाहिए: chapter का टकराव एक सम मात्रा और एक विषम मात्रा के बीच है।
- "किसी भी सम और किसी भी विषम संख्या को 2n और 2n + 1 लिखा जा सकता है।" इससे वे मजबूरन पड़ोसी बन जाती हैं। दो स्वतंत्र संख्याओं को दो स्वतंत्र अक्षर चाहिए। chapter का अपना पात्र Part I p.121 पर यही पूछता है।
- "अगर कथन ग़लत है, तो उसका उलटा ज़रूर सही होगा।" Part I p.122 no. 3 का item (ii) विभाज्यता के एक सच्चे तथ्य को पलटता है और ऐसी बात पाता है जो हमेशा सच नहीं। किसी सच्चे कथन को उलटना एक नया दावा है जिसे नया फ़ैसला चाहिए।
- "जिस अनुमान पर किसी का नाम लिखा है, वह शायद सही होगा।" चार exercises दावे students के मुँह में रखती हैं। कुछ टिकते हैं और कुछ नहीं, और नाम देना जान-बूझकर है: इससे किसी दावे को जाँचना हमले जैसा नहीं, आम बातचीत जैसा लगता है।
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पूरा transcript2,235 शब्द
यहाँ एक दावा है, कोई भी 2 even संख्याएँ जोड़िए, तो जवाब 4 का multiple होता है। तो क्या ये दावा सच है, या नहीं? मान लीजिए 12 और 16, जोड़ 28 है, जो 4 का multiple है, पर 12 और 6 का जोड़ 18 है, जो नहीं है। ऐसे किसी भी दावे के सिर्फ़ 3 जवाब होते हैं, हमेशा सच, कभी-कभी सच, और कभी सच नहीं। ये भरोसे के 3 स्तर नहीं हैं, ये 3 अलग तरह के दावे हैं, और हर एक का सबूत अलग तरह का होता है।
सही जवाब चुनना ही असली काम है, और ये काम किसी भी हिसाब से पहले आता है। तो चलिए, इन तीनों को एक-एक करके देखते हैं। शुरुआत हमेशा सच से कीजिए, क्योंकि ये सबसे बड़ा वादा करता है। हमेशा सच का मतलब है, कि दावा अपने हर case पर सही है, हर एक पर, बिना किसी छूट के। और ऐसे cases कभी ख़त्म नहीं होते, आप जितनी भी संख्याएँ जाँच लें, हमेशा और बची रहती हैं।
इसलिए हमेशा सच वाला दावा उदाहरणों से साबित नहीं होता, न थोड़े उदाहरणों से, न बहुत सारे उदाहरणों से। इसके लिए तर्क चाहिए, एक ऐसी वजह जो उन cases को भी ढँके, जिन्हें आप कभी देखेंगे ही नहीं। जैसे ये दावा, कि 8 अगर 2 संख्याओं में पूरा जाए तो उनके जोड़ में भी जाता है, इसकी वजह है 8 a प्लस 8 b बराबर 8 गुणा bracket a प्लस b, और 1600 जोड़ियों में ये एक बार भी नहीं गिरता।
पर उल्टी दिशा में देखिए, एक अकेली नाकामी पूरे दावे को गिरा देती है, और यही असंतुलन इस पूरे विषय की सबसे काम की बात है। उदाहरण कितना भटका सकते हैं, ये एक दावे से देखिए। कोई संख्या लीजिए, उसे उसी से गुणा कीजिए, फिर वही संख्या जोड़िए, और फिर 41 जोड़िए। शून्य से शुरू करें तो 41 आता है, जिसका 1 और ख़ुद के सिवा कोई factor नहीं। फिर 43, फिर 47, फिर 53, फिर 61, और किसी का भी 1 और ख़ुद के सिवा कोई factor नहीं।
यही चलता रहता है, case के बाद case, और जब संख्या 39 होती है, तो 1601 आता है, और उसका भी कोई दूसरा factor नहीं। एक बात और, ये सारे जवाब odd हैं, क्योंकि n गुणा n प्लस n हमेशा even होता है, और उसमें 41 जुड़ता है। यानी लगातार 40 cases, और एक भी नाकामी नहीं। इतने पर कोई भी इसे हमेशा सच कह देगा, क्योंकि 40 हरे निशान बहुत होते हैं।
पर अगली संख्या पर क्या होगा? संख्या 40 पर जवाब आता है 1681, और यहीं कहानी बदल जाती है। क्योंकि ये 1681, 41 गुणा 41 है, यानी 41 इसका एक factor है। इसकी वजह भी दिखती है, 40 गुणा 40 प्लस 40, बराबर 40 गुणा 41 है, और उसमें 41 जोड़ें, तो 41 गुणा 41 बनता है। तो दावा ग़लत है, कमज़ोर नहीं, आमतौर पर सही भी नहीं, बल्कि जैसा लिखा है, वैसा सीधा ग़लत।
एक case ने ये कर दिया, और हमेशा एक ही case काफ़ी होता है, क्योंकि हमेशा का मतलब है हर एक, और एक अपवाद हर एक को तोड़ देता है। ऐसे case को counterexample कहते हैं, इसे non-example भी कहते हैं, यानी वो उदाहरण जो दावे के ख़िलाफ़ खड़ा हो। वो 40 सफलताएँ ग़लत नहीं थीं, वो बस शुरू से ही सबूत नहीं थीं। और 81 cases तक जाएँ, तो सिर्फ़ 74 बचते हैं, 7 जगह कोई दूसरा factor मिल जाता है, इसीलिए counterexample ढूँढना सबसे सस्ती चाल है।
अब कभी-कभी सच, और यही वो जवाब है जिसका सबसे ज़्यादा ग़लत इस्तेमाल होता है। कभी-कभी सच का मतलब ये नहीं, कि मुझे पक्का नहीं पता, ये एक पक्का जवाब है, जिसके लिए पक्का सबूत चाहिए। इसे कमाने के लिए 2 चीज़ें दिखानी पड़ती हैं, एक case जहाँ दावा चलता है, और एक case जहाँ वो गिरता है। दावा ये है, कि अगर 8 किसी संख्या में पूरा जाता है, तो उसे बनाने वाले किन्हीं भी 2 हिस्सों में भी पूरा जाएगा।
संख्या 72 लीजिए, जो 8 गुणा 9 है, इसे 48 और 24 में बाँटिए, यानी 8 गुणा 6 और 8 गुणा 3, तो दावा चल गया। अब इसी 72 को 50 और 22 में बाँटिए, 8 इनमें से किसी में पूरा नहीं जाता, तो दावा गिर गया। एक ही संख्या के 2 बँटवारे, और दोनों मिलकर फ़ैसला कर देते हैं, 72 को बाँटने के 71 तरीक़ों में से सिर्फ़ 8 में दोनों हिस्से 8 के multiples हैं।
एक और दावा, और इसे भी यही इलाज चाहिए। अगर कोई संख्या 7 से पूरी बँटती है, तो क्या वो 7 के हर multiple से भी बँटती है? संख्या 42 लीजिए, जो 7 गुणा 6 है। क्या ये 14 से बँटती है, 14 है 7 गुणा 2, और हाँ, 42 में 14 पूरे 3 बार जाता है। क्या ये 28 से बँटती है, 28 है 7 गुणा 4, और नहीं, 42 में 28 एक बार जाकर 14 बचते हैं।
एक चलता है, एक नहीं, वो भी एक ही संख्या पर, तो कभी-कभी सच, और अब ये अंदाज़ा नहीं, कमाया हुआ जवाब है। गिनें तो 7 के पहले 12 multiples में से सिर्फ़ 4 ही 42 में पूरे जाते हैं, और वो हैं 7, 14, 21 और 42 ख़ुद। अब 2 दावे जो जुड़वाँ लगते हैं, पर उनके जवाब अलग निकलते हैं। पहला, जो संख्या 9 और 4 दोनों से बँटे, वो 36 से भी बँटेगी।
दूसरा, जो संख्या 6 और 4 दोनों से बँटे, वो 24 से भी बँटेगी। दोनों का आकार एक जैसा है, 2 divisors, उनका गुणा, और गुणनफल का दावा। गिनें तो 601 से नीचे 16 संख्याएँ 9 और 4 दोनों से बँटती हैं, और हर एक 36 की multiple है, तो पहला दावा हमेशा सच है। पर ऐसी 50 संख्याएँ 6 और 4 दोनों से बँटती हैं, और इनमें से आधी, यानी 25 संख्याएँ, 24 से नहीं बँटतीं, और सबसे छोटी संख्या 12 ही इसे तोड़ देती है।
फ़र्क़ की वजह factors में है, 9 और 4 में कुछ साझा नहीं, पर 6 और 4 दोनों में एक 2 है, जो गुणा में 2 बार गिना जाता है। यानी दावे का आकार उसका जवाब नहीं बताता, हर दावे का फ़ैसला अलग से करना पड़ता है। अब बचा कभी सच नहीं, और ये भी हमेशा सच जितना ही बड़ा दावा है। ये कहता है कि ऐसा हो ही नहीं सकता, एक बार भी नहीं, कभी नहीं।
इसलिए इसे भी तर्क चाहिए, ढूँढने पर न मिलना कोई तर्क नहीं है। दावा ये है, कि एक odd संख्या में एक even संख्या जोड़ें, तो 6 का multiple बनता है। कुछ जोड़ियाँ देखिए, 4 और 3 का जोड़ 7 है, 10 और 5 का जोड़ 15 है, और इनमें 6 का multiple कोई नहीं। छोटा तर्क पहले, 6 का हर multiple even है, जैसे 6, 12 और 18, और odd और even का जोड़ हमेशा odd होता है।
कोई odd संख्या even नहीं हो सकती, तो ये दोनों कभी नहीं मिलते, इसे टकराव कहते हैं, और कभी सच नहीं वाला जवाब टकराव से ही बनता है। जाँच में 1600 जोड़ियों पर ऐसा एक बार भी नहीं होता, पर हम इसे इस गिनती की वजह से नहीं, टकराव की वजह से मानते हैं। अब यही टकराव letters में, एक-एक line करके देखिए। मान लीजिए even संख्या 2 n है, और odd संख्या 2 m प्लस 1 है।
इनका जोड़ 6 के किसी multiple के बराबर रखिए, यानी 6 j के बराबर। एक को दूसरी तरफ़ ले जाइए, तो 2 n प्लस 2 m, बराबर 6 j माइनस 1 बनता है। बाईं तरफ़ 2 गुणा bracket n प्लस m है, यानी even, और दाईं तरफ़ 6 का multiple माइनस 1 है, यानी odd। मानों पर देखिए, n 4 हो, m 3 हो और j 2 हो, तो 8 और 7 का जोड़ 15 है, सामने 12, और एक हटाने पर बाईं तरफ़ 14, दाईं तरफ़ 11, एक even और एक odd।
यानी even बराबर odd, ऐसी कोई जोड़ी है ही नहीं, और अब हमें पता है कि क्यों। जाँच में 8000 मेलों पर बाईं तरफ़ हमेशा even, दाईं तरफ़ हमेशा odd, और दोनों एक बार भी बराबर नहीं। अब एक सवाल जो अक्सर उठता है, क्यों न 2 n और 2 n प्लस 1 लेकर, दोनों के लिए एक ही letter n से काम चलाया जाए? क्योंकि इससे दोनों पड़ोसी बन जाते हैं, odd संख्या even के ठीक बाद वाली हो जाती है।
जैसे 6 और 7, या 20 और 21, पर 6 और 15 जैसी जोड़ी इसमें कभी आती ही नहीं। अगर n और m, 1 से 40 तक चलें, तो ईमानदार जोड़ियाँ 1600 हैं, और एक letter वाली सिर्फ़ 40 जोड़ियाँ। यानी एक letter वाला तर्क बहुत छोटे सवाल का जवाब देता, उस सवाल का नहीं जो पूछा गया था। ये फ़र्क़ जवाबों में भी दिखता है, दोनों में 1 का अंतर है, ये दावा एक letter पर हमेशा सच है, पर 1600 जोड़ियों में से सिर्फ़ 79 पर।
यहाँ odd जोड़ वाला तर्क दोनों पर चल जाता है, इसीलिए ये जाल पकड़ में नहीं आता, पर 2 अलग संख्याओं के दावे के लिए 2 अलग letters ही चाहिए। दावे अक्सर किसी के नाम के साथ आते हैं, पर नाम कोई सबूत नहीं है। पहला दावा, 6 से भाग देने पर 2 बचाने वाली कोई भी 3 संख्याएँ जोड़ें, तो 6 का multiple बनेगा। जैसे 8, 14 और 20, इनका जोड़ 42 है, जो 6 गुणा 7 है।
ये हमेशा सच है, क्योंकि तीनों के बचे हुए 2, 2 और 2 मिलकर ठीक 6 बनाते हैं, और 1728 तिकड़ियों में से हर एक यही कहती है। दूसरा दावा, 12 से भाग देने पर 8 बचाने वाली संख्या में, 12 के किसी multiple से 4 कम वाली संख्या जोड़ें, तो 8 का multiple बनेगा। संख्या 20 और 8 लीजिए, जोड़ 28 है, जो 8 का multiple नहीं, पर 8 और 8 का जोड़ 16 है, जो है।
तो ये कभी-कभी सच है, और 1681 जोड़ियों में से सिर्फ़ 840 पर चलता है। तीसरा दावा, 9 के किसी multiple के अंक उल्टे कर दें, तो वो फिर भी 9 का multiple रहेगा। जैसे 1089 उल्टा होकर 9801 बनता है, और 9801 बराबर है 9 गुणा 1089, यानी 9 का multiple। ये हमेशा सच है, क्योंकि अंक उल्टे करने से उनका जोड़ नहीं बदलता, दोनों बार 18, और 9 का multiple वही है जिसके अंकों का जोड़ 9 का multiple हो।
गिनें तो 10000 से नीचे 9 के 1111 multiples हैं, और उल्टे होकर भी हर एक 9 का multiple रहता है। चौथा दावा, 11 के कुछ multiples को दोगुना करें तो वो 11 के multiple रहते हैं, और कुछ नहीं रहते। ये ग़लत है, और एक अनोखे ढंग से, 11 के 300 multiples में से हर एक दोगुना होकर भी 11 का multiple रहता है। यानी दावा कभी-कभी कहता है, पर सच हमेशा वाला है, और जो multiples बाहर हो जाएँ, वो कहीं मिलते ही नहीं।
कुल 4 दावे, और किसी में भी नाम ने कोई फ़ैसला नहीं किया, फ़ैसला सबूत ने किया। अब 8 दावे एक साथ रखिए, और हर एक को उसका जवाब दीजिए। जोड़ वाला दावा, 8 दोनों में जाए तो जोड़ में भी जाएगा, हमेशा सच, और अंतर में भी। हिस्सों वाला दावा, कभी-कभी सच, एक तरफ़ 48 और 24 वाला बँटवारा, दूसरी तरफ़ 50 और 22 वाला। संख्या 7 के multiple का हर multiple 7 से बँटता है, हमेशा सच, और 12 से बँटने वाली संख्या 12 के हर factor से बँटती है, ये भी हमेशा सच।
जो संख्या 7 से बँटे, वो 7 के हर multiple से बँटे, ये कभी-कभी सच है, ये multiples वाले दावे को उल्टा करने से बनता है, और उल्टा किया गया दावा एक नया दावा है। फिर 9 और 4 से 36, हमेशा सच, 6 और 4 से 24, कभी-कभी सच, और odd और even का जोड़ 6 का multiple, कभी सच नहीं। कुल मिलाकर 4 हमेशा सच, 3 कभी-कभी सच, और एक कभी सच नहीं, यानी तीनों जवाब यहाँ मौजूद हैं।
तो अब देखिए कि ठीक से दिया गया फ़ैसला कैसा दिखता है। हमेशा सच के लिए तर्क, उदाहरण नहीं, एक वजह, जैसे 8 a प्लस 8 b बराबर 8 गुणा bracket a प्लस b। कभी-कभी सच के लिए 2 संख्याएँ, एक जो चले और एक जो न चले, और दोनों दिखानी पड़ती हैं, जैसे 48 और 24 वाला बँटवारा, और 50 और 22 वाला। कभी सच नहीं के लिए टकराव, 2 चीज़ें जिन्हें बराबर होना पड़े पर जो हो नहीं सकतीं, जैसे एक even और एक odd।
और counterexample मिल जाए, तो वहीं मत रुकिए, पूछिए कि कौन सी शर्त दावे को बचा सकती है। जैसे 6 और 4 दोनों से बँटना 24 नहीं देता, पर 12 हर बार देता है, ये सारी 50 संख्याएँ 12 की multiples हैं। यही काम का जवाब है, असली दावा ग़लत था, पर उसके ठीक पीछे एक सच्चा दावा छिपा था। आख़िरी बात, और ये यहाँ का सबसे परिपक्व विचार है।
कई बार ईमानदार जवाब ये होता है, कि अभी फ़ैसला नहीं हुआ। ये कभी-कभी सच जैसा नहीं है, कभी-कभी सच एक पूरा फ़ैसला है, जिसके पीछे 2 गवाह खड़े हैं। फ़ैसला न होने का मतलब है कि आप अभी ढूँढ रहे हैं, और ऐसा कहना बिल्कुल ठीक है। ठीक ये नहीं है, कि जाँचते-जाँचते थक गए, तो किसी दावे को हमेशा सच कह दिया। वो लगातार 40 cases याद कीजिए, वो दावा बहुत देर तक पक्का लगा, और कभी पक्का था ही नहीं।
तो 3 फ़ैसले, 3 तरह के सबूत, और कौन सा सबूत देना है, ये जानना ही आधे से ज़्यादा काम है।
यह कहाँ बैठता है
यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.
किस पर टिका है
- The four divisibility facts you can prove, and how to use themकक्षा 8 · Ch 5, Number Play
- Deciding parity without computing the answerकक्षा 8 · Ch 5, Number Play
आगे फिर कहाँ आता है
- Divisibility by 6 and other numbers, checked through their factorsकक्षा 8 · Ch 5, Number Play
- Cracking a cryptarithm by reasoning about digits, not guessingकक्षा 8 · Ch 5, Number Play
इसके ठीक पहले और ठीक बाद
- Writing "leaves remainder r" as an algebraic expressionकक्षा 8 · Ch 5, Number Play