PrepShorts · पढ़ाई की शीट · Class 8 Mathematics · Chapter 1, Fractions in DisguisePrepShorts

Chapter 1 · Fractions in Disguise

लाभ, हानि और कर, किसी बताई गई राशि के percentage के रूप में

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एक खाद की बोरी 500 टोकन में खरीदी, 750 टोकन में बेची: लाभ 250 टोकन। ये 50 प्रतिशत है या 33.33 प्रतिशत? दोनों सही हैं, क्योंकि लाभ एक तथ्य है, पर लाभ प्रतिशत एक तथ्य और एक चुनाव है, कि उसे किस संख्या से नापा गया।

मुख्य idea

"₹130 का लाभ" किसी लेन-देन के बारे में एक तथ्य है; "43.3% का लाभ" किसी लेन-देन और आधार के एक चुनाव के बारे में तथ्य है। chapter इस चुनाव को दो तरह से दिखाता है: एक sweater को ऐसी शृंखला में आगे बढ़ते देखकर जिसमें हर पड़ाव का विक्रय मूल्य अगले पड़ाव का क्रय मूल्य बन जाता है, ताकि रुपयों का वही आँकड़ा, कौन बोल रहा है इसके हिसाब से, दो अलग labels उठाए; और एक दुकानदार का लाभ दो बार निकालकर, एक बार उसके चुकाए के सामने और एक बार उसकी कमाई के सामने, जिससे 50% और 33.33% आते हैं, और दोनों को सही कहकर। लाभ percentage आम तौर पर क्रय मूल्य पर लिया जाता है क्योंकि वह इस सवाल का जवाब देता है कि "जो दाँव पर लगाया उस पर मैंने कितना कमाया" — यह एक परिपाटी है, कोई theorem नहीं, और इसे परिपाटी के रूप में ही जानना फ़ायदेमंद है।

आपको क्या आना चाहिए

  • क्रय मूल्य, अंकित मूल्य और विक्रय मूल्य की परिभाषा देना, और किसी बताई गई हालत में हर एक को पहचानना
  • समझाना कि एक ही राशि एक साथ विक्रय मूल्य और क्रय मूल्य कैसे हो सकती है, और chapter की अपनी supply chain में इसका उदाहरण ढूँढ़ना
  • क्रय मूल्य पर percentage लाभ और percentage हानि निकालना
  • बताए गए लाभ या हानि margin से उल्टा चलकर विक्रय मूल्य, या क्रय मूल्य निकालना
  • अंकित मूल्य पर बताई गई percentage छूट के बाद विक्रय मूल्य निकालना, और फिर क्रय मूल्य पर लाभ percentage
  • सकल लाभ और शुद्ध लाभ में फ़र्क़ करना, और बताना कि कौन-से ख़र्च किसमें आते हैं
  • एक ही लेन-देन के लिए राजस्व पर और क्रय मूल्य पर लाभ percentage निकालना, और बताना कि हर एक किस सवाल का जवाब देता है
  • bill पर tax की lines जाँचना, और उस अकेली tax दर का हिसाब देना जो दो आधे हिस्सों में छपी है
  • समझाना कि असमान क्रय मूल्यों पर दो percentage लाभों को जोड़ा या उनका औसत क्यों नहीं निकाला जा सकता

जानने लायक़ शब्द

शब्दएक पंक्ति में अर्थहिंदी / क्षेत्रीय समकक्षपहली बार कहाँ
cost priceसामान पाने के लिए विक्रेता ने जो चुकायाक्रय मूल्यइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.16)
marked priceकिसी मोलभाव से पहले विक्रेता जो क़ीमत बताता हैअंकित मूल्यइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.16)
selling priceछूट के बाद ग्राहक असल में जो चुकाता हैविक्रय मूल्यइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.16)
MRPअधिकतम खुदरा मूल्य, जो कभी-कभी अंकित मूल्य होता हैअधिकतम खुदरा मूल्यइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.16)
profitविक्रय मूल्य का क्रय मूल्य से ज़्यादा होनालाभइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.17)
lossविक्रय मूल्य का क्रय मूल्य से कम पड़नाहानिइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.17)
profit marginक्रय मूल्य के percentage की तरह कहा गया लाभलाभ प्रतिशतइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.17)
discountदुकान किसी क़ीमत में जो कमी करती है, उसी क़ीमत के percentage की तरह कही गईछूट / बट्टाइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.16; p.18 पर अर्थ दिया गया)
gross profitबिक्री में से बिके सामान की लागत घटाकर, बाक़ी ख़र्चों से पहलेसकल लाभइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.18)
net profitसकल लाभ में से कारोबार चलाने के बाक़ी सारे ख़र्च घटाकरशुद्ध लाभइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.18)
revenueकिसी अवधि में बिक्री की कुल राशिराजस्वइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.19)
GSTGoods and Services Tax, जो क़ीमत के percentage की तरह लगता हैवस्तु एवं सेवा करइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.19)
CGSTछपे हुए bill पर GST का केंद्र वाला आधा हिस्साकेंद्रीय जीएसटीbill की artwork के भीतर छपा; छपे हुए Part II p.19 पर पढ़ा गया
SGSTउसी bill पर GST का राज्य वाला आधा हिस्साराज्य जीएसटीbill की artwork के भीतर छपा; छपे हुए Part II p.19 पर पढ़ा गया
chosen baseउस राशि के लिए इस पाठ का नाम जिसके सामने लाभ percentage निकाला जाता हैचयनित आधारइस पाठ का शब्द; chapter इस विचार पर विस्तार से दलील देता है पर इसे नाम नहीं देता

हिंदी column में standard हिंदी गणितीय शब्दावली दी गई है। Ganita Prakash कक्षा 8 का हिंदी संस्करण नहीं देखा गया, इसलिए इसे उस संस्करण के ठीक-ठीक शब्दों के बजाय standard प्रयोग मानें।

लोग कहाँ चूकते हैं

  • "अंकित मूल्य और विक्रय मूल्य एक ही चीज़ हैं।" सिर्फ़ तब, जब कोई मोलभाव न करे और कोई छूट न हो। sweater वाली figure हर पड़ाव पर इन्हें अलग करती है।
  • "क्रय मूल्य वह है जो ग्राहक चुकाता है।" यह वह है जो विक्रेता ने चुकाया। chapter की शृंखला इसी को तोड़ने के लिए है: ₹300 वह है जो retailer ने चुकाया और wholesaler को मिला।
  • "लाभ percentage, लाभ भाग विक्रय मूल्य है।" यह एक जायज़ आँकड़ा है — Manisha का 33.33% — पर "लाभ percentage" का आम मतलब यह नहीं है। chapter दोनों छापता है और बताता है कि हर एक किस सवाल का जवाब देता है। परिपाटी को परिपाटी के रूप में सिखाएँ।
  • "20% margin का मतलब है विक्रय मूल्य गुणा 0.8." इसका मतलब है क्रय मूल्य गुणा 1.2. students अक्सर छूट वाली चाल margin पर लगा देते हैं।
  • "12% की हानि से क्रय मूल्य निकालने के लिए विक्रय मूल्य का 12% लेकर उसमें जोड़ दो।" आधार क्रय मूल्य है, जो अनजाना है, इसलिए यह 0.88 से भाग है — 1.12 से गुणा नहीं। पूरे section की यही सबसे आम ग़लती है और इससे ऐसे जवाब आते हैं जो लगभग सही दिखते हैं।
  • "प्रति kilogram हानि और पूरे माल पर हानि अलग percentages हैं।" वे बिल्कुल एक हैं, क्योंकि ratio के दोनों हिस्से साथ-साथ scale होते हैं। Raghu वाला सवाल यही सीधे पूछता है।
  • "जब कोई साफ़ दिखने वाला ख़र्च न हो तो सकल लाभ और शुद्ध लाभ एक ही हैं।" ढुलाई, तनख़्वाह और बिजली chapter के अपने उदाहरण हैं ऐसे ख़र्चों के जिन्होंने सामान को कभी छुआ नहीं।
  • "एक ही विक्रय मूल्य पर दो चीज़ों पर 5% लाभ और 10% हानि कटकर 5% हानि बनते हैं।" दिशा संयोग से सही है; आकार ग़लत है, और बात यही है। दोनों क्रय मूल्य अलग हैं — ₹80,000/1.05 ≈ ₹76,190 बनाम ₹80,000/0.90 ≈ ₹88,889 — तो लगाई गई राशि ≈ ₹1,65,079 है, मिली ₹1,60,000, यानी ≈ ₹5,079 की हानि, या लगाई गई राशि का लगभग 3.08%, भोले 5% से कम। अलग-अलग आधारों पर टिके percentages को किसी भी दिशा में न जोड़ा जा सकता है न उनका औसत निकाला जा सकता है, और जो class उन्हें "काट" देती है वह सही चिह्न का अंदाज़ा लगाकर भी ग़लत संख्या पर पहुँचती है।
  • "bill ग़लत ही होगा क्योंकि 9% + 9% उस पर किसी चीज़ का 18% नहीं है।" एक ही sub-total के दो percentages आराम से जुड़ते हैं। bill की हर line हिसाब में सही है।
पूरा transcript2,281 शब्द

एक मामूली सी बिक्री के अंदर असल में अलग अलग दाम छिपे होते हैं, और इन्हें आपस में मिला देना ही इस विषय की ज़्यादातर मुश्किल है। यहाँ हर दाम टोकन में गिना जाएगा, ताकि सारा ध्यान हिसाब पर रहे। पहला दाम वो है जो बेचने वाले ने चीज़ पाने के लिए दिया, इसे लागत मूल्य कहते हैं। दूसरा वो जो चीज़ पर लिखा है, यानी अंकित मूल्य, और तीसरा वो जो ग्राहक सच में देता है, यानी विक्रय मूल्य।

लिखा हुआ दाम बस एक प्रस्ताव है, बेचने वाला उसे घटा सकता है, और अक्सर घटाता भी है। और लागत मूल्य कहीं लिखा नहीं होता, ग्राहक उसे कभी देखता ही नहीं। लाभ किसी बिक्री के बारे में एक तथ्य है, पर लाभ प्रतिशत उस बिक्री के साथ साथ एक चुनाव भी है, कि उसे किस संख्या से नापा गया। अब एक स्वेटर को बनाने वाली कार्यशाला से लेकर उसे पहनने वाले तक चलते हुए देखिए।

बनाने वाले की लागत 230 टोकन है, वो उस पर 255 टोकन लिखता है, और 253 टोकन में बेच देता है। थोक विक्रेता उसे 253 टोकन में खरीदता है, 310 टोकन लिखता है, और 300 टोकन में आगे बेचता है। दुकान 300 टोकन देती है, 480 टोकन लिखती है, और मोलभाव के बाद 430 टोकन लेती है। अब उन 253 टोकन पर ध्यान दीजिए, जो बीच में हाथ बदलते हैं।

बनाने वाले के लिए वो विक्रय मूल्य हैं, और थोक विक्रेता के लिए लागत मूल्य, संख्या वही है, बस नाम बदल गया। और 300 टोकन के साथ भी यही हुआ, पर ग्राहक के 430 टोकन किसी का लागत मूल्य नहीं हैं, क्योंकि कहानी वहीं खत्म होती है। यहाँ कुल 3 पड़ाव हैं, और हर एक पर लिखा हुआ दाम बिक्री के दाम से ऊपर था, और बिक्री का दाम लागत से ऊपर।

तो लागत मूल्य और विक्रय मूल्य किसी संख्या के गुण नहीं हैं, वो किसी की कहानी में उसकी जगह हैं। तो दुकान ने 300 टोकन लगाए, और 430 टोकन वापस पाए। यानी लाभ हुआ 130 टोकन, और इस पर कोई बहस नहीं। अब इसे नापिए, ये 130 टोकन, किस संख्या में से? उन 300 टोकन में से, क्योंकि दुकान ने वही दाँव पर लगाया था, और लाभ प्रतिशत यही बताता है कि लगाए हुए पर कितना कमाया।

तो 130 बटा 300, यानी 13 बटा 30, यानी करीब 43 दशमलव 3 3 प्रतिशत, और ये 3 कभी खत्म नहीं होते। ये लगाए हुए के एक तिहाई से ज़्यादा है, और आधे से कम। अब यही सवाल उन हाथों से पूछिए, जो दुकान से पहले आए। बनाने वाले ने 230 टोकन को 253 टोकन में बदला, यानी 23 टोकन का लाभ। और 23 बटा 230, ठीक 1 बटा 10 है, यानी पूरे 10 प्रतिशत, बिना किसी दशमलव के।

थोक विक्रेता ने 253 टोकन को 300 टोकन में बदला, यानी 47 टोकन का लाभ। और 47 बटा 253 करीब 18 दशमलव 5 8 प्रतिशत है अगर गोल करें, और 18 दशमलव 5 7 प्रतिशत अगर बस काट दें। हर हाथ का लाभ प्रतिशत उसकी अपनी लागत से नापा गया, किसी और की लागत से नहीं। अब वही आकार, बस दिशा उल्टी। एक दुकान ने चावल 35 टोकन प्रति किलो के भाव से खरीदा, और 10 किलो पुराना चावल 300 टोकन में निकाल दिया।

उस माल की लागत थी 350 टोकन, वापस आए 300 टोकन, तो 50 टोकन की हानि हुई। यानी 350 में से 50, वही भिन्न, वही आधार, बस दिशा उल्टी। ये 1 बटा 7 है, यानी करीब 14 दशमलव 2 8 5 7 प्रतिशत, और इसके अंक कभी नहीं रुकते। दशमलव के बाद 2 अंकों पर काटें तो 14 दशमलव 2 8 प्रतिशत, और गोल करें तो 14 दशमलव 2 9 प्रतिशत।

काटना और गोल करना अलग काम हैं, और ये जानना ज़रूरी है कि आपने कौन सा किया। यहाँ एक सवाल पर रुकना ठीक है, क्या ये हानि प्रति किलो के हिसाब से भी निकाली जा सकती थी? यानी 350 में से 50 की जगह, 35 में से 5 टोकन की हानि। प्रतिशत बिल्कुल वही है, लगभग नहीं, बिल्कुल वही, यानी 1 बटा 7 हिस्सा। भिन्न के ऊपर और नीचे, दोनों को 10 से गुणा किया गया था, और भिन्न को इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता।

यहाँ के 10 सौदों को 5 अलग आकारों में आज़माया गया, यानी 50 मामले, और प्रतिशत एक बार भी नहीं हिला। जबकि टोकन में लाभ या हानि, इन 50 मामलों में से हर एक में बदली। प्रतिशत यही सौदा करता है, वो भूल जाता है कि कितना, और याद रखता है कि कितना बड़ा। अब लाभ प्रतिशत से शुरू करके दाम तक पहुँचते हैं, पहले आसान दिशा में। एक कॉपी की लागत 36 टोकन है, और दुकान उस पर 20 प्रतिशत लाभ चाहती है।

यहाँ 20 प्रतिशत लाभ का मतलब है लागत को 1 दशमलव 2 से गुणा करना, तो विक्रय मूल्य बनता है 43 दशमलव 2 टोकन। आम गलती है छूट वाला कदम उठा लेना, यानी 36 को 8 बटा 10 से गुणा करना, जिससे 28 दशमलव 8 टोकन आते हैं। ये कदम आज़माए गए 10 लाभ प्रतिशतों में से हर एक पर गलत निकला, और सिर्फ़ तब मेल खाता है जब लाभ 0 हो।

ऐसे ही 475 टोकन की लागत वाली कुर्सी पर 50 प्रतिशत लाभ, यानी 1 दशमलव 5 से गुणा, तो 712 दशमलव 5 टोकन। हानि के साथ भी यही तरीका चलता है, 2650 टोकन का एक फूलदान, थोड़ा टूटा हुआ, 18 प्रतिशत हानि पर बिका। लागत को 100 प्रतिशत मानें, तो विक्रय मूल्य उसका 82 प्रतिशत है, और 2650 का 82 प्रतिशत है 2173 टोकन। या फिर 2650 का 18 प्रतिशत, यानी 477 टोकन, घटा दीजिए, तो फिर से 2173 टोकन।

गुणक वाला रास्ता और घटाने वाला रास्ता, एक ही बदलाव के अलग अलग रूप हैं। अब लाभ प्रतिशत को उल्टी दिशा में चलाते हैं, क्योंकि लोग यहीं गिरते हैं। एक डिब्बा 50 टोकन में बिका, और उस पर 25 प्रतिशत लाभ हुआ, तो उसकी लागत क्या थी? यहाँ 50 में से 25 प्रतिशत घटाना नहीं है, क्योंकि वो लाभ कभी 50 का प्रतिशत था ही नहीं। वो लागत का प्रतिशत था, और लागत ही अनजानी है, इसलिए ये भाग का सवाल है।

तो 50 को 1 दशमलव 2 5 से भाग दीजिए, लागत आती है 40 टोकन, और 40 गुणा 1 दशमलव 2 5 फिर से 50 टोकन। घटाने वाला रास्ता 37 दशमलव 5 टोकन देता है, और उस पर 25 प्रतिशत लाभ जोड़ें तो बस 46 दशमलव 8 7 5 टोकन बनते हैं। हानि के साथ ये गलती और भी आसानी से हो जाती है। स्ट्रॉबेरी 80 टोकन प्रति किलो बिकीं, 12 प्रतिशत हानि पर, तो लागत क्या थी?

हानि लागत की थी, तो ये 80 टोकन लागत का 88 बटा 100 हिस्सा हैं। तो लागत है 80 को 88 बटा 100 से भाग देकर, यानी 1000 बटा 11, करीब 90 दशमलव 9 1 टोकन। आम रास्ता 80 में 12 प्रतिशत जोड़ देता है, और 89 दशमलव 6 टोकन पर पहुँचता है, इतना करीब कि सही लगे। पर 89 दशमलव 6 टोकन पर 12 प्रतिशत हानि हो, तो बिक्री बनती है 78 दशमलव 8 4 8 टोकन, जो असली 80 टोकन से कम है, पूरे 1 दशमलव 1 5 2 टोकन कम।

जोड़ने वाला रास्ता आज़माई गई 9 हानियों में से हर एक पर असली लागत से नीचे रहा, और सिर्फ़ तब सही है जब हानि 0 हो। छूट एक ऐसा प्रतिशत है, जो उस दाम से घटाया जाता है जिसे कोई देने वाला नहीं था। एक कुकर पर 1800 टोकन लिखे हैं, और 35 प्रतिशत छूट है, यानी 630 टोकन कम, तो बचते हैं 1170 टोकन। दुकान की लागत 900 टोकन थी, तो लाभ हुआ 270 टोकन, यानी 30 प्रतिशत।

एक ही सौदे में 35 प्रतिशत और 30 प्रतिशत, और इनका आधार कभी एक नहीं रहा। वो 35 प्रतिशत था 1800 टोकन का, और 30 प्रतिशत था 900 टोकन का। और 300 टोकन की कमीज़ पर 25 प्रतिशत छूट से बचते हैं 225 टोकन, क्योंकि छूट बस उतने प्रतिशत की गिरावट है, आज़माए गए 9 मामलों में से हर एक पर। हर खर्च, माल का खर्च नहीं होता। एक दुकान महीने भर में 80000 टोकन की बिक्री करती है, और बिके हुए माल को खरीदने में 48000 टोकन लगे थे, तो बचते हैं 32000 टोकन।

ये सकल लाभ है, यानी बिक्री में से सिर्फ़ माल की लागत घटाकर। फिर ढुलाई, मज़दूरी और बिजली, इन 3 खर्चों में कुल 8000 टोकन गए, जिन्होंने माल को कभी छुआ तक नहीं, और बचते हैं 24000 टोकन। ये शुद्ध लाभ है, और ये बिक्री का 3 बटा 10, यानी 30 प्रतिशत है। एक बड़े महीने में बिक्री होती है 150000 टोकन की, माल लगता है 100000 टोकन का, और सकल लाभ बचता है 50000 टोकन।

बाकी खर्च 5000 टोकन, शुद्ध लाभ 45000 टोकन, और फिर से बिक्री का 30 प्रतिशत। कोई खाद की बोरी 500 टोकन में खरीदकर 750 टोकन में बेचता है, तो लाभ हुआ 250 टोकन। जो 500 टोकन दिए, उनके मुकाबले ये 250 बटा 500, यानी 50 प्रतिशत है। और जो 750 टोकन मिले, उनके मुकाबले ये 250 बटा 750, यानी 1 बटा 3, करीब 33 दशमलव 3 3 प्रतिशत है। दोनों सही हैं, 250 टोकन ज़रा भी नहीं हिले, बस उनके नीचे की संख्या बदल गई।

पहला बताता है कि लगाए हुए पर कितना कमाया, और दूसरा बताता है कि कुल बिक्री का कितना हिस्सा लाभ था। दोनों का रिश्ता भी पक्का है, 50 बटा 150, यानी फिर से 1 बटा 3 हिस्सा। यहाँ के 10 सौदों में से हर एक पर, बिक्री वाला प्रतिशत लागत वाले से छोटा निकला, लाभ में भी और हानि में भी। दोनों बस तब बराबर होते हैं, जब न लाभ हो, न हानि।

इसीलिए ये बताना ज़रूरी है कि प्रतिशत किस आधार पर है। एक स्टॉल की कुल बिक्री 2500 टोकन है, और उसका लाभ 25 प्रतिशत बताया गया। अगर लाभ लागत पर है, तो खर्च हुआ 2500 बटा 1 दशमलव 2 5, यानी 2000 टोकन। अगर लाभ बिक्री पर है, तो 2500 का 25 प्रतिशत, यानी 625 टोकन लाभ, और खर्च हुआ 1875 टोकन। दोनों जवाबों में 125 टोकन का फ़र्क है, और सवाल ने बताया ही नहीं कि आधार कौन सा था।

आम चलन लागत को आधार मानने का है, क्योंकि वो पूछता है कि जो दाँव पर लगाया, उस पर कितना मिला। पर ये एक चलन है, कोई प्रमेय नहीं, और इसे चलन की तरह ही जानना चाहिए। अब ऐसे प्रतिशत जो सच में जुड़ते हैं, और ये इस बात का दूसरा हिस्सा है। एक बिल पर 3 बल्ब हैं, हर एक 150 टोकन का, तो कुल 450 टोकन। उसके नीचे टैक्स की 2 पंक्तियाँ हैं, हर एक 9 प्रतिशत की, यानी हर पंक्ति 40 दशमलव 5 टोकन।

एक ही 450 टोकन का 9 और 9 प्रतिशत, यानी उसी का 18 प्रतिशत, कुल 81 टोकन। और 450 में 81 जोड़ें तो 531 टोकन, और बिल की 4 पंक्तियों में से हर एक सही निकलती है। बिल पर पूरा टैक्स एक साथ कहीं नहीं छपा, वो आधा आधा करके छपा है, इसीलिए बिल गलत लगता है, जबकि हर पंक्ति सही है। एक ही आधार पर लगे प्रतिशत हमेशा जुड़ते हैं, यहाँ 20 अलग तरीकों से आज़माया गया, और हर बार यही हुआ।

तो 8250 टोकन के फ़ोन पर 18 प्रतिशत टैक्स जुड़े, तो आखिरी दाम क्या होगा? उसे 1 दशमलव 1 8 से गुणा कीजिए, या उसमें उसी का 18 प्रतिशत, यानी 1485 टोकन जोड़िए। दोनों रास्तों से एक ही जवाब आता है, 9735 टोकन। किसी ने इसके लिए 7 हिसाब सुझाए, जैसे 8250 में 18 जोड़ना, या 8250 को 18 से गुणा करना। इन 7 में से सिर्फ़ 2 हिसाब सही जवाब तक पहुँचते हैं, गुणक वाला और खुद का प्रतिशत जोड़ने वाला।

बस 18 जोड़ने से 8268 टोकन आते हैं, और 18 से गुणा करने पर 148500 टोकन, दोनों 9735 टोकन से बहुत दूर। और अब ऐसे प्रतिशत जो नहीं जुड़ते, एक ऐसी हालत में जो लगभग वैसी ही दिखती है। कोई अपनी 2 पुरानी कारें बेचता है, हर एक 80000 टोकन में। एक पर उसे 5 प्रतिशत लाभ होता है, और दूसरी पर 10 प्रतिशत हानि। लगभग हर कोई कहता है, 5 घटा 10, यानी कुल 5 प्रतिशत हानि, और ये गलत है।

हर कार की लागत निकालिए, पहली की लागत थी 80000 को 1 दशमलव 0 5 से भाग देकर, करीब 76190 टोकन। दूसरी की लागत थी 80000 को 9 बटा 10 से भाग देकर, करीब 88889 टोकन। ये एक संख्या नहीं हैं, और पूरी मुश्किल यही है, 5 और 10 अलग अलग आधारों पर बैठे हैं। कुल लगाए करीब 165079 टोकन, और वापस मिले 160000 टोकन, तो हानि हुई करीब 5079 टोकन।

ये लगाए हुए का करीब 3 दशमलव 0 8 प्रतिशत है, 5 प्रतिशत नहीं, और औसत निकालने से आने वाला 2 दशमलव 5 प्रतिशत भी नहीं। हानि की दिशा किस्मत से सही निकली, पर उसका आकार कभी सही हो ही नहीं सकता था। आखिरी सवाल, जिसमें कोई दाम है ही नहीं। एक दुकान पेंसिलों का दाम ऐसे रखती है, कि 3 पेंसिलें बेचकर ठीक उतना मिलता है, जितनी 5 पेंसिलों की लागत है।

कोई दाम नहीं दिया गया, और किसी दाम की ज़रूरत भी नहीं। हर पेंसिल अपनी लागत के 5 बटा 3 में बिकती है, तो लाभ लागत का 2 बटा 3 है, यानी करीब 66 दशमलव 6 7 प्रतिशत। गोल करने की जगह काट दें तो 66 दशमलव 6 6 प्रतिशत, बस 1 बटा 100 का फ़र्क। कोई भी दाम मानकर देखिए, यहाँ 4 अलग दाम आज़माए गए, और हर एक से यही प्रतिशत आया।

ऐसे ही 75 टोकन का ज्यामिति बॉक्स 110 टोकन में बिके, तो 35 टोकन लाभ, यानी करीब 46 दशमलव 6 7 प्रतिशत। लाभ एक तथ्य है, पर लाभ प्रतिशत एक तथ्य और एक चुनाव, दोनों है। और अगर किसी ने नहीं बताया कि नीचे कौन सी संख्या थी, तो असल में आपको कोई प्रतिशत बताया ही नहीं गया।

यह कहाँ बैठता है

यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.

किस पर टिका है

आगे फिर कहाँ आता है

इसके ठीक पहले और ठीक बाद

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