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Chapter 1 · Fractions in Disguise

Compounding: बार-बार की बढ़त जुड़ने के बजाय गुणा क्यों होती है

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6000 टोकन, 10 प्रतिशत प्रति वर्ष, 3 साल। ब्याज हर साल निकाल लें तो 7800 टोकन, अंदर छोड़ दें तो 7986 टोकन। दर वही, साल वही, फिर भी 186 टोकन का फ़र्क, और वो पूरा फ़र्क ब्याज पर कमाया गया ब्याज है।

मुख्य idea

percentage बदलाव हमेशा अवधि की शुरुआत वाली value पर निकाला जाता है। तो सब कुछ इस पर निर्भर है कि उस value को हिलने दिया जाता है या नहीं। हर साल ब्याज निकाल लो तो आधार कभी नहीं बदलता: हर बार रुपयों की वही राशि जुड़ती है, और कुल राशि एक सीधी line पर ऊपर चलती है, p(1 + rt)। ब्याज अंदर ही छोड़ दो तो तुम्हारे नीचे आधार बढ़ता जाता है: हर साल उसी factor से गुणा होता है, और कुल राशि मुड़ती है, p(1 + r)^t। chapter की अपनी संख्याएँ यह अंतर 130% बनाम 133.1% पर रखती हैं — और वह अतिरिक्त 3.1% कोई रहस्य नहीं। यह ठीक-ठीक पहले के ब्याज पर कमाया गया ब्याज है, और इसे एक-एक रुपया गिना जा सकता है।

आपको क्या आना चाहिए

  • "k% p.a." के रूप में दी गई दर पढ़ना और किसी बताए गए मूलधन पर एक अवधि का ब्याज निकालना
  • दोनों तरह के fixed deposit को साल-दर-साल चलाकर देखना, हर साल की शुरुआत का मूलधन बताते हुए
  • हर बार आधार का नाम लेकर समझाना कि एक मामले में ब्याज हर साल बराबर क्यों है और दूसरे में बढ़ता क्यों है
  • मिली कुल राशि को जमा राशि के percentage की तरह, और गुणक की तरह कहना
  • दोनों कुल राशियों के अंतर का हिसाब ब्याज पर कमाए गए ब्याज की तरह देना, और दिखाना कि उसका जोड़ छपे हुए अंतर के बराबर है
  • p(1 + rt) और p(1 + r)^t लिखना और इस्तेमाल करना, और बताना कि कौन-सा किस option से मेल खाता है
  • इन्हीं दो रूपों को घटने वाली राशि पर लगाना — मूल्यह्रास और घटती आबादी
  • कई लगातार percentage बदलावों को उनके factors का गुणा करके मिलाना, और समझाना कि percentages जोड़ना ग़लत क्यों है
  • compounding को मुड़ने वाली बढ़त और बिना compounding को सीधी चलने वाली बढ़त की तरह पहचानना, और दोगुना होने के समयों की तुलना करना

जानने लायक़ शब्द

शब्दएक पंक्ति में अर्थहिंदी / क्षेत्रीय समकक्षपहली बार कहाँ
interestजमा किए या उधार लिए पैसे के इस्तेमाल के बदले दिया गया अतिरिक्त पैसाब्याजइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.20)
principalवह रक़म जिस पर ब्याज निकाला जाता हैमूलधनइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.21)
rate of interestमूलधन का वह percentage जो एक अवधि के लिए दिया जाता हैब्याज दरइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.21)
per annumहर साल के लिए; छोटा रूप p.a.प्रति वर्षइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.21)
fixed depositपहले से तय दर पर, तय समय के लिए bank में रखा गया पैसासावधि जमाइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.20)
maturityतय अवधि का अंत, जब पैसा लौटाया जाता हैपरिपक्वताइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.20, "maturity date" के रूप में; और p.21 पर "maturity period" के रूप में)
compoundingहर अवधि का ब्याज वापस जोड़ना ताकि वह भी आगे ब्याज कमाएचक्रवृद्धिइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.22)
termdeposit की एक ब्याज अवधिअवधिइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.23)
depreciationइस्तेमाल और उम्र की वजह से किसी चीज़ की क़ीमत में गिरावटमूल्यह्रासइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.24)
declineसमय के साथ क़ीमत या आबादी गिरने के लिए chapter का शीर्षकह्रासइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.24)
exponential growthहर अवधि में एक स्थिर factor से बढ़त, जिससे graph मुड़ता हैचरघातांकी वृद्धिइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.24)
linear growthहर अवधि में एक स्थिर राशि से बढ़त, जिससे graph सीधा रहता हैरैखिक वृद्धिइसी chapter में छपा (Part II, §1.3, p.24)
growth factorउस (1 + r) के लिए इस पाठ का नाम जिससे एक अवधि गुणा करती हैवृद्धि गुणकइस पाठ का शब्द; chapter यह राशि हर जगह इस्तेमाल करता है पर इसे नाम नहीं देता

हिंदी column में standard हिंदी गणितीय शब्दावली दी गई है। Ganita Prakash कक्षा 8 का हिंदी संस्करण नहीं देखा गया, इसलिए इसे उस संस्करण के ठीक-ठीक शब्दों के बजाय standard प्रयोग मानें।

लोग कहाँ चूकते हैं

  • "10% सालाना, 3 साल तक, यानी 30%, तो दोनों options मेल खाने ही चाहिए।" वे सिर्फ़ Option 1 में मेल खाते हैं। दर को तीन बार जोड़ना और factor से तीन बार गुणा करना अलग क्रियाएँ हैं, और chapter दोनों व्यंजक Part II p.22 पर ठीक इसलिए छापता है कि उनकी तुलना हो सके।
  • "compound करने पर ब्याज दर बढ़ जाती है।" नहीं बढ़ती। दोनों options में हर एक साल दर 10% ही है। बदलता यह है कि वह किस राशि का लिया जाता है।
  • "compounding हमेशा जीतता है।" तीन साल में, बिना compounding का 12%, compounding वाले 10% से आगे निकलता है — यही Q6 है और यह ठीक इसी मान्यता को तोड़ने के लिए दिया गया है। compounding एक तरीक़ा है, कोई जादुई फ़ायदा नहीं; यह जीतता है या नहीं, यह दर और अवधियों की गिनती पर निर्भर है।
  • "5% की बढ़त और फिर 2% और 3% की गिरावटें एक-दूसरे को काट देती हैं।" लगभग काट देती हैं, और यही जाल है। गुणनफल 0.99813, 1 से कम है, इसलिए आबादी शुरुआत से छोटी है। percentages का जोड़ शून्य है और factors का गुणनफल एक नहीं।
  • "3% फिर 4% यानी 7%." यह 7.12% है। 0.12, उस 4% का असर है जो पहले से जुड़े 3% पर लगा — वही ब्याज-पर-ब्याज वाला हिस्सा जो section 7 में है।
  • "60% हिस्सा कक्षा 8 वाले students का, excursion का 60% है।" यह excursion का 24% है। किसी उप-समूह के percentages परत-दर-परत बैठते हैं, और सवाल में छपा कच्चे diagram वाला संकेत इसका इलाज है।
  • "911.25 और 912 का मतलब है किसी से ग़लती हुई।" दोनों सही हैं; एक अंत में round करता है और एक तीन बार। बताएँ कि कौन-सा और क्यों, वरना students उस तरीक़े पर शक करेंगे जो भिन्न वाले इंसान देता है।
  • "मूल्यह्रास एक अलग formula है।" यह p(1 − r)^t है, वही मशीन, बस बदलाव का चिह्न पलटा हुआ। TV और गाँव, fixed deposit वाला ही सवाल हैं।
  • "ब्याज सिर्फ़ पैसों की बात है।" chapter की अपनी exercises यही रूप किसी शहर की आबादी, bacteria के एक culture और lab के चूहों पर लगाती हैं।
पूरा transcript2,265 शब्द

कोई भी प्रतिशत बदलाव, उस संख्या पर निकाला जाता है, जो उस दौर की शुरुआत में थी। यहाँ रकमें टोकन में गिनी जाएँगी, ताकि सारा ध्यान हिसाब पर रहे। तो एक ही सवाल आगे की पूरी कहानी तय करता है, क्या उस शुरुआती संख्या को हिलने दिया गया? अगर उसे रोककर रखा जाए, तो हर बार उतना ही जुड़ता है, और कुल रकम बराबर कदमों में सीधी चढ़ती है। अगर उसे बढ़ने दिया जाए, तो हर दौर उसी गुणक से गुणा होता है, और कुल रकम मुड़कर ऊपर जाती है, एक curve की तरह।

दर वही, साल उतने ही, फिर भी जवाब अलग अलग निकलते हैं। और उनके बीच का फ़र्क कोई रहस्य नहीं, उसे टोकन टोकन करके गिना जा सकता है। पहले एक शब्द समझ लेते हैं, जिसे ब्याज कहते हैं। जब आप कोई रकम किसी बैंक में रखते हैं, तो बैंक उसे इस्तेमाल करता है, और बदले में आपको कुछ ज़्यादा लौटाता है। वो ज़्यादा हिस्सा ब्याज कहलाता है, और जिस रकम पर वो निकाला जाता है, उसे मूलधन कहते हैं।

ब्याज की दर एक प्रतिशत होती है, जो बताती है कि एक साल में मूलधन का कितना हिस्सा मिलेगा, यानी प्रति वर्ष। एक सावधि जमा में रकम तय समय के लिए बंद रहती है, और उसकी दर पहले से तय होती है। समय पूरा होने पर आपको दोनों चीज़ें मिलती हैं, अपनी जमा की गई रकम भी, और उस पर कमाया गया ब्याज भी। ये पूरा विषय इसी बात पर टिका है, कि बीच के सालों में वो ब्याज कहाँ जाता है।

शुरुआत एक साल से करते हैं, 6000 टोकन जमा, 10 प्रतिशत प्रति वर्ष पर। और 6000 टोकन का 10 प्रतिशत, यानी 600 टोकन, तो साल के अंत में जमा 6600 टोकन हो जाती है। यही बात एक कदम में भी कही जा सकती है, 10 प्रतिशत की बढ़त, 1 दशमलव 1 से गुणा करना ही है। यानी 6000 टोकन गुणा 1 दशमलव 1, वही 6600 टोकन, और जमा अपनी ही 110 प्रतिशत बन गई।

एक साल के लिए, ब्याज जोड़ना और गुणक से गुणा करना, बिल्कुल एक ही जवाब देते हैं। एक साल पर यहाँ 5 अलग दरें आज़माई गईं, और उन सब पर दोनों तरीके बराबर निकले। और ठीक इसी वजह से, जोड़ते जाने वाला गलत नियम, इतने लंबे समय तक टिका रहता है। अब वही 6000 टोकन, उसी 10 प्रतिशत पर, पर इस बार 3 साल के लिए। अब जवाब इस पर निकलता है, कि कौन सी जमा चुनी गई।

पहली में, साल के अंत में ब्याज आपको लौटा दिया जाता है, और मूल जमा आखिर में वापस मिलती है। दूसरी में, ब्याज वहीं छोड़ दिया जाता है, वो जमा में मिल जाता है, और उसके साथ ब्याज कमाने लगता है। जमा के इस दूसरे तरीके को चक्रवृद्धि कहते हैं। दोनों में बस यही फ़र्क है, दर वही, साल वही, और जमा की गई रकम भी वही। पहले ब्याज निकालते चलिए, पहला साल 6000 टोकन से शुरू होता है, और 600 टोकन देता है।

दूसरा साल फिर 6000 टोकन से शुरू होता है, और तीसरा साल भी 6000 टोकन से। आधार कभी नहीं हिलता, इसलिए ब्याज हर साल बिल्कुल उतना ही रहता है, 600 टोकन। तो 3 साल में 600 टोकन 3 बार, यानी कुल 1800 टोकन ब्याज। उसमें वापस मिले 6000 टोकन जोड़िए, तो कुल 7800 टोकन हाथ में आए। हर साल बराबर कदम, यानी एक सीधी चढ़ाई। ये सिर्फ़ इस जमा की बात नहीं, यहाँ 10 अलग उदाहरण जाँचे गए, और ब्याज निकालने पर, उन सब में हर साल का ब्याज एक जैसा रहा।

अब ब्याज अंदर छोड़ दीजिए, पहला साल 6000 टोकन से शुरू होता है, 600 टोकन जुड़ते हैं, और अंत में 6600 टोकन। दूसरा साल 6600 टोकन से शुरू होता है, 660 टोकन जुड़ते हैं, और अंत में 7260 टोकन। तीसरा साल वहीं से शुरू होता है, 726 टोकन जुड़ते हैं, और अंत में 7986 टोकन। हर साल ठीक वहीं से शुरू होता है, जहाँ उससे पहले वाला साल खत्म हुआ।

यानी कुल ब्याज 1986 टोकन, और हाथ में 7986 टोकन। यहाँ आधार ख़ुद साल दर साल बढ़ता गया, दर के ठीक नीचे। अब हर साल जुड़ी रकम को ध्यान से देखिए, 600, फिर 660, फिर 726 टोकन। इनमें से हर एक 10 प्रतिशत ही है, 6000 टोकन का, 6600 टोकन का, और 7260 टोकन का। दर में कुछ नहीं बदला, वो शुरू से आखिर तक 10 प्रतिशत ही रही। बदली सिर्फ़ वो संख्या, जिसका 10 प्रतिशत लिया गया।

आधार नीचे से बढ़ता गया, और ब्याज भी उसके साथ बढ़ता गया। यहाँ 1 साल से लंबे 9 उदाहरण जाँचे गए, और चक्रवृद्धि में, उन सब में हर साल का ब्याज पिछले साल से ज़्यादा निकला। अब दोनों कुल रकमें साथ रखिए, 7800 टोकन, और 7986 टोकन। जमा किए गए 6000 टोकन के हिस्से की तरह, ये 130 प्रतिशत, और 133 दशमलव 1 प्रतिशत हैं। या गुणक की तरह देखें, तो 1 दशमलव 3 गुना, और 1 दशमलव 3 3 1 गुना।

पहले में 1 के ऊपर 1 बटा 10, 3 बार जोड़ा गया। दूसरे में 1 दशमलव 1 से, 3 बार गुणा किया गया। यानी 3 साल में बढ़त, एक तरफ़ 30 प्रतिशत, और दूसरी तरफ़ 33 दशमलव 1 प्रतिशत। दर को जोड़ना, या गुणक से गुणा करना, पूरा फ़र्क बस इतना ही है। तो ये 186 टोकन, जो ज़्यादा मिले, आखिर आए कहाँ से? ये जमा का 3 दशमलव 1 प्रतिशत है, यानी 130 और 133 दशमलव 1 के बीच का पूरा फ़र्क।

पहला साल दोनों तरफ़ 600 टोकन देता है, उसमें कोई फ़र्क नहीं। दूसरा साल 60 टोकन ज़्यादा देता है, और वो 60 टोकन, पहले साल के 600 टोकन का 10 प्रतिशत है। यानी ब्याज ने ख़ुद भी ब्याज कमाया। तीसरा साल 126 टोकन ज़्यादा देता है। यानी 60 और 126 मिलकर 186 टोकन बनते हैं, पूरा फ़र्क, एक एक टोकन का हिसाब। यही हिसाब गुणक से भी निकलता है, 1 दशमलव 1 को 3 बार आपस में गुणा करके खोलिए।

इस तरह 6000 टोकन पर वो 4 टुकड़ों में बँटता है, 6000, फिर 1800, फिर 180, और फिर 6 टोकन। इनमें 6000 टोकन मूलधन है, और 1800 टोकन सीधा ब्याज, वही जो पहली जमा में मिलता है। और 180 टोकन और 6 टोकन, ब्याज पर कमाया गया ब्याज है। तो 180 और 6 मिलकर फिर से 186 टोकन, वही फ़र्क, दूसरे रास्ते से। और ये सारे टुकड़े जोड़ें, तो ठीक 7986 टोकन बनते हैं।

यहाँ 10 उदाहरणों पर 3 साल का हिसाब जाँचा गया, और साल दर साल गिनना, और गुणक खोलना, हर बार एक ही फ़र्क देते रहे। अब इसे आम रूप में लिखते हैं, मूलधन p, दर r, और साल t। ब्याज निकालते चलें, तो कुल रकम p गुणा, 1 प्लस r गुणा t है। ब्याज अंदर छोड़ें, तो कुल रकम p गुणा, 1 प्लस r की घात t है। दूसरे रूप में, गुणा के बाद जो रकम बनती है, वही अगले साल का मूलधन बन जाती है।

ये दोनों रूप तभी बराबर होते हैं, जब समय 1 साल हो, या बिल्कुल न हो। यहाँ जाँचे गए 10 उदाहरणों में से 9 में चक्रवृद्धि आगे रही, और बचा हुआ 1 उदाहरण 1 साल का था, जहाँ दोनों बराबर निकले। अब देखिए, ये दोनों रूप बैंकों के एक जोड़े के साथ क्या करते हैं। पहला बैंक 20000 टोकन पर 10 प्रतिशत देता है, 2 साल के लिए। दूसरा उतनी ही रकम पर 5 प्रतिशत देता है, पर 4 साल के लिए।

बिना चक्रवृद्धि के दोनों ठीक 24000 टोकन देते हैं, क्योंकि दर गुणा साल, दोनों में 20 है। चक्रवृद्धि के साथ वो अलग हो जाते हैं, पहला देता है 24200 टोकन। दूसरा देता है 24310 दशमलव 1 2 5 टोकन, यानी 110 दशमलव 1 2 5 टोकन ज़्यादा। छोटी दर, पर ज़्यादा दौर, और वही आगे निकल गई। यहाँ दर गुणा साल बराबर रखने वाले 4 जोड़े जाँचे गए, सीधी गिनती में उन सब के कुल बराबर निकले, और चक्रवृद्धि में किसी के भी नहीं।

अब p टोकन, 6 प्रतिशत प्रति वर्ष, 4 साल, बिना चक्रवृद्धि, तो कुल रकम कैसे लिखी जाएगी? यहाँ 7 अलग रूप लिखे हैं, और उनमें से सिर्फ़ 1 सही है, आखिरी वाला, p प्लस, p गुणा 6 बटा 100 गुणा 4 वाला रूप। पहले रूप में 6 प्रतिशत को भिन्न में बदला ही नहीं गया, तो वो p का 24 गुना देता है। दूसरे में 6 प्रतिशत को 6 बटा 10 पढ़ लिया गया, जो असल में 60 प्रतिशत है।

तीसरे और चौथे में 100 से भाग ज़रूरत से ज़्यादा हुआ, और दर बहुत छोटी रह गई। पाँचवें और छठे में गुणक को 4 से गुणा किया गया, तो मूलधन ही 4 बार गिन लिया गया। आखिरी रूप मूलधन को 1 बार गिनता है, और ब्याज को 4 बार, यानी कुल p गुणा 1 दशमलव 2 4 टोकन। अब एक भरोसा तोड़ना ज़रूरी है, कि चक्रवृद्धि वाला हिसाब हर बार ज़्यादा देता है।

पहला उधार 12500 टोकन का है, 12 प्रतिशत पर, 3 साल, बिना चक्रवृद्धि के, तो ब्याज 4500 टोकन। उतनी ही रकम 10 प्रतिशत चक्रवृद्धि पर, तो ब्याज 4137 दशमलव 5 टोकन। यानी ऊँची दर 362 दशमलव 5 टोकन महँगी पड़ती है। और 4 साल पर भी वो 198 दशमलव 7 5 टोकन आगे रहती है। पहले 5 सालों में से, चक्रवृद्धि सिर्फ़ 5वें साल में आगे निकलती है। चक्रवृद्धि एक तरीका है, कोई जादुई फ़ायदा नहीं, वो जीतेगी या नहीं, ये दर पर भी निर्भर है, और समय पर भी।

यही मशीन नीचे की तरफ़ भी चलती है, एक भी पुर्ज़ा बदले बिना। एक टीवी 21000 टोकन में ख़रीदा गया, और एक साल में वो अपने मूल्य का 5 प्रतिशत खो देता है। घटत 21000 टोकन का 5 प्रतिशत है, यानी 1050 टोकन, तो बचते हैं 19950 टोकन। या सीधे 21000 टोकन का 95 प्रतिशत लीजिए, वही 19950 टोकन। इस्तेमाल और उम्र से मूल्य के ऐसे घटने को, मूल्यह्रास कहते हैं।

बढ़ते समय गुणक 1 से बड़ा था, यहाँ वो 1 से छोटा है, बस इतना ही बदला। अब एक गाँव लीजिए, जिसमें 1250 लोग हैं, और जहाँ से हर दशक करीब 10 प्रतिशत लोग चले जाते हैं। हर दशक 90 प्रतिशत बचता है, तो 3 दशक बाद, 1250 गुणा 9 बटा 10, 3 बार। जवाब आता है, 911 दशमलव 2 5 लोग। पर लोगों के टुकड़े नहीं होते, तो हर दशक के अंत में पूरे लोगों तक गोल करते चलिए।

तब पहले दशक के बाद 1125 लोग, दूसरे के बाद 1013 लोग, और तीसरे के बाद 912 लोग। पर 912 लोग, 911 दशमलव 2 5 को गोल करके नहीं आए, उसे गोल करें तो 911 लोग आते हैं। असल में 912 एक अलग तरीके का जवाब है, जिसमें रास्ते में हर दशक के अंत पर गोल किया गया। पहले दशक तक दोनों रास्ते साथ चलते हैं, और दूसरे दशक से अलग होने लगते हैं।

दोनों ईमानदार हैं, और दहाई तक गोल करें, तो दोनों 910 लोगों पर मिलते हैं। असल में ये बात सिर्फ़ टोकन की नहीं, बार बार होने वाला कोई भी प्रतिशत बदलाव, ठीक ऐसे ही चलता है। एक lab में चूहों की गिनती, एक महीने 5 प्रतिशत बढ़ती है, अगले महीने 2 प्रतिशत घटती है, और उसके अगले महीने 3 प्रतिशत। अब 5 घटा 2 घटा 3, ठीक 0 होता है, तो ऐसा लगता है कि गिनती वहीं लौट आएगी, जहाँ से उसने शुरुआत की।

अब गुणक गुणा कीजिए, 1 दशमलव 0 5, गुणा 98 बटा 100, गुणा 97 बटा 100, और इन सब का गुणनफल लीजिए। नतीजा आता है, शुरुआती गिनती का 99 दशमलव 8 1 3 प्रतिशत, यानी 100 प्रतिशत से नीचे। यानी गिनती शुरू से थोड़ी कम पर खत्म होती है, भले ही प्रतिशत जुड़कर 0 बनते हों। यहाँ 5 अलग आकार के बदलाव आज़माए गए, बढ़त के बाद उतनी ही घटत, और हर बार अंत, शुरुआत से नीचे रहा।

जैसे 10 प्रतिशत बढ़कर 10 प्रतिशत घटे, तो 99 प्रतिशत बचता है, यानी 1 प्रतिशत कम। बस का किराया एक साल 3 प्रतिशत बढ़े, और अगले साल 4 प्रतिशत, तो कुल बढ़त 7 प्रतिशत नहीं होती। यानी 1 दशमलव 0 3 गुणा 1 दशमलव 0 4, तो 7 दशमलव 1 2 प्रतिशत की बढ़त। ऊपर का वो छोटा हिस्सा, पहले से जुड़े 3 प्रतिशत पर लगा 4 प्रतिशत है, वही ब्याज पर ब्याज, बस नए कपड़ों में।

यहाँ 6 जोड़ों में से, जोड़ना सिर्फ़ 3 में सही बैठा, ठीक वो जिनमें कम से कम 1 बदलाव 0 था। किसी समूह के अंदर प्रतिशत भी ऐसे ही बैठते हैं, एक सैर पर गए students में से 40 प्रतिशत एक ही कक्षा के हैं। और उस कक्षा के students में से 60 प्रतिशत लड़कियाँ हैं। वो पूरी सैर का 60 प्रतिशत नहीं, 40 प्रतिशत का 60 प्रतिशत, यानी सबका 24 प्रतिशत।

ये दोनों तभी बराबर होते, जब वो कक्षा ही पूरी सैर होती। अगर कुल 160 students हों, तो उस कक्षा के 64 students होंगे, और उनका 60 प्रतिशत 38 दशमलव 4 आता है। ये पूरी गिनती नहीं, यानी ये संख्याएँ आपस में बैठती नहीं, इसलिए असली सीख 24 प्रतिशत वाली बात में है। आखिर में, दोनों को साथ साथ चलने दीजिए। शुरुआत 1000 टोकन से, 10 प्रतिशत पर, बिना चक्रवृद्धि के, वो ठीक 10 साल में दोगुना होता है।

चक्रवृद्धि के साथ, 7वें साल के अंत में वो 1948 दशमलव 7 2 टोकन है, यानी 2000 टोकन से अब भी कम। पहली बार 8वें साल में, वो 2000 टोकन को पार करता है। यहाँ 7 अलग दरों पर जाँचा गया, और किसी भी दर पर चक्रवृद्धि, सीधी गिनती से देर से दोगुनी नहीं हुई। एक बराबर कदमों में सीधी चढ़ती है, और दूसरी मुड़कर तेज़ होती जाती है, एक curve की तरह।

सीधी चढ़ाई जोड़ती है, और curve गुणा करता है। और दोनों को अलग करने वाली बस एक ही चीज़ है, कि प्रतिशत के नीचे वाली संख्या को हिलने दिया गया, या नहीं।

यह कहाँ बैठता है

यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.

किस पर टिका है

आगे फिर कहाँ आता है

इसके ठीक पहले और ठीक बाद

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