PrepShorts · पढ़ाई की शीट · Class 8 Mathematics · Chapter 4, Exploring Some Geometric Themes
Chapter 4 · Exploring Some Geometric Themes
Front, top और side views, और हर एक क्या खो देता है
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किसी segment की परछाईं कभी उससे लंबी नहीं होती: 21 में से 21 जोड़ों में लंबी नहीं, और 21 में से 8 में बराबर, ठीक वहीं जहाँ segment plane के समांतर है।
मुख्य idea
projection एक दिशा को फेंक देता है, और आप ठीक-ठीक बता सकते हैं कि इसकी क़ीमत क्या है: किसी segment की projected लंबाई उसकी असली लंबाई से कभी ज़्यादा नहीं होती, और दोनों तभी बराबर होती हैं जब segment पहले से plane के parallel पड़ा हो। चूँकि फेंकी गई दिशा बचे हुए से वापस नहीं पाई जा सकती, एक view कभी किसी ठोस को तय नहीं कर सकता — chapter यह तीन अलग वस्तुएँ बनाकर साबित करता है जिनके projections एक जैसे हैं। तीन आपस में perpendicular views आम तौर पर उसे तय कर देते हैं, और वजह न्यूनतम होना नहीं है: दो perpendicular views ही तीनों दिशाएँ दर्ज कर लेते हैं, क्योंकि front view लंबाई और ऊँचाई उठाता है जबकि top view लंबाई और गहराई। तीसरा view इसलिए लिया जाता है कि दो views अक्सर ठोस को अस्पष्ट छोड़ देते हैं, और इसलिए कि यही drawing की परिपाटी है — chapter ठीक यही कहता है, Part II p.91 पर बताते हुए कि हम अक्सर तीन आपस में perpendicular projections लेते हैं, और किसी सबसे छोटे समूह के बारे में कोई दावा नहीं करता। धूप यही बात भौतिक रूप में कहती है, क्योंकि दूर का perpendicular प्रकाश स्रोत जो परछाईं डालता है वह ही projection है।
आपको क्या आना चाहिए
- chapter की बताई perpendicular होने की शर्त से किसी point का plane पर projection परिभाषित कीजिए
- साबित कीजिए कि किसी segment की projected लंबाई उसकी असली लंबाई से ज़्यादा नहीं हो सकती, और बराबरी वाला मामला पहचानिए
- chapter जिन तीन planes का इस्तेमाल करता है उनके नाम बताइए और कहिए कि कौन-सा view किसका है
- किसी नाम वाले ठोस की स्थिति तय हो जाए तो उसके front, top और side views बनाइए
- समझाइए कि एक view काफ़ी क्यों नहीं, chapter के अपने उस उदाहरण से जिसमें अलग वस्तुओं का एक ही projection है
- समझाइए कि parallel lines का projection parallel lines क्यों होता है, और इससे parallelogram का projection तय कीजिए
- समझाइए कि प्रकाश स्रोत के दूर जाने पर परछाईं projection के क़रीब क्यों पहुँचती है, और धूप उसकी सीमा वाला मामला क्यों है
- एक जैसे cubes से बने ठोस को उसके तीन views से फिर से बनाइए, और बताइए कि यह पुनर्निर्माण कब भी अकेला नहीं होता
जानने लायक़ शब्द
| शब्द | एक पंक्ति में अर्थ | हिंदी / क्षेत्रीय समकक्ष | पहली बार कहाँ |
|---|---|---|---|
| projection | किसी point से plane पर डाले गए perpendicular का पाँव; किसी वस्तु के लिए, ऐसे सारे पाँवों का समुच्चय | प्रक्षेप | इसी chapter में छपा (Part II, §4.2, p.88, मोटे अक्षरों में) |
| perpendicular to the plane | plane में पाँव से होकर खींची हर line के साथ right angle बनाना | तल पर लंबवत | इसी chapter में छपा (Part II, §4.2, p.88, मोटे अक्षरों में) |
| front view | vertical plane पर projection | सम्मुख दृश्य | इसी chapter में छपा (Part II, §4.2, p.91, मोटे अक्षरों में) |
| top view | horizontal plane पर projection | शीर्ष दृश्य | इसी chapter में छपा (Part II, §4.2, p.91, मोटे अक्षरों में) |
| side view | side plane पर projection | पार्श्व दृश्य | इसी chapter में छपा (Part II, §4.2, p.91, मोटे अक्षरों में) |
| vertical plane | वस्तु के सामने लिया गया plane | ऊर्ध्वाधर तल | इसी chapter में छपा (Part II, §4.2, p.91, मोटे अक्षरों में) |
| horizontal plane | वस्तु के नीचे लिया गया plane | क्षैतिज तल | इसी chapter में छपा (Part II, §4.2, p.91, मोटे अक्षरों में) |
| side plane | वस्तु के बगल में लिया गया plane | पार्श्व तल | इसी chapter में छपा (Part II, §4.2, p.91, मोटे अक्षरों में) |
| shadow | रोशनी रुकने पर कोई वस्तु किसी सतह पर जो काली आकृति डालती है | छाया | इसी chapter में छपा (Part II, §4.2, p.94) |
| profile | किसी दिए गए viewpoint से ठोस जो आकृति दिखाता है, जिसे तीनों views औपचारिक बनाते हैं | परिच्छेदिका | इसी chapter में छपा (Part II, §4.2, pp.76, 91) |
| parallelogram | ऐसा quadrilateral जिसकी आमने-सामने की sides की दोनों जोड़ियाँ parallel हों | समांतर चतुर्भुज | इसी chapter में छपा (Part II, §4.2, pp.79, 89, 94) |
| orthographic projection | perpendiculars के साथ projection का standard engineering नाम | लांबिक प्रक्षेप | इस पाठ का शब्द; chapter ठीक यही बताता है और यह शब्द कभी इस्तेमाल नहीं करता |
| foreshortening | projection में किसी लंबाई का छोटा हो जाना | पूर्वसंक्षेपण | इस पाठ का शब्द, इस chapter में नहीं छपा |
Hindi column में standard Hindi गणितीय शब्दावली दी गई है। Ganita Prakash कक्षा 8 का Hindi संस्करण नहीं देखा गया, इसलिए इन शब्दों को standard शब्दावली मानें, उस संस्करण के ठीक-ठीक शब्द नहीं।
लोग कहाँ चूकते हैं
- "projection एक scaled प्रति है।" नहीं है। वह कुछ दिशाओं को छोटा कर सकता है और कुछ को नहीं, इसलिए square का projection ऐसा parallelogram हो सकता है जो square नहीं, और वह पूरी एक दिशा को कुछ भी नहीं तक सिकोड़ सकता है। परछाईं जो जोड़ती है — एक समान बड़ा होना — वही चीज़ है जो प्रकाश स्रोत के पीछे हटने पर चली जाती है।
- "projection हमेशा छोटा होता है।" कभी बड़ा नहीं, और कभी-कभी ठीक उतना ही — जब projected होने वाली चीज़ plane के parallel हो। बराबरी वाला मामला समझना Fig. 4.3 की आधी बात है।
- "p ≤ l ज़ाहिर है।" यह एक ख़ास तथ्य पर टिका है: right triangle में hypotenuse सबसे लंबी side है। chapter AE ⊥ BC खींचने को कहकर आपके लिए right triangle बना देता है। असमानता का दावा करने से पहले right angle को दिखाइए।
- "AECD rectangle है क्योंकि वह rectangle जैसा दिखता है।" वह rectangle इसलिए है कि AD और EC दोनों plane पर perpendicular हैं, इसलिए parallel हैं, और DC plane में पड़ा है। chapter क्यों इसीलिए पूछता है कि वजह ही असली बात है।
- "तीन views हमेशा ठोस को तय कर देते हैं।" आम तौर पर, हमेशा नहीं। दो अलग cube-जोड़ों के तीनों views एक जैसे हो सकते हैं — किसी ऐसे गड्ढे में छिपा cube जिसके भीतर कोई view नहीं देख सकता, standard उलटा उदाहरण है, और Part II p.97 पर chapter का अपना ढेर वह जगह है जहाँ student पहली बार इस कठिनाई से मिलता है।
- "परछाईं और projection एक ही चीज़ हैं।" वे सिर्फ़ सीमा में मेल खाते हैं। chapter सावधान है: torch की परछाईं बड़ी, खिंची हुई या बिगड़ी हुई हो सकती है। बताइए कि फ़र्क़ किससे पड़ता है — स्रोत की दूरी से।
- "बड़ी परछाईं का मतलब बड़ी वस्तु है।" इसका मतलब पास की रोशनी है। यह chapter का अपना Try This है और इसे भौतिक रूप से करके देखना ठीक है।
- "parallelogram का projection trapezium हो सकता है।" नहीं हो सकता। projection में parallel lines parallel रहती हैं, इसलिए आमने-सामने की sides की दोनों जोड़ियाँ parallel रहती हैं। chapter इसे Part II p.94 पर box में रखता है। अकेला अपवाद उसी साँस में बताइए: plane पर perpendicular खड़ा parallelogram सिकुड़कर segment बन जाता है, इसलिए दावा "कभी parallelogram से अलग quadrilateral नहीं" है, "हमेशा parallelogram" नहीं।
- "front view का मतलब सामने वाले face का दृश्य है।" इसका मतलब vertical plane पर projection है, जो पूरी वस्तु को उस plane पर समतल करके दिखाता है, छिपे हिस्से भी रूपरेखा की तरह। वस्तु में गहराई आते ही यह फ़र्क़ मायने रखने लगता है।
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पूरा transcript2,175 शब्द
एक ठोस चीज़ है, और कागज़ का एक सपाट पन्ना। काम ये है कि ठोस को कागज़ पर ऐसे उतारें, कि जिसने उसे कभी देखा न हो, वो भी उसे बना सके। ठोस को खोलकर उसका net बनाया जा सकता है, पर net से ठोस वापस पढ़ना मुश्किल है, जब तक उसे काटकर मोड़ा न जाए। और मुश्किल तुरंत दिखती है, ठोस में 3 दिशाएँ हैं, लंबाई, ऊँचाई और गहराई, और कागज़ पर जगह सिर्फ़ 2 दिशाओं की है।
यानी कोई 1 दिशा तो छोड़नी ही पड़ेगी। इसलिए असली सवाल ये नहीं, कि दिशा खोने से कैसे बचें, सवाल ये है कि कौन सी दिशा जाए, और उसकी कीमत क्या है? इसका ठीक-ठीक जवाब मिल जाए, तो एक दिशा जानबूझकर छोड़ी जा सकती है, 3 अलग तरीकों से, और फिर भी कुछ नहीं खोता। शुरुआत एक point और एक plane से करते हैं। उस point से plane तक सीधे नीचे एक line गिराइए, और जहाँ वो plane से टकराए, वहाँ निशान लगाइए।
वो निशान ही उस point का projection है, और यहाँ point, plane से 5 ऊपर है। सीधे नीचे का मतलब ध्यान से समझिए, गिराई गई line, plane के अंदर उस निशान से होकर जाने वाली हर line के साथ, 90 का कोना बनाती है। हर line के साथ, सिर्फ़ एक line के साथ नहीं, पूरी परिभाषा इसी में है। अब plane में एक ऐसा point लीजिए, जो वो निशान नहीं है।
उस तक गिराई गई line, plane की एक दिशा के साथ ठीक 90 का कोना बनाती है, पर दूसरी दिशा के साथ नहीं। सिर्फ़ एक line जाँचते, तो इसे भी projection मान लेते, हर line जाँचें, तो सिर्फ़ एक point बचता है। इसीलिए कोई चीज़ plane में सीधी घुसकर छेद बनाए, तो उस छेद का आकार ठीक उस चीज़ के projection जैसा होता है। अब पूरा segment लीजिए, उसके दोनों सिरों से नीचे line गिराइए, और plane पर बने दोनों निशानों को जोड़िए।
वो जोड़ने वाला टुकड़ा ही segment का projection है। सवाल ये है कि ये projection, segment के मुकाबले कितना लंबा है? ऊपर वाला सिरा 5 की ऊँचाई पर है, और नीचे वाला 1 की ऊँचाई पर। ऊपर वाले सिरे से, दूसरी गिराई गई line तक, plane के समांतर एक और line खींचिए। अब 4 कोने बनते हैं, और वो एक आयत बनाते हैं। ऐसा होना ही है, दोनों गिराई गई lines plane पर लंबवत हैं, इसलिए आपस में समांतर हैं, और निशानों को जोड़ने वाला टुकड़ा plane के अंदर पड़ा है।
आमने-सामने की भुजाओं की 2 में से 2 जोड़ियाँ बराबर हैं, और नीचे के कोने पर 90 बनता है। और आयत की आमने-सामने की भुजाएँ बराबर होती हैं, इसलिए ऊपर खींची गई line, projection जितनी ही लंबी है, यहाँ 3 की। अब देखिए, आयत के बाद क्या बचा। एक triangle, उसकी एक भुजा segment है, दूसरी projection की नकल, और नकल व बची हुई भुजा के बीच 90 का कोना।
जिस triangle में 90 का कोना हो, उसमें सबसे लंबी भुजा वो होती है, जो उस कोने के ठीक सामने हो, और यहाँ वो segment है। यानी projection उस triangle की एक छोटी भुजा है, जिसकी सबसे लंबी भुजा segment है, वो segment से लंबा हो ही नहीं सकता, कभी नहीं। यहाँ segment 5 लंबा है, projection 3 का, और 5 से 1 तक की 4 की गिरावट बाकी हिसाब पूरा करती है।
जाँच भी लीजिए, 3 का वर्ग 9 है, 4 का वर्ग 16, और 9 जमा 16 बराबर 25, जो 5 का वर्ग है। और दोनों बराबर तभी होते हैं, जब triangle पिचककर खत्म हो जाए, यानी जब दोनों सिरे plane से एक ही ऊँचाई पर हों। ये जाँच 21 जोड़ों पर की गई, 7 अलग-अलग segment, और हर एक के लिए 3 अलग plane। नतीजा, 21 में से 21 बार projection लंबा नहीं निकला, और 21 में से 8 बार बराबर निकला, ठीक वहीं, जहाँ segment plane के समांतर था।
यानी projection कभी कुछ खींचता नहीं, और लंबाई तभी बचाता है, जब वो लंबाई पहले से plane के समांतर हो। अब एक square लीजिए, जिसकी भुजा 3 है और क्षेत्रफल 9, और उसे plane के समांतर पकड़िए। उसकी हर भुजा plane के समांतर है, इसलिए 4 में से 4 भुजाएँ अपनी लंबाई रखती हैं, और projection वही square है, क्षेत्रफल भी 9 ही। अब उसे झुकाइए, अलग-अलग भुजाएँ अलग-अलग झुकती हैं, इसलिए अलग-अलग छोटी होती हैं।
अब projection एक parallelogram बनता है, भुजाओं के वर्ग 5 और 8, कोई 90 का कोना नहीं, और क्षेत्रफल घटकर 6 रह जाता है। किसी और तरह झुकाइए, तो projection एक rhombus बनता है, भुजाओं के वर्ग 5 और 5, बराबर, पर 90 नहीं, और क्षेत्रफल 3 रह जाता है। और उसे किनारे के बल खड़ा कर दीजिए, तो projection बस एक segment है, पूरी एक दिशा गायब, और क्षेत्रफल कुछ भी नहीं।
एक square, और 4 अलग आकार, इसलिए square का projection कैसा होगा, इसका जवाब एक आकार नहीं, एक सूची है। क्षेत्रफल पहले 9, फिर 6, फिर 3, और फिर कुछ नहीं, यानी 4 में से 4 बार, 9 से ज़्यादा कभी नहीं। इसीलिए बराबर भुजाओं वाली आकृति, projection में बराबर भुजाओं वाली नहीं रहती, क्योंकि projection अलग भुजाओं से अलग बर्ताव करता है। पर एक चीज़ बची रहती है, और उसी से ये सब कागज़ पर बनाना मुमकिन होता है।
मान लीजिए 2 समांतर lines हैं, उनकी दिशा एक ही है, और projection किसी दिशा के साथ हर जगह एक जैसा बर्ताव करता है। इसलिए उनके projection भी समांतर रहते हैं, या फिर वही दिशा फेंकी जा रही थी, और दोनों lines एक साथ point बनकर सिमट जाती हैं। इसके अलावा कोई नतीजा होता ही नहीं। जाँच में 4 जोड़ी lines थीं, और हर जोड़ी के लिए 3 अलग plane, कुल 12 मामले।
उनमें 11 बार lines समांतर रहीं, 1 बार दोनों साथ में सिमटीं, यानी 12 में से 12 बार, यही 2 नतीजे। किसी parallelogram में समांतर भुजाओं की 2 जोड़ियाँ होती हैं, और दोनों जोड़ियाँ समांतर बची रहती हैं। इसलिए उसका projection झुका हुआ parallelogram, rectangle, rhombus, या सिमटकर segment बन सकता है। जाँच में 12 परछाइयाँ बनीं, उनमें 9 बार parallelogram, जिनमें 1 बार rhombus और 1 बार rectangle, और 3 बार segment।
और trapezium कभी नहीं बनता, किसी भी झुकाव पर नहीं, 12 में से एक बार भी नहीं। धूप में parallelogram का एक कटआउट घुमाकर देखिए, उसकी परछाईं parallelogram ही रहती है। अब कुछ segment लीजिए, एक 8 लंबा, एक 10 लंबा, और एक 17 लंबा। ये सिर्फ़ इसमें अलग हैं कि कितना ऊपर चढ़ते हैं, पहला बिल्कुल नहीं, दूसरा 6, और तीसरा पूरे 15 चढ़ता है। जाँच लीजिए, 8 का वर्ग 64, उसमें 6 का वर्ग 36 जोड़ने पर 100 बनता है, जो 10 का वर्ग है, और 15 का वर्ग 225 जोड़ने पर 289, जो 17 का वर्ग है।
ऊपर से देखने पर ऊँचाई फेंक दी जाती है, इसलिए 3 में से 3 की परछाईं एक ही है, 8 लंबी। एक चित्र, 3 अलग चीज़ें, और चित्र में ऐसा कुछ नहीं, जो बता सके कि कौन सी। ठोस के साथ भी यही होता है, ऊँचाई और चौड़ाई एक जैसी, पर गहराई बढ़ती हुई, पहला block 4 घनों का, दूसरा 8 का, और तीसरा 16 का। सामने से देखने पर गहराई ही वो दिशा है जो फेंकी जाती है, इसलिए 3 में से 3 का front view, एक ही छोटा square है, 2 गुणा 2 का।
एक view किसी ठोस के बारे में सबूत है, उसका पूरा बयान कभी नहीं। इसलिए एक से ज़्यादा view लीजिए। एक plane चीज़ के सामने रखिए, एक उसके नीचे, और एक उसकी बगल में। सामने वाले plane पर बना projection, front view कहलाता है, नीचे वाले पर top view, और बगल वाले पर side view। हर view 2 दिशाएँ रखता है और 1 दिशा फेंकता है, और कभी भी 2 अलग views एक ही दिशा नहीं फेंकते।
यानी front view लंबाई और ऊँचाई रखता है, top view लंबाई और गहराई, और side view गहराई और ऊँचाई। मान लीजिए एक block 3 गुणा 4 गुणा 5 का है, यानी 60 घनों का। उसके views में 3 आयत बनते हैं, पहला 3 गुणा 5 का, फिर 3 गुणा 4 का, और फिर 4 गुणा 5 का। इस block की हर भुजा, 3 में से 2 अलग views में लिखी है, यानी हर नाप 2 बार दर्ज है।
हर नाप 2 बार, और यही बात रुककर सोचने लायक है। हर दिशा, 3 में से 2 अलग views में रहती है, इसलिए सिर्फ़ front और top मिलकर ही सारी 3 दिशाएँ रख लेते हैं। इसे एक segment पर जाँचिए, जो 13 लंबा है। उसके views की लंबाइयों के वर्ग देखिए, side view में 160, front view में 153, और top view में सिर्फ़ 25, यानी लंबाई 5 की। इन्हें जोड़िए, 160 जमा 153 जमा 25 बराबर 338, जो ठीक 2 गुणा 169 है, यानी segment के अपने वर्ग का 2 गुना।
ये संयोग नहीं, जाँचे गए सारे segment, 7 में से 7, यही देते हैं, क्योंकि हर दिशा 2 अलग views में गिनी जाती है। यानी तीसरा view इसलिए नहीं लिया जाता, कि पहले वाले views ने कोई दिशा छोड़ दी। वो इसलिए है कि 2 परछाइयाँ मिलकर भी चीज़ को साफ़ नहीं बता पातीं, और ड्रॉइंग का रिवाज भी यही है। पीछे वाले blocks पर लौटिए, उनके front views बिल्कुल एक जैसे हैं।
पर उनके top views अलग हैं, 2 गुणा 1, फिर 2 गुणा 2, और फिर 2 गुणा 4 के। और उनके side views भी अलग, 1 गुणा 2, फिर 2 गुणा 2, और फिर 4 गुणा 2 के। जो view उन्हें अलग नहीं कर पाया, वही था जिसने वो दिशा फेंकी, जिसमें वो अलग हैं। एक projection को बनते हुए देखा भी जा सकता है, लगभग। दीवार के सामने कोई चीज़ रखिए, और उस पर ठीक सामने से torch चमकाइए।
परछाईं का आकार तो ठीक बनता है, पर वो बड़ी होती है, क्योंकि torch से किरणें निकलकर फैलती जाती हैं। चीज़ दीवार से 2 कदम दूर हो, और torch 4 कदम पर, तो परछाईं projection की 2 गुना होती है। अब torch को 6 कदम पर ले जाइए, परछाईं 3 बटा 2 गुना रह जाती है, 10 पर 5 बटा 4 गुना, और 20 पर 10 बटा 9 गुना। और पीछे, 100 कदम पर 50 बटा 49 गुना, और 1000 कदम पर, projection से 1 बटा 400 हिस्से से भी कम बड़ी।
हर कदम पीछे परछाईं छोटी होती है, पर projection कभी नहीं बनती, बस जितना चाहें, उतने पास आ जाती है। और सूरज बहुत दूर है, इसलिए किसी दीवार पर सीधी पड़ती धूप की परछाईं, projection से अलग पहचानी ही नहीं जा सकती। ये काम दूरी करती है, रोशनी की तेज़ी नहीं। अब views पूरे हैं, दिशाएँ पूरी, कुछ नहीं छूटा, तो क्या वो ठोस को पक्का तय कर देते हैं?
ज़्यादातर हाँ, हमेशा नहीं, और सबसे छोटी मिसाल ऐसे डिब्बे में आ जाती है, जिसकी हर भुजा 2 घनों की है। पहले 3 घन, इस तरह रखे हुए। उनका front view, top view और side view देखिए। अब यहाँ 1 घन और जोड़िए। देखिए, front view नहीं बदला, top view नहीं बदला, और side view भी नहीं बदला। यानी 3 घन हों या 4 घन, views 3 में से 3 बिल्कुल एक जैसे रहते हैं।
और ये किस्मत नहीं, चौथा घन वहीं बैठा है, जहाँ हर view में पहले से एक square दिख रहा था, जो आसपास के घनों ने बनाया था। वो कुछ नया नहीं डालता, क्योंकि जो कुछ वो डाल सकता था, वो पहले से पड़ रहा था। उस छोटे डिब्बे में 8 जगहें हैं, और घन रखने के 255 तरीके, पर views के सिर्फ़ 165 अलग सेट बनते हैं। और 165 में से 45 सेट, एक से ज़्यादा ढेरों के हैं, यानी views किसी ठोस का सबूत हैं, उसकी परिभाषा नहीं।
घनों का ये सीढ़ीनुमा ढेर देखिए, सामने से 10 घन दिखते हैं। नीचे की कतार में 4, फिर 3, फिर 2, और सबसे ऊपर 1, यानी 4 जमा 3 जमा 2 जमा 1, कुल 10 घन। पर कुल घन कितने हैं? बताया नहीं जा सकता, पीछे 1 घन छिपा दीजिए, front view बिल्कुल वही रहता है, जबकि ढेर में अब 11 घन हैं। हाँ, top view ज़रूर बदलता है, पर सिर्फ़ सामने से देखें, तो पता ही नहीं चलता।
ये कोई खामी नहीं, projection एक दिशा फेंकता है, और जो फेंका, वो चला गया। तो पूरी बात एक लेन-देन पर आती है, जो 3 बार किया जाता है। आप एक दिशा छोड़ते हैं। बदले में एक सपाट चित्र मिलता है, जिसे नापा जा सकता है, और जिसमें कोई लंबाई बढ़ी नहीं, 21 में से 21 बार। जिसमें समांतर, समांतर ही रहा, 12 में से 12 बार, और trapezium एक बार भी नहीं बना।
और जो कुछ plane के समांतर पड़ा था, वो बिना बदले आया, 21 में से वही 8 बार। ऐसे 3 चित्र, इस तरह चुने कि उनके बीच कोई दिशा न छूटे, और कोई भी आपके ठोस को पन्ने से बना सकता है। इसलिए नहीं कि चित्र सब कुछ दिखाता है, बल्कि इसलिए कि आपको ठीक पता है, कि हर view ने क्या छोड़ा। और जब views भी कम पड़ें, जैसे 3 घन और 4 घन में, तो सोचिए, कौन सी दिशा, क्या छिपा रही है?
यह कहाँ बैठता है
यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.
किस पर टिका है
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- Nets: which flat shapes fold into which solidकक्षा 8 · Ch 4, Exploring Some Geometric Themes
आगे फिर कहाँ आता है
- Isometric projection: the orientation that keeps all edges equalकक्षा 8 · Ch 4, Exploring Some Geometric Themes
- Drawing solids on an isometric gridकक्षा 8 · Ch 4, Exploring Some Geometric Themes
इसके ठीक पहले और ठीक बाद
- The shortest path across a cube, found by flattening itकक्षा 8 · Ch 4, Exploring Some Geometric Themes