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Chapter 5 · Parallel and Intersecting Lines

"Parallel" असल में क्या दावा करता है, और उसे जाँचना मुश्किल क्यों है

Two lines that never meet11 मिनट

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2 lines को कितना भी आगे बढ़ाओ, वे कभी नहीं मिलेंगी, यह असीमित चीज़ का दावा है, और कागज़ हमेशा सीमित है।

मुख्य idea

"Parallel" इस बारे में दावा है कि हमेशा-हमेशा तक क्या होता है, और वह दावा आठ centimetre लंबी drawing से किया जाता है — पूरी मुश्किल यही फ़ासला है। section जो भी जाँच देता है वह सीमित तस्वीर की जाँच है: उन्हें आगे बढ़ाकर देखो, बीच की दूरियों की तुलना करो, क्या यह keyboard जैसा दिखता है। इनमें से कोई भी जाँच अनंत के बारे में किसी कथन को तय नहीं कर सकती, और इसीलिए section किसी नियम पर नहीं, इस मान लेने पर ख़त्म होता है कि कभी-कभी आप पक्का नहीं कह सकते। परिभाषा में एक दूसरी शर्त भी है जिसे students अक्सर छोड़ देते हैं: दोनों lines को एक ही सपाट सतह पर होना चाहिए, वरना "वे कभी नहीं मिलतीं" से कुछ भी साबित नहीं होता।

आपको क्या आना चाहिए

  • parallel lines की परिभाषा की दोनों शर्तें बताना — एक ही plane, और कितना भी बढ़ाओ कभी न मिलना
  • अलग-अलग सतहों पर पड़ी दो lines से "कभी नहीं मिलतीं, इसलिए parallel" का उलटा उदाहरण देना
  • point, endpoint और midpoint वाले शब्द इस्तेमाल करके बताना कि दो line segments कैसे मिलते हैं, और जहाँ angle लिखा हो वहाँ उसे बताना
  • छोटे बने segments की किसी जोड़ी के लिए तय करना कि बढ़ाने पर वे मिलेंगे या नहीं, और बताना कि वह फ़ैसला किस बात पर टिका है
  • dot-grid वाली figure में parallel lines की जोड़ियाँ पहचानना और उन पर तीर वाला निशान लगाना
  • dot paper पर किसी दिए गए segment के parallel segment बनाना, और बताना कि कौन-सी दिशाएँ सबसे मुश्किल हैं
  • समझाना कि आँख से किया गया अंदाज़ा parallel होने का proof क्यों नहीं, और बताना कि chapter उसकी जगह किस चीज़ का सहारा लेता है

जानने लायक़ शब्द

शब्दएक line में परिभाषाहिंदी / क्षेत्रीय समकक्षपहली बार कहाँ आया
parallel linesएक ही सपाट सतह पर दो lines जो कभी नहीं मिलतीं, किसी को भी कितना भी बढ़ाओसमांतर रेखाएँपरिभाषा वाले box के अंदर bold में छपा, §5.3, p.110
planeवह सपाट सतह जिस पर परिभाषा लागू होने के लिए दोनों lines का होना ज़रूरी हैसमतल§5.3, p.110 में और उसी पन्ने के Note to the Teacher में छपा
line segmentline का एक टुकड़ा जिसके दो endpoints हैंरेखाखंड§5.3, p.109 में छपा
endpointवह point जहाँ segment रुकता हैअंत्यबिंदु§5.3, p.109 में छपा
midpointsegment के ठीक आधे रास्ते वाला pointमध्यबिंदु§5.3, p.109 में छपा
intersectएक point पर मिलनाप्रतिच्छेद करना§5.1, p.106 में छपा
dot paperdots का grid, जिसे exercises में drawing की सतह की तरह इस्तेमाल किया जाता हैबिंदु पत्रFigure it Out, p.113 में छपा
arrow marklines पर लगाया जाने वाला निशान, यह दर्ज करने के लिए कि वे parallel हैंतीर चिह्न"Notations", p.112 में छपा
transversalऐसी line जो दो दूसरी lines को काटती हुई निकलती है; वह औज़ार जिसका सहारा section आख़िर में लेता हैतिर्यक रेखा§5.5, p.115 में छपा — इस topic के बाद नाम दिया गया, और इसके आख़िरी सवाल का जवाब
equidistantपूरे रास्ते एक ही दूरी पर बने रहनासमदूरस्थआँख असल में जिस चीज़ को परख रही होती है उसके लिए यहाँ इस्तेमाल किया गया शब्द; p.126 के बाद जुड़े solutions appendix में आता है, छपे chapter में कभी नहीं

हिंदी column में NCERT की standard हिंदी गणितीय शब्दावली है। Ganita Prakash Part I का हिंदी संस्करण इस brief के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री में नहीं है, इसलिए इन शब्दों को हिंदी छपाई से नहीं मिलाया गया — Notes देखें।

equidistant के बारे में एक सावधानी। एक plane में parallel होने का एक सच्चा नतीजा यह है कि दूरी एक जैसी रहती है, और student की आँख असल में यही परख रही होती है। लेकिन p.110 पर छपी परिभाषा कभी न मिलने के बारे में है, बराबर दूरी के बारे में नहीं, और §5.6 में chapter की जाँच angles के बारे में है, दूरियों के बारे में नहीं। व्याख्या में चुपचाप छपी परिभाषा की जगह दूरी वाली परिभाषा न आने दें।

लोग कहाँ चूकते हैं

  • "मेरे पन्ने पर वे नहीं मिलतीं, इसलिए वे parallel हैं।" पन्ना सीमित है और दावा नहीं। Section 3 में ऐसी जोड़ी दिखनी चाहिए जो एक पन्ने पर एक millimetre अलग होती है और सौ पन्ने दूर जाकर मिल जाती है।
  • "कभी न मिलना ही पूरी परिभाषा है।" यह उसका आधा हिस्सा है। अलग-अलग सपाट सतहों पर पड़ी दो lines हमेशा एक-दूसरे से चूक सकती हैं और फिर भी parallel नहीं होतीं — teacher के लिए छपा note ठीक यही हालत देता है। p.110 से जाँचा गया।
  • "Parallel का मतलब बराबर दूरी पर, इसलिए दो जगह दूरी नाप लो।" दो जगह काफ़ी नहीं, और वैसे भी chapter की अपनी परिभाषा मिलने के बारे में है, दूरी के बारे में नहीं। दूरी वाली जाँच एक अच्छी सहज समझ है जिसे section जान-बूझकर मान्यता नहीं देता।
  • "Parallel lines पन्ने पर आड़ी या खड़ी ही चलनी चाहिए।" Fig. 5.6 और Fig. 5.12 ठीक इसी सोच को तोड़ने के लिए diagonals से बनी हैं, और p.114 पर teacher के लिए note कहता है कि बेढब ढलान ही असली बात हैं।
  • "रेल की पटरियाँ क्षितिज पर मिल जाती हैं, इसलिए वे सच में parallel नहीं।" p.110 की keyboard वाली photograph में भी यही असर है। Perspective तस्वीर के बारे में एक तथ्य है, lines के बारे में नहीं — इसे Parallel illusions: why the eye is not a proof के लिए बचाकर रखें, जहाँ chapter इसे अपना आख़िरी तर्क बनाता है।
  • "अगर दो segments नहीं कटते, तो जिन lines पर वे पड़े हैं वे भी नहीं कटतीं।" segment line का एक टुकड़ा है, इसलिए दो segments का न छूना उन lines के बारे में कुछ तय नहीं करता जिन पर वे बैठे हैं। ST और UV वह जोड़ी है जिसे Fig. 5.5 घटती दूरी के साथ बनाती है, और उन्हें बढ़ाने पर वे मिलेंगे या नहीं, ठीक यही सवाल पन्ना खुला छोड़ देता है।
पूरा transcript1,651 शब्द

एक segment किसी line का टुकड़ा है, उसके 2 सिरे होते हैं, जबकि line दोनों तरफ़ बिना रुके चलती रहती है। 2 segments के बीच जो हो सकता है, उसमें ये बातें खास हैं, एक दूसरे को काटें, एक सिरा बाँटें, या बिल्कुल न छुएँ। काटने का मतलब है कि दोनों segments एक बिंदु से होकर आर पार निकल जाते हैं, और सिरा बाँटने का मतलब है कि दोनों वहीं से शुरू होते हैं।

और न छूने का मतलब, कागज़ पर जितने segments खींचे हैं, उनमें कोई बिंदु साझा नहीं। पर line के कोई सिरे नहीं, इसलिए lines के लिए बात सीधी है, वे कहीं मिलती हैं, या कभी नहीं। पहले सिर्फ़ इतना समझना है कि 2 segments कैसे मिलते हैं, या नहीं मिलते। एक चित्र में कई segments बिखरे हैं, F G और F H एक ही सिरा F बाँटते हैं, और उनके बीच का angle 115 दशमलव 3 degree लिखा है।

A B और C D एक बिंदु X पर एक दूसरे को काटते हैं, और I J और L M, बिंदु Y पर। फिर O P और Q R, पास पास, एक ही तरफ़ चलते हुए, और उनके बीच की दूरी शुरू से आखिर तक लगभग एक सी। और S T और U V, वे भी पास पास और एक ही तरफ़, पर उनके बीच की दूरी दाईं ओर साफ़ घटती दिखती है।

पूरे चित्र पर बस एक ही नाप लिखा है, F वाला angle, बाकी सब कुछ बस देखकर बताना है। हर जोड़ी के लिए एक वाक्य, कौन काटता है, कहाँ, कौन सिरा बाँटता है, और कौन छूता ही नहीं। अब असली सवाल, अगर S T और U V को आगे बढ़ाते जाएँ, तो क्या वे कहीं मिलेंगे? और O P और Q R, क्या वे कभी मिलेंगे? उन्हें आगे खींचो, और थोड़ी ही देर में कागज़ खत्म हो जाता है, lines वहीं रुक जाती हैं।

बड़ा कागज़ लो, तो किनारा थोड़ा दूर चला जाता है, पर रहता वहीं है, कोई भी कागज़ अनंत नहीं। इन सवालों का जवाब हम यहाँ नहीं देंगे, क्योंकि कागज़ इन्हें तय कर ही नहीं सकता, और यही इस पूरे विषय की मुश्किल है। सोचो, 2 lines, कागज़ के बाएँ किनारे पर 50 मिलीमीटर दूर, और 200 मिलीमीटर चौड़े कागज़ के पार जाते जाते बस आधा मिलीमीटर पास आती हैं। दाएँ किनारे पर भी उनके बीच 49 दशमलव 5 मिलीमीटर, आँख को बिल्कुल बराबर दूरी लगेगी।

पर हर कागज़ पर आधा मिलीमीटर, तो ठीक 100 कागज़ की चौड़ाई बाद वे मिल जाती हैं। और 100 कागज़ भी हमेशा नहीं है, कोई और जोड़ी उससे कहीं ज़्यादा दूर जाकर मिल सकती है, या कभी नहीं। इसलिए मेरे कागज़ पर नहीं मिलीं, इससे कुछ साबित नहीं होता, कागज़ सीमित है और दावा असीमित। एक और उलझन, 2 segments नहीं छू रहे, तो उनकी lines भी नहीं छुएँगी, यह सोचना गलत है।

segment line का एक टुकड़ा भर है, बाकी line कागज़ के बाहर, दोनों तरफ़ चलती रहती है। जैसे 2 छोटे segments, कागज़ के 2 कोनों में, बिल्कुल अलग, पर उनकी lines बीच में कहीं आराम से काट सकती हैं। और समांतर होने का सवाल segments का नहीं, पूरी lines का है। आसपास देखो, किसी keyboard की चाबियों के किनारे, बेंच की पट्टियाँ, खिड़की की सलाखें। ये सब एक ही दिशा में चलते हैं, और लगता है कि कितना भी बढ़ाओ, कभी नहीं मिलेंगे।

पर किसी keyboard की तिरछी तस्वीर में वही किनारे दूर जाते हुए पास आते दिखते हैं। रेल की पटरियाँ भी दूर क्षितिज पर मिलती हुई दिखती हैं, जबकि उन पर गाड़ी चलती है, वे मिल जाएँ तो पहिए कहाँ जाएँगे। वह तस्वीर की बात है, lines की नहीं, और उस पर हम आगे अलग से बात करेंगे। अब परिभाषा, और उसकी शर्तें ध्यान से। पहली, दोनों lines एक ही सपाट सतह पर हों।

दूसरी, उन्हें किसी भी दिशा में कितना भी आगे बढ़ाओ, वे कभी न मिलें। तब वे समांतर हैं, यानी parallel। और आगे बढ़ाना दोनों तरफ़, बाएँ भी और दाएँ भी, क्योंकि line दोनों तरफ़ चलती है। दोनों शर्तें ज़रूरी हैं, और अक्सर पहली वाली भुला दी जाती है। एक line मेज़ की सतह पर खींचो, और एक दीवार पर लगे board पर, तिरछी ऊपर जाती हुई। दोनों पर 1001 बिंदु लेकर हर जोड़ी मिलाई गई, एक भी बिंदु साझा नहीं, ये कभी नहीं मिलतीं।

सबसे पास आकर भी उनके बीच मेज़ और board की दूरी बनी रहती है, उससे कम कभी नहीं। फिर भी वे एक दिशा में नहीं चलतीं, एक सीधी आगे, एक तिरछी ऊपर। board वाली line को जितना चाहो घुमाओ, जब तक वह board पर है और दूसरी मेज़ पर, वे कभी नहीं मिलेंगी। तो कभी न मिलना समांतर होने के लिए काफ़ी नहीं, ये दोनों एक सतह पर नहीं हैं, इसलिए परिभाषा यहाँ लागू ही नहीं होती।

अब अपने कमरे में ढूँढो, फ़र्श और एक दीवार के मिलने वाला किनारा, और सामने वाली दीवार पर कोई तिरछी लकीर। ये कभी नहीं मिलेंगी, क्योंकि एक फ़र्श के पास है और दूसरी सामने की दीवार पर, और बीच में पूरा कमरा है। फिर भी ये समांतर नहीं, ये एक सपाट सतह पर हैं ही नहीं, और एक दिशा में भी नहीं चलतीं। कागज़ पर 2 lines या तो मिलती हैं या समांतर होती हैं, पर कमरे जैसी जगह में एक तीसरा रास्ता भी है, बिना मिले, बिना समांतर हुए।

कलाकार भी समांतर lines का खूब इस्तेमाल करते हैं, जालीदार तारे वाले पैटर्न में, या तिरछी पट्टियों वाले पैनल में। इन पैटर्न में सुंदरता इसी से आती है कि पट्टियाँ एक ही दिशा में, बराबर अंतर पर चलती हैं। किसी चित्र में छाया भरनी हो, तो पास पास समांतर लकीरें खींची जाती हैं, जितनी पास, उतनी गहरी छाया। अब बिंदुओं के एक जाल पर कई segments, कुछ खड़े, कुछ आड़े, और कई अलग अलग ढलान पर तिरछे।

कौन सी जोड़ियाँ समांतर दिखती हैं, खुद छाँटो। गौर करो, सवाल कहता है दिखती हैं, यह शब्द जानबूझकर चुना गया है। आड़े और खड़े segments का अंदाज़ा आसान है, तिरछे वालों में आँख सबसे ज़्यादा धोखा खाती है। क्योंकि कागज़ पर देखना एक अंदाज़ा है, फ़ैसला नहीं। कई लोग कहेंगे, आसान है, 2 जगह दूरी नाप लो, बराबर है तो समांतर। पर वह धीरे पास आती जोड़ी याद करो, कागज़ के दोनों किनारों पर 50 और 49 दशमलव 5 मिलीमीटर, ruler पर यह फ़र्क मुश्किल से दिखेगा।

और परिभाषा दूरी की नहीं, मिलने की बात करती है, दूरी वाला तरीका अच्छा अंदाज़ा है, पर यहाँ उसे नियम नहीं माना गया। नापना भी कागज़ पर ही होता है, इसलिए वह भी उसी सीमित चित्र की जाँच है। जब तय हो जाए कि lines समांतर हैं, तो चित्र पर उन पर एक छोटा तीर का निशान लगाते हैं। यह निशान कोई खोज नहीं, एक फ़ैसला दर्ज करता है, कि इन lines को हम समांतर मान रहे हैं या जान चुके हैं।

और अगर समांतर lines का दूसरा समूह भी हो, तो उस पर 2 तीर, ताकि दोनों समूह अलग पहचाने जाएँ। अब खुद बनाओ, बिंदुओं के जाल पर हर segment के बराबर दिशा में एक और segment। आड़ा, खड़ा, और ठीक तिरछा, यानी 45 degree वाले, इनका समांतर बनाना आसान है। पर 5 गुणा 5 बिंदुओं के जाल पर segments कुल 24 अलग दिशाओं में जा सकते हैं, और उनमें आसान सिर्फ़ 4।

बाकी के लिए गिनना पड़ता है, जैसे 3 बिंदु आगे और 1 ऊपर, और समांतर के लिए ठीक वही कदम दोहराने पड़ते हैं। गलती अक्सर यहीं होती है, 3 आगे 1 ऊपर की जगह 3 आगे 2 ऊपर गिन लिया, और line दूसरी दिशा में चली गई। और उन 24 दिशाओं में कोई 2 आपस में समांतर नहीं, हर दिशा अपना अलग परिवार है। अब एक मुश्किल जोड़ी, एक segment 7 आगे और 3 ऊपर, दूसरा 9 आगे और 4 ऊपर।

इनकी दिशाओं में बस 0 दशमलव 7 6 degree का फ़र्क है। अब 100 मिलीमीटर लंबे segment पर इनके सिरे बस 1 दशमलव 3 मिलीमीटर अलग होंगे, ruler पर मुश्किल से दिखने लायक। फिर भी ये समांतर नहीं, 7 गुणा 4 minus 3 गुणा 9, यानी 1, 0 नहीं, और बढ़ाने पर ये मिल जाएँगी। खींची हुई line की अपनी मोटाई ही लगभग 1 दशमलव 6 degree का फ़र्क छुपा सकती है, यह फ़र्क उससे भी छोटा है, इसलिए आँख इन्हें अलग नहीं कर सकती।

यानी कागज़ पर जो दिखता है, वह इतना मोटा है कि ये दोनों दिशाएँ उसमें छुप जाती हैं। ऐसी जोड़ी को देखकर नहीं, कदमों की गिनती से तय करना होता है, जैसा अभी किया। एक आयताकार कागज़ के आमने सामने वाले किनारे समांतर हैं, और पड़ोसी किनारे एक दूसरे पर लंब। उसे किनारों के बराबर दिशा में आधा मोड़ो, तो किनारे मिलाकर 3 समांतर lines। फिर से आधा मोड़ो, तो 5, फिर 9, फिर 17, हर बार बीच में नए मोड़।

हर मोड़ पिछले हर खाने को आधा करता है, इसलिए हर बार पिछले खानों जितने नए मोड़ जुड़ते हैं। यानी मोड़कर, बिना नापे, समांतर lines का पूरा समूह बन जाता है। यह हिस्सा किसी नियम पर नहीं, एक ईमानदार बात पर खत्म होता है, कभी कभी देखकर पक्का कहा ही नहीं जा सकता। आगे बढ़ाकर देखो, दूरी नापो, keyboard जैसा लगता है या नहीं, ये सारी जाँचें सीमित चित्र की हैं।

और समांतर होना असीमित चीज़ का दावा है, जो किसी भी कागज़ पर पूरा दिख ही नहीं सकता। यह हार नहीं है, यह ईमानदारी है, कि आँख और ruler कहाँ तक काम आते हैं, और कहाँ नहीं। इसलिए दिखती हैं ईमानदार शब्द है, और पक्का करने के लिए आगे एक तर्क वाला तरीका आएगा। याद रखो, समांतर होना कभी न मिलने का दावा है, और कागज़ हमेशा सीमित है। परिभाषा की शर्तें, एक ही सपाट सतह, और कितना भी बढ़ाओ, कभी न मिलना।

मेज़ और board वाली lines कभी नहीं मिलतीं, फिर भी समांतर नहीं। और 2 जगह दूरी नापना एक अच्छा अंदाज़ा है, पर परिभाषा मिलने की बात करती है। segments का न छूना lines के बारे में कुछ नहीं बताता। जब तक तर्क न हो, सही बात यही है कि समांतर दिखती हैं, और मोड़कर समांतर बनाना सीखो।

यह कहाँ बैठता है

यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.

किस पर टिका है

आगे फिर कहाँ आता है

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