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Chapter 5 · Parallel and Intersecting Lines

Corresponding-angle वाली जाँच से parallel line बनाना

Drawing parallels9 मिनट

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समांतर lines बनाना एक बात है, और ऐसे बनाना कि उन पर शक ही न हो, दूसरी।

मुख्य idea

कोई रचना तभी किसी काम की है जब वह अपनी गारंटी ख़ुद साथ लाए, और इस section का पूरा तर्क यही है कि उसके दोनों तरीक़े एक ही गारंटी लाते हैं। set square सरकाना और अख़बार मोड़ना बिल्कुल अलग हुनर लगते हैं, लेकिन हर एक ठीक एक ही कारण से काम करता है: वह corresponding angles की ऐसी जोड़ी बनाता है जो बराबर हो — वह साझा angle चाहे जो भी हो। इसलिए औज़ार बस हिसाब रख रहा है, geometry नहीं कर रहा। इसीलिए आप set square फेंक सकते हैं और फिर भी मोड़कर पक्की parallel line बना सकते हैं — और इसीलिए "यह parallel दिखती है" को कभी जवाब का हिस्सा बनने की ज़रूरत नहीं।

आपको क्या आना चाहिए

  • सीधे किनारे और set square से दो parallel lines बनाना, और उस line का नाम बताना जो transversal का काम करती है
  • बताना कि रचना corresponding angles की कौन-सी जोड़ी बराबर बनाती है, और उनका नाप देना
  • समझाना कि उस एक जोड़ी का बराबर होना parallel होने की गारंटी के लिए काफ़ी क्यों है
  • instruments से, किसी दिए गए point से होकर किसी दी गई line के parallel line बनाना
  • यही रचना दो मोड़ों से करना, और बताना कि हर मोड़ क्या पक्का करता है
  • वह आम नतीजा बताना जो दोनों रचनाओं में साझा है: एक ही plane में, किसी एक line पर perpendicular दो lines आपस में parallel होती हैं
  • बनाई गई parallels की जोड़ी को corresponding angles नापकर या tracing करके जाँचना, और बताना कि यह जाँच proof नहीं, पुष्टि क्यों है

जानने लायक़ शब्द

शब्दएक line में परिभाषाहिंदी / क्षेत्रीय समकक्षपहली बार कहाँ आया
set squaregeometry box का right angle वाला drawing त्रिभुजसेट स्क्वायर§5.7, p.118 में छपा
scaleline खींचने वाले सीधे किनारे के लिए किताब का शब्दपैमाना§5.1, p.106 में और फिर §5.7, p.118 में छपा
transversalऐसी line जो दो दूसरी lines को काटती हुई निकलती हैतिर्यक रेखा§5.5, p.115 में छपा
corresponding anglesदो angles, हर कटान पर एक, मिलती-जुलती जगहों परसंगत कोण§5.6, p.115 में छपा
perpendicularright angles पर कटनालंब§5.2, p.109 में छपा
creaseमोड़ने पर शीट में बची सीधी lineमोड़"Making Parallel Lines through Paper Folding", p.119 में छपा
necessary and sufficientदोनों दिशाओं में काम करना, ताकि एक जाँच सवाल तय कर देआवश्यक और पर्याप्तNote to the Teacher, §5.7, p.119 में छपा
geometry boxinstruments का वह set जिससे पाठक को बनाने के लिए कहा जाता हैज्यामिति पेटीFigure it Out, §5.7, p.119 में छपा
constructionऐसे तरीक़े से बनाई गई drawing जो अपने नतीजे की गारंटी ख़ुद देता हैरचनाये तरीक़े जो बनाते हैं उसके लिए यहाँ इस्तेमाल किया गया शब्द; इस chapter में नहीं छपा

हिंदी column में NCERT की standard हिंदी गणितीय शब्दावली है। Ganita Prakash Part I का हिंदी संस्करण इस brief के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री में नहीं है, इसलिए इन शब्दों को हिंदी छपाई से नहीं मिलाया गया — Notes देखें।

लोग कहाँ चूकते हैं

  • "set square ही lines को parallel बनाता है।" set square एक दोहराया गया angle देता है; corresponding-angle वाला नतीजा उस दोहराए गए angle को parallel होने में बदलता है। Section 5 इसे ठोस बनाता है: right angle के अलावा कोई angle दोहराओ, और फिर भी parallels मिलती हैं।
  • "ruler के साथ सरकाना बस सफ़ाई रखने का तरीक़ा है।" यही वह क़दम है जो पक्का करता है कि angle दोनों बार वही angle है। ruler हिल जाए, तो गारंटी चली जाती है और drawing का कोई मतलब नहीं रहता।
  • "मुझे तैयार जोड़ी नापकर साबित करना चाहिए कि यह काम कर गया।" नापना पुष्टि करता है; रचना साबित करती है। chapter का अपना note p.108 पर पहले ही समझा चुका है कि आप कितने भी सावधान हों, नाप थोड़ा चूकेगा ही।
  • "मोड़ने वाला तरीक़ा set square वाले तरीक़े से अलग विचार है।" वे एक ही विचार हैं। दोनों एक साझा line के साथ दो right angles बनाते हैं। Section 10 में दोनों figures अगल-बगल दिखनी चाहिए, उन्हीं तीन lines के नामों के साथ।
  • "किसी चीज़ पर perpendicular कोई भी दो lines parallel होती हैं।" सिर्फ़ तब, जब तीनों एक plane में हों। space में, एक ही line पर perpendicular दो lines का parallel होना ज़रूरी नहीं — p.110 वाली एक-ही-plane शर्त यहाँ असली काम कर रही है।
  • "किसी point से होकर parallel तभी बन सकती है जब point सुविधाजनक जगह पर हो।" line से बाहर किसी भी point से होकर ठीक एक parallel गुज़रती है, और दो-मोड़ वाला तरीक़ा point चाहे कहीं भी हो, उस तक पहुँच जाता है।
पूरा transcript1,414 शब्द

समांतर lines को पहचानना एक काम है, बनाना दूसरा, आज उन्हें बनाना है, और ऐसे बनाना कि उन पर शक ही न हो। कोई बनावट तभी काम की है जब वह अपनी गारंटी खुद लेकर चले, कि जो बना वह पक्का समांतर है। देखने में सही लगना काफ़ी नहीं, क्योंकि कागज़ सीमित है और आँख धोखा खाती है। गारंटी का मतलब, बनाने का हर कदम किसी साबित बात पर टिका हो, ताकि नतीजा देखे बिना पक्का हो।

आज 2 तरीके देखेंगे, set square सरकाना और कागज़ मोड़ना, और देखेंगे कि दोनों एक ही वजह से काम करते हैं। एक ruler रखो और उसके किनारे पर line l खींचो। ruler को वहीं दबाकर रखो, बिल्कुल न हिले। set square को ruler से सटाकर रखो, उसके छोटे किनारे से एक line खींचो, फिर set square को ruler पर सरकाओ और दूसरी line खींचो। दोनों बार set square का वही किनारा, और ruler से उसी तरह सटा हुआ, यही बात सबसे ज़रूरी है।

अब l से निकलती 2 नई lines हैं, और दोनों समांतर दिखती हैं। पर दिखने की बात छोड़ो, ये समांतर क्यों हैं, इसकी गारंटी कहाँ से आई? चित्र को नए ढंग से देखो, line l अब वह line है जो दोनों नई lines को काटती है। यानी l दोनों नई lines का transversal है। transversal कोई खास line नहीं, जो भी line दोनों को काटे, वह transversal है, और यहाँ वह line l ही है।

तो 2 crossings बनीं, पहली नई line और l की, और दूसरी नई line और l की। set square के एक कोने में right angle बना हुआ है, इसलिए हर नई line, l से 90 पर मिलती है। और दोनों angle एक जैसी जगह पर हैं, क्योंकि set square एक ही तरह से, एक ही तरफ़ रखा गया। तो corresponding angles 90 और 90, बराबर। और corresponding angles वाली पक्की जाँच कहती है, बराबर corresponding angles, तो lines समांतर।

कड़ी पूरी हुई, set square से 90, एक जैसी जगह से corresponding, बराबरी से समांतर, हर कदम किसी साबित बात पर। ruler को हर पूरे degree की दिशा में रखकर यह बनावट बनाई गई, कुल 180 दिशाओं में दोनों angle 90 पढ़े गए, और lines एक ही दिशा में निकलीं। अब set square को घुमाकर उसके लंबे किनारे से खींचो। अब नई lines, l पर तिरछी हैं, 90 पर नहीं, पकड़ के हिसाब से 30 या 60 degree पर।

फिर भी दोनों नई lines समांतर हैं, क्योंकि दोनों बार वही angle दोहराया गया। हर पूरे degree का किनारा, हर ruler दिशा पर, कुल 32,220 मामले, हर बार दोनों corresponding angles बराबर, और lines एक ही दिशा में। यह बात खुलकर कहनी ज़रूरी है, वरना लगता है कि समांतर lines बनाने के लिए right angle चाहिए ही। यानी 90 होना ज़रूरी नहीं, ज़रूरी है वही angle दोबारा बनना। set square lines को समांतर नहीं बनाता, वह बस एक ही angle बार बार देता है।

दोहराए हुए angle को समांतर lines में बदलने का काम corresponding angles वाली जाँच करती है। कोई भी चीज़ जिसका एक पक्का angle हो, जैसे किसी गत्ते के डिब्बे का कोना, वही काम कर सकती है, बस उसे ruler पर सरकाते रहो। औज़ार हिसाब रखता है, कि angle वही रहे, geometry का काम तो वह जाँच करती है। ruler पर सरकाना सफ़ाई के लिए नहीं, यही वह कदम है जो पक्का करता है कि दोनों बार angle वही है।

अगर दोनों lines के बीच ruler ज़रा सा घूम गया तो? अब 1 से 10 degree तक का घुमाव, हर ruler दिशा पर आज़माया गया, कुल 1800 मामले, और हर बार lines ठीक उतना ही झुकीं जितना ruler घूमा। और उनमें से एक भी जोड़ी समांतर नहीं निकली, 0। एक degree का घुमाव भी काफ़ी है, lines कागज़ पर समांतर दिखेंगी, पर कहीं दूर जाकर मिल जाएँगी। ruler हिला, तो गारंटी गई, और फिर बनी हुई आकृति का कोई मतलब नहीं।

अपनी बनाई जोड़ी जाँचो, एक angle tracing paper पर उतारकर दूसरे पर रखो, या protractor से दोनों नापो। नाप में ज़रा सा फ़र्क आएगा, line की मोटाई और हाथ की वजह से, यह हर खींची हुई line के साथ होता है। tracing वाला तरीका बिना number के दिखाता है कि angle वही है, protractor number देता है, दोनों पुष्टि के तरीके हैं। नापना पुष्टि करता है, साबित बनावट करती है, क्योंकि उसके पीछे तर्क है।

जाँच दोनों तरफ़ चलती है, बराबर corresponding angles, ठीक तब, जब lines समांतर। एक दिशा कहती है बराबर angle तो समांतर, वही बनाने में काम आई, दूसरी कहती है समांतर तो बराबर angle, वह जाँचने में। इसलिए एक ही जोड़ी जाँचना काफ़ी है, बाकी जोड़ियाँ अपने आप ठीक बैठती हैं। अब मुश्किल काम, एक line l है, और उसके ऊपर एक बिंदु A, और A से होकर l के समांतर line खींचनी है।

A से होकर बिंदुओं के जाल पर 48 अलग दिशाएँ आज़माई गईं, उनमें 47 कहीं न कहीं l से मिल जाती हैं, और सिर्फ़ 1 कभी नहीं मिलती। यानी A से होकर l की समांतर line ठीक एक है, न ज़्यादा, न कम। अब खुद सोचो, ruler और set square से यह एक line कैसे खींचोगे, और अपना तरीका शब्दों में लिखो। और A चाहे कहीं भी हो, पास या दूर, आगे वाला मोड़ने का तरीका उस तक पहुँच जाता है।

अब बिना औज़ार, एक कागज़ मोड़कर एक सीधा निशान बनाओ, वही line l, और उसके ऊपर बिंदु A लगाओ। अब कागज़ ऐसे मोड़ो कि मोड़ A से होकर जाए, और l का एक हिस्सा उसके दूसरे हिस्से पर ठीक बैठ जाए। यहाँ कोई ruler नहीं, कोई set square नहीं, कागज़ का मुड़ना ही औज़ार है। यह नया निशान t, l पर लंब है, क्योंकि मोड़ के दोनों तरफ़ के angle बराबर हैं, और बराबर पड़ोसी 90 के होते हैं।

अब फिर से मोड़ो, इस बार A से होकर, ऐसे कि t अपने ऊपर आ जाए। यह तीसरा निशान m, t पर लंब है, उसी वजह से। l की हर पूरे degree की दिशा के लिए ये दोनों मोड़ बनाए गए, कुल 180 में m ठीक l की दिशा में निकली। कागज़ खोलो, 3 निशान दिखेंगे, l, उस पर लंब t, और A से होकर जाती m। अब सवाल, l और m समांतर क्यों हैं?

t, l को भी काटती है और m को भी, यानी t दोनों का transversal है। t, l से 90 पर मिलती है, और m से भी 90 पर, और ये दोनों angle एक जैसी जगह पर हैं। तो corresponding angles 90 और 90, बराबर, और lines समांतर, वही जाँच, वही गारंटी। यह सवाल नया लगा, पर जवाब के सारे औज़ार हमारे पास पहले से थे, transversal और corresponding angles।

गौर करो, m और t वाली crossing भी पूरी तरह लंब है, वहाँ भी angle 90 है, चाहे उस पर निशान लगा हो या नहीं। अब दोनों तरीके आमने सामने रखो, set square वाला और मोड़ने वाला। दोनों में 3 lines हैं, एक साझा line, और 2 lines जो उससे एक ही angle पर मिलती हैं। हाथ का हुनर अलग है, एक में सरकाना, दूसरे में मोड़ना, पर दोनों में काम करने की वजह एक ही।

set square में साझा line ruler वाली l थी, मोड़ने में t, पर वजह वही, दोहराया हुआ angle, और corresponding angles की जाँच। इन दोनों से एक आम बात निकलती है, जो हम अपनी तरफ़ से कह रहे हैं। एक ही सपाट सतह पर, अगर 2 lines किसी तीसरी line पर लंब हों, तो वे आपस में समांतर हैं। हर पूरे degree की दिशा वाली line के लिए, उस पर 90 पर मिलने वाली दिशा ठीक एक ही है, कुल 180 दिशाओं में।

यह आम बात हमने इन 2 तरीकों से निकाली है, इसे एक नियम की तरह हम अपनी तरफ़ से रख रहे हैं। तो उस पर लंब कोई भी 2 lines उसी एक दिशा में होंगी। पर यह बात सिर्फ़ एक सपाट सतह पर सच है। कमरे में सोचो, फ़र्श पर एक line, और कहीं और से सीधी ऊपर उठती एक line, दोनों किसी तीसरी line पर लंब। ये कभी नहीं मिलतीं, बहुत से बिंदु जाँचे गए, एक भी साझा नहीं, और एक दिशा में भी नहीं, एक आड़ी, एक खड़ी।

इसलिए परिभाषा वाली वह शर्त, एक ही सपाट सतह, यहाँ भी पूरा काम कर रही है। याद रखो, बनावट की कीमत उसकी गारंटी में है, दिखने में नहीं। set square और मोड़, दोनों एक ही angle दोहराते हैं, और जाँच उसे समांतर में बदलती है। ruler हिला, तो angle बदला, और गारंटी गई। किसी बाहर के बिंदु से होकर समांतर line ठीक एक है। और 2 लंब lines समांतर, सिर्फ़ एक ही सपाट सतह पर।

यह कहाँ बैठता है

यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.

किस पर टिका है

आगे फिर कहाँ आता है

इसके ठीक पहले और ठीक बाद

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