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Chapter 1 · Geometric Twins

SSS: तीन sidelengths एक triangle को पूरी तरह तय कर देती हैं

Congruence criteria for triangles11 मिनट

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3 लंबाइयों से त्रिभुज बनाओ, तो circles 2 जगह मिलते हैं, यानी 2 त्रिभुज। फिर नकल पक्की कैसे? जवाब मोड़ में है: वे 2 बिंदु आधार के आर पार एक दूसरे की परछाईं हैं, और पलटना जायज़ चाल है।

मुख्य idea

Meera कहती है कि तीन भुजाओं की लंबाइयाँ काफ़ी हैं, और Rabia आपत्ति करती है — सही आपत्ति — कि इनसे triangle बनाने पर एक नहीं, दो जवाब निकलते हैं, क्योंकि दोनों circles दो बार कटते हैं। chapter इस आपत्ति को टालता नहीं; वह इसे मान लेता है और फिर दिखाता है कि दोनों जवाब base के आर-पार एक-दूसरे का प्रतिबिंब हैं, और प्रतिबिंब (पलटना) उन चालों में से एक है जिसकी congruence पहले से छूट देती है। इसलिए SSS का मतलब यह नहीं कि "construction संयोग से ठीक बैठ जाता है"; मतलब यह है कि "construction जो इकलौती छूट छोड़ता है वह एक पलटना है, और पलटना मुफ़्त है।" इसीलिए तीन numbers एक triangle को कमरे के इस पार से उस पार ले जा सकते हैं, और यही तर्क आगे chapter में तय करेगा कि SSA क्यों नाकाम होता है।

आपको क्या आना चाहिए

  • SSS शर्त को उसी रूप में बताना जिसमें chapter बताता है
  • तीन दी गई लंबाइयों के लिए segment-और-दो-circles वाला construction करना
  • समझाना कि उस construction से एक नहीं, दो points क्यों मिलते हैं
  • बनने वाले दोनों triangles आपस में मेल खाते हैं या नहीं, इसे परखने के कम से कम दो तरीक़े बताना
  • base को मोड़ वाली line मानकर तर्क देना कि दोनों congruent हैं
  • समझाना कि यह तर्क इस्तेमाल हुई ख़ास लंबाइयों पर क्यों निर्भर नहीं करता
  • बताना कि SSS से तुम क्या कर पाते हो, जिसमें angles भी नापने से कुछ नहीं जुड़ता
  • साझा भुजा को ऐसी तीसरी बराबरी के रूप में पहचानना जिसे कभी नापना नहीं पड़ा

जानने लायक़ शब्द

शब्दएक line में परिभाषाहिंदी / क्षेत्रीय समकक्षपहली बार कहाँ आया
sidelengthstriangle की तीनों भुजाओं की लंबाइयाँ, जिसे यह किताब एक शब्द में लिखती हैभुजाओं की लंबाइयाँ§1.2, Part II, pp.5–6 में छपा, और फिर SUMMARY, p.22 में
SSS conditionयह नियम कि बराबर sidelengths से congruence पक्की हो जाती हैभुजा-भुजा-भुजा (SSS) प्रतिबंध§1.2, Part II, p.6 में bold में छपा
conditioncongruence की किसी काफ़ी कसौटी के लिए इस किताब का शब्दप्रतिबंधपूरे §1.2, Part II, pp.6–17 में छपा
guaranteeवह जो कोई condition करती है जब वह congruence को सिर्फ़ मुमकिन नहीं, बल्कि पक्का कर देती हैसुनिश्चित करना§1.2, Part II, pp.12, 16 में, और SUMMARY, p.22 में छपा
line of symmetryवह line जिस पर आकृति को मोड़ने से दोनों आधे हिस्से पूरी तरह मिल जाएँसममिति रेखा§1.2, Part II, p.6 में छपा
cutoutकिसी आकृति की paper वाली नक़ल, काटकर निकाली हुई ताकि उसे दूसरी पर रखा जा सकेकटान आकृति§1.2, Part II, pp.4, 6, 8 में छपा
common sideवह भुजा जो तुलना किए जा रहे दोनों triangles की हैउभयनिष्ठ भुजा§1.2, Part II, p.8 में और §1.3, p.18 में छपा
measuring tapeलचीला फीता, उन लंबाइयों के लिए जहाँ ruler नहीं पहुँचतामापन फीता§1.2, Part II, p.5 में छपा
protractorangle को degrees में पढ़ने का औज़ारचाँदा§1.2, Part II, p.5 में छपा
criterionवह शब्द जो कई किताबें उस चीज़ के लिए इस्तेमाल करती हैं जिसे यह किताब condition कहती हैकसौटीइस chapter में नहीं छपा; chapter हर जगह condition कहता है, और व्याख्या को भी यही कहना चाहिए
reflectionवह पलटना जो बने हुए दो triangles में से एक को दूसरे पर ले आता हैपरावर्तनइस पाठ का शब्द, इस chapter में नहीं छपा — chapter flipped कहता है और उसकी जगह line of symmetry का नाम लेता है
ambiguityऐसे construction के लिए इस पाठ का नाम जिसके एक से ज़्यादा जवाब हो सकते हैंअस्पष्टताइस पाठ का शब्द, इस chapter में नहीं छपा

हिंदी column में NCERT की standard हिंदी गणितीय शब्दावली दी गई है। इस brief के लिए Ganita Prakash Part II का हिंदी संस्करण उपलब्ध नहीं था — Notes देखें।

लोग कहाँ चूकते हैं

  • "दो circles का दो बार कटना मतलब triangle तय नहीं है।" यह Rabia की अपनी चिंता है और अच्छी चिंता है — यही चीज़ p.12 पर SSA को डुबो देती है। SSS को जो बचाता है वह यह है कि यहाँ दोनों कटान AB के उलटी तरफ़ बैठते हैं, इसलिए दोनों triangles एक-दूसरे का पलटा हुआ रूप हैं। बीच वाला क़दम ही सबक़ है।
  • "सुरक्षित रहने के लिए angles भी चाहिए।" Meera की बात ही chapter की राय है: तीनों लंबाइयाँ हाथ में हों, तो angles नापने से कुछ नहीं जुड़ता। फ़ालतू माप किसी तय आकृति को और ज़्यादा तय नहीं कर सकते।
  • "SSS सच है क्योंकि मैंने तीन triangles बनाए और वे मेल खा गए।" तीन drawings सबूत हैं। कारण मोड़ वाली line का तर्क है, जो कोई ख़ास numbers इस्तेमाल ही नहीं करता — और इसीलिए 4, 6, 8 की जगह 40, 60, 80 रखने से कुछ नहीं बदलता।
  • "दोनों triangles की साझा भुजा गिनी नहीं जा सकती।" यह chapter की सबसे काम की बराबरी है। Fig. 1.1 में साझा segment BD ही दो दी गई बराबरियों को उन तीन में बदलता है जो SSS को चाहिए, और यही चाल बाद की हर उस exercise में फिर आती है जो किसी कटान या साझा किनारे पर बनी है।
  • "कोई भी तीन लंबाइयाँ triangle बना देती हैं।" chapter यह बात नहीं उठाता। सिर्फ़ वही कहो जो chapter कहता है: triangles की ऐसी जोड़ी दी हो जिनकी तीनों sidelengths मेल खाती हैं, तो congruence अपने-आप आती है।
  • "congruent का मतलब है कि दोनों triangles एक ही तरफ़ सीधे बैठे हैं।" p.5 के ΔABE और ΔABF उलटी दिशाओं में इशारा करते हुए भी congruent हैं। वही तस्वीर इसका इलाज है।
पूरा transcript1,549 शब्द

घास पर लकड़ी का एक त्रिभुज वाला ढाँचा खड़ा है। यह किसी भी कागज़ से बड़ा है, इसलिए इसे ट्रेस नहीं कर सकते। फिर भी इसकी हूबहू नकल कहीं और बनानी है, तो अपने पास क्या लेकर जाएँ? जवाब सीधा लगता है, पर उसके बीच एक अच्छी आपत्ति छिपी है, और यहाँ का असली पाठ वही है। यहाँ 2 दोस्त फ़ीते से भुजाएँ नापती हैं, 40, फिर 60, और 80 सेंटीमीटर।

एक दोस्त angle नापने के लिए चाँदा उठाती है। दूसरी रोक देती है, 3 भुजाएँ काफ़ी हैं। क्या सच में 3 लंबाइयाँ पूरा त्रिभुज एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकती हैं? पन्ने पर बनाने के लिए हर लंबाई को 10 से भाग करो। मिलता है, 4, 6 और 8 सेंटीमीटर। सवाल वही रहता है, बस अब पन्ने पर बनाकर देख सकते हैं। पहले आधार, A से B तक 6 सेंटीमीटर की सीधी भुजा।

अब तीसरा कोना ढूँढना है, जो A से 4 और B से 8 दूर हो। आधार कोई भी भुजा हो सकती है, अभी 6 वाली लेते हैं, बाकी बाद में जाँचेंगे। A से ठीक 4 दूर वाले सारे बिंदु, A के चारों ओर radius 4 वाले एक circle पर हैं। B से ठीक 8 दूर वाले सारे बिंदु, B के चारों ओर radius 8 वाले circle पर। तीसरा कोना दोनों पर होना चाहिए, यानी जहाँ ये दोनों circles मिलें।

circle ही क्यों? क्योंकि किसी एक बिंदु से तय दूरी वाले सारे बिंदु मिलकर circle ही बनाते हैं। दोनों circles 2 जगह मिलते हैं। एक बिंदु आधार के ऊपर, उसे E कहो, और एक नीचे, उसे F। दोनों A से 1 इकाई पीछे की सीध में, एक ऊपर, एक नीचे। और दोनों आधार से बराबर दूरी पर, एक ठीक ऊपर, दूसरा ठीक नीचे। अब दूसरी दोस्त टोकती है, 2 बिंदु, यानी 2 त्रिभुज, A B E और A B F।

तो 3 लंबाइयों से जवाब एक नहीं, 2 निकले, फिर नकल पक्की कैसे? यह आपत्ति सही है, इसे टाला नहीं जा सकता, इसका जवाब ढूँढना होगा। आपत्ति से सीधे नतीजे पर कूदना गलत होगा, बीच का कदम ही असली पाठ है। A B E में, A E बराबर 4, A B बराबर 6, और B E बराबर 8। A B F में भी, A F बराबर 4, A B बराबर 6, और B F बराबर 8।

दोनों में वही 3 लंबाइयाँ, पर क्या ये 2 अलग त्रिभुज हैं, या एक ही? पहली जाँच, A B E को ट्रेसिंग पर उतारो, और A B F पर रखो। खिसकाओ, घुमाओ, जितना चाहो, नहीं मिलता। ट्रेसिंग पलटो, अब पूरा मिल जाता है। दूसरी जाँच, A B E को काटकर निकालो, और A B F पर रखो। फिर वही बात, टुकड़ा उलटकर रखो, तो ठीक बैठता है। ये 2 जाँचें मेज़ पर की जा सकती हैं, पर ये बस इसी एक जोड़े के बारे में बताती हैं।

तीसरी जाँच, A B को मोड़ने वाली लकीर मानो। circles A और B के चारों ओर बने थे, जो इसी लकीर पर हैं, इसलिए ऊपर और नीचे की बनावट हूबहू एक जैसी है। मोड़ो, तो E ठीक F पर गिरता है, और A, B अपनी जगह रहते हैं। यही असली वजह है, पहली 2 जाँचें सबूत हैं, यह तीसरी कारण। मोड़ क्यों काम करता है? दोनों circles के केंद्र, A और B, मोड़ने वाली लकीर पर ही हैं।

ऐसा circle मोड़ने पर अपने ऊपर ही गिरता है, हर circle पर 360 बिंदु लगाकर मोड़ो, सभी 360 फिर उसी circle पर। तो ऊपर जहाँ दोनों circles मिलते हैं, मोड़ने पर वह बिंदु नीचे भी दोनों circles पर गिरेगा, यानी F पर। अब E को F से जोड़ो। यह लकीर A B को ठीक 90 degree पर काटती है। और A B इसे ठीक बीच से 2 बराबर हिस्सों में बाँटता है।

किसी लकीर के आर पार परछाईं की यही पहचान है, सीधे सामने, और बराबर दूरी पर। A से B, फिर E, कोनों को इस क्रम में पढ़ो, तो घड़ी की उलटी दिशा में घूमते हो। A से B, फिर F, तो घड़ी की दिशा में। दोनों का क्षेत्रफल बराबर, बस घूमने की दिशा उलटी। घुमाने से दिशा कभी नहीं बदलती, इसीलिए इन्हें मिलाने के लिए पलटना ही पड़ा। तो 3 लंबाइयाँ जो छूट छोड़ती हैं, वह बस एक पलटना है।

और congruent की जाँच में पलटना पहले से जायज़ चाल है। इसलिए A B E और A B F, 2 जवाब नहीं, एक ही जवाब के 2 रूप हैं। पलटी हुई आकृति अलग आकृति नहीं होती, बस उसका मुँह दूसरी तरफ़ है। मोड़ वाले तर्क में 4, 6 या 8 कहीं इस्तेमाल नहीं हुए। आधार और दोनों radius, 1 से 12 तक की हर पूरी संख्या लो। इनमें 870 चुनावों में circles 2 बार मिलते हैं।

और 870 के 870 में, दोनों बिंदु आधार के आर पार एक दूसरे की परछाईं, और त्रिभुज पलटकर मिल जाते हैं। इसीलिए 4, 6 और 8 की जगह, 40, 60 और 80 लेने से तर्क में कुछ नहीं बदलता। कोई कहे, मैंने 3 त्रिभुज बनाए, सब मिल गए, इसलिए नियम सही। वह सबूत है, कारण नहीं, किसी और बार की संख्याएँ अलग हो सकती हैं। कारण मोड़ वाला तर्क है, जो किसी खास संख्या पर टिका ही नहीं।

अब असली ढाँचा, आधार 60, circles 40 और 80 के। वही तस्वीर, बस 10 गुना बड़ी, और फिर से 2 बिंदु, एक दूसरे की परछाईं। पर यह पन्ने वाले छोटे त्रिभुज पर नहीं बैठता, नाप भी मिलना चाहिए। इन्हीं 3 लंबाइयों से 200 बार त्रिभुज बनाओ। आधार कहीं भी, किसी भी दिशा में, और ऊपर या नीचे वाला बिंदु, बिना सोचे चुनो। सभी 200, A B E पर बैठ जाते हैं, कुछ घुमाकर, कुछ पलटकर।

कौन सा बिंदु चुना, इससे बस इतना फ़र्क पड़ा कि मिलाने के लिए घुमाना पड़ा या पलटना। आधार 6 वाली भुजा ही हो, ऐसा ज़रूरी नहीं, 4 वाली या 8 वाली से भी शुरू कर सकते हो। और 3 तरह के आधार, हर बार 2 बिंदु, कुल 6 बनावटें। सभी 6, A B E पर बैठ जाती हैं। नतीजा, अगर एक त्रिभुज की तीनों भुजाएँ, दूसरे की तीनों भुजाओं के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज congruent हैं।

इसका नाम SSS, यानी तीनों बराबरियाँ भुजाओं की। ध्यान रहे, नियम यह बताता है कि बराबर भुजाओं वाले 2 त्रिभुज congruent होंगे, बस इतना ही। कोई कहे, पक्का करने के लिए angles भी नाप लो। angles तो पहले से तय हैं, A पर लगभग 104 degree, B पर 29, और E पर 47 degree। चित्र से नापो, या 3 लंबाइयों से हिसाब लगाओ, वही angles। और सभी 200 नकलों में यही angles।

जो आकृति पहले से पूरी तय है, उसे और नाप पक्का नहीं कर सकते। A B E ऊपर की ओर है, A B F नीचे की ओर। फिर भी दोनों congruent हैं। congruent का मतलब यह नहीं कि दोनों एक ही तरफ़ मुँह किए बैठे हों। फ़र्क बस इतना कि एक ऊपर मुँह किए है और दूसरा नीचे, और पलटने से यह फ़र्क मिट जाता है। अब एक आयत A B C D, ऊपर बाएँ A, ऊपर दाएँ B, नीचे दाएँ C, नीचे बाएँ D।

B से D तक एक विकर्ण खींचो, 2 त्रिभुज बनते हैं, A B D और C D B। आयत है, इसलिए A B बराबर C D बराबर 5, और A D बराबर C B बराबर 3। SSS के लिए तीसरी बराबरी कहाँ से आएगी? B D को किसी ने नापा नहीं, फिर भी वही काम आने वाली है। तीसरी बराबरी खुद B D है, यह दोनों त्रिभुजों की भुजा है।

कोई सोचे, साझी भुजा गिनती में नहीं आती, पर यही सबसे काम की बराबरी है। तीनों बराबरियाँ पूरी, इसलिए A B D और C D B congruent। और सच में, A B D को आधा चक्कर, यानी 180 degree घुमाओ, तो C D B पर बैठ जाता है। अब दूसरा विकर्ण, A से C, खींचो। फिर 2 बराबरियाँ आयत से, और तीसरी साझी भुजा A C से। A B C, आधा चक्कर घूमकर C D A पर बैठता है।

खुद करो, एक पतंग जैसी आकृति, ऊपर A, बाएँ B, नीचे C, दाएँ D। A B बराबर A D, और C B बराबर C D, और A से C तक एक लकीर। A C दोनों त्रिभुजों की साझी भुजा, तो A B C और A D C, SSS से congruent। A C के आर पार पलटो, तो एक दूसरे पर बैठते हैं। यहाँ भी साझी भुजा के बिना SSS पूरा नहीं होता, वही तीसरी बराबरी देती है।

और इससे एक नई बात मिलती है। A पर का angle, A C से 2 बराबर हिस्सों में बँटता है, B A C बराबर D A C। C पर भी, B C A बराबर D C A। congruent साबित होते ही, एक त्रिभुज के हिस्से दूसरे के मेल वाले हिस्सों के बराबर। खुद बनाओ, भुजाएँ 5, 5 और 8। आधार 8, और दोनों सिरों से 5 radius वाले circles। ये 2 जगह मिलते हैं, आधार पर 4 इकाई आगे, और 3 इकाई ऊपर और नीचे।

और फिर वही बात, दोनों त्रिभुज पलटकर एक दूसरे पर बैठते हैं। याद रखो, 3 लंबाइयों से बनाने पर circles 2 जगह मिलते हैं। पर वे 2 बिंदु आधार के आर पार एक दूसरे की परछाईं हैं। पलटना जायज़ चाल है, इसलिए जवाब असल में एक ही। अब 3 भुजाएँ बराबर, तो त्रिभुज congruent, यही SSS। और साझी भुजा भी बराबरी गिनी जाती है। और ट्रेस करना, काटकर रखना, मोड़ना, इन तीनों जाँचों में कारण मोड़ है।

यह कहाँ बैठता है

यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.

किस पर टिका है

आगे फिर कहाँ आता है

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