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Chapter 7 · A Tale of Three Intersecting Lines

triangle बनाने में compass, अंदाज़े से बार-बार की कोशिश से बेहतर क्यों है

Constructing from three sides11 मिनट

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3 भुजाएँ 4, 4 और 4 सेंटीमीटर हों, तो बस ruler से त्रिभुज बनाना अंदाज़े का खेल है: 179 दिशाओं में से बस 1 पर तीसरी भुजा ठीक 4 निकलती है।

मुख्य idea

Compass कोई ज़्यादा साफ़-सुथरा ruler नहीं है। ruler से point mark करो तो ऐसा point मिलता है जो A से संयोग से 4 cm दूर है, और फिर तुम्हें जाकर जाँचना पड़ता है कि क्या वह B से भी 4 cm दूर है — और अक्सर वह नहीं होता। arc इससे अलग क़िस्म की चीज़ है: वह उस दूरी पर पड़ा हर point है, एक साथ। इसलिए जहाँ दो arcs कटते हैं, वहाँ दूरी वाली दोनों शर्तें पहले से सच होती हैं, और बाद में की गई कोई भी नाप उसे पलट नहीं सकती। इसीलिए construction पूरा हो जाता है, और इसीलिए "क्या तुम देख सकते हो कि यह क्यों काम करता है?" का जवाब ही असली बात है, कोई फ़ुटनोट नहीं।

आपको क्या आना चाहिए

  • नाम लिखे हुए triangle के तीन vertices, तीन sides और तीन angles के नाम बताना, और triangle का नाम vertices के किसी भी क्रम में लिखना
  • समझाना कि सिर्फ़ ruler से triangle बनाने में बार-बार कोशिश क्यों करनी पड़ती है, जबकि compass से नहीं
  • बताना कि A को centre लेकर बने 4 cm radius वाले arc में क्या-क्या आता है, और यही बात उसे सही औज़ार क्यों बनाती है
  • बने हुए figure को नापे बिना सही ठहराना कि दो arcs का crossing point base के दोनों vertices से सही दूरी पर क्यों है
  • compass से दी गई sidelength का equilateral triangle बनाना
  • तीन दी गई sidelengths से triangle बनाना: base चुनकर, और छपे हुए चार steps से गुज़रते हुए
  • बताना कि पूरे circles की जगह छोटे arcs क्यों लिए जा सकते हैं, और इससे तर्क कमज़ोर क्यों नहीं होता
  • बराबर sidelengths की गिनती से equilateral और isosceles में फ़र्क़ करना

जानने लायक़ शब्द

शब्दएक पंक्ति में अर्थहिंदी / क्षेत्रीय समकक्षपहली बार कहाँ
triangleसबसे सरल बंद आकृति: तीन corner points, जोड़ियों में आपस में जुड़े हुएत्रिभुजपूरे chapter में छपा, p.146 से
vertextriangle के तीन corner points में से एकशीर्षp.146 पर छपा
sidevertices की किसी जोड़ी को जोड़ने वाले तीन segments में से एकभुजाp.146 पर छपा
sidelengthकिसी side की लंबाई, जिसे यह किताब एक शब्द में लिखती हैभुजा की लंबाईp.148 पर छपा और पूरे §7.2 में इस्तेमाल हुआ
marked rulerscale वाला सीधा किनारा, जो line खींचने के साथ नाप भी सकता हैअंकित रूलरp.147 पर छपा
compassदो टाँगों वाला औज़ार जो किसी point के चारों ओर एक तय दूरी घुमाकर ले जाता हैपरकारp.147 पर छपा
arccircle का हिस्सा: किसी centre से एक तय दूरी पर पड़े pointsचापp.147 पर छपा
radiuscentre से circle या arc के किसी भी point तक की तय दूरीत्रिज्याp.147 पर छपा
circlecentre से एक तय दूरी पर पड़ा हर pointवृत्तp.149 पर छपा
centreवह point जिसके चारों ओर circle या arc बनाया जाता हैकेंद्रp.149 पर छपा
baseसबसे पहले बनाई गई side, जिसे सवाल नहीं देता बल्कि तुम ख़ुद चुनते होआधारp.147 पर छपा
point of intersectionवह point जहाँ बनाई गई दो curves एक-दूसरे को काटती हैंप्रतिच्छेद बिंदुp.148 पर छपा और फिर p.150 पर
equilateral triangleऐसा triangle जिसकी तीनों sides बराबर लंबाई की होंसमबाहु त्रिभुज§7.1 के heading के रूप में छपा, p.146, और फिर p.150 के text में
isosceles triangleऐसा triangle जिसकी दो sides बराबर लंबाई की होंसमद्विबाहु त्रिभुजp.150 पर bold में छपा

Hindi column में standard NCERT हिंदी गणितीय शब्दावली दी गई है। Ganita Prakash Part I का हिंदी संस्करण यहाँ इस्तेमाल किए गए corpus में नहीं है, इसलिए ये शब्द हिंदी छपाई से नहीं लिए गए — Notes देखें।

समझाते समय दो सावधानियाँ। किताब sidelength को एक शब्द में लिखती है और लगातार इसका इस्तेमाल करती है; इसे बनाए रखो, क्योंकि "side की लंबाई" कहने से student को लगने लगता है कि लंबाई side से अलग कोई चीज़ है। और इस topic में शब्द congruent की कभी ज़रूरत नहीं पड़ती — यह शब्द इस chapter में कहीं छपा ही नहीं है (छपे हुए सभी सत्ताईस pages देखकर जाँचा गया)।

लोग कहाँ चूकते हैं

  • "compass बस line खींचने का ज़्यादा साफ़ तरीक़ा है।" यह एक अलग दावा है। ruler का निशान एक दूरी का दावा करता है; arc points के पूरे समूह का दावा करता है, इसलिए crossing एक साथ दो शर्तें पूरी करता है। section 7 के बाद student यह कह पाए कि बाद में जाँच की ज़रूरत क्यों नहीं — यही ज़रूरी है।
  • "triangle को अपनी सबसे लंबी side पर / किसी horizontal side पर ही टिकना चाहिए।" base बनाने वाले का अपना चुनाव है, triangle का कोई गुण नहीं। 4-5-6 वाले construction में chapter 4 cm वाली side को नीचे सिर्फ़ सुविधा के लिए रखता है।
  • "∆ABC और ∆BAC अलग triangles हैं।" वे एक ही triangle के दो नाम हैं; p.146 कहता है कि vertices का क्रम अपनी मर्ज़ी का है, और इसे साबित करने के लिए अपने उदाहरणों पर अक्षर क्रम से हटकर लिखता है।
  • "दो arcs हमेशा कटते हैं, इसलिए कोई भी तीन लंबाइयाँ चलेंगी।" नहीं चलतीं, और पूरा The triangle inequality: which three lengths can close इसी बारे में है कि वे कब नाकाम होती हैं। व्याख्या से ऐसा न लगे कि यह तरीक़ा हर बार चलता है — उसे इसी सवाल की ओर इशारा करते हुए ख़त्म होना चाहिए, ठीक जैसे §7.2 करता है।
  • "isosceles का मतलब ठीक-ठीक दो बराबर sides है, इसलिए equilateral triangle isosceles नहीं है।" chapter के शब्द हैं "दो बराबर sides", "ठीक-ठीक दो" नहीं, और वह isosceles triangles को circle की radii से निकालता है — जहाँ सारी radii बराबर होती हैं। "ठीक-ठीक दो" को एक चलन मानो जो कुछ किताबें अपनाती हैं, और यह किताब इस बारे में किसी भी तरफ़ कुछ नहीं कहती।
  • "figure में बना dashed circle जवाब का हिस्सा है।" dashes दर्ज करते हैं कि compass कहाँ तक पहुँच सकता था। इस्तेमाल सिर्फ़ crossing point होता है।
पूरा transcript1,525 शब्द

एक त्रिभुज क्या है, 3 बिंदु, कोने, और उन्हें जोड़ने वाले 3 segments, भुजाएँ। बोर्ड पर 4 त्रिभुज हैं, एक लंबा पतला, एक चौड़ा चपटा, और 2 और, जानबूझकर अलग अलग। उनके नाम भी ध्यान से देखो, A B C, Y Z X, W U V, और B A U, letters क्रम से नहीं लिखे। आज का काम, 3 भुजाओं की लंबाई दी हो, तो त्रिभुज बनाना, और समझना कि तरीका काम क्यों करता है।

त्रिभुज का नाम उसके कोनों के letters से, और letters किसी भी क्रम में पढ़ सकते हो। A B C को 6 क्रमों में पढ़ा जा सकता है, और सब एक ही त्रिभुज के नाम हैं। इसलिए A B C और B A C 2 त्रिभुज नहीं, एक ही त्रिभुज, 2 नामों से, और चित्र में Y Z X, W U V जैसे नाम इसीलिए लिखे हैं। और कोनों के संग 3 angles अपने आप आ जाते हैं, हर कोने पर एक।

अब एक सवाल जो अभी खुला छोड़ेंगे, अगर तीनों कोने एक ही line पर हों, तो क्या वह त्रिभुज है? इस सवाल को याद रखना, आज के आखिर में वह फिर लौटेगा। सबसे सरल मामला, एक त्रिभुज जिसकी तीनों भुजाएँ 4 सेंटीमीटर। सिर्फ़ ruler से कैसे बनाओगे? सच में कोशिश करके देखो, और ध्यान रखो कि किस कदम पर तुम्हें अंदाज़ा लगाना पड़ा। A B, 4 सेंटीमीटर, ruler से खींचो, फिर A से किसी दिशा में A C, वह भी 4।

पर B C कितनी निकलेगी, यह इस पर निर्भर है कि A C किस दिशा में गई, ruler यह तय नहीं करता। हर पूरे degree की दिशा आज़माई गई, कुल 179, और B C ठीक 4 बस 1 दिशा पर निकली, 60 degree पर। यहाँ 50 degree पर B C बनी लगभग 3 दशमलव 4 सेंटीमीटर, और 70 पर लगभग 4 दशमलव 6, 4 के करीब, पर 4 नहीं। और 60 degree पर भी, सही निकला यह नापने के बाद ही पता चलता है, पहले नहीं।

तो ruler से हर बार बनाओ, नापो, मिटाओ, फिर बनाओ, यह तरीका कभी खुद खत्म नहीं होता। compass को 4 सेंटीमीटर खोलो, नोक A पर रखो, और घुमाओ। जो बनता है वह एक बिंदु नहीं, A से ठीक 4 दूर वाले सारे बिंदु, एक ही बार में। उस घेरे पर हर पूरे degree पर एक बिंदु लिया गया, सभी 360 बिंदु A से ठीक 4 दूर। ruler का निशान एक दूरी वाला एक बिंदु देता है, arc उस दूरी वाले सारे बिंदु।

A B, 4 सेंटीमीटर खींचो, फिर A से 4 का arc, ये सारे बिंदु A से 4 दूर। फिर B से 4 का arc, ये सारे बिंदु B से 4 दूर। दोनों arcs जहाँ कटते हैं, वह बिंदु दोनों पर है, तो वह A से भी 4 दूर, और B से भी, यही C। नापकर देखा गया, C A बराबर 4, C B बराबर 4, और तीनों angles 60 degree।

बाद में नापना कुछ बदल नहीं सकता, क्योंकि दोनों शर्तें बनाते समय ही पूरी हो चुकी थीं। इसीलिए यह बनावट खत्म होती है, कोई मिटाना नहीं, कोई दोबारा नहीं। इस बनावट को 2 समूहों की तरह सोचो, पहला समूह, A से 4 दूर वाले सारे बिंदु। दूसरा समूह, B से 4 दूर वाले सारे बिंदु। कटाव वह बिंदु है जो दोनों समूहों में है, इससे ज़्यादा यह बनावट कुछ नहीं कहती, और इससे कम भी नहीं।

और त्रिभुज को इतना ही चाहिए था, तीसरा कोना जो A से भी सही दूरी पर हो, और B से भी। एक आम सोच, compass बस साफ़ सुथरा खींचने का औज़ार है। नहीं, वह एक अलग बात कहता है, arc पर हर बिंदु एक शर्त पूरी करता है। और 2 arcs का कटाव 2 शर्तें एक ही बिंदु पर पूरी करता है, यही पूरे तरीके की जान है। अब भुजाएँ 4, 5 और 6 सेंटीमीटर।

पहले एक भुजा को नीचे, आधार बनाओ, यहाँ 4 सेंटीमीटर वाली, बस सुविधा के लिए। A B, 4 सेंटीमीटर, बाकी 2 भुजाएँ A और B से निकलेंगी। A से 5 सेंटीमीटर का पूरा घेरा, उस पर हर बिंदु A से 5 दूर। फिर B से 6 सेंटीमीटर का arc, उस पर हर बिंदु B से 6 दूर। दोनों 2 जगह कटते हैं, एक आधार के ऊपर, एक नीचे। असल में पूरा घेरा ज़रूरी नहीं, बस कटाव के पास का छोटा टुकड़ा, बाकी बिंदीदार निशान बस यह दिखाता है कि compass कहाँ तक पहुँच सकता था।

C, A वाले घेरे पर है, तो C A उस घेरे की त्रिज्या, 5। और C, B वाले arc पर है, तो C B, 6। नापने पर C A बराबर 5, C B बराबर 6, ठीक वही। तो C सच में वह तीसरा कोना है जिसकी तलाश थी, इसकी वजह चित्र में ही लिखी है। नीचे वाला कटाव भी A से 5 और B से 6 दूर है। उससे बना त्रिभुज ऊपर वाले की दर्पण छवि है, वही 3 angles, बस पलटा हुआ।

तो किसी भी कटाव को चुनो, त्रिभुज वही बनेगा। इसीलिए arcs खींचते समय बस उस तरफ़ का टुकड़ा बनाते हैं जिधर त्रिभुज चाहिए। एक आम सोच, त्रिभुज को उसकी सबसे लंबी भुजा पर, या किसी पड़ी भुजा पर ही बैठना चाहिए। आधार 4 लो, 5 लो, या 6, तीनों तरह से त्रिभुज बनाकर उसके angles नापे गए। हर बार वही 3 angles, लगभग 41, 56, 83 degree। आधार बनाने वाले का चुनाव है, त्रिभुज की कोई खासियत नहीं।

पहला कदम, एक भुजा चुनो और उसे आधार A B बनाकर खींचो। दूसरा, A से दूसरी भुजा की लंबाई का arc। तीसरा, B से तीसरी भुजा की लंबाई का arc, ऐसा कि वह पहले arc को काटे। दूसरा और तीसरा कदम आपस में बदल भी सकते हो, पहले B से arc, फिर A से, कटाव वही रहेगा। चौथा, कटाव को C कहो, और C को A और B से जोड़ो।

चित्र में बिंदीदार घेरे जवाब का हिस्सा नहीं, काम का बस वह एक कटाव है। अब 5 त्रिभुज बनाओ, भुजाएँ 4, 4, 6, फिर 3, 4, 5, फिर 1, 5, 5, फिर 4, 6, 8, और 3 दशमलव 5, 3 दशमलव 5, 3 दशमलव 5 सेंटीमीटर। अब 4, 4, 6 में आधार 6 लो, दोनों सिरों से 4 के arcs, वे ऊपर बीच में कटते हैं। देखो, 1, 5, 5 में आधार 1 लो, दोनों सिरों से 5 के arcs, एक बहुत ऊँचा, पतला त्रिभुज।

यहाँ 4, 6, 8 में आधार 8 लो, एक सिरे से 4 और दूसरे से 6, arcs आधार के काफ़ी पास कटते हैं, एक चपटा त्रिभुज। और 3 दशमलव 5 वाले में आधार कोई भी, दोनों arcs 3 दशमलव 5 के। सभी 5 में दोनों arcs कटे, और बने हुए हर त्रिभुज ने नापने पर अपनी ही भुजाएँ लौटाईं। इनमें 1 त्रिभुज की तीनों भुजाएँ बराबर, 3 दशमलव 5 वाला।

और 2 में ठीक 2 भुजाएँ बराबर, 4, 4, 6 और 1, 5, 5। और 2 में कोई 2 भुजाएँ बराबर नहीं। और एक चुपचाप छिपी बात, 3, 4, 5 वाले त्रिभुज में एक angle ठीक 90 degree। यानी यह सूची सोच समझकर चुनी गई थी, हर तरह का एक नमूना। जिस त्रिभुज की 2 भुजाएँ बराबर हों, उसे isosceles कहते हैं। और जिसकी तीनों बराबर हों, उसे equilateral। क्या equilateral भी isosceles है, यहाँ की परिभाषा कहती है 2 बराबर भुजाएँ, ठीक 2 नहीं, तो हाँ, उसमें भी 2 बराबर भुजाएँ हैं।

एक घेरा लो और उसका केंद्र। घेरे पर कोई 2 बिंदु चुनो, और केंद्र से जोड़ो, दोनों segments त्रिज्या हैं, तो बराबर। तो हर बार एक isosceles त्रिभुज, कितनी भी जोड़ियाँ लो। जोड़ी बदलो तो तीसरी भुजा छोटी बड़ी होती है, पर केंद्र से निकली 2 भुजाएँ कभी नहीं बदलतीं। घेरे पर 10 degree के फ़ासले के बिंदुओं की सभी 612 जोड़ियाँ जाँची गईं, हर एक में दोनों भुजाएँ बराबर।

अब 2 एक जैसे घेरे, हर एक दूसरे के केंद्र से होकर जाता है। इस चित्र में कौन से त्रिभुज छिपे हैं? दोनों केंद्र और एक कटाव, तीनों के बीच हर दूरी एक त्रिज्या, तो तीनों भुजाएँ बराबर, 3, 3, 3। और कटाव 2 हैं, तो ऐसे 2 equilateral त्रिभुज। अब आधार 8 सेंटीमीटर, और बाकी 2 भुजाएँ 4 और 4। दोनों घेरे बस 1 बिंदु पर छूते हैं, और वह बिंदु आधार पर ही है, ठीक बीच में।

क्योंकि 8 ठीक 4 धन 4 है, दोनों भुजाएँ मिलकर बस आधार जितनी, ऊपर उठने की कोई गुंजाइश नहीं। और आधार को बढ़ाकर 9 करो, तो 4 के 2 घेरे मिलते ही नहीं, कटाव 0, क्योंकि 4 धन 4 बस 8, आधार से छोटा। तो तीनों कोने एक line पर, वही सवाल जो शुरू में खुला छोड़ा था, कोई त्रिभुज नहीं बनता। यानी यह मत मानो कि कोई भी 3 लंबाइयाँ चलेंगी, arcs हमेशा नहीं कटते।

तो कब कटते हैं, और कब नहीं? खुद बनाओ, चारों कदमों से, कोई भी 3 भुजाएँ जो ऊपर की सूची जैसी हों। नापने से पहले बोलो, तीसरा कोना सही क्यों है, वह किन 2 घेरों पर है। फिर नापो, और देखो कि नापना बस वही दोहराता है जो तर्क पहले कह चुका। याद रखो, ruler से तीसरी भुजा किस्मत पर छूटती है। arc एक दूरी वाले सारे बिंदु है। अब 2 arcs का कटाव दोनों दूरियाँ एक ही बार में पूरी करता है।

आधार तुम्हारा चुनाव है, त्रिभुज वही रहता है। पर arcs हमेशा नहीं कटते, वह अगली कहानी।

यह कहाँ बैठता है

यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.

किस पर टिका है

आगे फिर कहाँ आता है

इसके ठीक पहले और ठीक बाद

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