PrepShorts · पढ़ाई की शीट · Class 7 Mathematics · Chapter 7, A Tale of Three Intersecting Lines
Chapter 7 · A Tale of Three Intersecting Lines
दो sides और उनके बीच के angle से triangle बनाना
यह video load नहीं हो सकी. फिर से कोशिश करने के लिए page reload करें.
Sign in with Google10 min.
इस chapter में अपनी जगह बनाए रखिए — sign in करें, यह free है.Sign in करें
कक्षा 7 की सभी Hindi videos · सभी Hindi videos
3 लंबाइयाँ कई बार त्रिभुज नहीं बनातीं। पर 2 भुजाएँ और उनके बीच का angle दो, तो क्या कभी मना हो सकता है? 1 से 20 तक की हर जोड़ी और हर पूरा angle, कुल 71600 बनावटें: मना करने वाली 0।
मुख्य idea
तीन sides आपस में झगड़ सकती हैं, और §7.2 का आधा हिस्सा यही पता लगाने में गया कि कब। दो sides, जिनके बीच angle फँसा हो, नहीं झगड़ सकतीं: दोनों लंबाइयाँ एक ही corner से उन दो भुजाओं (arms) के साथ नापकर रखी जाती हैं जिन्हें angle पहले ही अलग कर चुका है, इसलिए दोनों दूर वाले सिरे मौजूद होते हैं, और उन्हें जोड़ने वाला segment ही तीसरी side है, तुम चाहो या न चाहो। असंगत होने के लिए कुछ बचता ही नहीं — तीसरी side construction का नतीजा है, उस पर लगी कोई शर्त नहीं। chapter student से कहता है कि इसे तोड़ने की कोशिश करके यह बात ख़ुद खोजे, और इसे सीधे-सीधे कहने से इनकार करता है — क्योंकि यही खोज असली सीख है।
आपको क्या आना चाहिए
- नाम लिखे triangle में पहचानना कि दो नाम वाली sides के बीच कौन-सा angle included है
- ऐसा नमूना figure पढ़ना जो दो sidelengths और उनके बीच का angle देता है, और बताना कि क्या-क्या तय किया गया है
- दो sides और उनके included angle से triangle बनाना, छपे हुए चार steps के क्रम में
- समझाना कि पहली दो sides बन जाने के बाद तीसरी side की अलग जाँच की ज़रूरत क्यों नहीं
- chapter के खुले सवाल का जवाब देना: क्या ऐसे मापों का कोई set नाकाम हो सकता है, और क्यों
- बताना कि construction टूटने से पहले दिए गए angle में क्या गड़बड़ होनी चाहिए
- इस हालत को तीन sides वाली हालत से अलग करना, इस आधार पर कि क्या नाकाम हो सकता है
- पहले से बताना कि बने हुए triangle के कौन-से हिस्से दिए गए थे और कौन-से construction से निकले
जानने लायक़ शब्द
| शब्द | एक पंक्ति में अर्थ | हिंदी / क्षेत्रीय समकक्ष | पहली बार कहाँ |
|---|---|---|---|
| included angle | उस corner का angle जहाँ से दोनों दी गई sides निकलती हैं | अंतर्विष्ट कोण | §7.3 के sub-heading के हिस्से के रूप में छपा, p.160, और pp.160–161 के text में |
| angle | एक ही endpoint वाली दो rays के बीच का खुलाव, degrees में नापा जाता है | कोण | पूरे chapter में छपा, p.146 से |
| arm | angle को घेरने वाली दो rays में से एक | भुजा | p.160 पर construction के steps में छपा |
| vertex | triangle का corner point, और angle की दोनों भुजाओं का साझा point | शीर्ष | p.146 पर छपा और पूरे chapter में इस्तेमाल हुआ |
| base | सबसे पहले बनाई गई side; यहाँ दी गई दो sides में से एक | आधार | p.160 पर छपा |
| sidelength | किसी side की लंबाई, जिसे यह किताब एक शब्द में लिखती है | भुजा की लंबाई | पूरे §7.2 और §7.3 में छपा |
| construct | ruler, compass और protractor से बताए गए मापों का figure बनाना | रचना करना | पूरे chapter में निर्देश के रूप में छपा, p.146 से |
| obtuse angle | ऐसा angle जो right angle से बड़ा और straight angle से छोटा हो | अधिक कोण | p.170 पर छपा; यहाँ 120° वाले construction के काम के लिए इस्तेमाल हुआ, जो p.161 पर है और जिसे chapter obtuse नहीं कहता |
| right angle | 90° का angle | समकोण | p.162 पर छपा और फिर p.169 पर |
| protractor | degrees में angle बनाने या पढ़ने का औज़ार | चाँदा | यहाँ जोड़ा गया शब्द, उस औज़ार के लिए जिसकी construction को ज़रूरत है; इस chapter में नहीं छपा |
Hindi column में standard NCERT हिंदी गणितीय शब्दावली दी गई है। Ganita Prakash Part I का हिंदी संस्करण यहाँ इस्तेमाल किए गए corpus में नहीं है, इसलिए ये शब्द हिंदी छपाई से नहीं लिए गए — Notes देखें।
समझाते समय दो सावधानियाँ। पहली, शब्द included असली काम कर रहा है: दो sides और ऐसा angle जो उनके बीच नहीं है, एक अलग सवाल है, और यह chapter उसे नहीं लेता। दूसरी, chapter इस construction के लिए तीन अक्षरों का कोई छोटा नाम नहीं देता — SAS जैसा कुछ भी इसमें कहीं नहीं छपा — इसलिए जो समझाने वाला ऐसा नाम लाए, वह नई शब्दावली जोड़ रहा है और उसे यह बताना चाहिए।
लोग कहाँ चूकते हैं
- "कोई भी दो sides और कोई भी एक angle चलेगा।" angle वही होना चाहिए जो दोनों दी गई sides के बीच है। दो sides और कहीं और का angle दिया हो, तो construction एक अलग सवाल है और यह chapter उसे नहीं उठाता।
- "चूँकि तीन लंबाइयाँ नाकाम हो सकती हैं, इसलिए तीन माप हमेशा नाकाम हो सकते हैं।" §7.2 में नाकामी इसलिए आई कि तीन शर्तें एक point के लिए होड़ कर रही थीं। यहाँ तीसरी side कोई शर्त है ही नहीं; वह बस वही है जो दोनों भुजाएँ पीछे छोड़ देती हैं। यही फ़र्क़ इस topic का तर्क है, और section 8 में यह बात पूरी होती है।
- "base दी गई दो sides में से लंबी वाली ही होनी चाहिए।" दी गई कोई भी side base हो सकती है। chapter AB = 5 cm इसलिए लेता है कि उसने AB पहले बनाया, इसलिए नहीं कि 5 > 4.
- "obtuse included angle हो तो triangle बंद नहीं होगा।" बंद होता है; बस लंबा-पतला होता है। 120° वाला set, जो p.161 पर है, बनाने के लिए ही है। ध्यान दो कि chapter इशारा करने के लिए कोई obtuse नमूना नहीं बनाता: p.160 के तीनों नमूना figures में included angles acute हैं, 60°, 30° और 40°, इसलिए obtuse हालत student तक सिर्फ़ construction के काम के रूप में पहुँचती है।
- "जाँचने के लिए आख़िर में 45° फिर से नापना पड़ेगा।" वह खिसक ही नहीं सकता। वह बनाया गया था, निकाला नहीं गया था। जाँचने की आदत §7.1 के ruler वाले तरीक़े की है, जिसकी जगह यह construction लेता है।
- "0° या 180° का angle बहुत चपटा triangle होगा।" वह कोई triangle नहीं होगा — दोनों भुजाएँ एक ही line पर पड़ती हैं, और तीनों vertices collinear होते हैं। यह chapter का p.146 वाला शुरुआती सवाल है, जो एक अलग दिशा से फिर आ रहा है। chapter यह हालत नहीं उठाता, इसलिए इसे ऐसे रखो कि व्याख्या किताब के सवाल की सीमा को टटोल रही है।
Ask your teacher a person
Your teacher reads this and writes back, usually within a day. For an instant answer, use Ask the video in the sidebar.
Your class sees the question and the answer. Only your teacher sees that it was you.
No questions on this topic yet.
Worked answers to this chapter’s exercises · this video explains Figure it Out · 5 Q1
पूरा transcript1,428 शब्द
जब 3 लंबाइयाँ दी जाती हैं, तो कई बार वे आपस में झगड़ पड़ती हैं, और त्रिभुज बनता ही नहीं। आज एक लंबाई की जगह एक angle आएगा, 2 भुजाएँ, और उनके बीच का angle। सवाल वही, क्या यह जोड़ी भी कभी मना कर सकती है? जवाब तुम्हें खुद बनाकर ढूँढना है, और आज उसी खोज को ध्यान से संभालना है। बीच का angle, यानी वह कोना जहाँ से दोनों दी हुई भुजाएँ निकलती हैं।
इसे included angle कहते हैं, वह दोनों भुजाओं के बीच फँसा हुआ है। कोई भी angle नहीं चलेगा, अगर angle किसी और कोने पर हो, तो वह बिल्कुल अलग सवाल है, आज उसे नहीं छेड़ेंगे। यहाँ 3 त्रिभुज हैं, हर एक पर बस 3 नाप लिखे हैं, 3, 60 degree, 4, फिर 6, 30 degree, 5, फिर 2, 40 degree, 3। गौर करो, निशान वाला कोना हर बार अलग है, एक बार नीचे बाईं ओर, एक बार नीचे दाईं ओर, और एक बार ऊपर की चोटी पर।
तो हर बार पहले वह कोना ढूँढो जहाँ दोनों लिखी भुजाएँ मिलती हैं, वहीं angle होना चाहिए। और तीनों angles 60, 30, 40 degree, सब right angle से छोटे, यानी acute। तीनों बनकर पूरे होते हैं, और पहले वाले की तीसरी भुजा लगभग 3 दशमलव 6 सेंटीमीटर निकलती है। अब एक पूरा उदाहरण, A B बराबर 5 सेंटीमीटर, A पर 45 degree, और A C बराबर 4 सेंटीमीटर। यहाँ 45 degree A पर है, और A B और A C दोनों A से ही निकलती हैं, तो यह सच में बीच का angle है।
पहला कदम, ruler से 5 सेंटीमीटर का आधार A B खींचो। दूसरा कदम, protractor का केंद्र A पर रखो, 45 पर निशान लगाओ, और A से उस निशान तक एक लंबी line खींचो। यह line जानबूझकर लंबी है, अभी पता नहीं कि C कहाँ आएगा, बस इतना पता है कि इसी line पर आएगा। तीसरा कदम, उस line पर A से 4 सेंटीमीटर नापो, और वहाँ C लिखो। चौथा कदम, B को C से जोड़ो, बस, त्रिभुज तैयार।
क्या कहीं कुछ जाँचना पड़ा, कि कोई चीज़ मिलेगी या नहीं? नहीं, B पहले से मौजूद था, C भी अब मौजूद है, और 2 बिंदुओं को हमेशा जोड़ा जा सकता है। अब गिनो, दिए गए थे 3, A B, A पर angle, और A C। और 3 चीज़ें खुद आ गईं, B C लगभग 3 दशमलव 6 सेंटीमीटर, B पर लगभग 52 degree, C पर लगभग 83 degree। और 45, 52 और 83, तीनों angles मिलकर 180, जैसा होना चाहिए।
त्रिभुज के कुल 6 नाप, 3 भुजाएँ और 3 angles, और उनमें से 3 देते ही बाकी 3 तय हो गए। यानी तीसरी भुजा कोई शर्त नहीं थी, वह इस बनावट का नतीजा है। कुछ बच्चे आख़िर में 45 को फिर से नापते हैं, कहीं बदल तो नहीं गया। पर वह बदल ही नहीं सकता, उसे हमने खुद खींचा था, उसे निकाला नहीं था। तैयार आकृति से नापो, तो A पर फिर 45 degree, और A B, A C फिर 5 और 4।
जाँचने की आदत ruler वाले तरीके की थी, जहाँ हर निशान को बाद में परखना पड़ता था, यहाँ उसकी ज़रूरत नहीं। एक और गलतफ़हमी, आधार हमेशा बड़ी भुजा होनी चाहिए। उल्टा करके देखो, आधार 4, A पर 45 degree, और line पर 5, तब भी तीसरी भुजा लगभग 3 दशमलव 6। उदाहरण में 5 पहले इसलिए आया क्योंकि A B पहले खींची गई, इसलिए नहीं कि 5 बड़ा है। 3 लंबाइयों वाली बनावट में तीसरे कोने को 2 शर्तें एक संग पूरी करनी होती हैं, A से इतनी दूरी, और B से इतनी दूरी, और कभी कभी ऐसा कोई बिंदु होता ही नहीं।
इस बार कोई झगड़ा नहीं, angle ने दोनों भुजाओं को पहले ही अलग अलग दिशा में भेज दिया। दोनों भुजाओं के दूर वाले सिरे बन चुके हैं, B भी और C भी। और उन्हें जोड़ने वाली line ही तीसरी भुजा है, चाहे वह जितनी भी लंबी निकले, उस पर कोई शर्त है ही नहीं। तो यह सोचना गलत है कि 3 लंबाइयाँ फेल हो सकती थीं, इसलिए कोई भी 3 नाप फेल हो सकते हैं।
अब असली सवाल, क्या 2 भुजाओं और उनके बीच के angle का कोई ऐसा जोड़ है, जिससे त्रिभुज न बने? इसका जवाब रटकर नहीं, बनाते बनाते देखकर आना चाहिए, तो इसे तोड़ने की कोशिश करो। आगे जो जवाब आएगा, वह हमारी अपनी खोज है, इसे खुद परखकर ही मानना। अब 1 से 20 तक की हर लंबाई की जोड़ी, और 1 से 179 degree तक का हर पूरा angle, कुल 71600 बनावटें बनाई गईं।
एक भी बनावट ऐसी नहीं निकली जिसमें त्रिभुज न बने, मना करने वाली बनावटें 0। फिर 40000 बार लंबाइयाँ और angles बेतरतीब चुने गए, 500 तक की लंबाइयाँ, फिर भी मना करने वाली 0। पर गिनती अकेले सबूत नहीं होती, वजह भी चाहिए, और वजह ऊपर वाली बात है, दोनों सिरे पहले से मौजूद हैं। और हर एक बनावट में तीसरी भुजा, दी हुई भुजाओं के अंतर से बड़ी, और जोड़ से छोटी निकली, सभी 71600 में।
यानी अंतर और जोड़ वाला नियम यहाँ अपने आप पूरा होता है, उसे अलग से जाँचना ही नहीं पड़ता। क्योंकि मोड़ वाला रास्ता कभी सीधे से छोटा नहीं, और यहाँ तीसरी भुजा सचमुच एक सीधा रास्ता ही है। अब भुजाएँ 3 और 5 रखो, और angle को थोड़ा थोड़ा खोलो, हर बार 0 दशमलव 1 degree। तीसरी भुजा हर कदम पर बढ़ती है, सभी 1798 कदमों पर, एक बार भी रुकती या घटती नहीं।
सबसे बंद angle पर वह लगभग 2 दशमलव 0, और सबसे खुले पर लगभग 8 दशमलव 0। तो बीच की हर लंबाई किसी न किसी angle पर आती है, कोई लंबाई छूटती नहीं। और अगर angle पूरा बंद करें, या पूरा खोलकर सीधा करें, तो? देखो, 5 और 3 को 0 degree पर रखो, दोनों भुजाएँ एक ही दिशा में, तीसरी भुजा ठीक 2, यानी 5 घटा 3। यहाँ 180 पर वे उल्टी दिशाओं में, तीसरी भुजा ठीक 8, यानी 5 धन 3।
दोनों बार तीनों बिंदु एक line पर, अंदर कोई जगह नहीं, कोई त्रिभुज नहीं। यह सीमा वाला मामला है, तीसरी भुजा ठीक अंतर या ठीक जोड़ के बराबर, और तब तीनों बिंदु एक line पर आ जाते हैं। पर 0 या 180 पर भुजाएँ एक ही line पर पड़ी हैं, कोई कोना बनता ही नहीं, तो वह सच्चा angle ही नहीं। ज़रा सा भी अंदर आओ, 0 से ज़रा ऊपर, या 180 से ज़रा नीचे, और त्रिभुज वापस, बहुत पतला, पर सच्चा।
तो हमारा जवाब, जब तक angle सच्चा है, यानी 0 से बड़ा और 180 से छोटा, तब तक त्रिभुज हर बार बनता है। और 0 या 180 वाला बहुत चपटा त्रिभुज नहीं है, वह त्रिभुज है ही नहीं। अब खुद बनाओ, 3, 75 degree, 7, फिर 6, 25 degree, 3, फिर 3, 120 degree, 8। हर जोड़ी में बीच वाली संख्या angle है, ठीक वैसे ही जैसे आकृति में angle दोनों भुजाओं के बीच बैठता है।
तीसरी भुजाएँ लगभग 6 दशमलव 9, 3 दशमलव 5, 9 दशमलव 8। तीनों पूरे बनते हैं, और तीनों में A का angle फिर नापो तो वही निकलता है जो रखा था। कोई सोचे कि 120 degree जैसा बड़ा angle त्रिभुज बंद नहीं होने देगा। बनाकर देखो, बंद होता है, बस लंबा और पतला, तीसरी भुजा लगभग 9 दशमलव 8, तीनों में सबसे लंबी। और बाकी 2 angles मिलकर बस 60, दोनों acute।
ऊपर के तीनों नमूनों में एक भी obtuse नहीं था, इसलिए यह तस्वीर हमें खुद बनानी पड़ी। अब देखो क्यों बीच वाला angle ज़रूरी है, A B बराबर 5, A पर 40 degree, पर इस बार B C दी हुई है, A C नहीं। B C बराबर 4 हो, तो उस line पर 2 जगह ऐसे बिंदु हैं, यानी 2 अलग त्रिभुज। B C बराबर 2 हो, तो ऐसे बिंदु 0, कोई त्रिभुज नहीं।
और A B बराबर 4, B C बराबर 6 हो, तो बस 1। तो बीच का angle न हो, तो जवाब कभी 2, कभी 1, कभी कोई नहीं, यह बिल्कुल अलग सवाल है, और आज का नहीं। खुद करो, 3, 120 degree, 8 बनाओ, और तीसरी भुजा नापकर देखो कि लगभग 9 दशमलव 8 आती है या नहीं। फिर किसी आकृति में 2 भुजाएँ और एक angle लिखो, और पहले पूछो, क्या यह angle उन दोनों के बीच है?
याद रखो, बीच का angle वह है जहाँ से दोनों दी हुई भुजाएँ निकलती हैं। आधार, angle वाली लंबी line, उस पर लंबाई, फिर जोड़ना। तीसरी भुजा शर्त नहीं, नतीजा है, इसलिए कुछ जाँचना नहीं पड़ता। सच्चा angle हो, तो त्रिभुज हर बार बनता है, obtuse हो तब भी। और 0 या 180 पर बस एक line, वे सच्चे angle ही नहीं।
यह कहाँ बैठता है
यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.
किस पर टिका है
- Why a compass beats trial and error for building a triangleकक्षा 7 · Ch 7, A Tale of Three Intersecting Lines
- The triangle inequality: which three lengths can closeकक्षा 7 · Ch 7, A Tale of Three Intersecting Lines
- The four angles at a crossing: vertically opposite and linear pairsकक्षा 7 · Ch 5, Parallel and Intersecting Lines
आगे फिर कहाँ आता है
- Constructing from two angles and the side between themकक्षा 7 · Ch 7, A Tale of Three Intersecting Lines