PrepShorts · पढ़ाई की शीट · Class 8 Mathematics · Chapter 5, Number Play
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संख्या 489710 के अंक जोड़िए, 29 आता है, फिर 11, फिर 2। ये आख़िरी 2 असल में क्या बताता है?
मुख्य idea
किसी संख्या के अंकों को जोड़ना उसके बारे में लगभग सब कुछ फेंक देता है — उसका आकार, उसके अंकों की गिनती, उसके अंकों का क्रम — और ठीक एक चीज़ ऐसी है जिसे यह क्रिया छू नहीं सकती: संख्या नौ के किसी गुणज से कितनी आगे बैठी है। हर बार संख्या की जगह ऐसी चीज़ आ जाती है जो उससे नौ के किसी गुणज जितनी अलग है, और हर बार वह पक्के तौर पर छोटी होती जाती है, इसलिए प्रक्रिया को रुकना ही पड़ता है, और ऐसी जगह रुकना पड़ता है जो वही जानकारी लिए हो। इसलिए जिस अकेले अंक पर तुम पहुँचते हो, वह नौ से भाग देने की एक रिपोर्ट है, एक मोड़ के साथ जिसे रटने के बजाय समझना ठीक है: नौ का गुणज 9 बताता है, 0 नहीं, क्योंकि प्रक्रिया के पास 0 तक पहुँचने का कोई रास्ता नहीं।
आपको क्या आना चाहिए
- बार-बार अंक जोड़कर किसी संख्या का अंकीय मूल निकालना, और बताना कि कब रुकना है
- समझाना कि प्रक्रिया हमेशा रुकती क्यों है
- समझाना कि अंक जोड़ने से यह क्यों नहीं बदलता कि संख्या नौ के किसी गुणज से कितनी आगे बैठी है
- बताना कि अंकीय मूल क्या बताता है, और नौ के गुणजों को मिलने वाली value का कारण देना
- क्रमागत संख्याओं की एक श्रेणी के अंकीय मूलों का अनुमान लगाना, और चक्र का वर्णन करना
- किसी दी गई संख्या के क्रमागत गुणजों के, और किसी गुणज से तय मात्रा आगे वाली संख्याओं के, अंकीय मूलों का अनुमान लगाना
- जब किसी व्यंजक के कुछ हिस्से नौ के गुणज हों, तो उसके हिस्सों से उसका अंकीय मूल पढ़ना
- किसी अंकगणितीय हिसाब को जाँचने के लिए अंकीय मूलों का इस्तेमाल करना, और बताना कि ऐसी जाँच क्या साबित कर सकती है और क्या नहीं
जानने लायक़ शब्द
| शब्द | एक पंक्ति में अर्थ | हिंदी / क्षेत्रीय समकक्ष | पहली बार कहाँ आया |
|---|---|---|---|
| digital root | किसी संख्या के अंकों को बार-बार जोड़कर पहुँचा गया अकेला अंक | अंकीय मूल | इस chapter में छपा (Part I, §5.2, p.130) |
| single-digit number | एक अंक से लिखी संख्या, जहाँ प्रक्रिया रुकती है | एक-अंकीय संख्या | इस chapter में छपा (Part I, §5.2, p.130) |
| remainder | जब भाग पूरा-पूरा न जाए तो जो बचता है | शेषफल | इस chapter में छपा (Part I, §5.1, p.116) |
| multiple | किसी दी गई संख्या को किसी पूर्ण संख्या से गुणा करके मिली संख्या | गुणज | इस chapter में छपा (Part I, §5.1, p.116) |
| divisible | भाग देने पर कुछ न बचना | विभाज्य | इस पूरे chapter में छपा |
| parity | कोई संख्या सम है या विषम | सम-विषमता | इस chapter में छपा (Part I, §5.1, p.113) |
| sequence | किसी तय नियम से एक के बाद एक बनाई गई संख्याएँ | अनुक्रम | इस chapter में छपा (Part I, §5.2, p.131) |
| conjecture | ऐसा दावा जो तय होने से पहले सामने रखा गया हो | अनुमान | इस chapter में छपा (Part I, §5.2, p.131) |
| digit | उन दस चिह्नों में से एक जिनसे संख्या लिखी जाती है | अंक | इस पूरे chapter में छपा |
| fixed point | ऐसी value जिसे प्रक्रिया नहीं बदलती, उसके लिए इस पाठ का नाम | अचर बिंदु | इस पाठ का शब्द; chapter की प्रक्रिया ऐसी जगह पहुँचती है और उसे नाम नहीं देती |
हिंदी column में standard हिंदी गणितीय शब्दावली दी गई है। Ganita Prakash कक्षा 8 का हिंदी संस्करण नहीं देखा गया, इसलिए इसे standard चलन मानें, उस संस्करण के ठीक-ठीक शब्द नहीं।
लोग कहाँ चूकते हैं
- "नौ के गुणज का अंकीय मूल शून्य है।" वह नौ है। प्रक्रिया सिर्फ़ ऐसे अंक पर रुक सकती है जिस तक वह जोड़कर सचमुच पहुँच सके, और वह किसी धनात्मक संख्या से कभी शून्य नहीं बनाती। नौ के किसी गुणज से आगे की जगह के हिसाब से नौ और शून्य एक ही हैं; यह प्रक्रिया तुम्हें उस जगह का प्रतिनिधि नौ थमाती है।
- "अंकीय मूल ही शेषफल है।" नौ संभव जगहों में से आठ के लिए वह शेषफल बताता है, और जहाँ शेषफल शून्य है वहाँ नौ बताता है। Part I p.125 और p.130 के chapter के दोनों छपे वाक्य एक-एक आधा हिस्सा कहते हैं; जो student सिर्फ़ एक पढ़ता है, वह नौ में से एक बार ग़लत होगा।
- "जब संख्या छोटी दिखे, तब जोड़ना रोक सकते हो।" तुम तब रुकते हो जब एक अंक बचे, उससे पहले नहीं। जो student 11 या 29 पर रुक जाता है, उसके पास बीच की value है, मूल नहीं।
- "बड़ी संख्याओं के अंकीय मूल बड़े होते हैं।" संख्या का आकार कुछ भी हो, मूल नौ values में से एक है। exercise 1 की संख्या आठ अंकों वाली ठीक इसलिए बताई गई है कि student ख़ुद खोज सके कि अंकों की गिनती से फ़र्क़ नहीं पड़ता।
- "किसी संख्या के अंकों का क्रम बदलने से उसका अंकीय मूल बदल जाता है।" नहीं बदल सकता — अंकों का योग वही रहता है। यह Part I p.132 वाले अंक उलटने के अनुमान से जुड़ता है।
- "दस जोड़ने से मूल में हमेशा एक जुड़ता है।" दस, नौ के किसी गुणज से एक आगे है, इसलिए मूल एक आगे बढ़ता है और नौ के बाद घूमकर फिर शुरू होता है। घूमने वाला हिस्सा ही students छोड़ देते हैं।
- "अंकीय मूल वाली जाँच साबित करती है कि हिसाब सही है।" वह साबित करती है कि दोनों पक्ष नौ के किसी गुणज से अपनी जगह पर सहमत हैं। ग़लत जवाब भी इससे बच सकता है। chapter कहता है कि इस तरीक़े का इस्तेमाल हिसाब जाँचने के लिए होता था, और यह ठीक-ठीक बताना ठीक है कि ऐसी जाँच का कितना वज़न है।
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पूरा transcript2,507 शब्द
यह रही एक संख्या, 489710, जिसमें 6 अंक हैं, और इस पर एक सीधा सा काम करना है। इसके अंक जोड़िए, 4 प्लस 8 प्लस 9 प्लस 7 प्लस 1 प्लस 0, तो कुल 29 आता है। संख्या 29 में अब भी 2 अंक हैं, तो फिर से जोड़िए, 2 प्लस 9 से 11 बनता है। संख्या 11 में भी 2 अंक हैं, तो एक बार और, 1 प्लस 1 से 2 बनता है।
अब बस 1 अंक बचा, तो यहीं रुकिए, और इस 2 को शुरू वाली संख्या का digital root कहते हैं। कुल 3 बार जोड़ना पड़ा, और इसी से ये एक सिलसिला जैसा लगता है। पर असली सवाल ये नहीं कि ये कैसे करें, सवाल ये है कि आख़िर में बचा अंक 2 हमें क्या बता रहा है? पहले एक छोटा सवाल, ये सिलसिला रुकता ही क्यों है, नियम में तो ऐसा कुछ लिखा नहीं?
ये इसलिए रुकता है, क्योंकि हर बार जोड़ने पर संख्या पहले से छोटी हो जाती है। कोई भी 6 अंकों वाली संख्या कम से कम 100000 होती है। पर उसके 6 अंकों का जोड़ ज़्यादा से ज़्यादा 9 गुणा 6, यानी 54 हो सकता है, जब सारे अंक 9 हों। इसीलिए हमारी संख्या एक ही बार में 6 अंकों से 2 अंकों पर आ गई। संख्या 1 से 2999 तक की हर संख्या पर, हर बार जोड़ने से संख्या छोटी हुई, 2999 में से 2999 बार।
और किसी को भी 3 से ज़्यादा बार जोड़ना नहीं पड़ा, 3 बार वाली पहली संख्या 199 है, 199 से 19, 19 से 10, और 10 से 1 पर। जो चीज़ हर बार छोटी हो और कभी 1 से नीचे न जाए, उसे रुकना ही पड़ता है, ये किस्मत नहीं, मजबूरी है। अब एक आम ग़लती, कई लोग तब रुक जाते हैं जब संख्या छोटी दिखने लगे। जैसे 29 छोटी दिखती है, पर 29 पर रुकेंगे तो जवाब 29 होगा, जबकि digital root 2 है।
और संख्या 199 वाले सिलसिले में, 10 पर रुक जाना बड़ा आसान लगता है। पर 10 में 2 अंक हैं, 1 और 0, तो एक बार और जोड़िए, और जवाब 1 आता है। नियम एक ही है, तब तक जोड़ते रहिए, जब तक सिर्फ़ 1 अंक न बचे। इसलिए 29, 11 और 10 बीच के पड़ाव हैं, digital root नहीं। संख्या 1 से 2999 तक, हर संख्या का digital root 1 से 9 के बीच ही निकलता है, 2999 में से 2999 बार।
अब सबसे ज़रूरी बात, अंक जोड़ने पर संख्या की लगभग हर चीज़ खो जाती है। उसका आकार खो जाता है, कितने अंक थे ये खो जाता है, और अंक किस क्रम में लिखे थे, ये भी खो जाता है। हमारी संख्या के 6 अंकों, 4, 8, 9, 7, 1 और 0 को हर तरह से आगे पीछे कीजिए। इनसे 720 अलग संख्याएँ बनती हैं, क्योंकि 6 गुणा 5 गुणा 4 गुणा 3 गुणा 2 गुणा 1 बराबर 720 होता है।
सबसे छोटी 14789 है, जिसमें आगे का 0 गायब हो गया, और सबसे बड़ी 987410 है। इन 720 में से हर एक के अंकों का जोड़ 29 है, और हर एक का digital root 2 है, 720 में से 720 बार। तो जो कुछ बचता है, वो आकार नहीं है, और क्रम भी नहीं है। अब नापते हैं कि एक बार जोड़ने में असल में क्या हटता है। संख्या 489710 में से उसके अंकों का जोड़ 29 घटाइए, तो 489681 मिलता है, और एक बार जोड़ने में ठीक इतना ही हटा।
और ये कोई भी संख्या नहीं, ये ठीक 54409 गुणा 9 है। वजह जगह के मान में है, 10 बराबर 9 प्लस 1, 100 बराबर 99 प्लस 1, और 1000 बराबर 999 प्लस 1 है। तो हर अंक अपने साथ 9 से बना एक ढेर लाता है, और अपनी एक खुली copy। सबसे बाईं ओर का 4, 4 गुणा 99999 का ढेर लाता है, और आगे के अंक इसी तरह छोटे ढेर लाते हैं, 8 गुणा 9999, 9 गुणा 999, 7 गुणा 99 और 1 गुणा 9 का ढेर।
इन सारे ढेरों को मिलाकर ठीक 489681 होता है, और बची हुई खुली copies का जोड़ 29 है। यानी अंक जोड़ने का मतलब है, खुली copies रखना, और 9 वाले ढेर फेंक देना। संख्या 29 से 11 पर जाते हुए 18 हटता है, जो 9 गुणा 2 है, और 11 से 2 पर जाते हुए 9 हटता है। और 1 से 2999 तक हर संख्या पर, हर बार जो हटा, वो 9 का multiple था, 2999 में से 2999 बार।
किसी संख्या में से 9 का multiple हटा दें, तो एक चीज़ नहीं बदलती। वो है, संख्या 9 के किसी multiple से कितना आगे है। यही एक चीज़ बचती है, हर बार जोड़ने के बाद ये वहीं की वहीं रहती है। संख्या 3 के साथ भी यही होता है, क्योंकि 9 खुद 3 का multiple है, और 10 बराबर 3 गुणा 3 प्लस 1 है। पर 10 के साथ ये 2999 में से सिर्फ़ 299 संख्याओं पर टिकता है, और 8 के साथ सिर्फ़ 379 पर।
संख्या 2 से 19 तक के 18 भाजकों में, ये बात सिर्फ़ 3 और 9 के लिए हर बार सच है। तो आख़िर में जो अकेला अंक बचता है, वो यही जानकारी लेकर आता है, और कुछ नहीं। इसका मतलब है, digital root असल में 9 से भाग देने की एक रिपोर्ट है। संख्या 489710 बराबर 9 गुणा 54412 प्लस 2 है, यानी 9 से भाग देने पर 2 बचता है, और इसका digital root भी 2 है।
अब 1 से 2999 तक की हर संख्या पर, digital root और बचा हुआ, दोनों निकालिए। ये दोनों 2999 में से 2666 बार मिलते हैं, और 333 बार नहीं मिलते। ये कोई गोलाई की ग़लती नहीं, और कोई दुर्लभ अपवाद भी नहीं, ये हर 9 में से 1 बार होता है। और जहाँ ये नहीं मिलते, वो ठीक 9 के multiples हैं, 9 से लेकर 2997 तक। अब संख्या 999 लीजिए, जो 9 गुणा 111 है।
इसके अंक 9 प्लस 9 प्लस 9 बराबर 27, और 2 प्लस 7 से फिर 9 बनता है। पर 999 को 9 से भाग दें, तो कुछ नहीं बचता, बचा हुआ 0 है। तो सही जवाब कौन सा है, 9 वाला या 0 वाला? दोनों, और एक बार वजह समझ में आ जाए, तो कोई टकराव नहीं बचता। घेरे पर 0 और 9 एक ही जगह हैं, वो जगह जहाँ संख्या ठीक 9 का multiple है।
और अंक जोड़ने से कभी 0 नहीं आ सकता, क्योंकि किसी भी संख्या के अंकों का जोड़ कम से कम 1 होता है। इसीलिए 3000 से नीचे के सारे 333 multiples का digital root 9 आता है, 333 में से 333 बार, और कभी 0 नहीं। तो 9 इस तरीके का दिया हुआ नाम है उस जगह के लिए, जहाँ कुछ नहीं बचता, इसमें रटने को कुछ नहीं। अब देखिए, लगातार संख्याओं पर क्या होता है।
संख्या 1 से 12 तक, 12 लगातार संख्याओं का digital root लिखिए। पहले 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 और 9 आते हैं, फिर 10 पर दोबारा 1, और उसके बाद 2 और 3 आते हैं। यानी 9 मान, और फिर वही दोहराव, कहीं से भी शुरू कीजिए, यही होता है। हमारी संख्या से शुरू करके 12 संख्याएँ लें, तो digital root 2 से 9 तक चलते हैं, और फिर 1, 2, 3, 4 पर आते हैं।
अब 1 से लेकर 2999 तक की हर संख्या लीजिए, उसका और उससे 9 आगे वाली संख्या का digital root एक ही निकलता है, 2999 में से 2999 बार। ये 9 जगहों का एक घेरा है, और 1 आगे गिनना, घेरे पर 1 कदम चलना है। अब 600 से 699 तक की 100 संख्याएँ लीजिए। इनमें से किन संख्याओं का digital root 5 है? पहली है 608, क्योंकि 6 प्लस 0 प्लस 8 बराबर 14, और 1 प्लस 4 बराबर 5 होता है।
उसके बाद हर 9 आगे अगली आती है, 617, 626, और ऐसे ही 698 तक, कुल 11 संख्याएँ। जिनका digital root 7 है, वो 601 से 691 तक हैं, और 3 वाली 606 से 696 तक, दोनों में 11 संख्याएँ। हर सूची में संख्याएँ 9 के फ़ासले पर हैं, वही घेरा फिर दिख रहा है। सिर्फ़ 6 वाली सूची में 12 संख्याएँ हैं, क्योंकि 600 और 699 दोनों का digital root 6 है, बाक़ी 8 सूचियों में 11 संख्याएँ हैं, और 12 प्लस 8 गुणा 11 बराबर 100 होता है।
अलग अलग सिलसिले इस घेरे पर अलग रफ़्तार से चलते हैं। संख्या 3 के लगातार multiples लीजिए, 3, 6, 9, 12, 15, 18, इनके digital root 3, 6, 9, और फिर 3, 6, 9 हैं। संख्या 6 के multiples 6, 12, 18 के digital root 6, 3 और 9 आते हैं, यहाँ भी सिर्फ़ 3 मान हैं। पर 4 के multiples, 4 से 36 तक, 4, 8, 3, 7, 2, 6, 1, 5 और 9 देते हैं।
सारे 9 मान, हर एक एक बार, और उसके बाद 40 पर फिर से 4 आता है। संख्या 3 और 6 में 9 के साथ 3 साझा है, और 4 में 9 के साथ कुछ साझा नहीं, यही एक फ़र्क तय करता है कि सिलसिला 3 जगहें घूमेगा या सारी 9 जगहें। संख्या 1 से 30 तक हर k के multiples पर यही नियम चला, 30 में से 30 बार, और जब 9 खुद k को बाँटे, तो बस 1 मान आता है।
और 6 के किसी multiple से 1 आगे वाली संख्याएँ, 7, 13, 19, के digital root 7, 4 और 1 आते हैं, वही 3 मान दोहराते हुए। जोड़ना और भी आसान है, बस संख्याओं की जगह घेरे की जगहों में सोचिए। संख्या 10 बराबर 9 प्लस 1 है, यानी 9 के multiple से 1 आगे, तो 10 जोड़ने पर digital root 1 कदम आगे बढ़ता है। जैसे संख्या 1234 का digital root 1 है, और संख्या 1244 का 2 है।
जिसका digital root 5 है, वो 6 पर आता है, पर 9 वाला 1 पर आता है, जैसे 9 प्लस 10 बराबर 19, और 19 का digital root 1 है। घेरे का ये वापस घूमना ही वो हिस्सा है जो लोग भूल जाते हैं, 9 के बाद कोई और जगह है ही नहीं। संख्या 11 बराबर 9 प्लस 2 है, तो 11 जोड़ने पर digital root 2 कदम आगे बढ़ता है, और वैसे ही घूमता है।
संख्या 8 से शुरू करके 11 जोड़ते जाइए, 8, 19, 30, 41, और आगे, तो digital root 8, 1, 3, 5, 7, 9, 2, 4, 6 आते हैं, और फिर से 8 पर लौटते हैं। यानी 2, 2 कदम चलकर सारी 9 जगहें घूम ली गईं। अब एक सवाल, 8 अंकों वाली किसी संख्या का digital root 5 है, तो उससे 10 बड़ी संख्या का digital root क्या होगा? जवाब 6 है, और 8 अंक होने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता।
जाँच के लिए 8 अंकों वाली पहली 1000 संख्याएँ लीजिए, इनमें digital root 5 वाली 111 हैं, और 10 जोड़ने पर सारी 111 का digital root 6 हो जाता है, 111 में से 111 बार। इससे किसी expression का digital root भी पढ़ा जा सकता है, letters का मान जाने बिना। अब ये लीजिए, 9a प्लस 36b प्लस 13 वाला expression। पहला हिस्सा 9a, a कुछ भी हो, 9 का multiple है, और 36b भी, क्योंकि 36 बराबर 9 गुणा 4 है।
ये दोनों उस जगह पर हैं जहाँ कुछ नहीं बचता, तो ये digital root को ज़रा भी नहीं हिलाते। बचा सिर्फ़ 13, और 1 प्लस 3 बराबर 4, तो जवाब 4 है। जाँच के लिए a बराबर 2 और b बराबर 1 लीजिए, 18 प्लस 36 प्लस 13 बराबर 67, 6 प्लस 7 बराबर 13, और फिर से 4 आता है। अब a और b को 0 से 29 तक बदलिए, 900 जोड़ियाँ बनती हैं, और जवाब हर बार 4 आता है, 900 में से 900 बार।
अब 2 अंदाज़े परखिए, पहला, क्या digital root बता देता है कि संख्या even है या odd? नहीं, 11 odd है और 20 even है, पर दोनों का digital root 2 है। संख्या 3000 से नीचे, 1 से 9 तक हर digital root के साथ even संख्याएँ भी हैं और odd भी, 9 में से 9 बार। तो digital root से even या odd का पता नहीं चलता। दूसरा अंदाज़ा, संख्या को 3 से भाग देने पर जो बचता है, उसका digital root से क्या रिश्ता है?
संख्या 489710 को 3 से भाग दें तो 2 बचता है, और उसके digital root 2 को 3 से भाग दें, तब भी 2 बचता है। संख्या 1 से 2999 तक, हर संख्या और उसका digital root, 3 से भाग देने पर एक सा बचा हुआ छोड़ते हैं, 2999 में से 2999 बार। वजह वही है, 9 खुद 3 का multiple है, तो जो बात 9 के लिए बचती है, वो 3 के लिए भी बचती है।
अब एक पहेली, जो पूरी की पूरी शर्तों में लिखी है। इसका हर अंक odd है, और उतना छोटा है जितना कोई odd अंक हो सकता है। और इसकी 3 बातें एक ही मान पर आती हैं, अंकों की गिनती, अंकों का जोड़, और digital root। वो मान सबसे बड़ा odd अंक है, और odd अंक 1, 3, 5, 7 और 9 हैं। तो वो साझा मान 9 ही है।
सबसे छोटा odd अंक 1 है, तो पहली शर्त हर अंक को 1 बना देती है। तो संख्या में 9 अंक हैं, और सब 1 हैं, उनका जोड़ 9 है, और digital root भी 9 ही आता है। यानी 1 को 9 बार लगातार लिखिए, हर शर्त एक साथ 9 पर आती है। हमने 12 उम्मीदवार परखे, और उनमें सिर्फ़ यही एक संख्या हर शर्त पर खरी उतरी। आख़िर में एक पुराना इस्तेमाल, ये तरीका बहुत पहले से हिसाब जाँचने में काम आता रहा है।
ऐसे जाँचते हैं, मान लीजिए आपने 12 गुणा 34 बराबर 408 लिखा। संख्या 12 का digital root 3 है और 34 का 7, दोनों का गुणा 21, और 21 से फिर 3 बनता है। उधर 408 के अंकों का जोड़ 12 है, और 12 से 3 बनता है, दोनों तरफ़ 3, तो check पास। संख्या 12 गुणा 34 जैसी 1444 सच्ची गुणाओं पर ये check हर बार पास हुआ, 1444 में से 1444 बार।
तो अगर check फ़ेल हो, तो हिसाब पक्का ग़लत है, और ये बड़े काम की बात है। पर check पास होना उतना साबित नहीं करता, जितना लगता है। अगर आपने 408 की जगह 409 लिखा, तो check पकड़ लेता है, क्योंकि 409 का digital root 4 है। पर अगर 417 लिखा, जो 9 ज़्यादा है, तो check चुपचाप पास हो जाता है। और अगर अंक आगे पीछे होकर 480 लिख दिया, तब भी check पास, क्योंकि अंकों का जोड़ वही रहता है।
हर गुणा में 1 से 8 तक की ग़लती, 11552 में से 11552 बार पकड़ी गई, पर ठीक 9 की ग़लती 1444 में से 1444 बार निकल गई। ये check सिर्फ़ इतना बताता है कि दोनों तरफ़ 9 के multiple से एक ही दूरी पर हैं, इससे ज़्यादा कुछ नहीं। तो याद रखिए, अंक जोड़ने से सब कुछ खो जाता है, सिवाय 9 के multiple से दूरी के, और digital root वही दूरी बताता है, 0 की जगह 9 लेकर।
यह कहाँ बैठता है
यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.
किस पर टिका है
- The digit-sum test for 9, and the algebra underneath itकक्षा 8 · Ch 5, Number Play
- Why the same digit sum also settles divisibility by 3कक्षा 8 · Ch 5, Number Play
इसके ठीक पहले और ठीक बाद
- Divisibility by 6 and other numbers, checked through their factorsकक्षा 8 · Ch 5, Number Play
- Cracking a cryptarithm by reasoning about digits, not guessingकक्षा 8 · Ch 5, Number Play