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Chapter 3 · A Story of Numbers

Chinese छड़ अंक: base-10 place value, बस एक symbol कम

Place value11 मिनट

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छड़ों से हिसाब करने वाली एक पुरानी पद्धति का आधार 10 था, वो जगह से चलती थी, बाएँ से दाएँ, सबसे बड़ा पहले, यानी लगभग आपकी अपनी पद्धति। बस ख़ाली जगह का कोई निशान नहीं था।

मुख्य idea

छड़ अंक (rod numerals) हमारा अपना ही system है, जिसमें ठीक एक हिस्सा ग़ायब है, और वे उस ग़ायब हिस्से से कैसे निपटते हैं, यही असली सबक है। ख़ाली स्थान के लिए कोई निशान न होने से, स्थानों के बीच की सीमाएँ ख़ुद digits से ही पहचानी जा सकनी चाहिए — इसलिए digits दो बार बनाए जाते हैं, एक बार खड़े और एक बार करवट लिटाकर, और पास-पास के स्थान कभी एक ही रूप इस्तेमाल नहीं करते। यह काम करता है, और यह एक जुगाड़ है: एक ऐसे symbol की जगह, जो है ही नहीं, अतिरिक्त दोहराव। chapter का अपना फ़ैसला यह है कि zero के एक चिह्न के साथ यह एक पूरा place value system होता।

आपको क्या आना चाहिए

  • 1 से 9 तक दोनों छड़-रूपों में लिखना, और बताना कि कौन-सा रूप किस स्थान का है
  • हर समूह को उसकी दस की घात से जोड़कर छड़ numeral पढ़ना
  • समझाना कि दोनों रूपों के बारी-बारी आने का मक़सद क्या है
  • chapter के अपने 41 से दिखाना कि सिर्फ़ एक रूप इस्तेमाल करने पर क्या गड़बड़ होती है
  • Chinese ख़ाली जगह की तुलना Mesopotamian ख़ाली जगह से करना, और बताना कि एक पढ़ने में आसान क्यों है
  • chapter के अपने शब्दों में ठीक-ठीक बताना कि system में क्या कमी है
  • chapter में आए दो Chinese number systems में फ़र्क़ करना, और बताना कि यह topic किसके बारे में है

जानने लायक़ शब्द

शब्दएक line में मतलबहिंदी / क्षेत्रीय समकक्षपहली बार कहाँ आया
rod numeralsछड़ों से बने Chinese system के numerals, जो हिसाब करने के लिए इस्तेमाल होते थेछड़ अंकइसी chapter में bold में छपा (Part I, §3.4, p.76)
Zongछड़ digit का खड़ा रूप, जो इकाइयों, सैकड़ों, दस-हज़ारों के लिए इस्तेमाल होता हैज़ोंगइसी chapter में छपा (Part I, §3.4, p.77)
Hengछड़ digit का करवट वाला रूप, जो दहाइयों, हज़ारों, लाखों के लिए इस्तेमाल होता हैहेंगइसी chapter में छपा (Part I, §3.4, p.77)
place value systemऐसा system जिसमें किसी चिह्न की जगह तय करती है कि वह किस landmark को गिनता हैस्थानीय मान पद्धतिइसी chapter में bold में छपा (Part I, §3.4, p.73)
decimalbase-10दशमलवइसी chapter में छपा (Part I, §3.4, p.76)
landmark number positionsकिसी numeral के नीचे घातों वाली पंक्ति के लिए chapter का labelसंदर्भ संख्या स्थानइसी chapter में छपा (Part I, §3.4, p.77)
blank spaceवह फ़ासला जो वहाँ छोड़ा जाता है जहाँ किसी स्थान में कोई digit नहींरिक्त स्थानइसी chapter में छपा (Part I, §3.4, p.77)
alternationहर स्थान पर दोनों रूपों के बीच अदला-बदलीएकांतर क्रमइस पाठ का शब्द; chapter अदला-बदली का वर्णन करता है पर उसे कोई नाम नहीं देता
redundancyदो बार रखी गई जानकारी, ताकि पढ़ने वाला बिना किसी निशान के सीमा पहचान सकेअतिरेकइस पाठ का शब्द; इस chapter में नहीं छपा

हिंदी column में standard हिंदी शब्दावली दी गई है, और दोनों Chinese शब्दों का लिप्यंतरण। Ganita Prakash कक्षा 8 का हिंदी संस्करण नहीं देखा गया, इसलिए इसे standard चलन मानें, उस संस्करण के ठीक-ठीक शब्द नहीं।

लोग कहाँ चूकते हैं

  • "दोनों पंक्तियाँ दो अलग number systems हैं।" वे उन्हीं नौ digits के दो रूप हैं। कौन-सा रूप इस्तेमाल होगा, यह स्थान तय करता है, मान नहीं।
  • "बारी-बारी आना बस सजावट है।" यह सीमा का निशान है। इसके बिना लकीरों की कतार को स्थानों में बाँटा नहीं जा सकता, और 41 वाला सवाल ठीक यही दिखाता है।
  • "बारी-बारी वाले तरीक़े के साथ उन्हें zero की ज़रूरत नहीं थी।" थी, और chapter यह कहता है। बारी-बारी वाला तरीक़ा बताता है कि एक स्थान कहाँ ख़त्म होता है और अगला कहाँ शुरू; यह नहीं बता सकता कि कोई स्थान है पर ख़ाली है।
  • "दाएँ से बाएँ पढ़ना नियम है।" पट्टिका numeral को बाएँ से दाएँ पढ़ती है, सबसे ऊँची घात पहले, ठीक जैसे हम लिखते हैं। बस digits का रूप बारी-बारी बदलता है।
  • "छड़ अंक संख्याओं के Chinese अक्षर हैं।" वे दूसरे system के हैं, यानी मात्राएँ दर्ज करने वाले लिखित system के। chapter अपने पहले paragraph में दोनों को अलग करता है, और यह topic छड़ों के साथ चलता है।
  • "छह एक नया symbol है।" छह है पाँच के बराबर वाली आड़ी लकीर और एक खड़ी लकीर। chart बनाया जाता है, रटा नहीं जाता, और बनावट दिखाने से student अठारह आकृतियाँ सीखने से बच जाता है।
पूरा transcript1,613 शब्द

एक पुरानी पद्धति में संख्याएँ लिखने के 2 अलग तरीके थे, और दोनों के काम अलग थे। एक तरीका ब्रश से लिखा जाता था, किसी मात्रा को दर्ज करने के लिए। दूसरा छोटी छोटी छड़ों से बनता था, जो लकीरों वाली एक सतह पर रखी जाती थीं, और हिसाब इसी से होता था। हम छड़ों वाले तरीके के साथ चलेंगे, क्योंकि ये बहुत लंबे समय तक हिसाब का औज़ार रहा।

और इसकी ख़ास बात ये है कि इसका आधार 10 है, ये जगह से चलता है, और अंक बाएँ से दाएँ लिखे जाते हैं, सबसे बड़ा पहले। यानी ये लगभग वही पद्धति है जो आप रोज़ इस्तेमाल करते हैं, बस एक हिस्सा कम। ब्रश वाले तरीके को हम यहीं छोड़ देते हैं, उसे सिखाना इस कहानी का हिस्सा नहीं। और उस कमी की जगह इन्होंने जो किया, वही इस पूरी कहानी का दिल है।

एक जगह से शुरू कीजिए, और एक ही चीज़ से, एक छड़ से। यहाँ पहले 1, 2, 3, 4 और 5, यानी उतनी ही खड़ी छड़ें, अगल बगल। तो क्या 6 के लिए पूरी 6 छड़ें लगेंगी? नहीं, 6 में ऊपर एक आड़ी छड़ रखी जाती है, जो 5 गिनी जाती है, और उसके नीचे एक खड़ी छड़। फिर 7, 8 और 9 में वही आड़ी छड़ है, और नीचे 2, 3 और 4 खड़ी छड़ें।

तो 1 से 9 में से 5 अंक सीधी कतार हैं, और 4 के ऊपर आड़ी छड़ है। अब 9 में बस 5 छड़ें लगती हैं, उतनी ही जितनी 5 में, और किसी अंक को 5 से ज़्यादा छड़ें कभी नहीं चाहिए। आड़ी छड़ न होती तो 9 के लिए पूरी 9 छड़ें लगतीं, आड़ी छड़ का पहला फ़ायदा यही है। अब वो हिस्सा जो आपकी अपनी पद्धति में है ही नहीं।

हर अंक की एक दूसरी तस्वीर भी है, पूरी तस्वीर को चौथाई चक्कर घुमा दीजिए। खड़ी छड़ें लेट जाती हैं, और आड़ी छड़ खड़ी हो जाती है। देखिए, लेटा हुआ 1 बस एक लेटी छड़ है, और लेटा हुआ 9 एक खड़ी छड़ के नीचे 4 लेटी छड़ें। और घुमाने से छड़ों की गिनती नहीं बदलती, लेटे रूप में भी हर अंक उतनी ही छड़ों का है। यानी 9 अंक, 18 तस्वीरें, और एक भी तस्वीर दोनों कतारों में नहीं आती।

यही बात याद रखिए, कोई भी तस्वीर देखकर आप बता सकते हैं कि वो किस कतार की है। पर ये किसी काम का नहीं, जब तक पता न हो कि ये किसलिए है। ये जगहों के लिए है, और नियम बहुत सीधा है। खड़ा रूप 1 की जगह और 100 की जगह पर जाता है। और लेटा रूप 10 की जगह और 1000 की जगह पर जाता है। यानी इकाई से शुरू करके हर दूसरी जगह पर खड़ा रूप, और बीच वाली जगहों पर लेटा।

तो रूप जगह तय करती है, अंक नहीं, 10 की जगह का 4 और इकाई का 4 एक ही अंक है, बस अलग ढंग से बना। जैसे 44 में पहले 4 लेटी छड़ें आती हैं, फिर 4 खड़ी छड़ें। और पास पास की 2 जगहें कभी भी एक ही रूप नहीं लेतीं। इसे याद रखिए, ये बहुत जल्द एक ऐसा काम करेगा जो और कोई नहीं कर रहा। अब एक संख्या पढ़िए, बाएँ से दाएँ छड़ों के 4 समूह।

बोर्ड पर पहले 2 लेटी छड़ें, फिर एक आड़ी छड़ के नीचे एक खड़ी, फिर 3 लेटी, और आख़िर में 4 खड़ी। सबसे दाईं तरफ़ का समूह इकाई गिनता है, 4 खड़ी छड़ें यानी 4 इकाइयाँ। उसके बाईं ओर वाला समूह 10 गिनता है, 3 लेटी छड़ें यानी 30 बनते हैं। उसके बाद वाला 100 गिनता है, आड़ी छड़ के नीचे एक, यानी 6, तो 600 बनते हैं। और सबसे बायाँ समूह 1000 गिनता है, 2 लेटी छड़ें, यानी 2000 बनते हैं।

पूरी संख्या 2634 बनी, और उसमें छड़ें लगीं 2, 2, 3 और 4, कुल 11 छड़ें। और किसी भी जगह को 4 से ज़्यादा छड़ें नहीं चाहिए थीं। अब आपकी बारी है, 7358 को छड़ों में कैसे लिखेंगे? पहले हर अंक की जगह देखिए, इकाई पर 8, 10 की जगह पर 5, 100 की जगह पर 3, और 1000 की जगह पर 7 है। इकाई की जगह खड़ी है, तो 8 खड़े रूप में, एक आड़ी छड़ और नीचे 3 खड़ी।

फिर 10 की जगह लेटी है, तो 5 यानी 5 लेटी छड़ें। उसके बाद 100 की जगह फिर खड़ी है, तो 3 खड़ी छड़ें। और 1000 की जगह लेटी है, तो 7 यानी एक खड़ी छड़ के नीचे 2 लेटी छड़ें। अब छड़ें गिनिए, 3, 3, 5 और 4, यानी कुल 15 छड़ें। इसमें कोई जगह ख़ाली नहीं, और ये किसी दूसरी संख्या से नहीं मिलती। अब घुमाना हटा दीजिए और देखिए कि क्या टूटता है।

मान लीजिए हर जगह खड़ा रूप ही लगे, और आपको 41 लिखना है। अब 4 यानी 4 खड़ी छड़ें, और 1 यानी एक खड़ी छड़, दोनों को साथ रखिए। देखिए, कतार में 5 खड़ी छड़ें बनती हैं, एक के बाद एक। और अंक 5 की तस्वीर भी बिल्कुल यही है, 5 खड़ी छड़ें। छड़ों का एक ही ढेर, 2 संख्याएँ, और बोर्ड पर कुछ नहीं जो बताए कि एक जगह कहाँ ख़त्म होती है।

घुमाना वापस लाइए, तो पहले 4 लेटी छड़ें और फिर एक खड़ी। वही 5 छड़ें, बस 4 लेटी हुईं, और उलझन ख़त्म। ये तो एक संख्या थी, असली सवाल ये है कि घुमाना कुल मिलाकर कितनी उलझन हटाता है? तो हर संख्या को, 1 से लेकर 9999 तक, दोनों तरह से बिछाकर गिनते हैं कि कितनी किसी और जैसी दिखती हैं। यहाँ अगर हर जगह एक ही रूप हो, तो 7166 संख्याएँ किसी दूसरी संख्या से मिल जाती हैं।

कुल 9999 संख्याएँ, और उनके लिए बस 3740 अलग तस्वीरें। पर जब दोनों रूप बारी बारी से लगते हैं, तो टकराने वाली संख्याएँ घटकर 759 रह जाती हैं। अब 9419 अलग तस्वीरें हैं, लगभग हर संख्या की अपनी। छोटी गिनती में भी यही दिखता है, 1 से 99 तक एक रूप में 42 संख्याएँ टकराती हैं, और बारी बारी के रूपों में एक भी नहीं। घुमाने से यही मिलता है, और ये लगभग सब कुछ है।

लगभग, क्योंकि एक चीज़ घुमाना नहीं कर सकता, और वो कभी हल नहीं हुई। अगर किसी जगह पर कोई अंक नहीं, तो वहाँ कुछ नहीं रखा जाता, बस एक फ़ासला। साठ के गट्ठरों में गिनने वाली एक पुरानी पद्धति में भी, ख़ाली जगह पर बस फ़ासला छोड़ा जाता था। पर यहाँ फ़ासला ज़्यादा आसानी से दिखता है, क्योंकि यहाँ हर जगह में 1 से 5 छड़ें होती हैं। उस पद्धति में एक जगह में 1 से 14 निशान तक होते थे, तो जगहों की चौड़ाई बहुत बदलती थी।

पर आसानी से दिखना, निशान लगा होना नहीं है। फ़ासले की कोई तय चौड़ाई नहीं होती, और बोर्ड पर छड़ें खिसक जाती हैं। जो पढ़ने वाला फ़ासले नहीं गिन सकता, वो जगहें भी नहीं गिन सकता। अब टकराने वाली उन 759 संख्याओं को ध्यान से देखिए, असल में कौन सी संख्याएँ खो जाती हैं? मसलन 101 लीजिए, खड़ा 1, फिर कुछ नहीं, फिर दोबारा खड़ा 1 आता है। यहाँ बीच में कुछ न होने से दोनों खड़ी छड़ें अगल बगल आ जाती हैं।

और 2 खड़ी छड़ें अगल बगल, यही तो 2 की तस्वीर है। तो 101, 200 और 2, छड़ों का एक ही ढेर है जो 3 संख्याएँ बन सकता है। पर ध्यान दीजिए, 2 में तो कोई ख़ाली जगह है ही नहीं, फिर भी वो खोती है। गिनें तो 759 में से 669 में ख़ाली जगह है, और 90 में नहीं, जैसे 1, जो 100 से टकराता है। पर टकराने वाले हर समूह में कोई न कोई ख़ाली जगह वाली संख्या ज़रूर है, सभी 179 समूहों में।

और जिन 7380 संख्याओं की हर जगह भरी है, उनमें से कोई 2 कभी नहीं टकरातीं। और एक बारीकी, जो दिखाती है कि जगह की सीमा का ये निशान असल में क्या कर रहा है। वैसे 1 से 9999 तक 2619 संख्याओं में कोई न कोई ख़ाली जगह है। उनमें से 669 खोती हैं, और 1950 बच जाती हैं। यानी ख़ाली जगह होना ज़रूरी है, पर इतना काफ़ी नहीं। अब 101 और 106 की तुलना कीजिए, दोनों में बीच की जगह ख़ाली है।

देखिए, 101 टकराता है, पर 106 नहीं टकराता। क्योंकि 6 में ऊपर आड़ी छड़ है, जो साफ़ अपनी जगह की है, और बताती है कि अंक कहाँ से शुरू होता है। तस्वीर में ये दोहराव एक ग़ायब निशान की जगह काम कर रहा है, और वो आधा ही काम करता है। तो गिनती तीसरी बार कीजिए, बस एक चीज़ जोड़कर। वही छड़ें, वही बारी बारी के रूप, और जहाँ भी जगह ख़ाली हो, वहाँ एक निशान, कोई भी निशान।

अब 1 से 9999 तक एक भी संख्या किसी दूसरी से नहीं टकराती। अब 101 में खड़ा 1, फिर निशान, फिर खड़ा 1 आता है, और वो 2 से बिल्कुल अलग दिखता है। देखिए, कुल 9999 संख्याएँ, और पूरी 9999 अलग तस्वीरें। एक निशान, और पद्धति की हर उलझन एक साथ ग़ायब। ऐसा नहीं कि उलझनें कम हो गईं, सारी की सारी चली गईं। आपकी पद्धति और इस पद्धति के बीच बस इतनी ही दूरी है।

तो बात एक अजीब और गहरी जगह पर आकर रुकती है। आधार 10, जगह से चलने वाली, बाएँ से दाएँ, और 9 अंक एक ही चीज़ से बने। सब कुछ है, बस कुछ नहीं को लिखने का कोई तरीका नहीं। और उस कमी को ढकने के लिए इन्होंने कुछ बहुत चतुर बनाया, हर अंक को 2 बार बनाकर जगह की सीमा अंक के अंदर ही रख दी। बहुत चतुर काम, एक ऐसी कमी के चारों ओर, जिसे एक अकेला निशान भर देता।

ख़ाली जगह का निशान किसी पद्धति की सजावट नहीं, उसका असली हिस्सा है। और जिस पद्धति ने आख़िरकार शून्य को एक संख्या माना, फ़ासला नहीं, वही हम सब ने सीखी है।

यह कहाँ बैठता है

यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.

किस पर टिका है

इसके ठीक पहले और ठीक बाद

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