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Chapter 3 · A Story of Numbers

शरीर के अंग और tally marks: numerals से पहले की गिनती

Some early number systems11 मिनट

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सबसे पुरानी 2 गिनती पद्धतियों को बस एक शरीर और खरोंचने को कुछ चाहिए था। शरीर की सैर उँगलियों से बाँह पर चढ़ती है, नाक पर मुड़ती है, और दूसरे हाथ तक उतरती है: 13, 1 और 13, कुल 27 पड़ाव, और पास की तरफ़ के सभी 13 जोड़ों का जोड़ 28।

मुख्य idea

chapter के दो सबसे पुराने number systems उन दो चीज़ों से बने हैं जो हर इंसान के पास पहले से हैं: एक शरीर, और खुरचने के लिए कोई सतह। दोनों में से हर एक ठीक आधी समस्या हल करता है। शरीर के अंगों वाले sequence को न किसी सामान की ज़रूरत है, न किसी समझौते की, क्योंकि शरीर की बनावट सबके लिए क्रम तय कर देती है — पर शरीर कहीं ख़त्म हो जाता है, और यहाँ बना शरीर 27 पर ख़त्म होता है। खाँचे कभी ख़त्म नहीं होते, पर खाँचों की कतार का कोई आकार नहीं होता, इसलिए उसे पढ़ने का मतलब है उसे फिर से शुरू से गिनना। दोनों मिलकर वे दो माँगें तय करते हैं जिन्हें chapter का हर बाद वाला system एक साथ पूरा करने की कोशिश करता है।

आपको क्या आना चाहिए

  • छपे हुए शरीर-अंग sequence को 1 से 27 तक पढ़ते हुए चलना, और 14 पर समरूपता (symmetry) का बिंदु पहचानना
  • समझाना कि chapter की अपनी परिभाषा के हिसाब से शरीर-अंग sequence एक standard sequence क्यों है
  • बने हुए शरीर-अंग system की ऊपरी सीमा बताना, और यह कहना कि उससे आगे गिनने के लिए इस्तेमाल करने वाले को क्या करना होगा
  • बताना कि tally §3.1 के डंडी वाले तरीक़े से कैसे अलग है, और इस फ़र्क़ से क्या मिलता है
  • chapter जिन दो हड्डियों का नाम लेता है, उन्हें उनके मिलने की जगह, उन पर खाँचों के सबूत और उनकी बताई गई उम्र के साथ बताना
  • समझाना कि दिनों का tally कैसे calendar बन जाता है, और 29 खाँचे एक इशारा करती संख्या क्यों है
  • ठीक-ठीक बताना कि tally क्या नहीं कर सकता, और उस कमी को आगे आने वाले समूह बनाने (grouping) के विचार से जोड़ना

जानने लायक़ शब्द

शब्दएक line में मतलबहिंदी / क्षेत्रीय समकक्षपहली बार कहाँ आया
tally marksकाटे या खुरचे गए निशान, गिनी गई हर चीज़ के लिए एकमिलान चिह्नइसी chapter में bold में छपा (Part I, §3.2, p.55)
notchesख़ुद वे कटान, जो हड्डी, लकड़ी या गुफा की दीवार पर बनाए गएखाँचे / निशानइसी chapter में छपा (Part I, §3.2, p.55)
Ishango boneDemocratic Republic of Congo से मिली निशानों वाली एक हड्डी, जिसके खाँचे columns में लगे हैंइशांगो अस्थिइसी chapter में छपा (Part I, §3.2, p.55)
Lebombo boneSouth Africa से मिली निशानों वाली एक हड्डी, जिस पर 29 खाँचे हैंलेबोंबो अस्थिइसी chapter में छपा (Part I, §3.2, p.55)
standard sequenceवह तय क्रम वाली सूची जिसके साथ-साथ गिनती चलती है, चाहे वह चीज़ों की हो, नामों की या निशानों कीमानक अनुक्रमइसी chapter में छपा (Part I, §3.1, pp.52–54)
one-to-one mappingहर चीज़ को sequence के ठीक एक सदस्य से जोड़नाएकैक संगतिइसी chapter में छपा (Part I, §3.1, p.52)
numeralsकिसी number system के लिखे हुए चिह्नअंक / संख्यांकइसी chapter में bold में छपा (Part I, §3.1, p.54)
body-count sequenceऐसा standard sequence जिसके सदस्य शरीर के नाम वाले अंग हैं, एक तय रास्ते परशरीर-अंग अनुक्रमइस पाठ का शब्द; इस chapter में नहीं छपा, जो sequence दिखाता है पर इस चलन को कोई नाम नहीं देता
ceiling of a systemवह सबसे बड़ी संख्या जहाँ तक कोई system किसी नई चीज़ की ज़रूरत पड़ने से पहले पहुँचता हैपद्धति की ऊपरी सीमाइस पाठ का शब्द; इस chapter में नहीं छपा

हिंदी column में standard हिंदी शब्दावली दी गई है। Ganita Prakash कक्षा 8 का हिंदी संस्करण नहीं देखा गया, इसलिए इसे standard चलन मानें, उस संस्करण के ठीक-ठीक शब्द नहीं।

लोग कहाँ चूकते हैं

  • "शरीर से गिनना बस उँगलियाँ उठाना है।" उँगलियाँ दस देती हैं। यह system 27 देता है क्योंकि sequence कलाई, अग्रबाहु, कंधे, कान और आँख पर से भी गुज़रता है — हर पड़ाव एक नाम वाली जगह है, और यह नाम देना ही उसे इशारे के बजाय sequence बनाता है।
  • "हर कोई शरीर को अलग क्रम में गिनेगा, इसलिए यह चल नहीं सकता।" क्रम शरीर की अपनी बनावट और समुदाय के चलन से तय होता है, और दर्पण जैसी समरूपता उसे याद रखना आसान बनाती है। जो दो लोग एक ही चलन मानते हैं, वे हमेशा एक ही जगह रुकेंगे।
  • "tally कोई number system नहीं है।" chapter की परिभाषा के हिसाब से है: तय क्रम वाले निशानों का sequence, जिसे चीज़ों से एक-एक करके जोड़ा जाता है। उसमें कमी सुविधा की है, वैधता की नहीं।
  • "हड्डियाँ साबित करती हैं कि पुराने लोग arithmetic करते थे।" chapter कहता है कि निशान संख्याओं को दिखाते हैं, ऐसा माना जाता है, और calendar वाली व्याख्या एक संभावना है। यह सावधानी बनाए रखो; यह text में है।
  • "tally marks और डंडियाँ एक ही चीज़ हैं।" लगभग। फ़र्क़ टिकाऊपन का है: निशान गिनने वाले के बाद भी बचे रहते हैं और अगले मौसम में पढ़े जा सकते हैं, और calendar को ठीक यही चाहिए।
  • "tally marks को पाँच-पाँच के समूहों में बाँधना ही tally का हमेशा का तरीक़ा रहा है।" Part I p.57 पर chapter पाँच निशानों के हर समूह की जगह एक नया अकेला symbol रखता है, और उदाहरण के लिए अपनी Table 1 के Roman V की तरफ़ इशारा करता है; वह कभी पाँच का कटा हुआ समूह नहीं बनाता, और व्याख्या को भी नहीं बनाना चाहिए। यहाँ निशान बिना समूह के हैं, और यही वह हालत है जिसे अगला topic ठीक करता है।
पूरा transcript1,795 शब्द

किसी भी गिनती पद्धति को गिनने के लिए एक अनुक्रम चाहिए। सबसे पुरानी जो 2 पद्धतियाँ हम जानते हैं, वो उन्हीं चीज़ों से बनी हैं जो लगभग सबके पास पहले से होती हैं। पहली चीज़ है आपका अपना शरीर। और दूसरी, कोई ऐसी सतह जिस पर खरोंचकर निशान बनाया जा सके। न इन्हें ख़रीदना पड़ता है, न किसी से तय करना पड़ता है, न साथ ढोना पड़ता है। और इन दोनों में से हर एक आधी समस्या हल करता है, और बाकी आधी में फ़ेल हो जाता है।

शरीर पर किसी समझौते की ज़रूरत नहीं पड़ती, पर शरीर ख़त्म हो जाता है। निशान कभी ख़त्म नहीं होते, पर निशानों की कतार की कोई शक्ल नहीं होती, इसलिए उसे पढ़ने के लिए पूरी गिनती दोबारा करनी पड़ती है। इन्हीं 2 कमियों से वो काम तय होता है जिसे बाद की पद्धतियाँ पूरा करने की कोशिश करती हैं। पहले शरीर को लीजिए, और देखिए कि गिनती कहाँ कहाँ जाती है।

शुरुआत एक हाथ की उँगलियों से होती है, 1, 2, 3, 4 और 5 तक। पर गिनती वहीं नहीं रुकती, जैसे हमारी अक्सर रुक जाती है। वो बाँह पर ऊपर चढ़ती है: कलाई, फिर कलाई से कोहनी के बीच का हिस्सा, फिर कोहनी, फिर ऊपरी बाँह, फिर कंधा। उसके बाद गर्दन, फिर कान, और फिर आँख। और फिर नाक, जो चेहरे के ठीक बीच में है। ठीक यहीं पर आकर गिनती वापस मुड़ती है।

फिर दूसरी आँख, दूसरा कान, दूसरा कंधा, और दूसरी बाँह से नीचे उतरकर दूसरे हाथ की उँगलियों तक। इन जगहों के अपने नाम हैं, और यही नाम इसे एक इशारे की जगह एक अनुक्रम बनाते हैं। अब चीज़ों को नहीं, इन पड़ावों को गिनकर देखिए। एक तरफ़ 13 पड़ाव हैं: 5 उँगलियाँ, और कलाई से आँख तक 8 और जगहें। नाक 1 और पड़ाव है, और वो किसी भी तरफ़ का नहीं है।

फिर दूसरी तरफ़ फिर से 13 पड़ाव, वही 13, बस उल्टे क्रम में। यानी पहले 13, फिर 1, फिर 13 पड़ाव। कुल जानने के लिए तस्वीर गिनने की ज़रूरत नहीं है, बस इन्हें जोड़िए। जोड़ने पर 13, 1 और 13 मिलकर 27 पड़ाव बनते हैं। और बीच का पड़ाव, यानी नाक, गिनती में 14 पर आता है, पूरी एक तरफ़ से ठीक 1 आगे। शरीर की इस सैर की बनावट ही आपको ये दोनों संख्याएँ दे देती है।

ये आईने वाली बात ज़रा रुककर देखने लायक है, क्योंकि ये असली काम करती है। कोई भी पड़ाव लीजिए, और दूसरी तरफ़ उसका जोड़ीदार। पहला और आख़िरी, यानी 1 और 27, फिर 2 और 26, फिर 13 और 15 वाले पड़ाव। पास वाली तरफ़ के सभी 13 जोड़ों का जोड़ 28 ही आता है। इसलिए दूसरी तरफ़ को याद करने की ज़रूरत ही नहीं, वो 28 में से पास वाला पड़ाव घटाकर मिल जाती है।

और ठीक 1 पड़ाव ऐसा है जिसे आईना अपनी जगह से नहीं हिलाता। वो पड़ाव जिसका जोड़ीदार वो ख़ुद है, यानी 14, क्योंकि 14 और 14 मिलकर 28 होते हैं। वही नाक है, और ऐसा बस 1 ही पड़ाव है, क्योंकि पड़ावों की कुल गिनती विषम है। अगर शरीर में 26 पड़ाव होते, तो मुड़ने के लिए कोई बीच का पड़ाव ही नहीं होता। अब देखिए कि इस पद्धति को क्या क्या मुफ़्त में मिलता है।

गिनती के अनुक्रम को एक तय क्रम चाहिए, जिस पर गिनना शुरू होने से पहले ही सहमति हो। किसी गढ़े हुए अनुक्रम के लिए ये सहमति मेहनत का काम है: कोई तय करता है, और बाकी सब याद रखते हैं। इस अनुक्रम में ये फ़ैसला शरीर ख़ुद कर देता है। कोहनी कलाई से ऊपर और कंधे से नीचे होती है, किसी के भी शरीर में। इसलिए जो भी लोग ये तरीका जानते हैं, वो एक ही चीज़ें गिनकर एक ही पड़ाव पर रुकते हैं।

और इससे भी फ़र्क नहीं पड़ता कि आप चीज़ें किस क्रम में उठाते हैं। मान लीजिए आपके पास 6 चीज़ें हैं, तो उन्हें उठाने के कुल 720 क्रम बनते हैं। इन सभी 720 क्रमों में गिनती एक ही पड़ाव पर रुकती है, और वो पड़ाव है कलाई। न कोई सामान, न कोई लिखावट, न कोई समझौता, और फिर भी इतना कुछ। तो फिर इसमें गड़बड़ क्या है? अपनी बकरियाँ गिनिए, बाँह पर ऊपर, चेहरे के पार, और दूसरी तरफ़ नीचे।

आप दूसरे हाथ की आख़िरी उँगली तक पहुँच गए, यानी पड़ाव 27 पर। और बकरियाँ अब भी बाकी हैं। अगली बकरी के लिए, यानी 28 पर, शरीर में कोई पड़ाव ही नहीं है। इस पद्धति की छत 27 पर है, क्योंकि शरीर वहीं ख़त्म हो जाता है। अब 30 बकरियों का झुंड इस छत से 3 ज़्यादा है। सिर्फ़ उँगलियों से तो आप 10 तक ही पहुँचते, बाकी 17 पड़ाव बाँहों और चेहरे ने जोड़े।

फ़र्क ज़्यादा नहीं है, पर जो पद्धति 30 पर अटक जाए, उससे पूरी फ़सल का हिसाब नहीं चल सकता। और ये गड़बड़ हिसाब की नहीं है, गिनने वाले के पास बस शरीर ख़त्म हो गया। इसका एक सीधा इलाज है, और लोगों ने इसे इस्तेमाल भी किया। दूसरे हाथ पर पहुँचकर फिर से शुरू कीजिए, और याद रखिए कि एक चक्कर पूरा हो गया। एक शरीर आपको 27 तक ले जाता है, और दूसरा चक्कर आपको 54 तक पहुँचा देता है।

तीसरा चक्कर 81 तक, यानी हर चक्कर में 27 और। तो 30 बकरियों का मतलब है 1 पूरा चक्कर, और उसके बाद 3 बकरियाँ बचीं। यानी एक चीज़ पूरे चक्करों की गिनती रखे, और दूसरी बची हुई बकरियों की। ये वही तरकीब है जो letters के ख़त्म होने के बाद भी गिनती आगे बढ़ाने में काम आती है। ये विचार आगे चलकर कहीं ज़्यादा ताक़तवर रूप में लौटता है। पर इसके लिए एक दूसरा इंसान चाहिए, या अच्छी याद्दाश्त, या कोई निशान।

और यहीं से हम दूसरी पद्धति पर पहुँचते हैं। एक सतह, और कोई नुकीली चीज़। जितनी चीज़ें गिनीं, उतने खाँचे काटिए, एक चीज़ पर एक खाँचा। एक बकरी, एक खाँचा, फिर अगली बकरी, और अगला खाँचा। अगर ये जाना पहचाना लगे, तो ठीक लगता है, ये बिल्कुल डंडियों वाला तरीका है। एक चीज़, एक निशान, और किसी भी तरफ़ कुछ नहीं बचता। तो ऐसा लगता है कि ये 2 अलग अलग तरीके हैं।

पर गणित के हिसाब से ये एक ही तरीका है, बस 2 अलग चीज़ों पर किया हुआ। वही 12 बकरियों वाला झुंड डंडियों से गिनिए तो 12 डंडियाँ, खाँचों से गिनिए तो 12 खाँचे। जाँच में 1 से 100 तक के सभी 100 झुंडों पर दोनों तरीकों का जवाब एक ही आया। ये अलग आ ही नहीं सकता, क्योंकि दोनों एक ही जोड़ी बनाना है, इसलिए फ़र्क हिसाब में नहीं है।

फ़र्क ये है कि डंडियों के ढेर को एक ठोकर से बिखेरा जा सकता है। उसकी रखवाली करनी पड़ती है, और उसे पूरे मौसम बाहर नहीं छोड़ा जा सकता। पर हड्डी में कटा खाँचा कटा ही रहता है। वो रात भर टिकता है, सर्दी भर टिकता है, और बनाने वाले के बाद भी टिका रहता है। और इसकी कोई छत नहीं है, जब तक सतह चलती है, निशान चलते रहते हैं, 1000 निशान भी बस एक लंबी कतार हैं।

यानी निशान ठीक वही कर देते हैं जो शरीर नहीं कर पाया। वो कभी ख़त्म नहीं होते, और टिके भी रहते हैं। इसीलिए गिनती की जो सबसे पुरानी चीज़ें हमारे पास हैं, वो तस्वीरें या शब्द नहीं हैं। वो हड्डियाँ हैं, जिन पर खाँचे कटे हुए हैं। ऐसी 2 हड्डियों के बारे में जानना काम का है। पहली हड्डी लगभग 44000 साल पुरानी मानी जाती है। दूसरी की उम्र एक दायरे में बताई जाती है, 20000 से 35000 साल के बीच।

तो इन दोनों में से कौन सी ज़्यादा पुरानी है? आप सोच सकते हैं कि ये कहा ही नहीं जा सकता, क्योंकि एक की उम्र तो एक दायरा है। पर कहा जा सकता है, और उसकी जाँच ये है। पहली हड्डी का सबसे कम अंदाज़ा, 44000 साल, दूसरी के सबसे ज़्यादा अंदाज़े, 35000 साल, से भी ज़्यादा है। दोनों दायरे आपस में छूते तक नहीं, इसलिए पहली हड्डी ज़्यादा पुरानी है, और फ़र्क कम से कम 9000 साल का है, ज़्यादा से ज़्यादा 24000 साल का।

अब मान लीजिए कि पहली हड्डी का दायरा 30000 से 50000 साल होता। तब दोनों दायरे एक दूसरे पर चढ़ जाते, और कौन ज़्यादा पुरानी है, इसका कोई ईमानदार जवाब ही नहीं होता। पहली हड्डी पर 29 खाँचे कटे हुए हैं। और 29 ऐसी संख्या है जिसे देखकर लोग चौंक जाते हैं। चाँद का एक चक्कर लगभग 29 या 30 दिन का होता है। यानी 29 खाँचे उस दायरे के बिल्कुल निचले सिरे पर हैं, ऊपरी सिरे से बस 1 कम।

तो हो सकता है ये हड्डी चीज़ों का नहीं, दिनों का हिसाब रही हो, गिनती की जगह एक कैलेंडर। हो सकता है, बस इतना ही, कोई नहीं जानता, और निशान ख़ुद ये नहीं बता सकते। पर देखिए कि ये संभावना किस चीज़ पर टिकी है। दिन गिनने के लिए ऐसा हिसाब चाहिए जो रात भर टिके, गिनने वाले के बाद भी बचे, और अगले महीने फिर शुरू हो सके। डंडियाँ ये कभी नहीं कर सकती थीं, पर हड्डी कर सकती है।

तो क्या निशान दोनों मामलों में जीत गए? पूरी तरह नहीं, और यहाँ ये कमी कहकर नहीं, नापकर दिखाई जाएगी। निशानों से लिखने में एक चीज़ पर एक खाँचा लगता है, 29 चीज़ें तो 29 खाँचे। इससे सस्ता कुछ हो ही नहीं सकता। अब इसी कतार को वापस पढ़कर देखिए। एक जैसे 29 निशानों पर नज़र डालकर आप नहीं जान सकते कि वो 29 हैं। आपको एक एक करके उन पर चलना पड़ता है, और ये पूरी गिनती दोबारा करना ही है।

पढ़ने की क़ीमत ठीक उतनी ही है जितनी लिखने की, यानी 29 बार देखना। और ये कभी सुधरता नहीं, 400 निशानों को पढ़ने में 400 बार देखना पड़ता है। जो चीज़ बाद में पढ़ने के लिए बनाई जाती है, उसका लिखना तेज़ और पढ़ना धीमा होना, अजीब बात है। तो इसे ठीक क्या करेगा? कुछ ऐसा, जो आँख को निशानों का एक पूरा टुकड़ा एक साथ पकड़ने दे। मान लीजिए 5 निशानों के हर समूह की जगह एक नया चिह्न रख दिया जाए।

मतलब, 5 निशानों पर आड़ी लकीर नहीं, बल्कि 5 के लिए एक बिल्कुल नया चिह्न। तब 29 देखने लायक 29 चीज़ें नहीं रह जातीं। वो बन जाते हैं 5 नए चिह्न और 4 बचे हुए निशान, यानी कुल 9 चीज़ें देखनी हैं। यानी 29 में से 20 बार देखना बच गया। और 400 निशान, 400 बार देखने से घटकर 80 बार देखने पर आ जाते हैं। आगे जो कुछ आता है, वो यही है, और आप देख सकते हैं कि उसे आना ही था।

देखिए कि ये 2 पद्धतियाँ मिलकर क्या माँग रही थीं। शरीर को ऐसा अनुक्रम चाहिए था जो ख़त्म न हो, और हड्डी को ऐसी कतार जो एक नज़र में पढ़ी जा सके। इन दोनों में से कोई भी आपको दोनों चीज़ें नहीं दे पाया। इसके बाद आने वाली पद्धतियाँ, इन दोनों को एक साथ पाने की कोशिशें हैं।

यह कहाँ बैठता है

यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.

किस पर टिका है

आगे फिर कहाँ आता है

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