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Chapter 3 · A Peek Beyond the Point

fractional हिस्से को अलग करने के प्रतिद्वंद्वी तरीक़े, और point क्यों जीता

Decimals outside the classroom10 मिनट

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दशमलव में क्या गणित से निकला, और क्या लोगों ने तय किया? इकाई को 10 में काटते ही बटा 10, बटा 100, बटा 1000 वाले खाने अपने आप बन जाते हैं। पर पूरा हिस्सा कहाँ खत्म होता है, यह बताने वाला निशान चुना गया।

मुख्य idea

इस chapter में बाक़ी सब कुछ एक फ़ैसले से निकलता है — unit को दस से बाँटो — पर वह निशान, जो दिखाता है कि पूरा हिस्सा कहाँ रुकता है, किसी चीज़ से नहीं निकलता। वह एक नियम है, एक सहमति, और chapter का इतिहास वाला हिस्सा इसका सबूत है: दस और सौ denominators वाले fractions भारतीय गणित में किसी भी अलग करने वाले निशान के मानक बनने से सदियों पहले इस्तेमाल होते थे, पंद्रहवीं सदी ने कम से कम तीन अलग तरीक़े आज़माए, सोलहवीं सदी point और comma के बीच बँट गई, और वह बँटवारा आज तक ख़त्म नहीं हुआ (Part I, §3.8, p.78)। जो student किसी notation के मजबूरी वाले हिस्सों को चुने हुए हिस्सों से अलग पहचान सकता है, उसने कुछ ऐसा सीखा है जो अकेला arithmetic नहीं सिखा सकता।

आपको क्या आना चाहिए

  • ख़ुद decimal fractions और उनके लिए decimal notation में फ़र्क़ करना, और बताना कि chapter के ब्योरे में पहले कौन आया
  • chapter के पाँच नाम लिए गए लोगों और उनके योगदान को क्रम में रखना
  • पूरे हिस्से को अलग करने के पंद्रहवीं सदी के हर प्रतिद्वंद्वी तरीक़े का वर्णन करना
  • दिए गए number को उनमें से किसी एक प्रतिद्वंद्वी notation में फिर से लिखना, और वापस
  • समझाना कि एक ही मात्रा के लिए एक से ज़्यादा notation व्यवहार में समस्या क्यों हैं
  • बताना कि आज भी क्या तय नहीं हुआ है, और किसी number के दो रूप देना
  • तर्क देना कि decimal notation के कौन-से हिस्से गणित की मजबूरी हैं और कौन-से सहमति से चुने गए हैं

जानने लायक़ शब्द

शब्दएक line में परिभाषाहिंदी / क्षेत्रीय समकक्षपहली बार कहाँ आया
Decimal fractionsऐसे fractions जिनके denominators दस, सौ, हज़ार वग़ैरह हैंदशमलव भिन्नPart I, §3.8, p.78 में, इतिहास वाले हिस्से की शुरुआत में छपा
decimal notationऐसी मात्रा लिखने का ऐसा तरीक़ा जिससे बँटवारा दिखेदशमलव संकेतनPart I, §3.4, p.62 में छपा
denominatorउन बराबर हिस्सों की संख्या जिनमें पूरा काटा जाता हैहरPart I, §3.8, p.78 में छपा
Śhrīdharāchāryaआठवीं सदी का वह भारतीय गणितज्ञ जिसका नाम chapter arithmetic और algebra पर काम के लिए लेता हैश्रीधराचार्यPart I, §3.8, p.78 में छपा
al-Uqlīdisīवह गणितज्ञ जिसके दसवीं सदी के काम को chapter विस्तृत ब्योरे का श्रेय देता हैअल-उक़्लीदिसीPart I, §3.8, p.78 में छपा
Kitāb al-Fuṣūlउस किताब के शीर्षक के शुरुआती शब्द, जो आगे fī al-Ḥisāb से चलता है और al Hindī पर ख़त्म होता है; page पूरे शीर्षक का मतलब भारतीय arithmetic के अध्यायों की किताब बताता है— (शीर्षक, अनुवाद नहीं किया गया)Part I, §3.8, p.78 में italics में छपा
vertical markपंद्रहवीं सदी के उन तरीक़ों में से एक जो दिखाते थे कि पूरा हिस्सा कहाँ ख़त्म होता हैऊर्ध्वाधर चिह्नPart I, §3.8, p.78 में छपा
superscriptऊपर उठाकर लिखा छोटा अंक, जो उन तरीक़ों में से एक और में fractional जगहें गिनने के लिए इस्तेमाल होता थाघातांक-सदृश ऊपरी अंकPart I, §3.8, p.78 में छपा
commaकई देशों में point की जगह इस्तेमाल होने वाला अलग करने का निशानअल्पविरामPart I, §3.8, p.78 में छपा
John Napierसोलहवीं सदी के उन दो गणितज्ञों में से एक जिनका नाम chapter point के लिए लेता हैजॉन नेपियरPart I, §3.8, p.78 में छपा
Christopher Claviusदूसराक्रिस्टोफ़र क्लेवियसPart I, §3.8, p.78 में छपा
François Vièteसोलहवीं सदी का वह गणितज्ञ जिसका नाम chapter comma के लिए लेता हैफ़्रांस्वा वियेतPart I, §3.8, p.78 में छपा
thousand separatorवह निशान या ख़ाली जगह जो बड़े पूरे number के digits के समूह बनाती हैसहस्र विभाजकPart I, §3.8, p.78 में, विदेशी ख़ाली जगह वाले रूप को समझाने वाले कोष्ठक में छपा

Hindi column में standard NCERT Hindi गणितीय शब्दावली दी गई है, और तीनों यूरोपीय नाम सामान्य देवनागरी लिप्यंतरण में दिए गए हैं। इस brief के लिए इस्तेमाल हुए corpus में कक्षा 7 Ganita Prakash का कोई Hindi संस्करण नहीं है, इसलिए ये cells किसी Hindi छपाई से नहीं पढ़े गए — Notes देखें।

लोग कहाँ चूकते हैं

  • "decimals तब आविष्कृत हुए जब decimal point आविष्कृत हुआ।" chapter दोनों को सदियों के फ़ासले से अलग करता है, और fractions को पहले रखता है। इसे उलटा समझना आम ग़लती है और section इसे सुधारने के लिए है।
  • "al-Uqlīdisī ने decimal point इस्तेमाल किया।" उन्होंने एक digit के ऊपर खड़ी लकीर इस्तेमाल की, और page number को इस तरह छापता है कि पाठक उसे देख सके। निशान दिखाओ।
  • "Napier ने decimal point का आविष्कार किया।" chapter एक ही वाक्य में point के लिए दो गणितज्ञों के नाम लेता है, और उसी समय एक प्रतिद्वंद्वी निशान के लिए तीसरे का। अकेले एक का नाम लेना page को ग़लत बताना है।
  • "comma एक ग़लती है।" यह आज चलन में एक अलग नियम है, और chapter बिना कोई फ़ैसला सुनाए यही कहता है। यही वह कारण भी है जिससे किसी विदेशी document से उतारा गया number ग़लत पढ़ा जा सकता है।
  • "1,000.5 और 1 000,5 अलग numbers हैं।" वे एक ही number हैं, इस बारे में दो सहमतियों के तहत कि कौन-सा निशान कौन-सा काम करता है।
  • "notation मनमाना है, इसलिए इसमें से कुछ भी मायने नहीं रखता।" सही नतीजा इसका उलटा है: क्योंकि निशान पर सहमति बनाई गई है, वह मजबूरी नहीं है, इसलिए उसे इस्तेमाल करने वाले हर व्यक्ति को सहमत होना पड़ता है, और असहमति की क़ीमत ठीक उसी तरह की नाकामी है जिसका वर्णन इस module के पिछले दो topics करते हैं।
  • "decimal notation में सब कुछ एक नियम भर है।" नहीं। unit को दस से बाँटना पहले से चल रहे place value system से निकलता है, जैसा Part I, §3.4, p.59 तर्क देता है, और जगहों का क्रम उस बँटवारे से निकलता है। जो चुना गया है वह निशान है। दोनों के बीच की रेखा साफ़ रखो; topic की पूरी बात यही है।
पूरा transcript1,416 शब्द

दशमलव की लगभग हर बात एक ही फ़ैसले से निकलती है, इकाई को 10 में काटना। एक बार यह तय हुआ, तो दाईं ओर के खाने अपने आप तय हो गए, बटा 10, फिर बटा 100, फिर बटा 1000, हर एक पिछले का 1 बटा 10। इनमें चुनने को कुछ नहीं था, काटने का फ़ैसला होते ही ये वैसे ही बनने थे। पर लिखावट का एक हिस्सा ऐसा है जो किसी चीज़ से नहीं निकलता।

वह निशान खुद, छोटा सा बिंदु, जो बताता है कि पूरा हिस्सा कहाँ खत्म होता है। वह किसी हिसाब से नहीं निकला, वह तय किया गया, और तय होने में बहुत लंबा समय लगा। और एक बात जो सबको चौंकाती है, दशमलव भिन्न, दशमलव बिंदु से सदियों पुराने हैं। कहानी भिन्नों से शुरू होती है, और उसमें कहीं कोई निशान नहीं है। ऐसे भिन्न, जिनके नीचे 10, 100 या 1000 हो।

जैसे 3 बटा 10, या 47 बटा 100, बिंदु से नहीं, भिन्न की तरह लिखे हुए। खगोल और गणित पर काम करने वाले लोग इन्हें बहुत पहले से इस्तेमाल कर रहे थे। बटा 10 और बटा 100 वाले हिस्से जोड़े जा रहे थे, उनकी तुलना हो रही थी, उन पर सोचा जा रहा था। और अभी तक किसी को number के 2 हिस्सों के बीच किसी निशान की ज़रूरत नहीं पड़ी थी।

और हिसाब भी चल रहा था, 3 बटा 10 में 47 बटा 100 जोड़ो, तो 3 बटा 10 यानी 30 बटा 100, कुल 77 बटा 100, बिना किसी बिंदु के। यही बात पकड़ कर रखो, विचार पहले आया, सदियों पहले, और लिखने का तरीका बाद में पीछे पीछे आया। फिर एक समय आया जब इस लिखावट का पहला पूरा ब्योरा लिखा गया, आज के रूप से काफ़ी मिलता जुलता। पर उसमें बिंदु कहीं नहीं है।

एक number ऐसे लिखा गया, 7 digits एक कतार में, 0, 0, 5, 9, 3, 7, 5। और पहले digit के ऊपर एक छोटी सी खड़ी लकीर। वह लकीर उस digit के ऊपर है जो पूरे हिस्से का आखिरी digit है, उसके बाद से भिन्न वाला हिस्सा शुरू। तो यह number है 0 दशमलव 0 5 9 3 7 5। यानी 59375 हिस्से, ऐसे हिस्से जिनके 1000000 एक इकाई भरते हैं।

अगर वही लकीर एक digit दाईं ओर होती, तो number क्या होता? तब वह 0 दशमलव 5 9 3 7 5 होता, पूरा 10 गुना, यानी लकीर की जगह ही सब कुछ तय कर रही थी। बाद के एक दौर में, एक नहीं, कई तरीके आपस में होड़ कर रहे थे। पहला, वही खड़ी लकीर, पूरे हिस्से के आखिरी digit के ऊपर। दूसरा, रंग, पूरा हिस्सा एक रंग में, और भिन्न वाला हिस्सा दूसरे रंग में।

तीसरा, digits के ऊपर एक छोटा सा उठा हुआ अंक, जो बताता है कि आखिर के कितने digits भिन्न वाले हैं। तीनों एक ही सवाल के जवाब हैं, पूरा हिस्सा कहाँ खत्म होता है। उठे हुए अंक वाला तरीका देखो, 36 लिखो, और ऊपर छोटा सा 2। मतलब, आखिर के 2 digits भिन्न वाले हैं, तो यह 0 दशमलव 3 6 है। ऊपर 1 होता, तो बस आखिरी digit भिन्न का, और number 3 दशमलव 6।

यह तरीका सीमा नहीं खींचता, वह गिनता है कि दाईं ओर से कितने खाने भिन्न के हैं। गिनकर देखा गया, 1 से 9999 तक हर गिनती, और हर मुमकिन उठे हुए अंक पर, कुल 48888 मामलों में, उठा हुआ अंक, खड़ी लकीर और बिंदु, तीनों एक ही मात्रा बताते हैं। निशान अलग, पर गणित वही, क्योंकि खानों की कीमत निशान से नहीं, 10 से काटने से आती है। रंगों वाला तरीका सुंदर था, तो वह टिका क्यों नहीं?

क्योंकि उसमें सीमा स्याही में रहती है, digits में नहीं। कोई उस number को एक ही रंग की कलम से उतार ले, तो सीमा गायब, और 705 फिर से कई मात्राएँ बन जाता है। लकीर या उठा हुआ अंक, किसी भी कलम से उतर जाता है, वह digits की तरह ही लिखा जाता है। यानी जो निशान टिकता है, उसे digits के संग ही सफ़र करना होता है। और आगे चलकर, होड़ घटकर 2 तरीकों में रह गई।

कुछ गणितज्ञों ने बिंदु अपनाया। और उसी समय कुछ दूसरों ने अल्पविराम, यानी comma। इसलिए किसी एक इंसान को बिंदु का आविष्कारक कहना कहानी को गलत सुनाना है, बिंदु भी कई लोगों ने अपनाया, और comma भी। धीरे धीरे बिंदु सबसे ज़्यादा फैला, पर comma कभी गया नहीं। यह फ़ैसला आज तक पूरा नहीं हुआ है। जिसे हम 1000 दशमलव 5 लिखते हैं, बीच के comma के बाद बिंदु और 5, कई देशों में वह ऐसे नहीं लिखा जाता।

वहाँ बीच में comma की जगह खाली जगह आती है, और बिंदु की जगह comma। दोनों एक ही number हैं, 1000 और आधा। फ़र्क number में नहीं, इस समझौते में है कि कौन सा निशान कौन सा काम करता है। तो comma कोई गलती नहीं, वह एक दूसरा समझौता है, जो आज भी चलता है। अब सोचो, किसी कागज़ पर लिखा है 1, फिर comma, फिर 005, इसका मतलब क्या है?

बिंदु वाले समझौते में comma बस बड़े numbers के digits को 3-3 के गुच्छों में बाँटता है, तो यह 1005 है। comma वाले समझौते में comma भिन्न शुरू करता है, तो यह 1 और 5 बटा 1000 है। एक ही लिखावट, और 2 पढ़ाइयों में पूरे 1000 गुने का फ़र्क। बचाव सीधा है, पहले पूछो कि कागज़ किस समझौते में लिखा है, और फिर देखो कि जवाब का आकार समझ में आता है या नहीं।

निशान तय किया गया है, इसलिए सबका एक ही बात पर सहमत होना ज़रूरी है, वरना ठीक वैसी गलतियाँ होती हैं जैसी लंगर छूटने पर। पर जब एक ही समझौते में लिखा और पढ़ा जाए, तो 0 दशमलव 1 से 9999 दशमलव 9 तक के सारे 99999 numbers ठीक वापस मिलते हैं। अब तुम्हारी बारी, कुछ numbers को पुराने तरीकों में लिखकर देखो। पहला, 2 दशमलव 5, digits 2 और 5, लकीर 2 के ऊपर, या फिर 25 के ऊपर उठा हुआ 1।

फिर 4 दशमलव 1 2 5, digits 4, 1, 2, 5, लकीर 4 के ऊपर, या ऊपर उठा हुआ 3, क्योंकि आखिर के 3 digits भिन्न के हैं। अब 12 दशमलव 0 7, लकीर 12 के दूसरे digit, यानी 2 के ऊपर, और उठा हुआ अंक 2। और 0 दशमलव 3 6, digits 0, 3, 6, लकीर 0 के ऊपर, या उठा हुआ 2। चारों को वापस पढ़ा जाए, लकीर वाले भी, उठे अंक वाले भी, तो हर बार वही number लौटता है।

लकीर जिस digit पर है, उसके बाद जितने digits बचे, उठा हुआ अंक ठीक उतना ही होता है, और पुराने number के सातों खानों पर यह जाँचा गया। तो कोई भी निशान चाहिए ही क्यों? याद करो, 705 बिना किसी निशान के, 705 हो सकता है, 70 दशमलव 5, या 7 दशमलव 0 5। और इनमें सबसे बड़ा सबसे छोटे का 100 गुना है। लकीर, रंग, उठा हुआ अंक, बिंदु, comma, हर एक इसी सवाल का जवाब है, इकाई का खाना कहाँ है।

अब 70 दशमलव 5 को बिंदु से, comma से, लकीर से, और उठे हुए 1 से लिखो, 4 निशान, पर मात्रा सिर्फ़ 1। तो अब छाँटते हैं, क्या मजबूरी था और क्या चुनाव। पहला, 10 से काटना मजबूरी जैसा था, क्योंकि इकाई के बाईं ओर सब कुछ पहले से 10 में गिनता है। खानों का क्रम और उनकी कीमत, बटा 10, बटा 100, बटा 1000, काटने से अपने आप निकलते हैं।

और यह भी मजबूरी है कि निशान के बाद digits बड़े खाने से छोटे खाने की ओर चलें, बटा 10 वाला खाना पहले, बटा 1000 वाला खाना बाद में। पर निशान चुना गया, उसकी शक्ल, उसकी जगह, और वह कौन सा काम करेगा। इसलिए यह कहना गलत है कि दशमलव में सब कुछ बस एक रिवाज है, हिसाब का हिस्सा मजबूरी है, निशान रिवाज। और चुना हुआ होने का मतलब यह नहीं कि उससे फ़र्क नहीं पड़ता, चुना हुआ है, इसीलिए सबको एक होना पड़ता है।

यही सवाल हर लिखावट से पूछ सकते हो, इसमें क्या गणित से निकला, और क्या लोगों ने तय किया। याद रखो, बटा 10 और बटा 100 वाले भिन्न, किसी भी निशान से बहुत पहले इस्तेमाल होते थे। पूरे हिस्से का अंत दिखाने के लिए लकीर, रंग, उठा हुआ अंक, बिंदु और comma, सब आज़माए गए। आज भी कुछ जगह बिंदु है, कुछ जगह comma, और एक ही लिखावट 2 समझौतों में 2 numbers हो सकती है।

लकीर, उठा हुआ अंक और बिंदु, एक ही number को अलग अलग ढंग से लिखते हैं, मात्रा नहीं बदलती। और आखिर में, 10 से काटना और खानों की कीमत गणित से निकले, निशान लोगों ने तय किया।

यह कहाँ बैठता है

यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.

किस पर टिका है

इसके ठीक पहले और ठीक बाद

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