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Chapter 6 · Perimeter and Area

Triangle अपने चारों ओर के rectangle का ठीक आधा क्यों होता है

Area of a triangle12 मिनट

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एक आयत को उसके विकर्ण पर काटिए, एक टुकड़े को आधा चक्कर घुमाइए, और दूसरे पर रखिए — दोनों ठीक एक-दूसरे पर बैठते हैं। तो विकर्ण से कटा त्रिभुज आयत का ठीक आधा है, और ये बिना कुछ नापे पता चला।

मुख्य idea

किसी rectangle को diagonal के साथ काटने पर दो टुकड़े मिलते हैं जो एक-दूसरे पर ठीक-ठीक बैठ जाते हैं, इसलिए हर एक आधा है — पर इससे सिर्फ़ वे triangles तय होते हैं जिनका ऊपरी कोना rectangle के किसी कोने के ठीक ऊपर है। chapter की असली चाल यह दिखाना है कि बाक़ी हर triangle कोई नया सवाल नहीं है: ऊपरी कोने से base तक सीधी नीचे एक line गिराओ, तो वह तय हो चुकी किस्म के दो triangles में टूट जाता है, हर एक अपने rectangle में बैठा, और वे दोनों rectangles मिलकर ठीक वही rectangle हैं जो पूरे triangle के चारों ओर है। दोनों हिस्सों का आधा और आधा, पूरे का आधा है। इसीलिए ऊपरी कोना कहीं भी खिसके, जवाब आधा ही रहता है, और इसीलिए section बिना formula के ख़त्म हो सकता है: तर्क ही सामग्री है।

आपको क्या आना चाहिए

  • rectangle को diagonal के साथ काटना और जाँचना कि दोनों triangles एक-दूसरे पर ठीक बैठते हैं
  • बताना कि ऐसे कट से बना हर triangle rectangle का आधा है, और क्यों
  • grid पर बने right-angled triangle का area उसके rectangle को आधा करके निकालना
  • triangle के ऊपरी कोने से उसके base तक एक line गिराना और उससे बने दोनों rectangles के नाम बताना
  • दिखाना कि दोनों आधे rectangles मिलकर घेरने वाले rectangle का आधा बनते हैं
  • समझाना कि बहुत अलग आकार के दो triangles का area बिल्कुल एक जैसा क्यों हो सकता है
  • grid पर बनी आकृति का area उसे rectangles और triangles में काटकर निकालना
  • बताना कि chapter ने triangles के बारे में आम तौर पर क्या साबित किया है और क्या नहीं

जानने लायक़ शब्द

शब्दएक line में परिभाषाहिंदी / क्षेत्रीय समकक्षपहली बार कहाँ आया
areaकिसी बंद आकृति से घिरे region का आकारक्षेत्रफल§6.2, p.137 पर bold में छपा और परिभाषित
triangleतीन sides वाली बंद आकृतित्रिभुज§6.1, p.131 पर छपा
diagonalrectangle के दो आमने-सामने के कोनों को जोड़ने वाला segmentविकर्ण§6.3, p.142 पर छपा; वहाँ का Teacher's Note इसकी परिभाषा याद दिलाने को कहता है
rectangleचार sides वाली आकृति जिसकी आमने-सामने की sides बराबर हों और कोने square होंआयत§6.1, p.129 पर छपा
halfदो बराबर हिस्सों में से एकआधा§6.3, p.143 पर छपा
overlapकिसी दूसरी आकृति को ठीक-ठीक, बिंदु दर बिंदु ढकनाअतिव्यापन§6.3, p.142 पर छपा
square unitगिनती की वह unit जो grid देता हैवर्ग इकाई§6.2, p.140 पर छपा
grid paperlines वाला कागज़ जिस पर गिनकर संबंध जाँचे जाते हैंग्रिड पेपर§6.3, p.142 पर छपा
basetriangle की वह side जिसके सापेक्ष ऊपरी कोना नापा जाता हैआधारव्याख्या का अपना शब्द; इस chapter में नहीं छपा
heightऊपरी कोने से नीचे base तक की दूरीऊँचाईव्याख्या का अपना शब्द; इस chapter में नहीं छपा
foot of the dropped lineवह बिंदु जहाँ ऊपरी कोने से आई line base से मिलती है — किताब का Fलंब का पादव्याख्या का अपना वाक्यांश; इस chapter में नहीं छपा

Hindi column में standard Hindi गणितीय शब्दावली दी गई है। Ganita Prakash का Hindi संस्करण इस brief के लिए इस्तेमाल किए गए corpus में नहीं है, इसलिए इन शब्दों को Hindi छपाई से नहीं मिलाया गया — Notes देखें।

लोग कहाँ चूकते हैं

  • "आधा सिर्फ़ right-angled triangle के लिए चलता है।" तर्क वहीं से शुरू होता है, वहीं ख़त्म नहीं होता। Sections 7 से 9 इसीलिए हैं कि उसे ऐसे triangle तक ले जाया जाए जिसका ऊपरी कोना किसी कोने के ऊपर नहीं है।
  • "ऊपरी कोने को ऊपरी किनारे के साथ खिसकाने से area बदल जाता है।" नहीं बदलता। rectangle वही रहता है और आधा भी। यह इस section का अकेला सबसे क़ीमती विचार है, और लाल-नीली जोड़ी इसी को दिखाने के लिए छपी है।
  • "ज़्यादा ऊँचा दिखने वाले triangle का area ज़्यादा है।" p.143 के दोनों triangles बहुत अलग दिखते हैं और नाप में बराबर हैं। किताब यह बात जान-बूझकर एक पात्र के मुँह से कहलवाती है।
  • "diagonal वाले कट से बने दोनों टुकड़े लगभग बराबर हैं।" वे एक-दूसरे पर ठीक बैठते हैं। काटने वाला काम लगभग की जगह ठीक-ठीक लाने के लिए है।
  • "base को height से गुणा करके आधा करना होता है।" chapter यह कभी नहीं लिखता, और जिस student ने आधा करने वाला तर्क समझ लिया है उसे इसकी ज़रूरत नहीं। अगर व्याख्या इसका सहारा लेती है, तो section का अपना तर्क खो जाता है।
  • "triangle अपने चारों ओर बनाए गए किसी भी rectangle का आधा है।" सिर्फ़ उसी का जो उसी base पर बना हो और उतनी ही ऊँचाई तक जाता हो। एक बार ग़लत rectangle बनाओ और गिनती को उसका खंडन करने दो।
  • "Triangle ABE के लिए नया नियम चाहिए क्योंकि वह right-angled नहीं है।" उसे पुराना नियम दो बार इस्तेमाल करके हल किया जाता है। पूरा तर्क यही है।
  • "जो आकृति न rectangle है न triangle, उसे नापा नहीं जा सकता।" p.144 की exercise ऐसी ही पाँच आकृतियाँ है, और हर एक काटने से हल हो जाती है।
पूरा transcript1,702 शब्द

एक कागज़ पर एक आयत बनाइए। कोई भी आयत चलेगा। अब उसका एक विकर्ण खींचिए — एक कोने से ठीक सामने वाले कोने तक। अब उसी पर काटिए। आपके हाथ में 2 त्रिभुज आ गए। अगला काम बहुत सीधा है, पर उसे सच में करके देखिए — सिर्फ़ सोचकर नहीं। एक त्रिभुज उठाइए, उसे आधा चक्कर घुमाइए, और दूसरे के ऊपर रख दीजिए। दोनों एक दूसरे को पूरा ढक लेते हैं।

कोने पर कोना, किनारे पर किनारा, कहीं कुछ बाहर नहीं निकलता। पर एक आयत पर रुकिए मत। यही काम एक लंबे, पतले आयत पर दोहराइए — 8 और 2 का। फिर 5 और 3 का, फिर खड़ा 3 और 5 का, और फिर 4 और 4 का वर्ग। हर बार टुकड़ों की शक्ल अलग होती है — कभी लंबे और नुकीले, कभी छोटे और मोटे — पर मेल वही रहता है।

हर बार दोनों टुकड़े एक दूसरे पर ठीक बैठ जाते हैं। ये दोहराना बेकार नहीं है। एक बार कुछ देख लेना और उस पर भरोसा करना — इन दोनों में यही फ़र्क है। भरोसे लायक बात वही है, जो जान-बूझकर चुने गए अटपटे उदाहरणों पर भी बार-बार टिकी रहे। पर ये हर बार मिलते क्यों हैं? दोनों टुकड़ों की भुजाएँ देखिए। हर टुकड़े की एक भुजा आयत की लंबाई है, एक उसकी चौड़ाई, और तीसरी वही विकर्ण, जिस पर काटा था।

आयत की आमने-सामने की भुजाएँ बराबर होती हैं, और विकर्ण तो दोनों का साझा है। तो दोनों टुकड़ों की तीनों भुजाएँ बराबर हैं — यानी दोनों एक ही त्रिभुज हैं। इसीलिए आधा चक्कर घुमाते ही एक दूसरे पर बैठ जाता है। यानी ये मेल किस्मत से नहीं होता — ये आयत के बनने के तरीके से ही निकलता है। तो लिखिए — 2 बिल्कुल एक जैसे टुकड़े, और दोनों मिलकर पूरा आयत।

जब 2 बराबर हिस्से मिलकर पूरा बनाते हैं, तो हर हिस्सा ठीक आधा होता है। इस कदम में इससे ज़्यादा कुछ नहीं। तो विकर्ण से कटा त्रिभुज आयत का ठीक आधा है। लगभग आधा नहीं, मोटे तौर पर आधा नहीं — ठीक आधा। और ध्यान दीजिए, यहाँ तक पहुँचने में कुछ भी नापना नहीं पड़ा — न लंबाई, न गिनती। बस एक कागज़ दूसरे पर रखा। फिर भी एक बार गिनकर देख लेते हैं।

4 और 4 का वर्ग लीजिए, और उसका विकर्ण खींचिए। विकर्ण खानों के कोनों से होकर जाता है, तो हर खाना या तो पूरा है, या ठीक आधा कटा है। एक तरफ़ 6 पूरे खाने हैं, और 4 आधे। 4 आधे मिलकर 2 पूरे। 6 जोड़ 2 — 8। और 8 ठीक 16 का आधा है। गिनती भी वही कहती है, जो काटने ने कहा था। अब 2 आकृतियाँ, और एक सवाल।

एक 3 और 4 का आयत। और उसके बगल में एक त्रिभुज, जिसका आधार 6 है, ऊँचाई उतनी ही 4, और उसकी चोटी से आधार तक एक सीधी खड़ी लकीर गिराई गई है। आयत का क्षेत्रफल त्रिभुज से ज़्यादा है, कम है, या बराबर? त्रिभुज का आधार आयत की लंबाई का दुगना है, और ऊँचाई दोनों की बराबर। इसे आँख से तय मत कीजिए। थोड़ी देर में गिनकर तय करेंगे।

अब graph paper पर चलते हैं, जहाँ गिनती पक्की होती है। आयत ABCD लीजिए। A नीचे बाईं ओर, B नीचे दाईं ओर, C ऊपर दाईं ओर, और D ऊपर बाईं ओर। ये 5 खाने चौड़ा और 4 खाने ऊँचा है — कुल 20 वर्ग इकाई। कोई अंदाज़ा नहीं, हर कोना जाल के बिंदु पर है। अब ऊपर वाले किनारे पर एक बिंदु E लगाइए, D से 3 खाने आगे। और नीचे वाले किनारे पर बिंदु F, ठीक E के नीचे।

E से F तक की खड़ी लकीर आयत को 2 छोटे आयतों में बाँट देती है। इन्हें याद रखिए — आगे सारा काम यही करेंगे। पहले आसान वाला। त्रिभुज BAD — कोने से कोने से कोने तक। इसकी चोटी ठीक आयत के एक कोने के ऊपर है। यानी ये वही हालत है, जो हम तय कर चुके हैं। ये आयत ABCD ही है, अपने विकर्ण से कटा हुआ। तो इसका क्षेत्रफल 20 का आधा — 10 वर्ग इकाई।

और बचा हुआ टुकड़ा BCD भी 10 — दोनों मिलकर पूरे 20। BAD को गिनकर भी देखिए। पर यहाँ विकर्ण जाल के कोनों से होकर नहीं जाता। BAD में 6 खाने पूरे हैं, और 8 खाने विकर्ण ने अटपटे टुकड़ों में काटे हैं। गिनती के नियम इन 8 को सिर्फ़ अंदाज़े से गिन पाते। पर आधा चक्कर यहाँ भी काम आता है। हर कटे खाने का बीच के पार एक जोड़ीदार खाना है।

एक का अंदर वाला टुकड़ा और दूसरे का अंदर वाला टुकड़ा मिलकर ठीक 1 पूरा खाना बनाते हैं। 8 कटे खाने, यानी 4 जोड़े, यानी 4 पूरे खाने। और 6 जोड़ 4 — फिर से 10। अब दिलचस्प वाला — त्रिभुज ABE। आधार वही — पूरा नीचे का किनारा, A से B तक। ऊँचाई भी वही, क्योंकि E ऊपर वाले किनारे पर है। पर चोटी खिसक गई है। E किसी कोने के ऊपर नहीं, 3 खाने अंदर है।

ABCD के विकर्ण वाले 2 टुकड़े ABE को ढक तो लेते हैं, पर उससे बाहर भी फैल जाते हैं। यानी वो ABE के टुकड़े नहीं हैं। यहाँ बहुत से लोग किसी नए नियम की तलाश में लग जाते। पर नया नियम नहीं चाहिए। पुराना नियम ही 2 बार लगाना है। E से F तक की खड़ी लकीर को फिर देखिए — इसने त्रिभुज के साथ क्या किया? इसने ABE को 2 त्रिभुजों में काट दिया — बाईं ओर AEF, और दाईं ओर BEF।

AEF को देखिए। F पर उसका कोना एकदम सीधा है, और वो बाएँ आयत AFED के अंदर बैठा है। असल में वो AFED ही है, अपने विकर्ण से कटा हुआ। तो AEF, AFED का आधा है। और BEF दाएँ आयत FBCE के अंदर है — वो भी अपने विकर्ण से कटा हुआ। तो BEF, FBCE का आधा है। जो त्रिभुज हम नहीं कर पा रहे थे, वो 2 ऐसे त्रिभुजों में बदल गया, जो हम पहले से कर सकते थे।

अब सब जोड़कर देखिए। ABE बराबर AEF जोड़ BEF। यानी बाएँ आयत का आधा, जोड़ दाएँ आयत का आधा। और एक चीज़ का आधा जोड़ दूसरी का आधा — ये दोनों को मिलाकर उसका आधा होता है। दोनों आयत मिलकर पूरा ABCD हैं। तो ABE, ABCD का आधा है — 20 का आधा, 10 वर्ग इकाई। संख्याओं में देखिए। बायाँ आयत 3 और 4 का, यानी 12, तो AEF 6।

दायाँ 2 और 4 का, यानी 8, तो BEF 4। और 6 जोड़ 4 — 10। और वो पहले वाली जोड़ी? 3 और 4 का आयत 12। त्रिभुज की खड़ी लकीर उसे 2 आयतों के आधों में बाँटती है — 4 और 8, कुल 12। यानी दोनों बराबर हैं। अब BAD और ABE को साथ रखिए। एक एक तरफ़ झुका हुआ, दूसरा बीच में चोटी वाला। दोनों 10 वर्ग इकाई।

देखने में बिल्कुल अलग, नाप में बिल्कुल बराबर। अब सबसे कीमती बात। E को ऊपर वाले किनारे पर कहीं भी खिसकाइए। A के ठीक ऊपर, B के ठीक ऊपर, 1 से थोड़ा आगे, या आख़िर के पास। E ठीक A के ऊपर हो, तो ABE असल में BAD ही बन जाता है — जिसे हम जानते हैं। और ठीक B के ऊपर हो, तो वो ABC बन जाता है — दूसरे विकर्ण से कटा आधा।

दोनों छोर पर भी 10। हर एक त्रिभुज 10 वर्ग इकाई का है — ऐसी 8 जगहों पर जाँचा गया है। क्योंकि पूरे तर्क में कहीं ये काम ही नहीं आया कि E कहाँ है। आधार नहीं बदला, ऊँचाई नहीं बदली — तो कुछ नहीं बदला। तो निष्कर्ष ये है — त्रिभुज उस आयत का ठीक आधा है, जो उसके आधार पर बना हो और उसकी ऊँचाई तक पहुँचता हो।

पर एक चेतावनी भी, क्योंकि ये बात आसानी से ज़्यादा खींच ली जाती है। उसके चारों ओर बना कोई भी आयत नहीं — सिर्फ़ वही वाला। आयत को 6 ऊँचा कर दीजिए। अब उसमें 30 खाने हैं, और ABE के 10 उसका आधा नहीं, सिर्फ़ तिहाई हैं। या 7 चौड़ा कर दीजिए — 28 खाने, और 10 फिर आधा नहीं। आधा सिर्फ़ उस आयत का, जिसका आधार और ऊँचाई त्रिभुज वाले ही हों।

और ध्यान दीजिए, इस पूरी बात में हमने कोई सूत्र नहीं लिखा। उसकी ज़रूरत ही नहीं पड़ी। बस 2 चालें थीं। विकर्ण पर काटो, और चोटी से आधार तक सीधी लकीर गिराओ। अगर आपने ये तर्क समझ लिया, तो ऐसे किसी भी त्रिभुज का जवाब आप ख़ुद दोबारा बना सकते हैं — और असली पूँजी यही तर्क है। अब उन आकृतियों को नापते हैं, जिनका कोई नियम है ही नहीं।

जाल पर 5 आकृतियाँ। 2 तिरछी आकृतियाँ, एक ऊपर चोटी वाली, एक ऊपर से कटी हुई, और एक पतंग जैसी। इनमें से कोई भी आयत नहीं, कोई भी त्रिभुज नहीं। पहली को काटिए — बीच में 4 और 5 का आयत, यानी 20। ऊपर-नीचे 2 त्रिभुज, हर एक 4 और 1 के आयत का आधा, यानी 2। कुल 20 जोड़ 2 जोड़ 2 — 24। चोटी वाली — 6 और 7 का आयत, 42।

ऊपर की चोटी 6 और 2 के आयत का आधा, 6। कुल 48। कटी हुई — 4 और 5 का आयत, 20। उसमें से ऊपर का खाँचा, जो 4 और 2 के आयत का आधा है, यानी 4, घटाइए। बचे 16। पाँचों के जवाब — 24, 30, 48, 16 और 12। हर एक 2 अलग तरीकों से जाँचा गया है। अब पतंग जैसी आकृति। उसे सबसे चौड़ी जगह से आड़ा काटिए — ऊपर एक त्रिभुज, नीचे एक।

दोनों में से किसी की चोटी कोने के ऊपर नहीं है। तो वही पुरानी चाल — हर एक में चोटी से सीधी लकीर गिराइए। ऊपर वाला 2 सीधे-कोने वाले त्रिभुजों में बँट गया — दोनों 2 और 2 के आयत के आधे, यानी 2 जोड़ 2, कुल 4। नीचे वाला भी 2 में बँटा — 3 और 4 के आयत का आधा, 6, और 1 और 4 के आयत का आधा, 2।

कुल 8। और 4 जोड़ 8 — 12। वही 2 चालें, फिर से। यानी पूरा विषय 3 शब्दों में। जहाँ गिन सकें, गिनिए। जहाँ न गिन सकें, काटिए। और फिर जोड़िए। आयत ने गिनती दी। विकर्ण ने त्रिभुज दिया। और इन दोनों के बीच, सीधी भुजाओं वाली हर आकृति आ जाती है, जो आपको कभी भी दी जाएगी। अगली बार हम नाप को छोड़कर भिन्नों की तरफ़ चलेंगे।

यह कहाँ बैठता है

यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.

किस पर टिका है

इसके ठीक पहले और ठीक बाद

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