PrepShorts · पढ़ाई की शीट · Class 7 Mathematics · Chapter 7, A Tale of Three Intersecting Lines
Chapter 7 · A Tale of Three Intersecting Lines
दो angles और उनके बीच की side से triangle बनाना
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A पर 40 degree रोको और B का angle बढ़ाते जाओ: 139 तक lines मिलती हैं, 140 पर वे parallel हो जाती हैं और त्रिभुज नहीं बनता।
मुख्य idea
यह construction नाकाम हो सकता है, और हैरानी इस बात में है कि फ़ैसला किससे होता है। जो side तुम्हें दी गई है — यहाँ की अकेली चीज़ जिसकी लंबाई है — वह बेमानी निकलती है: उसे लंबा करो या छोटा, दोनों भुजाएँ (arms) फिर भी मिलती हैं, या फिर भी नहीं मिलतीं। फ़ैसला सिर्फ़ angles की जोड़ी करती है, और chapter सटीक सीमा यों ढूँढ़ता है कि एक भुजा को तब तक धकेलता है जब तक वह दूसरी से मिलना बंद न कर दे — और ठीक उसी पल दोनों भुजाएँ parallel होती हैं। फिर Part I, Chapter 5 का parallel lines वाला नियम सीमा की value बता देता है, और एक ऐसी सीमांत स्थिति, जो ख़ुद triangle नहीं है, यह बताती है कि कौन-से triangles मौजूद हैं।
आपको क्या आना चाहिए
- किसी triangle के दो नाम वाले angles के बीच कौन-सी side included है, यह पहचानना
- दो angles और उनकी included side से triangle बनाना
- समझाना कि base के ऐसे दो angles, जिनमें से हर एक कम से कम 90° का है, triangle क्यों नहीं बना सकते
- समझाना कि दोनों भुजाएँ ठीक तभी मिलना बंद करती हैं जब वे parallel हो जाती हैं
- transversal वाले नियम से, दिए गए पहले angle के लिए दूसरे angle की सीमा वाली value निकालना
- मौजूद होने की शर्त को इस रूप में कहना कि दोनों दिए गए angles का जोड़ कितना होना चाहिए
- angles की दी गई जोड़ी के लिए तय करना कि triangle मौजूद है या नहीं, और फ़ैसला करने वाला जोड़ दिखाना
- तर्क देना कि triangle मौजूद है या नहीं, इसमें included sidelength की कोई भूमिका नहीं
- ग़ौर करना कि दो angles तय कर देने से तीसरा भी तय हो जाता है, included side चाहे जो हो
जानने लायक़ शब्द
| शब्द | एक पंक्ति में अर्थ | हिंदी / क्षेत्रीय समकक्ष | पहली बार कहाँ |
|---|---|---|---|
| included side | वह side जिस पर दोनों दिए गए angles बनाए जाते हैं | अंतर्विष्ट भुजा | §7.3 के sub-heading के हिस्से के रूप में छपा, p.161, और p.161 के text में |
| base angles | base मानी गई side के दोनों सिरों पर बने दो angles | आधार कोण | p.162 पर छपा |
| parallel | एक समतल की ऐसी दो lines के लिए, जो कभी नहीं मिलतीं | समांतर | p.163 पर छपा और फिर p.164 पर; p.162 यही सवाल inclined (झुकी हुई) शब्द से खड़ा करता है |
| transversal | ऐसी line जो दो दूसरी lines को काटती हुई जाती है | तिर्यक रेखा | p.163 पर छपा और फिर p.164 पर |
| right angle | 90° का angle | समकोण | p.162 पर छपा |
| acute angle | right angle से छोटा angle | न्यून कोण | p.162 पर छपा और फिर p.170 पर |
| angle | एक ही endpoint वाली दो rays के बीच का खुलाव, degrees में नापा जाता है | कोण | पूरे chapter में छपा, p.146 से |
| vertex | triangle का corner point; यहाँ वह point जहाँ दोनों भुजाएँ मिलती हैं | शीर्ष | p.146 पर छपा और फिर p.161 पर |
| base | सबसे पहले बनाई गई side; यहाँ हमेशा दी गई included side | आधार | p.161 पर छपा |
| line segment | दो endpoints वाला line का एक टुकड़ा | रेखाखंड | p.161 पर छपा और फिर p.167 पर |
| boundary case | वह स्थिति जो चलने वाली angle जोड़ियों को न चलने वाली जोड़ियों से अलग करती है | सीमांत स्थिति | यहाँ जोड़ा गया शब्द; यह phrase इस chapter में नहीं छपा, हालाँकि यह हालत p.163 पर नीले रंग में बनी है |
Hindi column में standard NCERT हिंदी गणितीय शब्दावली दी गई है। Ganita Prakash Part I का हिंदी संस्करण यहाँ इस्तेमाल किए गए corpus में नहीं है, इसलिए ये शब्द हिंदी छपाई से नहीं लिए गए — Notes देखें।
समझाते समय एक सावधानी। chapter इस construction को कभी तीन अक्षरों वाले code में छोटा नहीं करता; ASA जैसा कुछ भी इसमें कहीं नहीं छपा। जो समझाने वाला ऐसा code लाए, वह किताब के बाहर की शब्दावली जोड़ रहा है और उसे यह बताना चाहिए।
लोग कहाँ चूकते हैं
- "लंबे base से भुजाओं को मिलने के लिए ज़्यादा जगह मिलती है।" chapter p.163 पर इसे साफ़-साफ़ ख़त्म करता है। base लंबा करने से दोनों भुजाएँ एक-दूसरे से दूर खिसकती हैं, पर कोई भी झुकती नहीं, इसलिए जो जोड़ी मिलती है वह फिर भी मिलती है और जो चूकती है वह फिर भी चूकती है। section 10 वाले figure को यह बात आँखों के सामने लानी है।
- "अगर दोनों में से एक angle 90° है, तो triangle नहीं बनता।" 90° के साथ 85° चलता है — उनका जोड़ 180° से कम है। नाकामी के लिए दोनों angles का कम से कम 90° होना ज़रूरी है, या एक का इतना बड़ा होना कि कमी पूरी कर दे। p.163 पर छपी जोड़ी ठीक इसी ग़लती को पकड़ने के लिए है।
- "दोनों भुजाएँ parallel हैं, तो यही वह हालत है जहाँ वे बिलकुल आख़िरी पल में मिलती हैं।" parallel भुजाएँ मिलती ही नहीं। parallel वाली स्थिति पहली व्यवस्था है जो नाकाम होती है, और chapter के शब्द उसे नाकाम वाली तरफ़ रखते हैं: 140° और उससे ऊपर कोई triangle नहीं। inequality सही दिशा में रखो।
- "दो angles से triangle पूरी तरह तय नहीं होता।" वे उसका आकार (shape) पूरी तरह तय कर देते हैं, और उसके साथ तीसरा angle भी — जैसा section 12 दिखाता है। जो वे तय नहीं करते, वह है उसका size. यह फ़र्क़ नाम लेकर बताने लायक़ है, भले ही यह chapter ऐसा नहीं करता।
- "नाकाम होने का मतलब है कि भुजाएँ base की ग़लत तरफ़ कटती हैं।" chapter की तस्वीर में भुजाएँ base से ऊपर की ओर बनाई जाती हैं और या तो उसके ऊपर मिलती हैं या कभी नहीं मिलतीं। उन्हें पीछे की ओर बढ़ाना एक अलग figure है, और वह नहीं जो बनाया जा रहा है।
- "नियम में तीनों angles आने चाहिए।" test सिर्फ़ दोनों दिए गए angles इस्तेमाल करता है। इसी वजह से वह किसी तीसरे angle के मौजूद होने से पहले ही काम आ सकता है।
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पूरा transcript1,667 शब्द
2 भुजाएँ और उनके बीच का angle दिया हो, तो त्रिभुज कभी मना नहीं करता। आज उल्टा, 2 angles, और उनके बीच की भुजा। यह बनावट फेल हो सकती है, और हैरानी की बात यह है कि फ़ैसला कौन करता है। क्या फ़ैसला उस भुजा की लंबाई करती है, जो यहाँ अकेली लंबाई है? बीच की भुजा वह है जिसके दोनों सिरों पर वे 2 angles बैठे हैं। इसे included side कहते हैं, हर angle उसी भुजा के एक सिरे से खुलता है।
पहले नमूने में 5 के आधार के सिरों पर 40 और 50, दूसरे में 4 के आधार पर 30 और 45। तीसरा पतला है, 20 ऊपर की चोटी पर, 6 सेंटीमीटर दाईं भुजा पर, और 50 नीचे। यहाँ दी हुई भुजा न नीचे है, न लेटी हुई, तो ढूँढना पड़ता है, कौन सी भुजा दोनों angles को जोड़ती है। तीनों बनते हैं, और तीसरा angle खुद आता है, 90, 105, 110 degree।
और हर नमूने में दिए गए 2 angles का जोड़, 90, 75, 70, सब 180 से काफ़ी कम, यह बात आगे काम आएगी। अब पूरा उदाहरण, A B बराबर 5 सेंटीमीटर, A पर 45 degree, B पर 80 degree। दोनों angles A B के सिरों पर हैं, तो A B सच में बीच की भुजा है। पहला कदम, ruler से A B खींचो। दूसरा, A पर protractor रखो, 45 पर निशान, और A से एक लंबी line ऊपर की ओर।
तीसरा, B पर 80, और B से भी एक लंबी line। C कोई नापकर नहीं रखता, वह वहीं है जहाँ ये 2 lines एक दूसरे को काटती हैं। 3 लंबाइयों वाली बनावट में भी तीसरा कोना एक कटाव से आता है, 2 घेरों का, और वह कटाव कभी कभी होता ही नहीं। अब नापो, C पर angle 55 degree। और A C लगभग 6 दशमलव 0, B C लगभग 4 दशमलव 3 सेंटीमीटर।
यहाँ 3 चीज़ें दीं, 3 खुद आईं, पर इस बार एक सवाल बचा है, क्या lines हमेशा कटेंगी? यहाँ दिए गए angles का जोड़ 45 धन 80, यानी 125, इसे भी याद रखो। सोचो, 2 lines कब कभी नहीं कटेंगी? अगर दोनों lines ऊपर जाते जाते एक दूसरे से दूर होती जाएँ, तो C बनेगा ही नहीं। पहली तस्वीर, दोनों lines बाहर की ओर झुकी, वे और दूर होती जाती हैं।
दूसरी, एक line आधार पर बिल्कुल सीधी खड़ी, दूसरी बाहर झुकी, फिर भी दूरी बढ़ती है। तीसरी, दोनों सीधी खड़ी, 2 right angles, वे हमेशा एक जितनी दूर रहती हैं। इन 3 में से मिलने वाली जोड़ियाँ 0। और यह कोई संयोग नहीं, जिन जोड़ियों में दोनों angles 90 या उससे बड़े हों, ऐसी सभी 8100 जोड़ियाँ गिनी गईं, मिलने वाली 0। दोनों lines या तो सीधी खड़ी हैं या बाहर झुकी हैं, कोई भी दूसरी की ओर नहीं आती।
अब असली खोज, A पर angle 40 पर रोको, और B वाली line को धीरे धीरे बाहर झुकाओ। जैसे जैसे B का angle बढ़ता है, कटने की जगह ऊपर, और ऊपर जाती है। किस angle पर lines मिलना बंद करती हैं? और 5 के आधार पर, B पर 50 हो, तो C आधार से लगभग 2 दशमलव 5 ऊपर। B पर 100 हो, तो लगभग 4 दशमलव 9। और 130 पर लगभग 14 दशमलव 2, आधार की लंबाई से कहीं ज़्यादा ऊँचा।
अब 1 से 139 तक हर कदम पर C ऊपर ही चढ़ता है, सभी 138 कदमों पर, एक बार भी नीचे नहीं आता। B के हर पूरे angle को, 1 से 179 तक, आज़माया गया, 139 पर lines मिलती हैं, 40 पर नहीं। आख़िरी मिलने वाला 139, और पहला न मिलने वाला 140। देखो, 139 पर, सिर्फ़ 5 सेंटीमीटर के आधार के ऊपर, C लगभग 121 सेंटीमीटर ऊँचा है। यानी सीमा के पास कटने की जगह भागकर बहुत दूर चली जाती है।
पर 139 वाला बहुत लंबा, पतला त्रिभुज भी पूरा त्रिभुज है, पतला होना फेल होना नहीं। और 140 पर दोनों lines बिल्कुल एक ही दिशा में, यानी parallel। कोई कहे, parallel वाली बस आख़िरी पल में मिलती हैं, नहीं, parallel lines कभी मिलती ही नहीं। तो 140 खुद फेल वाली तरफ़ है, 140 और उससे ऊपर, कोई त्रिभुज नहीं। parallel वाली line को एक पैमाना मान लो। B की line अगर उससे ज़रा भी अंदर की ओर झुकी, तो वह ऊपर जाकर A वाली line की ओर आती है, और कहीं न कहीं काटती है।
और अगर उससे बाहर झुकी, तो A वाली line से दूर होती जाती है, कभी नहीं मिलती। तो बीच में बस एक parallel वाली line है, जो दोनों तरह की lines को अलग करती है। अब यह 140 बिना गिने निकालो, A B उन 2 parallel lines को काटती है, यानी वह एक transversal है। A और B के angles दोनों lines के बीच में, और A B की एक ही तरफ़ हैं, ऐसे angles co-interior कहलाते हैं।
parallel lines के co-interior angles हमेशा मिलकर 180 होते हैं। तो 40 धन B बराबर 180, यानी B बराबर 140, वही सीमा जो गिनती से आई। मज़े की बात, सीमा वाली आकृति खुद त्रिभुज नहीं, पर वही बताती है कि कौन से त्रिभुज बनते हैं। अब उल्टा करो, 40 B पर रोको, और A वाला angle बढ़ाओ। पहला न मिलने वाला फिर 140, बिल्कुल वही। कौन सा सिरा रोका, इससे कुछ नहीं बदलता, बस जोड़ी मायने रखती है।
अब सोचो, अगर आधार लंबा कर दें, तो क्या lines को मिलने की ज़्यादा जगह मिलेगी? आधार लंबा करने से lines बस खिसक जाती हैं, उनका झुकाव ज़रा भी नहीं बदलता। तो जो जोड़ी मिलती थी वह अब भी मिलेगी, और जो नहीं मिलती थी, वह अब भी नहीं। B को दाईं ओर खिसकाओ, B वाली line अपने झुकाव के संग खिसकती है, और कटने की जगह बस ऊपर और आगे चली जाती है।
और जो lines नहीं मिलती थीं, उन्हें कितना भी पास लाओ या दूर ले जाओ, उनका झुकाव वही है, वे फिर भी नहीं मिलतीं। यहाँ 1 से 179 तक के हर पूरे angle की हर जोड़ी, कुल 32041 जोड़ियाँ, और हर जोड़ी 5 अलग आधारों पर बनाई गई। आधार 1, 5, 10, 50, 100 सेंटीमीटर। हर आधार पर ठीक वही 15931 जोड़ियाँ मिलीं, और वही 16110 नहीं मिलीं। तो यहाँ की अकेली लंबाई का फ़ैसले से कोई लेना देना नहीं, फ़ैसला बस angles करते हैं।
नियम, दोनों angles का जोड़ 180 से कम, तो त्रिभुज बनता है। जोड़ 180 या उससे ज़्यादा, तो नहीं बनता। और lines काटकर देखी गई गिनती, सभी 32041 जोड़ियों में इसी नियम से मिली। याद रहे, नियम में बस वही 2 angles हैं जो दिए गए, तीसरा अभी बना ही नहीं, इसलिए यह पहले से काम आता है। अब छाँटो, 35 और 150, 70 और 30, 90 और 85, 50 और 150।
और 35 धन 150, 185, तो lines नहीं मिलतीं, 70 धन 30, 100, तो मिलती हैं। अब 90 धन 85, 175, तो मिलती हैं, और 50 धन 150, 200, तो नहीं मिलतीं। तीसरी जोड़ी सबसे काम की है, उसमें एक right angle है, और फिर भी त्रिभुज बनता है। कुछ बच्चे सोचते हैं, जोड़ी में 90 है, तो त्रिभुज नहीं बनेगा। पर 90 और 85 बना, और A पर 90 रखकर गिनो, तो 89 जोड़ीदार angles, 1 से 89 तक, सब बनते हैं।
फेल होने के लिए जोड़ चाहिए 180 या ज़्यादा, एक right angle अकेले काफ़ी नहीं। अब पहला angle 30, 70, 54, 144 हो, तो कौन से जोड़ीदार चलेंगे? पहला फेल होने वाला जोड़ीदार, क्रम से, 150, 110, 126, 36। उससे छोटा हर जोड़ीदार चलता है, तो 2 चलने वाले और 2 न चलने वाले चुनना आसान है। हर बार सीमा बस 180 घटा पहला angle। देखो, 144 के संग तो बहुत कम जगह बची है, बस 36 से छोटे जोड़ीदार चलते हैं।
अब 60 और 70 लो, पहले 5 के आधार पर, फिर 7 के आधार पर। दोनों बार तीसरा angle 50 degree, ज़रा भी नहीं हिला। और हर भुजा 1 दशमलव 4 गुना बड़ी हो गई, आकृति वही, बस बड़ी। तीसरा angle क्यों नहीं बदलता, इस पर खुद सोचो, अभी बस इसे नोट करो। 2 भुजाओं और बीच के angle वाली बनावट में दोनों दूर वाले सिरे पहले से मौजूद होते हैं, बस उन्हें जोड़ना होता है, इसलिए वह कभी फेल नहीं होती।
यहाँ तीसरा कोना 2 lines के कटने से आता है, और कटाव होना ज़रूरी नहीं। 3 लंबाइयों वाली बनावट में फ़ैसला लंबाइयाँ करती हैं, यहाँ फ़ैसला सिर्फ़ angles करते हैं। हर बनावट में यह पूछो, तीसरा कोना कहाँ से आता है, जोड़ने से, या कटने से, यही बताता है कि वह फेल हो सकती है या नहीं। कोई कहे, 2 angles काफ़ी नहीं, त्रिभुज तय नहीं होता। और 2 angles आकार का रूप पूरा तय कर देते हैं, बस उसका नाप तय नहीं करते।
नाप वह भुजा तय करती है, वह यह नहीं तय करती कि त्रिभुज बनेगा या नहीं। एक और गलतफ़हमी, फेल होने पर lines आधार के नीचे जाकर मिलती हैं। हम lines आधार से ऊपर की ओर खींचते हैं, वे ऊपर मिलती हैं, या कभी नहीं। उन्हें पीछे नीचे की ओर बढ़ाना एक अलग आकृति है, वह यह बनावट नहीं। आज का तरीका याद रखो, किसी बनावट की सीमा ढूँढनी हो, तो एक चीज़ को धीरे धीरे तब तक बढ़ाओ जब तक वह ठीक टूट न जाए।
फिर टूटने वाली जगह को ध्यान से देखो, यहाँ वह जगह 2 parallel lines थी। और उस एक तस्वीर से, co-interior angles वाले नियम ने, पूरी सीमा ठीक ठीक बता दी, अंदाज़े की ज़रूरत नहीं। खुद करो, 60 और 70 किसी भी आधार पर बनाओ, और तीसरा angle नापो। फिर ऐसी जोड़ी लो जिसका जोड़ ठीक 180 हो, और देखो कि lines पूरे पन्ने पर एक जितनी दूर रहती हैं।
और 144 के संग पहले 30 आज़माओ, फिर 40, और नियम से पहले बताओ कि कौन सी जोड़ी मिलेगी। याद रखो, 2 angles और बीच की भुजा वाली बनावट फेल हो सकती है। फ़ैसला angles करते हैं, भुजा की लंबाई नहीं। जोड़ 180 से कम, तो त्रिभुज, 180 या ज़्यादा, तो नहीं। सीमा पर lines parallel होती हैं, और parallel lines कभी नहीं मिलतीं। और 2 angles आकार का रूप तय करते हैं, नाप नहीं।
यह कहाँ बैठता है
यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.
किस पर टिका है
- Constructing from two sides and the angle between themकक्षा 7 · Ch 7, A Tale of Three Intersecting Lines
- Alternate angles, and interior angles that add to 180°कक्षा 7 · Ch 5, Parallel and Intersecting Lines
आगे फिर कहाँ आता है
- Why the three angles of any triangle add to 180°कक्षा 7 · Ch 7, A Tale of Three Intersecting Lines