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Chapter 4 · Data Handling and Presentation
सजा हुआ graph एक ईमानदार पढ़ने वाले को कैसे भटका सकता है
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7 ऊँचाइयाँ, और उनका एक सीधा-सादा दंड आलेख। सब दंड बराबर चौड़ाई के, और बदलती सिर्फ़ लंबाई। वो बराबर चौड़ाई सफ़ाई की बात नहीं थी — वो जान-बूझकर रोकी गई थी, ताकि तुलना अकेली लंबाई के ज़िम्मे रहे। और इसीलिए उस तस्वीर से कोई भी अनुपात निकालना सुरक्षित था।
मुख्य idea
data की तस्वीर वह सब कहती है जो उसकी शक्ल कहती है, सिर्फ़ वही नहीं जो तुम कहना चाहते थे। जब सात पहाड़ों की ऊँचाइयाँ दिखाने वाले त्रिकोण ऊँचे होने के साथ-साथ चौड़े भी बनाए जाते हैं, तो चित्र चुपचाप यह दावा कर देता है कि ऊँचे पहाड़ ज़्यादा चौड़े होते हैं — ऐसा दावा जो किसी ने किया नहीं, किसी ने जाँचा नहीं, और जिसका बचाव table से कोई नहीं कर सकता। इसीलिए bar graph की बराबर चौड़ाइयाँ कभी भी बेवजह की बारीकी नहीं थीं: चौड़ाई ठीक इसीलिए एक जैसी रखी गई थी कि मतलब सिर्फ़ लंबाई में रहे। और एक सुंदर पर ग़लत तस्वीर से बचाव बेहतर पसंद नहीं है; वह हिसाब है — चित्र से कोई number पढ़ो, फिर उसे table से जाँचो।
आपको क्या आना चाहिए
- infographic को ऐसे data display के रूप में परिभाषित करना जिसमें काफ़ी सारे कलात्मक चित्र जोड़े गए हों, और बताना कि यह किस काम आता है
- सजा हुआ graph बिना बताए जो दूसरा दृश्य संकेत ले आता है — चौड़ाई, क्षेत्रफल, आकार — उसे पहचानना
- समझाना कि bar graph के bars को एक जैसी चौड़ाई क्यों दी जाती है
- किताब की अपनी दोगुना करने वाली जाँच से, हिसाब लगाकर, किसी दृश्य छाप को numbers से परखना
- तय करना कि कोई दिया गया infographic उस मात्रा को बचाए रखता है या नहीं जिसे दिखाने का वह दावा करता है
- बताना कि ख़तरा दोनों तरफ़ है: किसी और की तस्वीर तुम्हें भटका सकती है, और तुम्हारी अपनी तस्वीर दूसरों को
- किसी सजी हुई data तस्वीर पर भरोसा करने से पहले जाँचने वाली बातों की सूची बनाना
जानने लायक़ शब्द
| शब्द | एक पंक्ति में अर्थ | हिंदी / क्षेत्रीय समकक्ष | पहली बार कहाँ |
|---|---|---|---|
| infographic | ढेर सारे कलात्मक और दृश्य चित्रों से सजाया गया data display | सूचनाचित्र | इसी chapter में छपा, p.103 |
| information graphics | छोटा करने से पहले किताब का दिया पूरा रूप | सूचना ग्राफ़िक्स | इसी chapter में छपा, p.103 |
| misleading | ऐसी बात जताना जिसका data साथ नहीं देता | भ्रामक | इसी chapter में छपा, p.104 |
| uniform width | bar graph के हर bar की साझा चौड़ाई, एक जैसी इसलिए रखी जाती है कि मतलब सिर्फ़ लंबाई में रहे | समान चौड़ाई | Reading a bar graph: what length is standing for; p.86 |
| column graph | ऐसा bar graph जिसके bars खड़े हों | स्तंभ आलेख | What makes a data picture clear and worth looking at; p.102 |
| scale | एक unit length की घोषित value | मापक | Pictographs, and why the scale has to be stated; p.83 |
| second signal | चौड़ाई या आकार जैसा कोई दृश्य गुण जो लंबाई के साथ-साथ बदलता है और अपना एक दावा जताता है — व्याख्या का अपना वाक्यांश | दूसरा संकेत | व्याख्या का अपना शब्द; इस chapter में नहीं छपा |
| check by computing | किसी दृश्य छाप को मानने से पहले numbers से परखना — किताब का दोगुना करने वाला सवाल जो करवाता है, उसके लिए व्याख्या का अपना नाम | गणना द्वारा जाँच | व्याख्या का अपना शब्द; इस chapter में नहीं छपा |
हिंदी column में आम चलन वाले standard NCERT हिंदी शब्द दिए गए हैं। ये इस chapter के किसी हिंदी संस्करण से नहीं लिए गए — Notes देखें।
लोग कहाँ चूकते हैं
- "सुंदर graph बेहतर graph है।" किताब का अपना क्रम उलटी तरफ़ जाता है: pp.104–105 पर सजाने का हर क़दम तस्वीर को ज़्यादा आकर्षक और कम भरोसेमंद बनाता है। आकर्षक होना और सच्चा होना अलग-अलग पैमाने हैं।
- "त्रिकोण ठीक हैं क्योंकि उनकी चोटियाँ सही ऊँचाई पर हैं।" हैं। मुश्किल यह है कि जब कोई देख नहीं रहा था, तब और क्या बदल गया। तस्वीर वह हर दावा करती है जो उसकी ज्यामिति करती है, सिर्फ़ इरादे वाला नहीं।
- "Infographics एक चाल हैं, इसलिए उनसे बचो।" किताब ऐसा नहीं कहती। वह कहती है कि वे जल्दी और सुहाने ढंग से बात पहुँचाने के लिए बनते हैं, और उन्हें जाँचना ज़रूरी है। जिस फ़ैसले की ओर वह ले जाती है वह सावधानी है, इनकार नहीं।
- "भटकाने वाले graphs सिर्फ़ बेईमान लोग बनाते हैं।" यहाँ जो होता है उसके लिए किताब का अपना शब्द क्रियाविशेषण accidentally (अनजाने में) है (p.104)। उदाहरण में कोई धोखा देने की कोशिश नहीं कर रहा; सुंदर बनाए जाते समय चित्र ने एक अतिरिक्त मतलब पकड़ लिया।
- "Everest, Elbrus का लगभग दोगुना है — तस्वीर यही दिखाती है।" 5642 को दोगुना करो और 8848 से तुलना करो। Everest, Elbrus के दोगुने से काफ़ी कम है, और यह उलटी बात सिर्फ़ तस्वीर ने कही थी।
- "अगर label तस्वीर पर छपा है, तो तस्वीर सटीक है।" पर्वत-श्रृंखला वाले infographic पर सही दिखने वाले labels हैं, फिर भी वह ऊँचाइयों के आपसी अनुपात बिगाड़ देता है — और उसका एक label उस table से 3 m अलग है जिससे वह आया था।
- "यह कला की बात है, इसलिए कोई सही जवाब नहीं।" है: तस्वीर या तो मात्राओं को बचाए रखती है या नहीं, और यह हिसाब से तय किया जा सकता है।
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पूरा transcript1,757 शब्द
वही 7 ऊँचाइयाँ, और उनका एक सीधा-सादा आलेख। यहाँ देखो — 7 दंड, सब बराबर चौड़ाई के, और हर एक की लंबाई उसकी अपनी संख्या से आई है। इस तस्वीर में दंड से दंड तक सिर्फ़ 1 चीज़ बदलती है — लंबाई। ऊपर से नीचे तक चौड़ाई हर दंड की एक जैसी है। ये तस्वीर सही है। और सच कहें तो थोड़ी सादी भी है। कोई रंग नहीं, कोई आकार नहीं — बस सीधे डिब्बे।
तो इसे सुंदर क्यों न बनाया जाए? यही सवाल इस वीडियो को शुरू करता है, और इसी सवाल का जवाब सबसे दिलचस्प निकलता है। पर उससे पहले एक बात। इन दंडों की चौड़ाई बराबर क्यों रखी गई थी? ये सफ़ाई की बात नहीं थी। वजह ये है कि तस्वीर में जो चीज़ बदलती है, वही कुछ कहती है। इसलिए अगर सिर्फ़ लंबाई बदले, तो मतलब भी सिर्फ़ लंबाई का रहेगा।
चौड़ाई जान-बूझकर रोक कर रखी गई थी, ताकि तुलना अकेली लंबाई के ज़िम्मे रहे। जो चीज़ नहीं बदलती, वो कुछ नहीं कहती। और इसी वजह से इस तस्वीर से कोई भी गुना-भाग निकालना सुरक्षित है। जो अनुपात संख्याओं में है, वही तस्वीर में दिखेगा। इस बात को पकड़े रहो। आगे का पूरा वीडियो इसी पर है कि जब ये बात सच रहना बंद कर देती है, तब क्या होता है।
जब किसी आँकड़ों की तस्वीर में चित्रकारी जोड़ दी जाती है, तो उसका अपना एक नाम है — सूचनाचित्र। ऐसी तस्वीरें इसलिए बनाई जाती हैं कि देखने वाला उन्हें जल्दी पढ़ ले, और देखने में भी अच्छी लगें। ये कोई बुरी नीयत नहीं है। तो इन 7 दंडों को तिकोना बनाकर देखो। हर तिकोने की नोक ठीक उसी ऊँचाई पर रहेगी जहाँ दंड का सिरा था। फिर हर एक को अपना रंग दे दो।
अब तस्वीर देखने में पहले से कहीं बेहतर लगती है। और यहाँ कुछ असली फ़ायदा भी हुआ है। तिकोने देखने में पहाड़ जैसे लगते हैं, इसलिए तस्वीर एक नज़र में समझ आ जाती है। और हर तिकोने की नोक ठीक उसी ऊँचाई पर है जो उसकी संख्या कहती है। सातों नोकें अपनी-अपनी सही जगह पर हैं। क्रम भी वैसा का वैसा है। सबसे ऊँचा अब भी सबसे ऊँचा है, सबसे छोटा अब भी सबसे छोटा।
तुम्हें लगता होगा कि अब इसमें ग़लत क्या रह गया। नोकें सही, क्रम सही, रंग सुंदर। तो गड़बड़ कहाँ है? एक पल के लिए नोकों से नज़र हटाओ और नीचे की तरफ़ देखो। हर तिकोने की ज़मीन कितनी चौड़ी है? हर एक को नाप कर देखो। और यहीं वो बात सामने आती है जो अब तक छुपी हुई थी। ये ज़मीनें बराबर नहीं हैं। जो तिकोना ज़्यादा ऊँचा है, वो ज़्यादा चौड़ा भी है।
और ये बात पूरी सूची में चलती है। सूची में नीचे उतरते हुए छहों क़दम पर यही होता है — जो नीचा है, वो पतला भी है। एक भी क़दम पर ये नियम नहीं टूटता। इसका मतलब है कि अब आकार से आकार तक 2 चीज़ें बदल रही हैं, 1 नहीं। लंबाई भी, और चौड़ाई भी। और तस्वीर वो सब कहती है जो उसका आकार कहता है — सिर्फ़ वो नहीं जो तुम कहना चाहते थे।
ये बात याद रखने लायक़ है। तो ये तस्वीर अब ये भी कह रही है कि ऊँचे पहाड़ चौड़े भी होते हैं। किसी ने ये कहा नहीं था, पर तस्वीर कह रही है। पर क्या ये सच है? क्या ऊँचा पहाड़ हमेशा चौड़ा भी होता है? किसी ने जाँचा ही नहीं। सारणी में सिर्फ़ ऊँचाइयाँ हैं, चौड़ाइयाँ हैं ही नहीं। इसलिए ये दावा कहीं से आया ही नहीं — बस बनते-बनते आ गया।
अब वो बात जो इसे सचमुच ख़तरनाक बनाती है। आँख लंबाई नहीं नापती। आँख ये देखती है कि कोई आकार कितनी जगह घेरता है। और कोई आकार कितनी जगह घेरता है, ये उसकी चौड़ाई गुणा लंबाई से तय होता है। यही वो चीज़ है जो आँख तौलती है। अब वापस बराबर चौड़ाई पर आओ। मान लो हर दंड की चौड़ाई 1 इकाई है। तब चौड़ाई गुणा लंबाई का मतलब सिर्फ़ लंबाई रह जाता है।
इसलिए बराबर चौड़ाई पर, जितनी जगह घेरी गई उसका अनुपात ठीक वही होता है जो संख्याओं का अनुपात है। दोनों एक ही निकलते हैं। और ये किसी एक जोड़ी की बात नहीं है। 7 आकारों से जो 21 जोड़ियाँ बनती हैं, सब की सब सही निकलती हैं। अब वही करो जो सुंदर तस्वीर ने किया था। चौड़ाई भी लंबाई के साथ-साथ बढ़ती जाए — जो आकार दुगना लंबा है, वो दुगना चौड़ा भी।
तब घेरी गई जगह बड़ी चौड़ाई गुणा बड़ी लंबाई हो जाती है। दोनों एक साथ बढ़ते हैं, और गुणा दोनों को पकड़ लेता है। इसलिए जगह का अनुपात अब संख्याओं का अनुपात नहीं रहता। वो उस अनुपात का ख़ुद से गुणा बन जाता है। यही पूरी गड़बड़ की जड़ है। और ये भी किसी एक जोड़ी की बात नहीं। पूरी 21 जोड़ियों पर एक साथ यही होता है। इसलिए ये कोई इत्तिफ़ाक़ नहीं है।
21 में से 1 भी जोड़ी अपना असली अनुपात नहीं बचा पाती। सब की सब बढ़ा-चढ़ाकर दिखने लगती हैं। सजावट यहीं नहीं रुकती। इन 7 आकारों को जोड़कर एक ही पहाड़ों की क़तार बना लो, जिसमें सातों चोटियाँ निकली हुई हों। सातों चोटियाँ ठीक वहीं रहती हैं जहाँ थीं। ऊपर देखो — नोकें नहीं हिलीं। पर उनके बीच का सब कुछ बनाया हुआ है। किसी संख्या ने उस ढलान को, उस चौड़ाई को, उस छाया को नहीं माँगा था।
और तीनों तस्वीरों में ये सबसे सुंदर है। यही इस पूरी बात की असली मुश्किल है — सबसे सुंदर तस्वीर सबसे कम भरोसे लायक़ निकली। अब इस तस्वीर को वैसे ही पढ़ो जैसे कोई भी पढ़ता है — सिर्फ़ देखकर। यहाँ सबसे ऊँची चोटी है, और यहाँ 5वीं वाली। आँख कहती है कि सबसे ऊँची चोटी 5वीं से लगभग दुगनी है। देखने में यही लगता है, और पूरे भरोसे से लगता है।
पर क्या वो सचमुच दुगनी है? इस पर बहस करने की या राय बनाने की ज़रूरत नहीं है। इसका जवाब हिसाब से निकलता है, और हिसाब सिर्फ़ 1 क़दम का है। दोनों में से छोटी संख्या लो और उसे दुगना करो। 5वीं ऊँचाई 5642 है। 5642 को दुगना करो तो 11284 आता है। यही वो ऊँचाई है जो सचमुच दुगनी कहलाती। अब इसे सबसे ऊँची चोटी के सामने रखो, जो 8848 है।
यहाँ देखो — 8848 उस निशान तक पहुँचता ही नहीं। वो 2436 पीछे रह जाता है। ये कोई मामूली अंतर नहीं है — ये 5वीं ऊँचाई के 2 बटा 5 से भी ज़्यादा है। इसलिए सबसे ऊँची चोटी 5वीं से दुगनी नहीं है। और दुगनी होने की बात सिर्फ़ तस्वीर ने कही थी, संख्याओं ने नहीं। पर फिर वो दुगनी दिखी क्यों? आँख आम तौर पर इतनी ग़लत नहीं होती।
उन 2 संख्याओं का असली अनुपात डेढ़ से थोड़ा ऊपर है। न 2, न उसके आसपास। पर घेरी गई जगह उस अनुपात का ख़ुद से गुणा कर देती है, क्योंकि चौड़ाई और लंबाई दोनों बढ़ी थीं। और वो गुणा किया हुआ अनुपात 2 से ऊपर निकल जाता है। इसलिए आँख ने जो कहा, वो आँख की ग़लती नहीं थी। आँख ने तस्वीर को ठीक-ठीक पढ़ा था। ग़लत तस्वीर थी, आँख नहीं।
और यही बात इसे पकड़ना मुश्किल बनाती है। अब ये देखो कि सजावट ने क्या नहीं तोड़ा। क्रम बिल्कुल सही है — सातों आकार उसी क्रम में हैं जिसमें होने चाहिए। हर नोक अब भी अपनी सही ऊँचाई पर है। अगर तुम तस्वीर को सिर्फ़ नोकों से पढ़ो, तो पूरी सारणी वापस मिल जाती है। जो टूटता है वो हर अनुपात है। पूरी 21 की 21 जोड़ियाँ। एक भी बची नहीं।
और इसीलिए इसे पकड़ना मुश्किल है। जिन चीज़ों को हम जाँचने की सोचते हैं — क्रम और नोकें — वो सब ठीक निकलती हैं। तो पढ़ने वाले के लिए एक नियम बनता है — सजी हुई तस्वीर को ऊँचाई से पढ़ो, उसके भारीपन से कभी नहीं। ये गड़बड़ कितनी दूर तक जाती है, इसे गिनकर देखना चाहिए। 7 आकारों की 21 जोड़ियाँ हैं। इन 21 में से 6 जोड़ियाँ सचमुच दुगनी या उससे ज़्यादा हैं।
ये असली गिनती है, संख्याओं से निकली हुई। पर सजी हुई तस्वीर उनमें से 11 को दुगना या उससे ज़्यादा दिखाती है। यानी 5 जोड़ियाँ ऐसी हैं जो दिखती दुगनी हैं और हैं नहीं। ये किसी 1 बदक़िस्मत तुलना की बात नहीं है। ये पूरी तस्वीर की बात है, और हर जोड़ी पर एक साथ हो रहा है। एक चीज़ और जाँचने लायक़ है, और उसका आकार से कोई लेना-देना नहीं।
ख़ुद लिखे हुए अंकों को देखो। चौथी ऊँचाई सारणी में और पहली तस्वीर में 5895 लिखी है। पर रंगी हुई तस्वीर पर वही ऊँचाई 5892 लिखी है। फ़र्क़ सिर्फ़ 3 का है, और उससे कोई तुलना नहीं बदलती। क्रम वही रहता है, चाहे कोई सी भी संख्या लो। फिर भी 2 तस्वीरें आपस में अलग बात कह रही हैं, जबकि दोनों एक ही सारणी से बनी थीं। सजावट में ऐसी छोटी चूकें इसीलिए घुस आती हैं, क्योंकि वहाँ ठीक रखने को चीज़ें ज़्यादा होती हैं।
एक बात साफ़ कह देनी चाहिए। यहाँ किसी ने किसी को धोखा देने की कोशिश नहीं की थी। वो फ़ालतू दावा तब आया जब कोई तस्वीर को और सुंदर बना रहा था। इसलिए ये नीयत की नहीं, ध्यान की बात है। मतलब सावधानी 2 तरफ़ रखनी है, 1 तरफ़ नहीं। जब कोई तस्वीर पढ़ो, और जब ख़ुद कोई तस्वीर बनाओ। शायद तुम सोचो कि ये सिर्फ़ दूसरों की तस्वीरों की बात है।
नहीं — अपनी बनाई तस्वीर से भी बिना चाहे ग़लत बात कही जा सकती है। तो जाँचने की सूची यहाँ है, और वो छोटी है। पहला सवाल — इस तस्वीर में बदल क्या रहा है? दूसरा — जो-जो बदल रहा है, क्या उसके लिए कोई मापक बताया गया है? अगर चौड़ाई बदल रही है और मापक सिर्फ़ ऊँचाई का है, तो वहीं रुक जाओ। तीसरा, और यही फ़ैसला करता है — तस्वीर जो तुलना कहती दिख रही है, उसे उठाओ और हिसाब लगाकर देखो।
अक्सर 1 ही गुणा काफ़ी होता है, ठीक वैसे ही जैसे यहाँ था। छोटी संख्या को दुगना करो और बड़ी से मिला लो। इस सब का मतलब ये नहीं कि सुंदर तस्वीरें मत बनाओ। मतलब सिर्फ़ इतना है कि सुंदर बनाते वक़्त जाँचते भी रहो। सुंदर होना और भरोसे लायक़ होना, 2 अलग बातें हैं। ऊपर वाली सादी तस्वीर कम सुंदर थी और ज़्यादा सच्ची। और अब दंड आलेख की बराबर चौड़ाइयाँ वही दिखती हैं जो वो हमेशा से थीं — सफ़ाई नहीं, बचाव।
1 चीज़ बदले, 1 ही बात कही जाए। जिस पल कोई दूसरी चीज़ भी बदलने लगे, तस्वीर एक और दावा करने लगती है। और जब कोई तस्वीर कोई चौंकाने वाली बात कहे, तो न उसकी तारीफ़ करो, न उससे बहस। उसका हिसाब लगाओ।
यह कहाँ बैठता है
यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.
किस पर टिका है
- What makes a data picture clear and worth looking atकक्षा 6 · Ch 4, Data Handling and Presentation
- Reading a bar graph: what length is standing forकक्षा 6 · Ch 4, Data Handling and Presentation
इसके ठीक पहले और ठीक बाद
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