PrepShorts · पढ़ाई की शीट · Class 10 Mathematics · Chapter 2, Polynomials
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किसी polynomial को एक मशीन मानिए, जिसमें बस एक खाँचा है: एक संख्या अंदर जाती है, और एक संख्या बाहर आती है। p ऑफ़ 2 का मतलब p गुणा 2 नहीं, बल्कि वो अकेली संख्या है जो 2 डालने पर निकलती है।
मुख्य idea
Polynomial एक नियम है जो एक number को दूसरे में बदल देता है, और p(k) बस उस चीज़ का नाम है जो k डालने पर बाहर आती है। सोचने का यही नया ढंग "क्या यह number zero है?" को arithmetic की एक line में हल होने लायक़ सवाल बना देता है, बिना ढूँढ़े और बिना अंदाज़ा लगाए — आप number डालिए और जवाब देख लीजिए। और linear वाली हालत पहले ही बता देती है कि chapter किधर जा रहा है: ax + b ठीक एक input पर 0 लौटाता है, −b/a पर, जो पूरी तरह coefficients से बना है। zeroes कभी a और b से आज़ाद थे ही नहीं; बाक़ी chapter यह पूछता है कि यह बात कहाँ तक जाती है।
आपको क्या आना चाहिए
- दिए गए input पर polynomial का output निकालना, arithmetic से पहले substitution लिखकर दिखाते हुए
- notation p(k) पढ़ना और लिखना, और शब्दों में बताना कि वह किस चीज़ के लिए है
- वह जाँच बताना जो तय करती है कि कोई number zero है या नहीं, और उसे लागू करना
- समझाना कि constant term input 0 पर output क्यों होता है
- किसी भी linear polynomial का zero उस equation को हल करके ढूँढ़ना जो definition से बनती है
- ax + b के zero को constant term और variable के coefficient के ratio के रूप में लिखना, और sign जाँचना
- किसी उम्मीदवार को जाँचने और zero ढूँढ़ने में फ़र्क़ करना, और बताना कि इस मोड़ पर chapter के पास इन दोनों में से किसके लिए general method है
जानने लायक़ शब्द
| शब्द | एक पंक्ति में अर्थ | हिंदी / क्षेत्रीय समकक्ष | पहली बार कहाँ |
|---|---|---|---|
| value of p(x) | किसी बताए गए input के लिए polynomial जो number लौटाता है | बहुपद का मान | §2.1, p. 11 |
| p(k) | input k होने पर उस लौटाए गए number का notation | p(k) — यह notation अनुवाद नहीं की जाती | §2.1, p. 11 |
| zero of a polynomial | वह input जिस पर polynomial 0 लौटाता है | बहुपद का शून्यक | §2.1, p. 11 |
| coefficient | variable की किसी दी हुई power से गुणा होने वाली real number | गुणांक | §2.1, p. 10 |
| constant term | polynomial का वह हिस्सा जिसमें कोई variable नहीं | अचर पद | §2.1, p. 11, जहाँ ax + b का zero देने वाले ratio के अंदर इसका नाम आता है |
| real number | वह तरह की संख्या जो यहाँ input हो सकती है | वास्तविक संख्या | §2.1, p. 11 |
| substitution | variable की जगह हर जगह कोई number रखना | प्रतिस्थापन | इस पाठ का शब्द, इस chapter में छपा नहीं; पन्ना यह क़दम उठाता है और इसे letter की जगह कुछ रखना कहता है, नाम दिए बिना |
| root | zero के लिए एक आम दूसरा शब्द | मूल | इस पाठ की टिप्पणी; यह chapter इसे कभी नहीं छापता, और यहाँ परीक्षा वाला शब्द 'zero' है |
इस पाठ्यपुस्तक का हिंदी संस्करण नहीं देखा गया, इसलिए हिंदी column को उस संस्करण के ठीक-ठीक शब्द नहीं, standard गणितीय शब्दावली मानें।
लोग कहाँ चूकते हैं
- "p(2) का मतलब है p गुणा 2।" यह एक अकेला number है, input 2 पर output। यहाँ bracket गुणा नहीं है, और chapter की शुरुआत में पढ़ने की यह सबसे आम ग़लती है।
- "polynomial का zero, number 0 होता है।" zero input है; 0 वह है जो बाहर आता है। दो अलग slots, और शब्द पहले वाले की ओर इशारा करता है।
- "p(−1) = (−1)² − 3 × (−1) − 4 = −1 − 3 − 4." दोनों signs ग़लत हैं। brackets जस के तस रखकर substitute कीजिए, फिर सरल कीजिए — पन्ना ख़ुद value निकालने से पहले brackets लिखता है।
- "zero ढूँढ़ने के लिए numbers आज़माते रहिए जब तक कोई चल न जाए।" linear polynomial के लिए एक तरीक़ा है जो हमेशा एक क़दम में ख़त्म होता है। numbers आज़माने वाला तरीक़ा ठीक वही है जिसे definition हटा देती है।
- "ax + b का zero b/a है।" sign ही असली बात है। ratio रटने के बजाय उसे ak = −b से होकर पीछे तक track कीजिए।
- "हर polynomial का zero इसी तरह निकाला जा सकता है।" यहाँ जो तय हुआ है वह linear हालत है। quadratic हालत वह खुला सवाल है जिस पर section ख़त्म होता है, और उसमें बाक़ी पूरा chapter लगता है।
- "p(0) को term-दर-term निकालना पड़ता है।" वह हर बार constant term होता है, और यह देख लेना उसे निकालने से ज़्यादा काम का है।
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पूरा transcript2,347 शब्द
किसी polynomial को देखने का एक ऐसा तरीक़ा है, जिससे आगे की हर बात आसान हो जाती है। उसे एक मशीन मानिए, जिसमें बस एक खाँचा है। खाँचे में एक संख्या डालिए, मशीन अपना हिसाब करती है, और दूसरी तरफ़ से एक संख्या निकलती है। बोर्ड पर लिखा expression कोई ठहरी हुई चीज़ नहीं है। वो हिदायतों की एक सूची है, जो किसी input का इंतज़ार कर रही है। मिसाल के लिए लीजिए x का वर्ग, घटा 3 गुणा x, घटा 4 वाला बहुपद।
इसकी हिदायतें कहती हैं: जो मिले उसका वर्ग करो, उसमें से उसका 3 गुना घटाओ, और आख़िर में 4 घटाओ। इनमें से कोई भी हिदायत ख़ास x के बारे में नहीं है। यहाँ x बस उस जगह को थामे बैठा है, जहाँ कोई संख्या आने वाली है। तो इस मशीन से पूछने लायक़ असली सवाल क्या है? सवाल ये नहीं कि x क्या है; सवाल ये है कि कुछ डालने पर बाहर क्या आता है।
चलिए, इस मशीन में 2 डालकर देखते हैं। तरीक़ा ये है कि जहाँ जहाँ x लिखा है, वहाँ 2 रखिए, और ये काम कोई भी हिसाब करने से पहले कीजिए। तो पहली line ये बनती है: 2 का वर्ग, घटा 3 गुणा 2, और घटा 4, अभी बिना कोई हिसाब किए। इस line को कुछ देर बोर्ड पर रहने दीजिए, क्योंकि लोग अक्सर इसी को छोड़ देते हैं। अब इसके बाद आता है असली हिसाब।
सबसे पहले, 2 का वर्ग 4 होता है। फिर 3 गुणा 2, यानी 6, और ये घटाया जा रहा है। और आख़िरी 4 को भी घटाना है। तो 4 घटा 6 घटा 4, यानी माइनस 6 आता है। मतलब, 2 डालने पर ये मशीन माइनस 6 लौटाती है। एक input, एक output, और कहीं कोई उलझन नहीं। अब इसमें शून्य डालिए, और देखिए expression के साथ क्या होता है। शून्य का वर्ग शून्य है, और 3 गुणा शून्य भी शून्य है।
पहले दोनों पदों में x है, इसलिए दोनों ग़ायब हो जाते हैं। खड़ा रहता है सिर्फ़ माइनस 4 वाला पद। और माइनस 4 तो शुरू से ही बोर्ड पर लिखा हुआ था। ये वो पद है जिसमें कभी कोई x था ही नहीं, यानी constant पद। क्या ये बस इसी एक बहुपद का संयोग है? नहीं; शून्य डालते ही x वाला हर पद मिट जाता है, और बिना x वाला पद ज्यों का त्यों बचा रहता है।
इसलिए शून्य पर output हमेशा constant पद ही होता है, और उसे बिना हिसाब किए पढ़ा जा सकता है। ये बात 2401 बहुपदों पर जाँची गई, सबमें शून्य डालकर। उन 2401 में से सभी ने अपना constant पद ही लौटाया। इस चीज़ का एक नाम होना चाहिए, और पहली बड़ी ग़लतफ़हमी इसी नाम पर होती है। मशीन का नाम हम p ऑफ़ x रखते हैं। और 2 डालने पर जो निकलता है, उसे p के आगे bracket में 2 रखकर लिखते हैं।
तो अभी वाली line कहती है कि p ऑफ़ 2 बराबर माइनस 6 है। तो bracket वाला ये निशान असल में है क्या, एक गुणा या एक संख्या? यहाँ p ऑफ़ 2 का मतलब, p गुणा 2 नहीं है। ये bracket गुणा का निशान नहीं है, और p कोई संख्या नहीं जिसे किसी चीज़ से गुणा करना हो। बल्कि p मशीन का नाम है, और bracket के अंदर वो है जो आपने मशीन में डाला।
और पूरा निशान, यानी p और bracket में 2, एक अकेली संख्या है: वो जो बाहर निकली। इसीलिए यहाँ एक और letter काम आता है। हम p ऑफ़ k लिखते हैं, जहाँ k वो संख्या है जो इस वक़्त डाली जा रही है, और x वो letter बना रहता है जिसमें नियम लिखा है। एक letter नियम का नाम बताता है, और दूसरा letter input का। अब मशीन में माइनस 1 डालिए; इस एक line में ही चिह्न के जाल बिछे हैं।
पूरी line, brackets के साथ, ऐसी बनती है: bracket में माइनस 1 का वर्ग, घटा 3 गुणा bracket में माइनस 1, और घटा 4, अभी बिना हिसाब के। माइनस 1 का वर्ग प्लस 1 होता है, क्योंकि किसी ऋण संख्या को उसी से गुणा करने पर धन संख्या मिलती है। और 3 गुणा माइनस 1 होता है माइनस 3, जो घटाया जा रहा है, यानी असल में 3 जुड़ जाता है।
तो 1 जोड़ 3 घटा 4, और जवाब शून्य आता है। अब वो line देखिए जो जल्दबाज़ी में लिखी जाती है। उसमें आता है माइनस 1, फिर माइनस 3, फिर माइनस 4, और कुल माइनस 8 बनता है। दोनों चिह्न खो गए, क्योंकि brackets कभी लिखे ही नहीं गए। ग़लती का एक और रास्ता है: माइनस वाला चिह्न दरवाज़े पर ही छोड़ देना, यानी असल में 1 डाल देना। तब मशीन शून्य नहीं, माइनस 6 लौटाती है, क्योंकि 1 डालने पर यही निकलता है।
क्या ये कभी कभार होने वाली चूक है? ये चूक 1710 बार दोहराकर देखी गई, छोटे बहुपदों में माइनस 1 से माइनस 5 तक की संख्याएँ डालकर। उन 1710 में से 1470 बार जवाब बदल गया, और बस 240 बार वही रहा। ये brackets सजावट नहीं हैं; पूरा फ़र्क़ उन्हीं से पड़ता है। अब मशीन में 4 डालकर देखते हैं। यहाँ 4 का वर्ग 16 है, फिर 3 गुणा 4 यानी 12, और आख़िर में 4 घटाना है।
तो 16 घटा 12 घटा 4, और जवाब फिर से शून्य। अब देखिए कि इस मशीन ने अब तक क्या क्या दिया है। जब 2 डाला, तो माइनस 6 मिला; जब शून्य डाला, तो माइनस 4 मिला। जब माइनस 1 डाला, तो शून्य मिला; और जब 4 डाला, तब भी शून्य मिला। इन जवाबों में से कौन से बाक़ियों जैसे नहीं हैं? कुल 4 जवाबों में से 2 जवाब शून्य हैं, और बाक़ी 2 नहीं।
माइनस 1 पर और 4 पर कुछ अलग हुआ है, और आगे की सारी बात इसी फ़र्क़ के बारे में है। अब परिभाषा, और वो छोटी सी है। कोई संख्या किसी polynomial का शून्यक कहलाती है, अगर उस संख्या पर polynomial शून्य लौटाए। ध्यान दीजिए, इसका नाम शून्यक है, शून्य नहीं। बस, पूरी परिभाषा इतनी ही है। माइनस 1 इस बहुपद का एक शून्यक है, क्योंकि माइनस 1 डालने पर शून्य निकलता है।
इसी वजह से संख्या 4 को भी इसका शून्यक कहेंगे। अब दूसरी ग़लतफ़हमी, जो पहली से भी ज़्यादा आम है। क्या polynomial का शून्यक, संख्या शून्य ही होता है? नहीं; परिभाषा में एक खाना input का है और एक output का, और शब्द शून्यक, input वाले खाने की बात करता है। यानी शून्यक वो है जो अंदर जाता है, और शून्य वो है जो बाहर आता है। और देखिए, इसी बहुपद में शून्य डालने पर माइनस 4 आया था, इसलिए शून्य ख़ुद इसका शून्यक नहीं है।
माइनस 1 एक शून्यक है, 4 एक शून्यक है, और इनमें से कोई भी संख्या शून्य नहीं है। अब ऐसे सवाल देखिए जो लिखने में लगभग एक जैसे लगते हैं। पहला सवाल: क्या 4 इस बहुपद का शून्यक है? दूसरा सवाल: इस बहुपद के शून्यक कौन कौन से हैं? पहला सवाल तो शुरू होते ही ख़त्म हो जाता है। बस 4 डालिए, जवाब देखिए, और अगर शून्य आए तो जवाब हाँ है।
यानी 16 घटा 12 घटा 4, जो शून्य है, तो हाँ। और उसी तरह, क्या संख्या 3 इसका शून्यक है? यहाँ 9 घटा 9 घटा 4 से माइनस 4 आता है, तो जवाब नहीं है। न कुछ ढूँढना है, न कुछ उलटना पलटना है, और ये भी साफ़ है कि काम कब ख़त्म हुआ। पर दूसरा सवाल बिल्कुल अलग चीज़ है। यहाँ किसी ने आपको कोई उम्मीदवार नहीं थमाया। आपको कहीं से एक संख्या पैदा करनी होगी, फिर दूसरी, और फिर किसी तरह साबित करना होगा कि और कोई नहीं बची।
जाँचना, हिसाब की बस एक line है। ढूँढना एक तरीक़ा है, और तरीक़ा बनाना पड़ता है। आगे की पूरी कहानी इसी की है कि जाँचने के तरीक़े से ढूँढने का तरीक़ा कैसे बनाया जाए। किसी शून्यक को ढूँढने का सबसे सीधा plan है: संख्याएँ आज़माते जाओ, जब तक कोई काम न कर जाए। पहले 1 डालो, फिर 2, फिर 3, और देखो कि कहीं शून्य निकला या नहीं। देखते हैं ये plan कितना बुरा चलता है।
ऐसे सभी linear बहुपद लीजिए, a गुणा x जोड़ b, जिनके coefficients माइनस 12 से 12 तक की पूर्ण संख्याएँ हों, और a शून्य न हो। ऐसे कुल 600 बहुपद बनते हैं। उन 600 में से हर एक का एक शून्यक है। पर उन 600 में से सिर्फ़ 164 बहुपदों का शून्यक पूर्ण संख्या है। बाक़ी 436 बहुपदों का शून्यक एक भिन्न है। यानी हर 3 में से 2 से ज़्यादा बहुपदों पर, पूर्ण संख्याएँ आज़माना धीमा तरीक़ा नहीं है।
वो तरीक़ा है ही नहीं, क्योंकि टकराने के लिए कोई पूर्ण संख्या है ही नहीं। आप ज़िंदगी भर ऊपर गिनते रहें, तो भी वहाँ कभी नहीं पहुँचेंगे। परिभाषा आपको इसी हालत से बचाती है। अब देखिए परिभाषा एक linear बहुपद के साथ क्या करती है। लीजिए 2 गुणा x जोड़ 3 वाला बहुपद। हमें वो संख्या k चाहिए जिस पर ये मशीन शून्य लौटाए। परिभाषा साफ़ बताती है इसका मतलब: p ऑफ़ k बराबर शून्य।
तो इसे पूरा लिखते हैं: 2 गुणा k जोड़ 3 बराबर शून्य। अब ये सवाल कोई खोज नहीं रहा। अब ये equation है, और उसे हल करने में बस एक क़दम लगता है। पहले 3 को उस पार ले जाइए, तो 2 गुणा k बराबर माइनस 3 हो जाता है। फिर 2 से भाग दीजिए, तो k बराबर माइनस 3 बटा 2 आता है। और जाँच भी कर लीजिए, क्योंकि यहाँ जाँच मुफ़्त है।
देखिए, 2 गुणा माइनस 3 बटा 2 होता है माइनस 3, और माइनस 3 जोड़ 3 शून्य है। एक line सवाल बनाने में, एक line हल करने में, एक line जाँचने में, और अंदाज़ा कहीं नहीं। अब यही काम संख्याएँ चुने बिना कीजिए। लीजिए a गुणा x जोड़ b, जहाँ a शून्य नहीं है। परिभाषा से मिलता है: a गुणा k जोड़ b बराबर शून्य। अब b को उस पार ले जाइए, तो a गुणा k बराबर माइनस b।
फिर a से भाग दीजिए, तो k बराबर माइनस b बटा a मिलता है। इसे ध्यान से देखिए, क्योंकि चिह्न ही असली बात है। ऊपर है constant पद, अपना चिह्न उलटकर। और नीचे है x वाले पद का coefficient। ये माइनस b बटा a है, b बटा a नहीं। उन्हीं 600 बहुपदों पर, b बटा a सिर्फ़ 24 बार सही बैठता है, और वो सारे वही हैं जहाँ b शून्य है, यानी दोनों संयोग से बराबर हैं।
बाक़ी 576 बहुपदों पर वो सीधा ग़लत है। अब 4 गुणा x घटा 10 पर आज़माइए। यहाँ b माइनस 10 है, तो माइनस b हुआ प्लस 10, और शून्यक बनता है 10 बटा 4, जो सरल करके 5 बटा 2 होता है। जाँचकर देखें तो 4 गुणा 5 बटा 2 बराबर 10 होता है, और 10 घटा 10 शून्य है। यहाँ b ऋण था, इसलिए शून्यक धन निकला; और 2 गुणा x जोड़ 3 में b धन था, तो शून्यक ऋण निकला।
और देखिए, a के शून्य न होने की शर्त कहाँ काम आई। आख़िरी क़दम में a से भाग देना इसी शर्त की वजह से मुमकिन हुआ। ये formula चुपचाप एक और बात कह रहा है। वो एक ही जवाब देता है: न कोई सूची, न कोई दायरा, बस एक संख्या। तो क्या किसी linear बहुपद के अलग अलग शून्यक हो सकते हैं? मान लीजिए ऐसी संख्याएँ हैं, k और m, और दोनों पर बहुपद शून्य देता है।
तब a गुणा k जोड़ b शून्य है, और a गुणा m जोड़ b भी शून्य है। एक में से दूसरा घटाइए, तो b कट जाता है। बचता है a गुणा, k घटा m, बराबर शून्य। पर a तो शून्य है ही नहीं। तो ये गुणनफल तभी शून्य हो सकता है जब k घटा m शून्य हो, यानी k और m शुरू से एक ही संख्या थे। ये बात गिनकर भी जाँची गई।
माइनस 6 से 6 तक के coefficients वाले सभी 156 linear बहुपद, उन 47 भिन्नों पर आज़माए गए जिनका ऊपर और नीचे का हिस्सा 6 तक है। उन 156 में से हर एक, उन भिन्नों में से ठीक एक पर शून्य हुआ। और अलग अलग भिन्नों की जितनी भी जोड़ियाँ बनीं, उनमें एक भी ऐसी नहीं थी जिसकी दोनों संख्याओं पर शून्य आया हो। अब यही जाँच उलटी दिशा में चलाते हैं।
मान लीजिए बहुपद है x का वर्ग, जोड़ c गुणा x, घटा 6, और c अनजाना है। किसी ने बताया है कि 2 इसका एक शून्यक है। तो c क्या होना चाहिए? परिभाषा कहती है कि 2 डालने पर शून्य आना चाहिए, यानी 4 जोड़ 2 गुणा c घटा 6 बराबर शून्य। इससे 2 गुणा c बराबर 2 बनता है, और c बराबर 1 आता है। माइनस 10 से 10 तक की 21 पूर्ण संख्याएँ c की जगह रखकर देखी गईं, और उनमें से बस एक ने काम किया, यानी 1 ने।
यहाँ शून्यक की जाँच, coefficient के लिए एक equation बन गई। अब बहुपद है x का वर्ग जोड़ x घटा 6, और 2 डालने पर 4 जोड़ 2 घटा 6, यानी शून्य आता है। पर 3 डालने पर 9 जोड़ 3 घटा 6, यानी 6 आता है, तो 3 इसका शून्यक नहीं। इसका दूसरा शून्यक माइनस 3 निकलता है, जहाँ 9 घटा 3 घटा 6 शून्य देता है। तो linear वाला मामला यहीं बंद हुआ।
एक शून्यक, पूरा का पूरा अपने coefficients से बना, और एक क़दम में मिला। तो उस बहुपद का क्या, जिससे इस बात की शुरुआत हुई थी? उसके शून्यक माइनस 1 और 4 निकले। क्या ये संख्याएँ भी उसके coefficients में कहीं छिपी हैं? और अंदाज़े वाले plan की तरफ़ दोबारा मत जाइए। ऐसे सभी quadratic बहुपद लीजिए जिनके coefficients माइनस 4 से 4 तक की पूर्ण संख्याएँ हों, और पहला coefficient शून्य न हो।
ऐसे कुल 648 बहुपद बनते हैं। उन 648 में से सिर्फ़ 176 बहुपदों का कोई शून्यक भिन्न के रूप में लिखा जा सकता है। बाक़ी 472 बहुपदों का ऐसा कोई शून्यक नहीं, इसलिए भिन्न आज़माते रहने से वो कभी नहीं मिलेगा। तरीक़ा जो भी निकले, वो खोज नहीं हो सकता। उसे coefficients में से ही निकलना होगा, जैसे माइनस b बटा a निकला था। सवाल यहीं खुला है: क्या किसी quadratic के शून्यक भी उसके coefficients से ही बनते हैं?
यह कहाँ बैठता है
यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.
किस पर टिका है
- Degree as the label that separates linear, quadratic and cubicकक्षा 10 · Ch 2, Polynomials
आगे फिर कहाँ आता है
- A zero is exactly a point where the curve meets the horizontal axisकक्षा 10 · Ch 2, Polynomials
- What the sum and product of two zeroes reveal about a, b and cकक्षा 10 · Ch 2, Polynomials
- The three symmetric relations that hold for a cubicकक्षा 10 · Ch 2, Polynomials