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Chapter 4 · Data Handling and Presentation

Bar graph बनाना, और ऐसा scale चुनना जो समा जाए

Bar graphs15 मिनट

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एक सारणी सामने है और एक कोरा पन्ना। बना हुआ आलेख पढ़ने में सिर्फ़ एक गुणा लगता था — लंबाई गुणा मापक। बनाना उल्टी दिशा में चलता है — संख्या भाग मापक। और जब ये तय हो जाए, तो हर दंड की ऊँचाई अपने आप निकल आती है।

मुख्य idea

Bar graph बनाना असल में ruler पहने हुए भाग का एक सवाल है। scale तय हो जाने के बाद हर bar की ऊँचाई बस frequency भाग scale है — इसलिए पूरे तरीक़े में अपनी सूझ वाला फ़ैसला सिर्फ़ एक है, scale, और वह फ़ैसला हिसाब का है, कला का नहीं। उसे बहुत बारीक चुनो तो graph page से बाहर चला जाता है; बहुत मोटा चुनो तो data में सचमुच मौजूद अंतर एक line की मोटाई में खो जाते हैं। बाक़ी बनावट — बराबर चौड़ाई, बराबर जगह, zero से शुरू होते निशान — इसीलिए है कि पढ़ने वाले को ठीक वही numbers वापस मिलें जो तुमने डाले थे।

आपको क्या आना चाहिए

  • दो perpendicular reference lines बनाना और तय करना कि किस पर categories रहेंगी और किस पर frequencies
  • data की सबसे छोटी और सबसे बड़ी frequency देखकर scale चुनना, और चुनाव को सही ठहराना
  • हर bar की लंबाई frequency ÷ scale के रूप में निकालना और उसे उतनी ही लंबाई में बनाना
  • बराबर चौड़ाई वाले bars, उनके बीच बराबर जगह छोड़कर, बनाना, और निशान zero से शुरू करना
  • दिए गए data set को दूसरे scale पर दोबारा बनाना और बताना कि क्या बदला और क्या नहीं
  • किसी एक bar से graph का scale वापस निकालना, जिसकी units में लंबाई और value दोनों पता हों
  • जिस table से graph बना है वह दी हो, तो ग़लत ऊँचाई पर बना bar पकड़ना और ठीक करना
  • बने हुए graph से तुलना वाले सवालों के जवाब देना, "लगभग आधा" और "चौथाई से कम" जैसी अनुपात वाली तुलनाओं समेत
  • बिना छाँटे observations मिलें तो पहले frequency table बनाना, फिर उसका graph

जानने लायक़ शब्द

शब्दएक पंक्ति में अर्थहिंदी / क्षेत्रीय समकक्षपहली बार कहाँ
scaleघोषित संख्या, कि एक unit length कितनी चीज़ों को दर्शाती हैमापकPictographs, and why the scale has to be stated; p.83
unit lengthpaper पर वह तय लंबाई जो scale का एक step घेरता हैइकाई लंबाईइसी chapter में छपा, p.89
bar graphबराबर चौड़ाई वाले bars का display, जिनकी लंबाइयाँ frequencies बताती हैंदंड आलेखReading a bar graph: what length is standing for; p.85
frequency distribution tablecategories और गिनतियों की वह table जिससे graph बनता हैबारंबारता सारणीइसी chapter में छपा, p.95
vertical axisवह खड़ी reference line जिस पर frequencies mark होती हैंऊर्ध्वाधर अक्षइसी chapter में छपा, p.94
uniform gapलगातार bars के बीच छोड़ी गई बराबर जगहसमान अंतरालइसी chapter में छपा, p.92
expenditureकिसी चीज़ पर ख़र्च हुआ पैसा, यहाँ frequency जैसी मात्रा की तरह इस्तेमालव्ययइसी chapter में छपा, p.91
bar height in unitsfrequency ÷ scale, वह number जिस पर ruler रखा जाता है — उस मात्रा के लिए व्याख्या का अपना वाक्यांश जिसे किताब एक column में निकालती है पर नाम नहीं देतीइकाइयों में दंड की ऊँचाईव्याख्या का अपना शब्द; इस chapter में नहीं छपा

हिंदी column में आम चलन वाले standard NCERT हिंदी शब्द दिए गए हैं। ये इस chapter के किसी हिंदी संस्करण से नहीं लिए गए — Notes देखें।

लोग कहाँ चूकते हैं

  • "scale वही है जो teacher कहे।" वह data से आता है। किताब एक unit में दस runs तक सबसे छोटे score, 0, और सबसे बड़े, 100, को देखकर और यह पूछकर पहुँचती है कि क्या समाएगा। तर्क दिखाओ, सिर्फ़ नतीजा नहीं।
  • "बड़ा scale मतलब बड़ा graph।" उलटा। ₹200 वाली एक unit ₹3400 के bar को 17 units बना देती है; ₹1 वाली unit को 3400 units चाहिए होंगी।
  • "bars की ऊँचाई आँख से बनाई जाती है।" वह निकाली जाती है। किताब p.92 पर भाग का पूरा column इसीलिए छापती है कि यह अंदाज़े पर न छोड़ा जाए।
  • "zero frequency का मतलब है category को छोड़ दो।" Match 6 अपनी जगह रखता है और उसे कोई ऊँचाई नहीं मिलती। उसे हटाने से record की शक्ल बदल जाएगी।
  • "bars एक-दूसरे को छूने चाहिए, ताकि graph भरा हुआ लगे।" chapter का अपना सार कहता है कि बीच की जगहें यह दिखाने के लिए हैं कि bars अलग-अलग खड़े हैं और अलग categories दर्शाते हैं।
  • "numbering वहीं से शुरू करो जहाँ से data शुरू होता है।" किताब का सार साफ़ कहता है कि निशान zero से शुरू होने चाहिए। 15 से शुरू करने पर 16 का bar 28 के bar के बगल में इतना छोटा दिखता है जितना numbers नहीं कहते।
  • "frequency table का कुल निकालना है तो बाईं तरफ़ वाला column जोड़ो।" Bumrah के wickets के साथ किताब ठीक यही जाल बिछाती है। बायाँ column values बताता है; कुल के लिए हर value को उसकी अपनी frequency से गुणा करना पड़ता है।
  • "छपे graph का हर bar सही ही होगा।" chapter की दो exercises जान-बूझकर student को ग़लत graph थमाती हैं। किसी तस्वीर को उसकी table से मिलाकर जाँचना वह हुनर है जो किताब साफ़-साफ़ सिखा रही है।
पूरा transcript2,284 शब्द

एक सारणी सामने है। 5 तरह के फल हैं, और हर एक को कितने लोगों ने चुना, वो गिनती लिखी है — 13, 9, 7, 6 और 3। और उसके बगल में एक कोरा पन्ना है, जिस पर इसी सारणी का दंड आलेख बनाना है। बना हुआ आलेख पढ़ने में सिर्फ़ एक गुणा लगता था — दंड की लंबाई को मापक से गुणा करो, और संख्या मिल जाती थी। बनाना उल्टी दिशा में चलता है — संख्या को मापक से भाग करो, और लंबाई मिल जाती है।

तो फिर इसमें तय करने को बचता क्या है? पहले पन्ने के नीचे एक सीधी लेटी हुई लकीर खींचो। इस पर पाँचों फलों के लिए बराबर जगहें छोड़ी जाएँगी। फिर उसके शुरू से एक खड़ी लकीर ऊपर उठाओ। इसी पर गिनतियाँ निशान लगाकर लिखी जाएँगी। नीचे वाली लकीर पर चीज़ों के नाम आते हैं, और खड़ी वाली पर उनकी गिनतियाँ। ये बँटवारा बदलता नहीं है। और खड़ी लकीर पर निशान हमेशा शून्य से शुरू होते हैं।

ये आख़िरी शर्त बाद में सबसे ज़्यादा काम आएगी। बाक़ी हर क़दम पहले से तय है — बराबर चौड़ाई, बराबर अंतराल, शून्य से निशान। उसमें सोचने को कुछ नहीं। पर एक चीज़ तय नहीं है — एक इकाई लंबाई किसके बराबर मानी जाए। यही मापक है, और यही पूरी ड्राइंग का इकलौता फ़ैसला है। और ये पसंद का मामला नहीं है। ऐसा नहीं कि जो मन आए वो मापक चुन लो — ये फ़ैसला आँकड़े ख़ुद करते हैं।

इसके लिए 2 शर्तें हैं, और उन्हीं से हर बार जवाब निकलेगा। तो तय कौन करता है? पहली शर्त — हर दंड किसी निशान पर ख़त्म हो, 2 निशानों के बीच में नहीं। तभी पढ़ने वाला उसे ठीक-ठीक पढ़ पाएगा। इसका मतलब है कि मापक को सारणी की हर गिनती में पूरा-पूरा बँटना चाहिए। आधी इकाई बची, तो दंड निशान चूक जाएगा। दूसरी शर्त — सबसे लंबा दंड पन्ने पर समा जाए।

मान लो इस पन्ने में 18 इकाई लंबाई की जगह है। इस सारणी में सबसे छोटी गिनती 3 है और सबसे बड़ी 13। 13 और 9 में कोई सांझा भाजक 1 के सिवा है ही नहीं। इसलिए यहाँ एक ही मापक बचता है — एक इकाई बराबर एक व्यक्ति। सबसे लंबा दंड 13 इकाई का होगा, और 18 में वो आराम से आ जाता है। खड़ी लकीर पर शून्य से 14 तक निशान लगाओ।

13 तक जाना ज़रूरी था, और एक क़दम ऊपर तक जाना सफ़ाई के लिए। अब हर दंड की ऊँचाई निकालो — गिनती को मापक से भाग करके। 13 को 1 से भाग करो, तो 13 इकाई। एक के मापक पर पाँचों ऊँचाइयाँ वही निकलती हैं — 13, 9, 7, 6 और 3 इकाई। यहाँ भाग करना आसान था। पाँचों दंड बराबर चौड़े बनाओ, और उनके बीच बराबर अंतराल छोड़ो। अंतराल इसलिए कि हर दंड अलग चीज़ का है।

अब दूसरे आँकड़े लो। एक खेल के 8 दौर हैं, और हर दौर में मिले अंक — 80, 50, 10, 100, 90, 0, 90 और 50। ये शून्य से लेकर 100 तक फैले हैं। और यहीं पहला तरीक़ा टूट जाता है। अगर एक इकाई एक अंक की मानो, तो सबसे लंबा दंड 100 इकाई का बनेगा। पन्ने में जगह 18 की है — यानी पन्ने से 5 गुना से भी ज़्यादा।

और सिर्फ़ निशान लगाने में ही शून्य से 100 तक एक-एक करके 101 निशान लगाने पड़ेंगे। 10-10 करके लगाओ तो सिर्फ़ 11। पहली शर्त तो पूरी थी — 1 हर गिनती में बँटता है। पर पन्ने ने मना कर दिया। इसीलिए दूसरी शर्त अलग से चाहिए थी। तो पूछो — कौन सी सबसे बड़ी संख्या इन आठों अंकों में पूरी बँट जाती है? 80, 50, 10, 100, 90 और 50 — सब 10 में बँटते हैं।

और जिस दौर में शून्य अंक मिले, वो कोई शर्त नहीं लगाता — शून्य हर मापक में बँट जाता है। इसलिए मापक बनता है — एक इकाई लंबाई बराबर 10 अंक। इससे बड़ा कोई मापक सबमें पूरा नहीं बँटेगा। हर अंक को 10 से भाग करो — ऊँचाइयाँ मिलती हैं 8, 5, 1, 10, 9, 0, 9 और 5 इकाई। सबसे लंबा दंड 10 इकाई का है, और पन्ने में 18 की जगह है।

दोनों शर्तें पूरी — यही मापक चुना जाता है। छठे दौर में शून्य अंक मिले थे। शून्य को 10 से भाग करो तो शून्य — यानी उसका दंड शून्य इकाई ऊँचा है। इसका मतलब ये नहीं कि उस दौर को सारणी से हटा दो। जगह वहीं रहेगी, नाम वहीं रहेगा — बस दंड नहीं बनेगा। अगर हटा दिया, तो 8 की जगह 7 दौर दिखेंगे, और रिकॉर्ड ये बताना ही बंद कर देगा कि खेल कितने दौर चला।

जाँच भी कर लो — आठों ऊँचाइयाँ जोड़ो तो 47 इकाई, और 47 को 10 से गुणा करो तो 470, जो आठों अंकों का जोड़ है। अब एक घर में हफ़्ते भर का पानी। 6 काम हैं, और हर काम में कितने लीटर लगे — 3000, 3400, 800, 400, 600 और 1200। एक इकाई एक लीटर की मानो, तो सबसे लंबा दंड 3400 इकाई का बनेगा। पन्ना 18 का है — बात ही ख़त्म।

अब देखो कि इन छहों में सबसे बड़ी कौन सी संख्या पूरी बँटती है। 3000, 3400, 800, 400, 600 और 1200 — सब 200 में बँटते हैं। पर सिर्फ़ 200 ही नहीं — 200 के हर भाजक में भी सब बँटते हैं। ऐसे कुल 12 मापक बनते हैं, तो पहली शर्त अकेले काफ़ी नहीं। अब दूसरी शर्त फ़ैसला करेगी। उन 12 में से पन्ने पर समाता कौन सा है? 100 के मापक पर हर दंड पूरा तो बनेगा, पर सबसे लंबा 34 इकाई का होगा।

18 वाले पन्ने पर वो नहीं आएगा। 400 के मापक पर जगह तो बच जाएगी, पर 6 में से 3 दंड निशान चूक जाएँगे — 3400 को 400 से भाग करो तो साढ़े 8 आता है। उन 12 में से सिर्फ़ 200 ही दोनों शर्तें पूरी करता है। इसीलिए 200 चुना जाता है — सलीक़े के लिए नहीं, हिसाब से। अब पूरा भाग एक साथ लिख लो। 3000 बटा 200 बराबर 15, और 3400 बटा 200 बराबर 17।

छहों ऊँचाइयाँ निकल आईं — 15, 17, 4, 2, 3 और 6 इकाई। हर एक पूरी संख्या है, तो हर दंड निशान पर रुकेगा। यहाँ एक ग़लतफ़हमी होती है — लगता है कि बड़ा मापक चुनोगे तो आलेख भी बड़ा बनेगा। उल्टा होता है। मापक भाग में नीचे बैठता है। नीचे वाली संख्या बढ़ाओगे, तो हर दंड छोटा होगा, बड़ा नहीं। वही 3400 लीटर, एक के मापक पर 3400 इकाई का दंड बनाता है, और 200 के मापक पर सिर्फ़ 17 इकाई का।

यानी 200 गुना छोटा, जबकि संख्या वही है। मापक बड़ा करना आलेख को छोटा करना है। अब बना हुआ आलेख पढ़ो। सबसे लंबा दंड दूसरा है, और उसके बाद पहला। इतना बिना कोई संख्या पढ़े दिख जाता है। दोनों में 400 लीटर का फ़र्क़ है। और इस पन्ने पर वो फ़र्क़ ठीक 2 इकाई लंबाई का दिखता है। पढ़ना फिर वही गुणा है — लंबाई गुणा मापक। 2 इकाई गुणा 200 बराबर 400 लीटर।

छहों दंड मिलाकर 47 इकाई की लंबाई बनती है, और वो 9400 लीटर बताती है — पूरे हफ़्ते का पानी। अब 2 सवाल, जो देखकर नहीं, हिसाब से निकलेंगे। पहला — क्या चौथा काम तीसरे का लगभग आधा है? 400 और 800 देखो। ये लगभग आधा नहीं है — ठीक आधा है। और दंडों पर भी 2 इकाई ठीक 4 इकाई की आधी है। दूसरा सवाल कठिन है — क्या 800, 3400 के चौथाई से कम है?

यहाँ आँख से कुछ तय नहीं होगा। 3400 का चौथाई निकालो — 850। और 800, 850 से कम है। तो जवाब हाँ है, पर सिर्फ़ 50 के फ़र्क़ से। और पन्ने पर वो 50 लीटर, एक इकाई लंबाई का सिर्फ़ चौथाई हिस्सा है। इतना फ़र्क़ देखकर पकड़ा ही नहीं जा सकता। कई बार सारणी होती ही नहीं। एक खिड़की से एक घंटे में जो गुज़रा, वो जिस क्रम में दिखा उसी क्रम में लिखा गया — कुल 30 बार।

उसमें 5 तरह की चीज़ें हैं, पर आपस में बिखरी हुई। ऐसी सूची से सीधे आलेख नहीं बनता। पहले सारणी बनाओ। सूची में एक बार ऊपर से नीचे चलो, और हर चीज़ के सामने एक लकीर लगाते जाओ। गिनती निकलती है — 11, 8, 3, 2 और 6। अब ये सारणी है, और इसी से आलेख बनेगा। इन्हें जोड़ो तो 30 — यानी जितनी बार देखा था उतना ही। यही जाँच है कि कोई गिनती छूटी नहीं।

और मापक कौन सा लें? 11 और 8 में 1 के सिवा कुछ सांझा नहीं। तो फिर एक इकाई बराबर एक — और 11 इकाई पन्ने में आ जाती है। अब एक अलग शक्ल की सारणी। बाईं ओर हैं गोल — शून्य से 7 तक। और दाईं ओर, उतने गोल वाले कितने मैच हुए। दाईं ओर की गिनतियाँ हैं 2, 4, 6, 8, 3, 5, 1 और 1। जोड़ो तो 30 मैच — यही जाँच है कि सारणी पूरी है।

अब सवाल — कुल कितने गोल हुए? यहाँ जाल ये है कि बाईं ओर का कॉलम जोड़ लिया जाए। शून्य से 7 तक जोड़ो तो 28 आता है। पर बायाँ कॉलम गिनतियाँ नहीं, क़ीमतें रखता है। 3 गोल एक बार नहीं, 8 बार हुए। हर क़ीमत को उसके मैचों से गुणा करना पड़ेगा। गुणा करके जोड़ो तो असली जवाब 90 गोल आता है — 28 से 62 ज़्यादा, यानी 3 गुना से भी ऊपर।

और इसका आलेख दाईं ओर वाली गिनतियों का बनता है। सबसे लंबा दंड 8 का होगा, और एक के मापक पर वो आराम से समा जाता है। अब एक आलेख जिसकी खड़ी लकीर से सारे निशान मिट चुके हैं। 5 आकार नीचे लिखे हैं, पर मापक कहीं नहीं लिखा। पर एक बात बची है — पहला दंड 6 इकाई लंबा है, और पता है कि वो 24 का है। क्या इतने से मापक वापस निकल सकता है?

24 को 6 इकाई में बाँटो — एक इकाई बराबर 4। यानी पढ़ने वाला गुणा उल्टा करके मापक निकाल लेता है। जाँच 2 और दंडों पर करो। 20 बटा 4 बराबर 5 इकाई, और आलेख में वो 5 इकाई का ही बना है। 16 बटा 4 बराबर 4 इकाई — वो भी सही। चौथा आकार 28 का है। 28 बटा 4 बराबर 7 — तो उसका दंड 7 इकाई लंबा होना चाहिए।

पर आलेख में वो 4 और 5 इकाई के बीच कहीं रुका है। यानी कम से कम 2 इकाई छोटा बना है। जितना बना है, वो ज़्यादा से ज़्यादा 20 बताता है — असली 28 से 8 कम। यही वो ग़लत दंड है जिसे सुधारना है। और पाँचवें आकार का दंड बना ही नहीं है, जबकि उसकी गिनती 16 है। 16 बटा 4 बराबर 4 इकाई। यानी वो तीसरे दंड जितना ही लंबा बनेगा, क्योंकि दोनों की गिनती एक ही है।

अब उस शर्त पर लौटो जो शुरू में मामूली लगी थी — निशान शून्य से शुरू हों। ये मामूली नहीं है। 2 दंड लो — एक 28 का, दूसरा 16 का। सही मापक पर इनका अनुपात 7 और 4 का है, यानी ज़रा सा बड़ा। अब मान लो निशान 15 से शुरू किए गए, शून्य से नहीं। तब दिखेगा सिर्फ़ 15 के ऊपर वाला हिस्सा। एक दंड 13 का दिखेगा और दूसरा सिर्फ़ 1 का।

यानी 7 बटा 4 का अनुपात, 13 का दिखने लगा — 7 गुना से भी ज़्यादा बढ़ा हुआ। फ़र्क़ फिर भी 12 का ही रहता है, चाहे निशान कहीं से शुरू हों। टूटता सिर्फ़ अनुपात है — और वही सबसे ज़्यादा देखा जाता है। अब एक हफ़्ते के आलेख पर आओ, जिसमें 7 दिन के पौधे लगे हैं और निशान 10-10 पर लगे हैं। निशानों पर पढ़ो तो 7 दिन निकलते हैं — 50, 40, 30, 40, 50, 60 और 40।

पूरे हफ़्ते का जोड़ 310। तीसरे और चौथे दिन मिलाकर 70 होते हैं, यानी 7 इकाई लंबाई। सबसे ज़्यादा छठे दिन, सबसे कम तीसरे दिन। पर एक दंड अपने निशान से ज़रा ऊपर दिखता है — जैसे 52 पर। यहाँ मापने की ललक होती है। पर 10 के मापक पर 52, पूरी इकाइयों में आता ही नहीं। तो आलेख वो कह ही नहीं सकता — वो 50 कह रहा है, और बनाने में ज़रा चूक हुई है।

अब आख़िरी सारणी देखो। एक के बाद एक 5 गिनतियाँ हुईं — 1400, 1700, 2200, 3000 और 3700। और किसी ने इनका आलेख भी बनाया। यहाँ दोनों शर्तें मिलकर कुछ नहीं छोड़तीं। सबमें बँटने वाला सबसे बड़ा मापक 100 है, पर उस पर सबसे लंबा दंड 37 इकाई का बनता है। तो मोटा मापक लेना पड़ता है — मान लो 500। अब 5 में से सिर्फ़ 1 दंड निशान पर रुकता है, बाक़ी बीच में।

और ये मानकर चलना पड़ता है। पर एक चीज़ मापक कभी नहीं बदलता — कौन सा दंड सबसे लंबा है। 100 पर, 250 पर, 500 पर — क्रम हर बार वही रहता है। और इसी से ये आलेख पकड़ा जाता है। सारणी हर क़दम पर बढ़ती है, पर आलेख में तीसरा और चौथा दंड आपस में बदले हुए हैं। एक-एक करके मिलाओ तो 5 में से सिर्फ़ आख़िरी दंड सारणी से मेल खाता है।

पहले 2 छोटे बने हैं, और बीच के 2 आपस में बदले हैं। दंड बनाना एक भाग है — संख्या बटा मापक बराबर लंबाई। और पढ़ना उसका उल्टा गुणा है। मापक 2 शर्तों से निकलता है — वो सारणी की हर संख्या में पूरा बँटे, और सबसे लंबा दंड पन्ने में समा जाए। यानी मापक आँकड़े चुनते हैं, बनाने वाला नहीं। और जब दोनों शर्तें एक साथ पूरी न हों, तो कोई दंड बीच में रुकेगा — ये मानकर चलो।

बाक़ी सब बहीखाता है — बराबर चौड़ाई, बराबर अंतराल, और शून्य से निशान। तीनों पढ़ने वाले की हिफ़ाज़त के लिए हैं। और आख़िरी बात — बना हुआ आलेख जाँच से बाहर नहीं है। उसके पीछे एक सारणी है, और हर दंड उससे मिलाकर देखा जा सकता है।

यह कहाँ बैठता है

यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.

किस पर टिका है

आगे फिर कहाँ आता है

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