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Chapter 4 · Data Handling and Presentation

Pictographs, और scale बताना क्यों ज़रूरी है

Pictographs11 मिनट

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5 कतारें, छोटे-छोटे चित्रों की। देखने में लगता है कि इसे समझाने की ज़रूरत ही नहीं — लंबी कतार यानी ज़्यादा, छोटी यानी कम। पर एक सवाल यहीं छुपा है: किसी चित्र का मतलब कोई संख्या है, ये तय कौन करता है?

मुख्य idea

छोटे-छोटे चित्रों की एक row में तब तक कोई number नहीं होता, जब तक चित्र के बाहर की कोई चीज़ यह न बताए कि एक चित्र कितने का है। यह घोषणा — किताब इसे scale या key कहती है — बाद में जोड़ा गया कोई caption नहीं है; पूरा हिसाब इसी में है, और वही बनी हुई row इसके हिसाब से 5, 25 या 50 का मतलब रखती है। फिर key चुनना एक असली सौदा है: बड़ी key से जगह और रफ़्तार मिलती है, पर वह यह भी तय कर देती है कि क्या ठीक-ठीक बनाया जा सकता है। पूरे symbols key की multiples तक पहुँचते हैं और, किताब का आधा symbol मान लेने पर, उनके ठीक बीच वाली values तक भी — इसीलिए दस की key से भी 25 और 35 ईमानदारी से बन जाते हैं। चित्र तभी नाकाम होता है जब कोई value इस set से भी बाहर पड़े, जैसे किताब के 33 और 27।

आपको क्या आना चाहिए

  • पहले key पढ़कर pictograph को सही ढंग से पढ़ना
  • किसी category की frequency को (symbols की संख्या) × (एक symbol की value) के रूप में निकालना
  • आधे symbol को key की value का आधा समझना, और इस पढ़त को सही ठहराना
  • समझाना कि एक ही data के दो pictographs बिल्कुल अलग क्यों दिख सकते हैं
  • किसी data set के लिए key चुनना और इस चुनाव का बचाव जगह के आधार पर, और इस आधार पर करना कि values उसकी, या उसके आधे की, multiples हैं या नहीं
  • ऐसा data पहचानना जिसे चुनी हुई key ठीक-ठीक नहीं दिखा सकती, और कारण बताना
  • frequency table से pictograph बनाना — categories rows या columns में, हर unit के लिए एक symbol, और बगल में छपी key के साथ
  • बताना कि किसी pictograph के साथ हमेशा क्या छपा होना चाहिए ताकि उसका कोई मतलब हो

जानने लायक़ शब्द

शब्दएक पंक्ति में अर्थहिंदी / क्षेत्रीय समकक्षपहली बार कहाँ
pictographऐसा प्रदर्शन जो चीज़ों के दोहराए गए चित्रों से data दिखाता हैचित्रालेखइसी chapter में छपा, p.79
symbolpictograph में बना एक चित्र, जो चीज़ों की एक तय संख्या के बराबर हैप्रतीकइसी chapter में छपा, p.80
scaleघोषित संख्या, कि एक symbol कितनी चीज़ों के बराबर हैमापकइसी chapter में छपा, p.83
keyscale का छपा हुआ कथन, pictograph के बगल में दिखाया गयाकुंजीइसी chapter में छपा, p.83
frequencyकिसी category के आने की गिनतीबारंबारताTally marks and frequency: organising data so it can be read; p.77 पर परिभाषित
categoryनाम वाले समूहों में से एक, जिनमें data छाँटा जाता हैवर्गइसी chapter में छपा, p.83
complete pictureपूरा बना हुआ symbol, आधे के मुक़ाबलेपूरा चित्रइसी chapter में छपा, p.80
exact multipleऐसी value जिसे चुनी हुई key पूरे symbols से, बिना round किए, बना सकेपूर्ण गुणजइसी chapter में छपा, p.83

हिंदी column में आम चलन वाले standard NCERT हिंदी शब्द दिए गए हैं। ये इस chapter के किसी हिंदी संस्करण से नहीं लिए गए — Notes देखें।

लोग कहाँ चूकते हैं

  • "symbols गिन लो, number मिल गया।" सिर्फ़ तब, जब key कहे कि एक symbol एक चीज़ है। p.80 पर पाँच symbols का मतलब पचास बच्चे है। जो आदत बनानी है वह यह: हर बार, पहले key पढ़ो।
  • "आधे symbol का मतलब एक और।" (किताब इसे half picture कहती है, p.80।) इसका मतलब है key जो भी कहे, उसका आधा। Sangita के pictograph पर आधा symbol 5 students है क्योंकि उसकी key 10 है; Jarina के pictograph पर वह 2½ होता, इसीलिए वह कभी आधा symbol नहीं बनाती।
  • "लंबी row का मतलब हमेशा ज़्यादा।" सिर्फ़ तब, जब दोनों rows एक ही key इस्तेमाल करें। Jarina की कक्षा II वाली row सात symbols की है और Sangita की साढ़े तीन की, और दोनों उन्हीं 35 students को दिखाती हैं।
  • "ख़ाली row चित्र बनाने में हुई ग़लती है।" p.81 पर कक्षा V में कोई symbol नहीं है क्योंकि कोई ग़ैरहाज़िर नहीं था। शून्य एक जायज़ frequency है और उसे कुछ नहीं के रूप में बनाना चाहिए, छोड़ना नहीं।
  • "बड़ी key हमेशा बेहतर है क्योंकि उससे जगह बचती है।" वह यह भी तय कर देती है कि तुम ठीक-ठीक क्या बना सकते हो — उसकी अपनी multiples, और आधे symbol के साथ उनके बीच वाली values, और कुछ नहीं। किताब का 33-and-27 वाला सवाल ठीक यही परखता है।
  • "27 को round करके 30 कर दो और तीन symbols बना दो।" तब चित्र वह बात कहता है जो data नहीं कहता। अगर key value को नहीं दिखा सकती, तो key बदलो या साफ़ कह दो — data को चुपचाप मत बदलो।
  • "key तो caption है; गणित चित्र में है।" उलटा है। key के बिना चित्र में कोई number होता ही नहीं।
पूरा transcript1,624 शब्द

board पर 5 कतारें बनी हैं, और हर कतार में छोटे-छोटे चित्र हैं। हर कतार एक तरीके की है — school bus, पैदल, public bus, निजी गाड़ी, और साइकिल। देखने में लगता है कि इसे समझने के लिए किसी ने कुछ बताने की ज़रूरत नहीं। कतार लंबी है तो ज़्यादा, छोटी है तो कम। कतारें 11, 7, 5, 4 और 3 चित्र लंबी हैं। और यहाँ हर चित्र एक व्यक्ति का है, इसलिए कतार की लंबाई ही गिनती है।

पर एक सवाल यहीं छुपा है — किसी चित्र का मतलब कोई संख्या है, ये आख़िर तय कौन करता है? जवाब ये है कि चित्र के बाहर कहीं लिखा होना चाहिए कि एक चित्र किस संख्या के बराबर है। यहाँ लिखा है कि एक चित्र एक व्यक्ति का है। इस लिखी हुई बात को कुंजी कहते हैं, और जो संख्या वो बताती है उसे मापक कहते हैं। यहाँ सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी यही है कि कुंजी को नीचे लिखी एक मामूली बात समझ लिया जाता है।

असल में पूरा हिसाब उसी में है। कुंजी हटाओ, तो बचती हैं सिर्फ़ कुछ तस्वीरें। उनमें कोई संख्या नहीं बची। अब इस चित्रालेख से कुछ जवाब बिना गिने ही मिल जाते हैं। सबसे लंबी कतार कौन सी है, ये देखते ही दिख जाता है। सबसे लंबी कतार school bus की है, और सबसे छोटी साइकिल की। इसके लिए किसी संख्या की ज़रूरत नहीं पड़ी। अब गिनकर देखो तो ये 11 और 3 निकलते हैं, यानी फ़र्क 8 का है।

पर ध्यान रखो कि आँख से ये फ़ैसला यहाँ इसलिए हो पाया क्योंकि एक चित्र एक ही व्यक्ति का था। कुंजी बदलते ही ये सुविधा ख़त्म हो जाती है। अब एक और चित्रालेख देखो। इसमें 3 कतारें हैं, और सवाल ये था कि रात में पूरी नींद कितनी बार मिलती है — हमेशा, कभी-कभी, या कभी नहीं। पर इस बार कुंजी अलग है। यहाँ लिखा है कि एक चित्र 10 बच्चों का है।

पहली कतार में 5 चित्र हैं। हर चित्र 10 बच्चों का है, इसलिए ये कतार 50 कहती है। ये 5 नहीं कहती। जो सिर्फ़ चित्र गिनकर 5 बता देता है, उसने कुंजी पढ़ी ही नहीं। इसलिए आदत ये बनानी है — चित्रालेख देखते ही सबसे पहले कुंजी पढ़ो, फिर चित्र गिनो। हर बार, बिना छोड़े। बीच वाली कतार में कुछ अलग है। उसमें 2 पूरे चित्र हैं, और उसके बाद आधा चित्र।

यहाँ अक्सर ये सोचा जाता है कि आधा चित्र यानी एक और चित्र। तब जवाब 30 आएगा। पर आधा चित्र आधी कुंजी के बराबर होता है। कुंजी 10 की है, तो आधा चित्र 5 का हुआ। इसलिए 2 पूरे चित्र 20 के हुए, और आधा चित्र 5 का — कतार 25 कहती है, 30 नहीं। और आख़िरी कतार में 4 पूरे चित्र हैं, तो वो 40 कहती है। तीनों कतारें मिलकर 50, 25 और 40 बताती हैं।

अब उलटा काम करो। यहाँ 8 समूहों की सारणी है, और हर समूह से कितने ग़ैरहाज़िर थे ये लिखा है। कुंजी सीधी रखो — एक चित्र एक व्यक्ति का। अब हर समूह के लिए उतने ही चित्र बनाओ जितनी उसकी गिनती है। कतारें बनती हैं 3, 5, 4, 2, फिर कुछ नहीं, फिर 1, 5 और 7 चित्रों की। सब मिलाकर 27 चित्र बने। जिस कतार में कोई चित्र नहीं, वो छूटी नहीं है।

उसका मतलब है कि उस समूह से कोई ग़ैरहाज़िर नहीं था। ख़ाली कतार भी एक जवाब है, इसलिए उसे छोड़ना नहीं है — ख़ाली ही रखना है। अब उसी सारणी का दूसरा खाना लो — हर समूह से कितने हाज़िर थे। गिनतियाँ हैं 30, 35, 20, 25, 30, 25, 30 और 20। इन्हें जोड़ो तो 215 आता है। अगर कुंजी वही रखी — एक चित्र एक व्यक्ति का — तो 215 चित्र बनाने पड़ेंगे।

पिछले चित्रालेख में सिर्फ़ 27 चित्र बने थे। यानी उतनी ही 8 कतारों के लिए 7 गुना से भी ज़्यादा काम। कतारें पन्ने से बाहर चली जाएँगी और कोई उन्हें गिनेगा भी नहीं। इसका हल ये है कि एक चित्र को ज़्यादा लोगों का बना दो। पर कितने का — यही असली सवाल है। पहला तरीका — एक चित्र 5 लोगों का। अब वही 8 कतारें बनती हैं 6, 7, 4, 5, 6, 5, 6 और 4 चित्रों की।

दूसरा तरीका — एक चित्र 10 लोगों का। अब कतारें बनती हैं 3, साढ़े 3, 2, ढाई, 3, ढाई, 3 और 2 चित्रों की। दोनों चित्रालेख देखने में बिल्कुल अलग हैं। पर दोनों को पढ़ो तो वही 8 संख्याएँ मिलती हैं जिनसे शुरू किया था। यानी दोनों सही हैं। फ़र्क मेहनत का है। छोटी कुंजी पर 43 चित्र बनाने पड़ते हैं, बड़ी पर साढ़े 21। कुंजी दोगुनी करो, बनाना आधा हो जाता है।

बड़ी कुंजी वाले चित्रालेख में 3 कतारें आधे चित्र पर ख़त्म होती हैं। बाकी 5 पूरे चित्रों पर। और ये 3 कोई भी 3 नहीं हैं। ये ठीक वही हैं जिनकी गिनती 10 का गुणज नहीं है। वो गिनतियाँ हैं 35, 25 और 25। बाकी पाँचों 10 के गुणज हैं, इसलिए वहाँ आधे चित्र की ज़रूरत ही नहीं पड़ी। और छोटी कुंजी वाले चित्रालेख में एक भी आधा चित्र नहीं है।

इसकी वजह आगे आएगी, और वो वजह मज़ेदार है। अब एक सवाल। एक कतार में 7 चित्र हैं, दूसरी में साढ़े 3। कौन सी ज़्यादा है? कोई भी नहीं। दोनों बराबर हैं। पहली कतार छोटी कुंजी वाली है — 7 चित्र, हर एक 5 का, यानी 35। दूसरी बड़ी कुंजी वाली है — साढ़े 3 चित्र, हर पूरा 10 का, यानी 30 और 5, फिर 35। इसलिए कतारों की लंबाई की तुलना तभी करो जब दोनों की कुंजी एक हो।

अलग कुंजी हो तो लंबी कतार का मतलब ज़्यादा नहीं होता। अब मान लो किसी समूह में 33 लोग हाज़िर होते। बड़ी कुंजी पर इसे कैसे बनाओगे? 3 पूरे चित्र 30 तक ले जाते हैं, और 3 बच जाते हैं। पर आधा चित्र 5 का है, 3 का नहीं। तो उन 3 को बनाने का कोई तरीका नहीं। 27 के साथ भी यही होता है — 2 पूरे चित्र, और 7 बचे।

छोटी कुंजी पर भी यही दिक़्क़त है: वहाँ 33 पर 3 बचते हैं और 27 पर 2, और आधा चित्र ढाई का होता। यहीं वो बात सामने आती है जो अक्सर छूट जाती है। बड़ी कुंजी सिर्फ़ मेहनत नहीं बचाती। वो ये भी तय कर देती है कि कौन सी गिनतियाँ ठीक-ठीक बनाई जा सकती हैं और कौन सी नहीं। और अगर कुंजी एक व्यक्ति की होती, तो 33 और 27 दोनों आराम से बन जाते।

यही उस सौदे की क़ीमत है जो बड़ी कुंजी लेकर आई। अब एक लालच आता है — 27 के लिए 3 पूरे चित्र बना डालो, किसे पता चलेगा। पर उस कुंजी पर 3 चित्रों का मतलब 30 है। यानी चित्रालेख अब 3 ज़्यादा बता रहा है। ये 3 आँकड़ों में कहीं थे ही नहीं, चित्र ने ख़ुद जोड़ दिए। अगर कुंजी किसी गिनती को ठीक-ठीक नहीं बना सकती, तो 2 ही रास्ते हैं — कुंजी बदलो, या साफ़ लिखो कि ये गिनती इस कुंजी पर पूरी नहीं बनती।

आँकड़े चुपचाप बदलना कोई रास्ता नहीं है। अब वो मज़ेदार बात। 40 तक की गिनतियों में से कौन सी कुंजी ज़्यादा बना सकती है — 5 वाली, या 10 वाली? इसे गिनकर देखा जा सकता है। 40 तक कुल 41 संख्याएँ हैं, और दोनों कुंजियाँ उनमें से 9-9 बना सकती हैं। और ये वही 9 हैं — 5 के गुणज। बड़ी कुंजी अपने 5 गुणजों तक पहुँचती है और उनके बीच के 4 तक, क्योंकि आधा चित्र वहाँ ले जाता है।

छोटी कुंजी अपने 9 गुणजों तक पहुँचती है और बीच में कहीं नहीं, क्योंकि 5 का आधा पूरा व्यक्ति नहीं होता। यानी आधे चित्र की इजाज़त मिलते ही बड़ी कुंजी कुछ भी नहीं खोती, और मेहनत आधी कर देती है। आधा चित्र कोई छूट नहीं है — वही बड़ी कुंजी को ईमानदार रखता है। अब साफ़ हो जाता है कि हर चित्रालेख के साथ क्या-क्या लिखा होना चाहिए। सबसे पहले कुंजी, हमेशा।

उसके बिना चित्रों में कोई संख्या नहीं होती। फिर हर कतार का नाम, ताकि पता चले कि किसकी गिनती हो रही है। और ये भी कि पूरे चित्रालेख का विषय क्या है। अगर कुंजी न लिखी हो, तो पढ़ने वाला अंदाज़ा लगाएगा। और आम तौर पर वो यही मान लेगा कि एक चित्र एक चीज़ का है — जो ग़लत भी हो सकता है और पता भी नहीं चलेगा। अब आख़िरी काम, और यही सबसे अहम है।

यहाँ 6 गिनतियाँ हैं — 18, 36, 12, 48, 18 और 24। इस बार कुंजी किसी ने नहीं दी। तुम्हें चुननी है। शर्त ये है कि हर कतार पूरे चित्रों में बने, कोई आधा न लगे। तो कुंजी क्या रखोगे? जो संख्या इन छहों को पूरा-पूरा बाँट दे, वही चलेगी। ऐसी सिर्फ़ 4 संख्याएँ हैं — 1, 2, 3 और 6। इनमें सबसे बड़ी 6 है। 6 की कुंजी पर कतारें बनती हैं 3, 6, 2, 8, 3 और 4 चित्रों की।

एक भी आधा चित्र नहीं लगा। और अगर आधे चित्र की इजाज़त मिल जाए, तो 2 कुंजियाँ और चल जाती हैं — 4 और 12। सबसे बड़ी वाली पर पूरा चित्रालेख सिर्फ़ 13 चित्रों में बन जाता है, जहाँ एक-एक का हिसाब रखने पर 156 लगते। पीछे मुड़कर देखो। चित्रों की कतार अपने आप कोई संख्या नहीं बताती। पहले कुंजी पढ़ो, फिर चित्र गिनो, फिर गुणा करो। और आधा चित्र आधी कुंजी का होता है, एक और चित्र का नहीं।

ख़ाली कतार का मतलब शून्य है, कोई चूक नहीं। और 2 कतारों की लंबाई तभी तुलना के लायक़ है जब दोनों की कुंजी एक हो। और कुंजी चुनना एक सौदा है। बड़ी कुंजी जगह और मेहनत बचाती है, पर साथ ही तय कर देती है कि कौन सी गिनतियाँ ठीक-ठीक बन सकेंगी। इसलिए कुंजी आँकड़ों से निकालो, आँकड़ों को कुंजी में फ़िट मत करो। जो गिनती बन नहीं सकती, उसे बदल देना सबसे आसान रास्ता है और सबसे ग़लत भी।

यह कहाँ बैठता है

यह उन notes से लिया गया है जिनसे हर video बनी है, पढ़ने के क्रम से नहीं — ये वे ideas हैं जिन पर यह टिका है, और वे जो आगे चलकर इस पर टिकते हैं.

किस पर टिका है

आगे फिर कहाँ आता है

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